नालंदा जिले में अब नहीं ढहेंगे घर! रहुई में राजमिस्त्रियों को मिला आपदा से लड़ने का हथियार, रहुई में राजमिस्त्रियों को मिला आपदा से लड़ने का ज्ञान, नालंदा जिला अंतर्गत रहुई प्रखंड में आपदा-रोधी भवन निर्माण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से प्रखंड स्थित प्रशिक्षण भवन में दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ भवन निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि भूकंप, बाढ़ या अन्य आपदाओं में जान-माल की क्षति को कम किया जा सके। पटना से आए मास्टर ट्रेनर प्रियांशु उपाध्याय ने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कुल 30 राजमिस्त्रियों का चयन किया गया था, जिनमें से 24 राजमिस्त्री इस प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान फाउंडेशन से लेकर छत (स्लैब) तक घर निर्माण की पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। राजमिस्त्रियों को सिखाया गया कि— मजबूत और संतुलित फाउंडेशन कैसे तैयार करें, दीवारों में सही बंधन और मजबूती कैसे सुनिश्चित करें, भूकंप व अन्य आपदाओं के दौरान भवन को सुरक्षित रखने के लिए आपदा-रोधी तकनीकों का प्रयोग कैसे किया जाए। यह विशेष प्रशिक्षण 14 जनवरी तक चलेगा। स्थानीय स्तर पर इस पहल को भविष्य के लिए जीवनरक्षक कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब गांव-गांव में ऐसे मकान बनेंगे जो आपदा में भी ढाल बन सकें।
नालंदा जिले में अब नहीं ढहेंगे घर! रहुई में राजमिस्त्रियों को मिला आपदा से लड़ने का हथियार, रहुई में राजमिस्त्रियों को मिला आपदा से लड़ने का ज्ञान, नालंदा जिला अंतर्गत रहुई प्रखंड में आपदा-रोधी भवन निर्माण को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह प्रशिक्षण बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की ओर से प्रखंड स्थित प्रशिक्षण भवन में दिया जा रहा है। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य आपदा के समय सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ भवन निर्माण को बढ़ावा देना है, ताकि भूकंप, बाढ़ या अन्य आपदाओं में जान-माल की क्षति को कम किया जा सके। पटना से आए मास्टर ट्रेनर प्रियांशु उपाध्याय ने बताया कि बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण द्वारा कुल 30 राजमिस्त्रियों का चयन किया गया था, जिनमें से 24 राजमिस्त्री इस प्रशिक्षण में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के दौरान फाउंडेशन से लेकर छत (स्लैब) तक घर निर्माण की पूरी प्रक्रिया की व्यावहारिक जानकारी दी जा रही है। राजमिस्त्रियों को सिखाया गया कि— मजबूत और संतुलित फाउंडेशन कैसे तैयार करें, दीवारों में सही बंधन और मजबूती कैसे सुनिश्चित करें, भूकंप व अन्य आपदाओं के दौरान भवन को सुरक्षित रखने के लिए आपदा-रोधी तकनीकों का प्रयोग कैसे किया जाए। यह विशेष प्रशिक्षण 14 जनवरी तक चलेगा। स्थानीय स्तर पर इस पहल को भविष्य के लिए जीवनरक्षक कदम माना जा रहा है, क्योंकि अब गांव-गांव में ऐसे मकान बनेंगे जो आपदा में भी ढाल बन सकें।
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