दलित की जमीन सामान्य वर्ग को बेचने का मामला: नियमों को ताक पर रखकर हुआ दाखिल-खारिज, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल झाँसी। तहसील क्षेत्र में भूमि संबंधी एक मामला सामने आने के बाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त अभिलेखों के अनुसार मौजा बिजौली, तहसील झांसी की अराजी संख्या 3469 की भूमि के संबंध में नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 30 अगस्त 2017 को दाखिल-खारिज का आदेश पारित किया गया। आरोप है कि उक्त भूमि के विक्रेता अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं, जबकि क्रेता सामान्य वर्ग का बताया जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 157-ए के अनुसार अनुसूचित जाति के भूमिधर की भूमि सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेचे जाने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2010 में हुई रजिस्ट्री के आधार पर वर्ष 2017 में दाखिल-खारिज कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो आखिर किस आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों को दरकिनार कर इस प्रकार जमीनों का नामांतरण किया जा रहा है तो यह न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि अनुसूचित जाति के अधिकारों पर सीधा आघात भी है। लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका सामने आ सके। इस प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक दाखिल-खारिज का नहीं बल्कि कानून और व्यवस्था के साथ खुलेआम खिलवाड़ का उदाहरण बन सकता है।
दलित की जमीन सामान्य वर्ग को बेचने का मामला: नियमों को ताक पर रखकर हुआ दाखिल-खारिज, प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल झाँसी। तहसील क्षेत्र में भूमि संबंधी एक मामला सामने आने के बाद राजस्व प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्राप्त अभिलेखों के अनुसार मौजा बिजौली, तहसील झांसी की अराजी संख्या 3469 की भूमि के संबंध में नायब तहसीलदार द्वारा दिनांक 30 अगस्त 2017 को दाखिल-खारिज का आदेश पारित किया गया। आरोप है कि उक्त भूमि के विक्रेता अनुसूचित जाति वर्ग से संबंधित हैं, जबकि क्रेता सामान्य वर्ग का बताया जा रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950 की धारा 157-ए के अनुसार अनुसूचित जाति के भूमिधर की भूमि सामान्य वर्ग के व्यक्ति को बेचे जाने के लिए सक्षम अधिकारी की अनुमति आवश्यक होती है। बताया जा रहा है कि वर्ष 2010 में हुई रजिस्ट्री के आधार पर वर्ष 2017 में दाखिल-खारिज कर दिया गया। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या इस पूरे प्रकरण में सक्षम अधिकारी की अनुमति ली गई थी या नहीं। यदि अनुमति नहीं ली गई थी तो आखिर किस आधार पर राजस्व अभिलेखों में नामांतरण कर दिया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नियमों को दरकिनार कर इस प्रकार जमीनों का नामांतरण किया जा रहा है तो यह न केवल कानून की अवहेलना है बल्कि अनुसूचित जाति के अधिकारों पर सीधा आघात भी है। लोगों ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है ताकि जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित लोगों की भूमिका सामने आ सके। इस प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला केवल एक दाखिल-खारिज का नहीं बल्कि कानून और व्यवस्था के साथ खुलेआम खिलवाड़ का उदाहरण बन सकता है।
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- झांसी प्रेम नगर पुलिस ने पुलिस के साथ अभद्रता करने वाले तीन अभियुक्त को गिरफ्तार कार न्यालय के समक्ष पेश किया है यह तीनों अभियुक्त वही है जिन्होंने पुलिस टीम पर हमला किया और वर्दी फाड़ी सरकारी गाड़ी को पत्थर मार कर क्षतिग्रस्त किया था1
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- झांसी प्रेमनगर थाना पुलिस ने पुलिस से अभद्रता करने वाले तीन लोगों को किया गिरफ्तार न्यायालय में किया पेश1
- झांसी। बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के जनक स्वर्गीय शंकर लाल महरोत्रा की जयंती को बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने संकल्प दिवस के रूप में मनाया। इस अवसर पर बुंदेली स्वयंसेवकों के साथ प्रदेश अध्यक्ष यज्ञेश गुप्ता के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें महरोत्रा के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रदेश अध्यक्ष यज्ञेश गुप्ता ने स्व. शंकर लाल महरोत्रा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान बुंदेली कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कंपाउंडर की मदद से रक्त निकालकर प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखते हुए अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने के वादे को याद दिलाया। प्रदेश अध्यक्ष यज्ञेश गुप्ता ने कहा कि स्व. शंकर लाल महरोत्रा ने बुंदेलखंड राज्य आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश कांग्रेस के कोषाध्यक्ष पद से इस्तीफा दिया और आंदोलन को जारी रखने के लिए अपनी फैक्ट्री तक बेच दी, लेकिन उनके निधन के दो दशक बाद भी बुंदेलखंड राज्य का सपना अधूरा है। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड राष्ट्र समिति महरोत्रा के सपने को पूरा करने के लिए संघर्ष जारी रखेगी। बताया गया कि स्व. शंकर लाल महरोत्रा ने 17 सितंबर 1989 को मध्यप्रदेश के नौगांव से बुंदेलखंड राज्य आंदोलन की शुरुआत की थी। उन्होंने बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा का गठन कर आंदोलन को गति दी और इसके लिए कई आंदोलन, धरना-प्रदर्शन और अभियान चलाए। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष यज्ञेश गुप्ता, जिला अध्यक्ष दीपक साहू, क्षेत्रीय प्रभारी बीके गुप्ता, संयोजक राजू बुकसेलर, सह संयोजक संजय अग्रवाल, महामंत्री ज्ञानेश्वर कुशवाहा, उपाध्यक्ष वीरेन्द्र झा, राष्ट्रीय सदस्य शिवम् झा, कोषाध्यक्ष अजीत तिवारी, पार्षद लखन कुशवाहा, प्रदीप खटीक, जिला महामंत्री इस्माइल खान सहित सैकड़ों बुंदेलखंडी कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन झांसी महानगर के जिला अध्यक्ष दीपक साहू ने किया।1
- *डॉ विजय पहारिया के मुख्य आतिथ्य में हुआ नारी सशक्तिकरण का "फुलवारी" कार्यक्रम* *ज्ञान स्थली बालिका इंटर कॉलेज में “लेट्स गेट कलरफुल” कार्यक्रम, दीप प्रज्वलित कर हुआ शुभारंभ** *महिला सशक्तिकरण का दिया संदेश, छात्राओं ने दी शानदार सांस्कृतिक प्रस्तुतियां** झांसी! बड़ा गांव गेट बाहर स्थित ज्ञान स्थली बालिका इंटर कॉलेज में “लेट्स गेट कलरफुल” कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि समाजसेवी विजय पहारिया, विशिष्ट अतिथि केंद्रीय अध्यक्ष संजय पटवारी व मोनिका गुप्ता ने विद्यालय की प्रिंसिपल अर्चना गुप्ता के साथ दीप प्रज्वलित कर किया इस दौरान छात्राओं ने नृत्य, गीत व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शानदार प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण और शिक्षा के महत्व पर भी जोर दिया गया। अतिथियों ने छात्राओं को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने के लिए प्रेरित किया कार्यक्रम में विद्यालय परिवार, शिक्षक-शिक्षिकाएं और अभिभावक भी मौजूद रहे। अंत में विद्यालय प्रशासन ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया1
- बबीना-झाँसी (उत्तर प्रदेश)। झांसी के बबीना थाना क्षेत्र में सोमवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने सबको झकझोर दिया। खैलार गांव के पास सुबह करीब 5:30 बजे सेना के ट्रक और मुर्गों से भरी पिकअप के बीच आमने-सामने जोरदार भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सेना के एक नायब सूबेदार की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि दो अन्य नायब सूबेदार और पिकअप चालक घायल हो गए।1
- Post by S News1