प्रयागराज के मेजा तहसील के उधरेघा गांव में मुख्य मार्ग की बदहाली के कारण ग्रामीण बेहद परेशान हैं। इस सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और उखड़ी गिट्टियां लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। इस जर्जर मार्ग का सबसे बुरा खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो सुबह साइकिल से स्कूल जाते समय इन गड्ढों के कारण संतुलन खोकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसके साथ ही कीचड़ से उनके कपड़े भी खराब हो जाते हैं। बारिश के दिनों में यह पूरा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है। इस बदहाल रास्ते से गुजरना केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि आम राहगीरों और किसानों के लिए भी बेहद मुश्किल भरा साबित हो रहा है। रात के समय अंधेरा होने के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों में मरीजों के लिए एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं का भी इस गांव तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय निवासियों ने सड़क की मरम्मत के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेने और सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराने की मांग की है।
प्रयागराज के मेजा तहसील के उधरेघा गांव में मुख्य मार्ग की बदहाली के कारण ग्रामीण बेहद परेशान हैं। इस सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे और उखड़ी गिट्टियां लगातार दुर्घटनाओं का कारण बन रही हैं। इस जर्जर मार्ग का सबसे बुरा खामियाजा स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है, जो सुबह साइकिल से स्कूल जाते समय इन गड्ढों के कारण संतुलन खोकर गिर जाते हैं और चोटिल हो जाते हैं। इसके साथ ही कीचड़ से उनके कपड़े भी खराब हो जाते हैं। बारिश के दिनों में यह पूरा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है, जिससे बच्चों की पढ़ाई भी बाधित होती है। इस बदहाल रास्ते से गुजरना केवल बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि आम राहगीरों और किसानों के लिए भी बेहद मुश्किल भरा साबित हो रहा है। रात के समय अंधेरा होने के कारण दोपहिया वाहन चालक आए दिन हादसों का शिकार हो रहे हैं। आपातकालीन स्थितियों में मरीजों के लिए एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं का भी इस गांव तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थानीय निवासियों ने सड़क की मरम्मत के लिए कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई है, लेकिन अब तक उन्हें केवल कोरा आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेने और सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराने की मांग की है।
- प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र की एग्रीकल्चर चौकी के अंतर्गत पिछले 70 वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों में नगर निगम द्वारा उनका आशियाना उजाड़ने की धमकी दिए जाने के बाद भारी आक्रोश व्याप्त है। इन पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे इन दुकानों के सहारे ही अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन अब उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी संदेश भेजा था, लेकिन कुछ विधायकों के कहने पर मुख्यमंत्री भी गरीबों की इस फरियाद को नहीं सुन रहे हैं। इस मामले के विरोध में समाजवादी कार्यकर्ता गुलाब चंद्र पासी, आकाश पासी, आनंद पासी, राजेश पासी, सविता कैथवास और गंगोत्री नगर से समाजसेवी भोले पाल चाचा (टी स्टॉल) मौके पर पहुंचे। पासी समाज के लोगों का कहना है कि पासी समाज से होने के कारण इस सरकार में उनका कोई वजूद नहीं समझा जा रहा है और न ही उनकी कोई सुनवाई हो रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनका आशियाना तोड़ा गया तो वे पीछे नहीं हटेंगे और सरकार चाहे भाजपा की हो या कोई और, वे इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि योगी सरकार में गरीबों के साथ घोर अन्याय हो रहा है और भाजपा के विधायक अपनी जेबें गर्म करके गरीबों के आशियाने उजड़वा रहे हैं। पीड़ित जनता ने मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया है कि इन विधायकों की कॉल डिटेल चेक कराई जाए कि किसके पास कितना पैसा गया है और ऐसे विधायकों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई कर गरीबों को न्याय दिलाया जाए।1
- प्रयागराज के इलाहाबाद अंतर्गत मनोहर दास डी ब्लॉक में नाले की टूटी दीवार के कारण जलभराव हो गया है। नाले से हो रहे इस जलभराव की वजह से स्थानीय जनता में भारी नाराजगी है।1
- कौशाम्बी के मंझनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई हत्या की वारदात से संबंधित अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से बरामदगी भी की गई है। इस कार्रवाई के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक श्रीमती अमिता सिंह ने वीडियो बाइट के जरिए आधिकारिक जानकारी दी है।1
- प्रयागराज के बारा में अदालती आदेश और एसडीएम के निर्देशों के बावजूद एक पीड़िता को उसकी खुद की जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। थाना शंकरगढ़ क्षेत्र के ग्राम जनवा की निवासी सीमा देवी (पत्नी राजबिहारी सिंह) का जमीन विवाद का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सीमा देवी की दर्ज भूमि आराजी संख्या 1143/3, रकबा 0.114 हेक्टेयर पर कोर्ट का आदेश होने के बाद भी विपक्षी कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं है। शनिवार को थाना समाधान दिवस पर एसडीएम बारा डॉ. गणेश कन्नौजिया के निर्देश पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम सीमांकन और पीड़िता को कब्जा दिलाने मौके पर पहुंची थी, लेकिन विपक्षी राम प्रताप ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर वहाँ जमकर हंगामा खड़ा कर दिया। विपक्षियों के बढ़ते विरोध को देखकर राजस्व और पुलिस की टीम बिना कार्रवाई पूरी किए ही वापस लौट गई। बताया जा रहा है कि एसडीएम के फोन के बाद टीम को वापस बुला लिया गया। पीड़िता सीमा देवी का आरोप है कि यह पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले भी 3-4 बार पुलिस-राजस्व की टीम आ चुकी है लेकिन हर बार विपक्षियों के हंगामे के आगे प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। सीमा देवी ने चेतावनी दी है कि कोर्ट का आदेश होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो गाँव में गंभीर विवाद या खूनी संघर्ष हो सकता है। इस पूरे मामले पर स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की लचर कार्रवाई के कारण ही विपक्षियों के हौसले इतने बुलंद हैं। वहीं, एसडीएम बारा डॉ. गणेश कन्नौजिया का कहना है कि कोर्ट का आदेश है तो उसका पालन कराया जाएगा और टीम विरोध के कारण वापस जरूर आई है, लेकिन अब विधिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस सतर्क है और प्रशासन ने जल्द ही पीड़िता को कब्जा दिलाने का भरोसा दिया है, लेकिन पीड़िता के लिए थाना समाधान दिवस पर भी न्याय न मिलना प्रशासन की लाचारी को दर्शाता है।1
- प्रयागराज से मिली जानकारी के अनुसार, वियतनाम के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल फु-क्वोक (Phu Quoc) द्वीप के निकट शनिवार को एक दर्दनाक नौका हादसे में 15 भारतीय पर्यटकों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब एक स्पीडबोट माय रुट द्वीप से लौट रही थी और तेज लहरों व खराब समुद्री परिस्थितियों के बीच अचानक पलट गई। हादसे के समय स्पीडबोट पर 32 भारतीय पर्यटक और चालक दल के सदस्य सवार थे। दुर्घटना के बाद समुद्र में अफरा-तफरी मच गई, जिसके बाद स्थानीय बचाव दल, तटरक्षक बल और आसपास मौजूद अन्य नौकाओं ने तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। इस बचाव अभियान के दौरान अब तक 21 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जबकि सभी 15 मृतकों के शव भी बरामद कर लिए गए हैं। हादसे में घायल हुए कुछ पर्यटकों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से कुछ की स्थिति गंभीर बताई जा रही है। वियतनाम सरकार ने इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं, हालांकि प्रारंभिक तौर पर खराब मौसम और ऊंची लहरों को ही दुर्घटना की वजह माना जा रहा है। वहीं, भारतीय दूतावास ने इस हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए पीड़ित परिवारों की सहायता के लिए हेल्पलाइन और नियंत्रण कक्ष स्थापित किए हैं।2