संत कबीर नगर के घनघटा क्षेत्र में पीएमओ पीजी और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से जनता के साथ किए जा रहे कथित मजाक को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस प्रकार की लापरवाही और पक्षपात धरातल पर हो रहा है, उसे कोई भूलने वाला नहीं है और यही वजह है कि साल 2027 में लोकसभा चुनाव 2024 से भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ेगा। धरातल पर गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के लोग जुल्म, ज्यादती, अन्याय, उत्पीड़न, शोषण और भेदभाव से बुरी तरह त्रस्त हैं। शिकायतों के निस्तारण के नाम पर घोर लापरवाही बरती जा रही है, जहां आरोपी को ही जांच अधिकारी बना दिया जाता है। अत्याचारी, धनबलियों और प्रभावशाली लोगों के इशारे पर संबंधित जांच अधिकारी मामलों का केवल कागजी निस्तारण कर रहे हैं, या फिर पीड़ित को ही उल्टा आरोपी सिद्ध कर दिया जा रहा है, जिसके कारण न्याय लगातार दम तोड़ रहा है।
संत कबीर नगर के घनघटा क्षेत्र में पीएमओ पीजी और जनसुनवाई पोर्टल के माध्यम से जनता के साथ किए जा रहे कथित मजाक को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जिस प्रकार की लापरवाही और पक्षपात धरातल पर हो रहा है, उसे कोई भूलने वाला नहीं है और यही वजह है कि साल 2027 में लोकसभा चुनाव 2024 से भी बदतर स्थिति का सामना करना पड़ेगा। धरातल पर गरीब, कमजोर और वंचित वर्ग के लोग जुल्म, ज्यादती, अन्याय, उत्पीड़न, शोषण और भेदभाव से बुरी तरह त्रस्त हैं। शिकायतों के निस्तारण के नाम पर घोर लापरवाही बरती जा रही है, जहां आरोपी को ही जांच अधिकारी बना दिया जाता है। अत्याचारी, धनबलियों और प्रभावशाली लोगों के इशारे पर संबंधित जांच अधिकारी मामलों का केवल कागजी निस्तारण कर रहे हैं, या फिर पीड़ित को ही उल्टा आरोपी सिद्ध कर दिया जा रहा है, जिसके कारण न्याय लगातार दम तोड़ रहा है।
- गोरखपुर के सहजनवां में आपका अपना लोकप्रिय चैनल 'सूर्यांश न्यूज़ 24' आज की खबरों पर पूरी तरह से नजर बनाए हुए है।1
- उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव जी का एक बड़ा बयान सामने आया है, जिसमें यह जानकारी दी गई है कि उनकी तरफ से लगभग 300 टिकट फाइनल हो चुके हैं। इस बयान के साथ ही लोगों से यह देखने को कहा गया है कि किस विधानसभा क्षेत्र से कौन प्रत्याशी है। इसके साथ ही जनता से अपनी-अपनी विधानसभा से एक मजबूत प्रत्याशी का नाम लिखकर बताने की अपील भी की गई है।1
- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर में पुलिस कार्यालय पर आज 12.07.2026 को अपर जिलाधिकारी जयप्रकाश और अपर पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। उत्तर प्रदेश होमगार्ड भर्ती बोर्ड, लखनऊ द्वारा जारी निर्देशों के अनुक्रम में बुलाई गई इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जनपद में आयोजित होने वाली होमगार्ड दस्तावेज सत्यापन (DV) और शारीरिक मानक परीक्षा (PST) को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना है। इस महत्वपूर्ण ब्रीफिंग के दौरान DVPST दल के सभी सदस्य, संबंधित कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधिगण तथा परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में तैनात समस्त पुलिस बल के अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे। बैठक में उपस्थित अधिकारियों द्वारा सुरक्षा ड्यूटी में लगे पुलिस बल को पूरी सतर्कता बरतने, अभ्यर्थियों के साथ शालीन व्यवहार करने तथा भर्ती बोर्ड के नियमों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधियों से भी तकनीकी व अन्य व्यवस्थाओं को समय से दुरुस्त रखने की अपेक्षा की गई है ताकि पूरी परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का व्यवधान न आए।2
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- बस्ती के कप्तानगंज रेंज के अंतर्गत कचौलिया और रैकवार मार्ग पर वन विभाग की घोर लापरवाही और संवेदनहीनता का एक बड़ा मामला सामने आया है। बीती 11 जुलाई की रात को आई तेज आंधी-पानी के कारण कचौलिया फार्म के समीप एक विशालकाय पेड़ गिर गया, जो आज भी आधी सड़क को घेरे हुए है। 12 जुलाई का दिन ढलने को आ गया है, लेकिन जिम्मेदार विभाग की नींद अब तक नहीं टूटी है, जिससे यह मार्ग राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। इस व्यस्त मार्ग से हर पल लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सड़क पर गिरी पेड़ की टहनियां और झाड़ियां अंधेरे में दिखाई नहीं देतीं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा काफी बढ़ गया है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस संबंध में सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे विभाग के अधिकारी किसी बड़ी अनहोनी या हादसे का इंतजार कर रहे हैं। वन विभाग की इस उदासीनता से स्थानीय निवासियों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने तीखे शब्दों में मांग की है कि युद्धस्तर पर कार्रवाई करते हुए अविलंब इस पेड़ को सड़क से हटाकर यातायात को सुचारू किया जाए। इसके साथ ही, इतने घंटों तक सड़क को बाधित छोड़ने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच कराकर कड़ी कार्रवाई की जाए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस मामले में कब जागता है या फिर जनता को खुद अपनी जान जोखिम में डालकर कोई कदम उठाना पड़ेगा।1
- गाजियाबाद के एक स्पा सेंटर में हुई छापेमारी और उसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई ने कानून और समानता के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस स्पा सेंटर से पुलिस ने कथित तौर पर 'सेक्स रैकेट' चलाने के आरोप में 23 लड़कियों और 5 लड़कों को हिरासत में लिया था। लेकिन असली खेल थाने के भीतर देखने को मिला, जहां पुलिस ने इस मामले में बेहद ही पक्षपातपूर्ण और दोहरा रवैया अपनाया। हिरासत में लिए जाने के बाद, पुलिस ने लड़कियों को सिर्फ पूछताछ करके और चेतावनी देकर घर भेज दिया, जबकि हिरासत में लिए गए लड़कों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उनका चालान काट दिया गया। इस सिलेक्टिव कार्रवाई पर तीखे सवाल उठाते हुए अजीत मिश्रा (खोजी) ने पूछा है कि अगर कानून सबके लिए समान है, तो यह भेदभाव क्यों किया जा रहा है? क्या अपराध की परिभाषा जेंडर यानी लिंग के आधार पर बदल जाती है? अगर यह वास्तव में एक रैकेट था, तो इसमें शामिल हर व्यक्ति—चाहे वह लड़का हो या लड़की—बराबर का गुनहगार क्यों नहीं है? पुलिस की इस कार्रवाई को 'पितृसत्तात्मक' सोच का चश्मा बताते हुए यह सवाल उठाया गया है कि क्या लड़कियां हमेशा सिर्फ 'विक्टिम' ही होती हैं? महिलाओं के प्रति इस तरह का नरम रुख अपनाकर पुलिस असल में उन महिलाओं के साथ न्याय नहीं कर रही है जो शायद अपनी मर्जी से इस काम में थीं, बल्कि वह कानूनी प्रक्रिया का मजाक उड़ा रही है। कानून का काम निष्पक्ष होना है, न कि किसी की दया पर फैसला सुनाना। इस तरह का दोहरा रवैया न्याय व्यवस्था से भरोसा कम करता है और साबित करता है कि समानता सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। न्याय का तराजू संतुलित होना चाहिए, जो किसी के जेंडर या प्रभाव के बोझ से न झुके।1