सोना-चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी के आयात पर सरकार ने लगाई पाबंदी, जारी किया नोटिफिकेशन जारी मुंबई। भारत सरकार ने देश के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर तत्काल प्रभाव से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, इन कीमती धातुओं के आभूषणों की आयात नीति को 'मुक्त' श्रेणी से हटाकर अब 'प्रतिबंधित' श्रेणी में डाल दिया गया है. क्या है इस बदलाव का मतलब? इस नए नियम का सीधा अर्थ यह है कि अब कोई भी व्यापारी या कंपनी बिना सरकारी अनुमति के विदेश से सोने, चांदी या प्लैटिनम के आभूषण नहीं मंगा सकेगी. अब इन वस्तुओं के आयात के लिए DGFT से विशेष लाइसेंस या पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यह प्रतिबंध इतना सख्त है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यापारी ने पहले से कोई सौदा (कॉन्ट्रैक्ट) किया हुआ है या एडवांस पेमेंट भी कर दी है, तो भी उन्हें नए नियमों का पालन करना होगा और लाइसेंस लेना होगा. क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण 'मुक्त व्यापार समझौतों' (FTA) का कथित दुरुपयोग रोकना है. उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ आयातक भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच हुए समझौते का गलत फायदा उठा रहे थे. वे थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों से बिना किसी रत्न वाले साधारण आभूषणों के नाम पर भारी मात्रा में कीमती धातुएं कम शुल्क पर भारत ला रहे थे. इससे न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि घरेलू आभूषण निर्माताओं को भी असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था. किसे मिलेगी छूट हालांकि, सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने वाली इकाइयों का ध्यान रखा है. 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOU) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थित कंपनियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है. इसके अलावा, जो आयात 'रत्न एवं आभूषण निर्यात योजनाओं' के तहत किए जाते हैं, उन पर भी यह पाबंदी लागू नहीं होगी. उद्योग की प्रतिक्रिया बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से घरेलू स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में थोड़ी हलचल देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में यह भारतीय ज्वैलरी उद्योग के लिए फायदेमंद होगा. उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि सरकार को अब लाइसेंस देने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि वास्तविक और ईमानदार कारोबारियों को अपना काम करने में कोई परेशानी न हो.
सोना-चांदी और प्लैटिनम ज्वेलरी के आयात पर सरकार ने लगाई पाबंदी, जारी किया नोटिफिकेशन जारी मुंबई। भारत सरकार ने देश के रत्न एवं आभूषण क्षेत्र में एक बड़ा नीतिगत बदलाव करते हुए सोना, चांदी और प्लैटिनम से बने आभूषणों के आयात पर तत्काल प्रभाव से कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए हैं. विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) द्वारा जारी ताजा अधिसूचना के अनुसार, इन कीमती धातुओं के आभूषणों की आयात नीति को 'मुक्त' श्रेणी से हटाकर अब 'प्रतिबंधित' श्रेणी में डाल दिया गया है. क्या है इस बदलाव का मतलब? इस नए नियम का सीधा अर्थ यह है कि अब कोई भी व्यापारी या कंपनी बिना सरकारी अनुमति के विदेश से सोने, चांदी या प्लैटिनम के आभूषण नहीं मंगा सकेगी. अब इन वस्तुओं के आयात के लिए DGFT से विशेष लाइसेंस या पूर्व-अनुमति लेना अनिवार्य होगा. यह प्रतिबंध इतना सख्त है कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि किसी व्यापारी ने पहले से कोई सौदा (कॉन्ट्रैक्ट) किया हुआ है या एडवांस पेमेंट भी कर दी है, तो भी उन्हें नए नियमों का पालन करना होगा और लाइसेंस लेना होगा. क्यों लिया गया यह फैसला? सरकार के इस कदम के पीछे मुख्य कारण 'मुक्त व्यापार समझौतों' (FTA) का कथित दुरुपयोग रोकना है. उद्योग सूत्रों के अनुसार, कुछ आयातक भारत और आसियान (ASEAN) देशों के बीच हुए समझौते का गलत फायदा उठा रहे थे. वे थाईलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों से बिना किसी रत्न वाले साधारण आभूषणों के नाम पर भारी मात्रा में कीमती धातुएं कम शुल्क पर भारत ला रहे थे. इससे न केवल सरकारी राजस्व का नुकसान हो रहा था, बल्कि घरेलू आभूषण निर्माताओं को भी असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा था. किसे मिलेगी छूट हालांकि, सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने वाली इकाइयों का ध्यान रखा है. 100 प्रतिशत निर्यात-उन्मुख इकाइयों (EOU) और विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZ) में स्थित कंपनियों को इस प्रतिबंध से बाहर रखा गया है. इसके अलावा, जो आयात 'रत्न एवं आभूषण निर्यात योजनाओं' के तहत किए जाते हैं, उन पर भी यह पाबंदी लागू नहीं होगी. उद्योग की प्रतिक्रिया बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से घरेलू स्तर पर सोने-चांदी की कीमतों में थोड़ी हलचल देखने को मिल सकती है, लेकिन लंबे समय में यह भारतीय ज्वैलरी उद्योग के लिए फायदेमंद होगा. उद्योग जगत के अधिकारियों का कहना है कि सरकार को अब लाइसेंस देने की प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाना चाहिए ताकि वास्तविक और ईमानदार कारोबारियों को अपना काम करने में कोई परेशानी न हो.
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- मुंबई, महाराष्ट्र: एआईएमआईएम (AIMIM) के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान का कहना है, "...मेरी व्यक्तिगत राय है कि नक्सलवाद और आतंकवाद को जड़ से खत्म कर देना चाहिए। गुंडागर्दी भी खत्म होनी चाहिए। और ये विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल के लोग जो मासूम मुसलमानों को पकड़ते हैं और कहते हैं कि यह मत कहो, वह मत कहो, जो उन्हें पीटते हैं और मार देते हैं, जो उनकी लिंचिंग करते हैं, हमारे देश से ये सभी चीजें खत्म होनी चाहिए। किसी को भी कानून अपने हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। वे लोग जो खुद को बड़े गुंडे समझते हैं और निर्दोष लोगों की हत्या करते हैं, वे आतंकवाद और नक्सलवाद से कम क्या हैं? उसे भी खत्म किया जाना चाहिए। गृह मंत्री को उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए..."1
- सदन में Sanjay Singh ने जोरदार सवाल उठाते हुए Gautam Adani और संजय सिंह के पासपोर्ट जब्ती के मुद्दे पर हंगामा किया। विपक्ष के सवालों पर सरकार घिरी नजर आई और संसद का माहौल गरमा गया।1
- Post by Lokhit Hindi1
- Maundy Thursday Special Video From Mi Marathi India Please Subscribe 🙏🙏1
- चोरी की है धुरंधर 2 की स्क्रिप्ट, आदित्य धर ने चुराई साउथ के राइटर की कहानी? कौन हैं संतोष कुमार क्या है मामला Dhurandhar 2 की कहानी चोरी की है? आदित्य धर ने अपने फायदे के लिए चुरा ली किसी और की कहानी? राइटर फिल्म मेकर के दावे ने पब्लिक को किया हैरान. धुरंधर 2 की कहानी चोरी की है? आदित्य धर ने फिल्म बनाने के लिए चोरी कर ली किसी और की कहानी? ये दावा हम नहीं बल्कि संतोष कुमार आरएस नाम के एक राइटर और फिल्ममेकर ने किया है. संतोष ने फिल्म डायरेक्टर आदित्य धर पर गंभीर आरोप लगाया है. उन्होंने दावा किया कि रणवीर सिंह की हालिया ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर 2: द रिवेंज' उनकी 2023 में लिखी गई ओरिजनल स्क्रिप्ट से काफी हद तक मिलती जुलती है. संतोष कुमार ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपनी कहानी को एंटरटेनमेंट के मकसद से तैयार किया था, लेकिन इसे चुराकर एक प्रोपेगेंडा और राजनीतिक प्रचार वाली फिल्म में बदल दिया गया. उन्होंने साफ किया कि वे जल्द ही कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं और सभी सबूत पेश करेंगे.1
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- हनुमान नगर, कांदिवली पूर्व स्थित पाल स्कूल के आसपास अवैध नशीले पदार्थों की बिक्री1