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बकस्वाहा में विशाल चुनरी यात्रा का पुष्पवर्षा कर युवा कांग्रेस नेता आशिक मंसूरी के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। यह धार्मिक

2 hrs ago
user_ANVI NEWSवाजनाहर खबर मबसे
ANVI NEWSवाजनाहर खबर मबसे
आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
2 hrs ago

बकस्वाहा में विशाल चुनरी यात्रा का पुष्पवर्षा कर युवा कांग्रेस नेता आशिक मंसूरी के नेतृत्व में भव्य स्वागत किया गया। यह धार्मिक

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  • ! नगर निगम आगरा में पढ़ाई कम… घूमाई ज्यादा? आगरा नगर निगम का स्टडी टूर एक बार फिर चर्चा में है… लेकिन सवाल वही— सीखा क्या… और शहर को मिला क्या? 28 मार्च को नगर निगम के पार्षद बेंगलुरु मैसूर ऊटी के 7 दिन के स्टडी टूर पर जा रहे हैं।अब तक 100 में से 76 पार्षद रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं इस टूर का कुल खर्चा – करीब 55 लाख रुपये होना है। साल 2021 में अंडमान और निकोबार द्वीप टूर पर 83 पार्षद गए। खर्च – 35. लाख रुपये हुआ साल 2024 में मुंबई टूर 74 पार्षद गए। खर्च – 32 लाख रुपये हुआ। लेकिन… एक भी पार्षद ने स्टडी रिपोर्ट जमा नहीं की! अगर तीनों टूर का खर्च जोड़ दिया जाएं तो — कुल खर्च = लगभग 1 करोड़ 21 लाख रुपये होगा। सवाल सीधा है— इतने पैसे में शहर में क्या विकास हुआ? क्या सड़कों की हालत बदली? क्या सीवर और पानी की समस्या खत्म हुई? क्या कोई नया मॉडल आगरा में लागू हुआ? 👉 जवाब— NO CLEAR RESULT! टूर पर दलील देते हुए कुछ पार्षद कहते हैं कि “मंशा ठीक है…” लेकिन सच्चाई ये है— रिपोर्ट नहीं प्लानिंग नहीं और न ही कोई ठोस बदलाव मेयर हेमलता दिवाकर के मुताबिक टूर का उद्देश्य है नई चीजें सीखना और शहर में लागू करना लेकिन सवाल अब भी वही है सीखा क्या… और लागू क्या हुआ? जनता टैक्स दे रही है— हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, वाटर टैक्स और बदले में मिल रहा है— टूर… लेकिन बिना रिजल्ट के! अगर स्टडी टूर है तो— 📌 रिपोर्ट अनिवार्य हो 📌 लागू किए गए काम दिखें 📌 जनता को हिसाब मिले मेयर साहिबा और माननीय पार्षद जी गौर से सुनो आगरा जैसे शहर को विकास चाहिए… ना कि सिर्फ टूर की तस्वीरें। नगर निगम पार्षद टूर को लेकर आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और वीडियो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि आपका पार्षद और आपके मेयर के इनबॉक्स में यह वीडियो पहुंचे और इस टूर को लेकर वह कोई मजबूत कदम उठाएं। “टूर पर पार्षद… विकास ठंडे बस्ते में!” “1.21 करोड़ खर्च… रिपोर्ट ZERO!” “स्टडी टूर या सैर-सपाटा?” “जनता का पैसा… घूमने में खर्च!” “सीखा क्या? बताया नहीं!” “नगर निगम का टूर मॉडल FAIL?
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    !
नगर निगम आगरा में पढ़ाई कम… घूमाई ज्यादा?
आगरा नगर निगम का स्टडी टूर एक बार फिर चर्चा में है… लेकिन सवाल वही—
सीखा क्या… और शहर को मिला क्या?
28 मार्च को नगर निगम के पार्षद
बेंगलुरु
मैसूर
ऊटी
के 7 दिन के स्टडी टूर पर जा रहे हैं।अब तक 100 में से 76 पार्षद रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं
इस टूर का कुल खर्चा – करीब 55 लाख रुपये होना है।
साल 2021 में
अंडमान और निकोबार द्वीप
टूर पर 83 पार्षद गए।
खर्च – 35. लाख रुपये हुआ
साल 2024 में
मुंबई टूर 74 पार्षद गए।
खर्च – 32 लाख रुपये हुआ।
लेकिन…
एक भी पार्षद ने स्टडी रिपोर्ट जमा नहीं की!
अगर तीनों टूर का खर्च जोड़ दिया जाएं तो —
कुल खर्च = लगभग 1 करोड़ 21 लाख रुपये होगा।
सवाल सीधा है—
इतने पैसे में शहर में क्या विकास हुआ?
क्या सड़कों की हालत बदली?
क्या सीवर और पानी की समस्या खत्म हुई?
क्या कोई नया मॉडल आगरा में लागू हुआ?
👉 जवाब— NO CLEAR RESULT!
टूर पर दलील देते हुए
कुछ पार्षद कहते हैं कि
“मंशा ठीक है…”
लेकिन सच्चाई ये है—
रिपोर्ट नहीं
प्लानिंग नहीं
और न ही कोई ठोस बदलाव
मेयर हेमलता दिवाकर के मुताबिक टूर का उद्देश्य है नई चीजें सीखना और शहर में लागू करना
लेकिन सवाल अब भी वही है
सीखा क्या… और लागू क्या हुआ?
जनता टैक्स दे रही है—
हाउस टैक्स, सीवर टैक्स, वाटर टैक्स
और बदले में मिल रहा है—
टूर… लेकिन बिना रिजल्ट के!
अगर स्टडी टूर है तो—
📌 रिपोर्ट अनिवार्य हो
📌 लागू किए गए काम दिखें
📌 जनता को हिसाब मिले
मेयर साहिबा और माननीय पार्षद जी गौर से सुनो आगरा जैसे शहर को विकास चाहिए…
ना कि सिर्फ टूर की तस्वीरें।
नगर निगम पार्षद टूर को लेकर आपकी क्या राय है कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं और वीडियो ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि आपका पार्षद और आपके मेयर के इनबॉक्स में यह वीडियो पहुंचे और इस टूर को लेकर वह कोई मजबूत कदम उठाएं।
“टूर पर पार्षद… विकास ठंडे बस्ते में!”
“1.21 करोड़ खर्च… रिपोर्ट ZERO!”
“स्टडी टूर या सैर-सपाटा?”
“जनता का पैसा… घूमने में खर्च!”
“सीखा क्या? बताया नहीं!”
“नगर निगम का टूर मॉडल FAIL?
    user_Syed Shakeel Journalist
    Syed Shakeel Journalist
    Local News Reporter आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • आगरा संवाददाता बहादुर सिंह पचगई पट्टी जैसे बन रहे हैं हालात, श्रमिकों की क्षमता पर प्रतिकूल असर* विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी और इसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। क्षेत्र का भूजल न केवल नीचे जा रहा है, बल्कि अत्यधिक खारेपन (Salinity) और फ्लोराइड (Fluoride) के खतरनाक स्तर से भी दूषित हो चुका है। भारत सरकार की ओर से जल स्तर की गिरावट रोकने के लिये अनेक गंभीर प्रयास किये जा रहे है और अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित किये जाने का प्रयास हो रहा है।लेकिन इसके बावजूद जलस्तर और उसकी गुणवत्ता में गिरावट आना जारी है।है।उ प्र ग्रामीण मजदूर संगठन उपरोक्त मौजूदा स्थितियों को लेकर अत्यंत गंभीर है और मानता है कि इनको और अधिक बढ़ने से रोका जाना चाहिये।पर्यावरण विभाग और सिंचाई विभाग को इसके लिए योजना बनानी चाहिये। सिंचाई विभाग से अपेक्षा* उ प्र के सिंचाई विभाग के सिंचाई कार्य मंडल-III, आगरा के तहत अधिशासी अभियंता लोअर खंड आगरा के प्रशासन में फतेहपुर सीकरी विकास खंड क्षेत्र आता है,लेकिन इसकी तेरहमोरी बांध और खारी नदी जैसी जल नियंत्रण एवं जल प्रवाह जैसी योजनाएं उपेक्षित कर रखी गयी हैं। तेरहमोरी बांध जनपद का सबसे बड़ा बांध है किंतु इसके गेट टूटे पडे होने के कारण बडे जलग्राही क्षेत्र से पहुंचने वाला मानसून काल में पहुंचने वाला पानी नहीं रुकता।अगर यह पानी रुकने लगे तो रसातल में पहुंच चुका भूजल स्वत:रिचार्ज हो जायेगा और पानी की गुणवत्ता में भी बदलाव आयेगा। किरावली तहसील के गांवों से होकर बहने वाली खारी नदी के बहाव को तेरह मोरी बांध का डिसचार्ज और भरतपुर जनपद के चिकसाना बांध का डिस्चार्ज नियंत्रित करता है।तेरहमोरी बांध के गेटों के टूटा रहने से नदी मानसून काल में भी लगभग बहाव शून्य सी रहती है।जब तक नदी बहती थी तब तक किरावली तहसील के अधिकांश गांवों हैंड पंप सुचारू थे,कूंओं में से अपने कम में गुणवत्ता वाली पानी मिलता था। पंचगाई पट्टी बनने से रोके वर्तमान में फतेहपुर सीकरी विकास खंड के तमाम गांवों में जनपद के सबसे अधिक समस्या ग्रस्त रहे सदर तहसील के गांव ‘पचगईं पट्टी’ जैसी स्थिति बनती जा रही है।जहां कि निम्न गुणवत्ता वाले पानी का उपयोग करने भर से गांव शारीरिक विकलांगता से अभिशप्त हो गया।अब भी यहां के लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता को कम आंक कर सेवा योजक रोजगार देने से बचना चाहते हैं। एक श्रमिक नेता के रूप में मुझे यहां के लोगों की शारीरिक विकलांगता के कारण रोजगार को पाने को लेकर बनी चली आ रही समस्या की जानकारी है,इस लिये मैं नहीं चाहता कि फतेहपुर सीकरी की मेहनतकश श्रम शक्ति को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पडे। वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) क्षेत्र में हरियाली का विस्तार नहीं हो सकेगा।मेंझे बार बार कहना अखर रहा है किंतु हकीकत यही है कि जब तक तेरह मोरी बांध के गेटो की मरम्मत करवाके मानसून कालीन पानी का कहराव सुनिश्चित नहीं हो जाता क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार लाया जाना असंभव है। स्थानीय प्रशासन नागरिकों को बूंद बूंद बचाकर ,जल संचयन (Rainwater Harvesting) के लिये लगातार प्रेरित करता रहता है,लेकिन पता नहीं सिंचाई विभाग से तेरहमोरी बांध के गेटों की मरम्मत का महत्वपूर्ण कार्य क्यों नहीं करवा पाता।
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    आगरा संवाददाता बहादुर सिंह 
पचगई पट्टी जैसे बन रहे हैं हालात, श्रमिकों की क्षमता पर प्रतिकूल असर*
विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक नगरी फतेहपुर सीकरी और इसके आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों में भूजल प्रदूषण का स्तर चिंताजनक रूप से बढ़ रहा है। क्षेत्र का भूजल न केवल नीचे जा रहा है, बल्कि अत्यधिक खारेपन (Salinity) और फ्लोराइड (Fluoride) के खतरनाक स्तर से भी दूषित हो चुका है।
भारत सरकार की ओर से जल स्तर की गिरावट रोकने के लिये अनेक गंभीर प्रयास किये जा रहे है और अनेक महत्वपूर्ण योजनाएं क्रियान्वित किये जाने का प्रयास हो रहा है।लेकिन इसके बावजूद जलस्तर और उसकी गुणवत्ता में गिरावट आना जारी है।है।उ प्र ग्रामीण मजदूर संगठन उपरोक्त मौजूदा स्थितियों को लेकर अत्यंत गंभीर है और मानता है कि इनको और अधिक बढ़ने से रोका जाना चाहिये।पर्यावरण विभाग और सिंचाई विभाग को इसके लिए योजना बनानी चाहिये।
सिंचाई विभाग से अपेक्षा*
उ प्र के सिंचाई विभाग के सिंचाई कार्य मंडल-III, आगरा के तहत अधिशासी अभियंता लोअर खंड आगरा के प्रशासन में फतेहपुर सीकरी विकास खंड क्षेत्र आता है,लेकिन इसकी तेरहमोरी बांध और खारी नदी जैसी जल नियंत्रण एवं जल प्रवाह जैसी योजनाएं उपेक्षित कर रखी गयी हैं।
तेरहमोरी बांध जनपद का सबसे बड़ा बांध है किंतु इसके गेट टूटे पडे होने के कारण बडे जलग्राही क्षेत्र से पहुंचने वाला मानसून काल में पहुंचने वाला पानी नहीं रुकता।अगर यह पानी रुकने लगे तो रसातल में पहुंच चुका भूजल स्वत:रिचार्ज हो जायेगा और पानी की गुणवत्ता में भी बदलाव आयेगा।
किरावली तहसील के गांवों से होकर बहने वाली खारी नदी के बहाव को तेरह मोरी बांध का डिसचार्ज और भरतपुर जनपद के चिकसाना बांध का डिस्चार्ज नियंत्रित करता है।तेरहमोरी बांध के गेटों के टूटा रहने से नदी मानसून काल में भी लगभग बहाव शून्य सी रहती है।जब तक नदी बहती थी तब तक किरावली तहसील के अधिकांश गांवों हैंड पंप सुचारू थे,कूंओं में से अपने कम में गुणवत्ता वाली पानी मिलता था।
पंचगाई पट्टी बनने से रोके
वर्तमान में फतेहपुर सीकरी विकास खंड के तमाम गांवों में जनपद के सबसे अधिक समस्या ग्रस्त रहे सदर तहसील के गांव ‘पचगईं पट्टी’ जैसी स्थिति बनती जा रही है।जहां कि निम्न गुणवत्ता वाले पानी का उपयोग करने भर से गांव शारीरिक विकलांगता से अभिशप्त हो गया।अब भी यहां के लोगों को उनकी शारीरिक क्षमता को कम आंक कर सेवा योजक रोजगार देने से बचना चाहते हैं।
एक श्रमिक नेता के रूप में मुझे यहां के लोगों की शारीरिक विकलांगता के कारण रोजगार को पाने को लेकर बनी चली आ रही समस्या की जानकारी है,इस लिये मैं नहीं चाहता कि फतेहपुर सीकरी की मेहनतकश श्रम शक्ति को भी इस प्रकार की समस्या का सामना करना पडे।
वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI)
क्षेत्र में हरियाली का विस्तार नहीं हो सकेगा।मेंझे बार बार कहना अखर रहा है किंतु हकीकत यही है कि जब तक तेरह मोरी बांध के गेटो की मरम्मत करवाके मानसून कालीन पानी का कहराव सुनिश्चित नहीं हो जाता क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में सुधार लाया जाना असंभव है। स्थानीय प्रशासन नागरिकों को बूंद बूंद बचाकर ,जल संचयन (Rainwater Harvesting) के लिये लगातार प्रेरित करता रहता है,लेकिन पता नहीं सिंचाई विभाग से तेरहमोरी बांध के गेटों की मरम्मत का महत्वपूर्ण कार्य क्यों नहीं करवा पाता।
    user_Bahadur Singh
    Bahadur Singh
    Farmer आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • truck driver nikala khatron ka Khiladi
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    truck driver nikala khatron ka Khiladi
    user_Raja Singh
    Raja Singh
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • उपडाकघर खेरागढ़ में दिनांक 27 मार्च 2026 को समय लगभग 02:54 बजे एक गंभीर घटना सामने आई। एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने निजी कार्य से उपडाकघर पहुंचे थे। चश्मा घर पर भूल आने के कारण उन्होंने वहां उपस्थित कर्मचारी से फॉर्म भरने में सहायता का अनुरोध किया। इस पर संबंधित कर्मचारी ने सहायता करने के बजाय बुजुर्ग के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनसे तू-तड़ाक की भाषा में बात की। कर्मचारी ने बुजुर्ग को अपमानित करते हुए यह तक कह दिया कि "इतने पढ़े-लिखे हो तो खुद क्यों नहीं भर लेते।" सरकारी कार्यालय में इस प्रकार का असंवेदनशील और अपमानजनक व्यवहार न केवल सेवा की मूल भावना के विरुद्ध है, बल्कि बुजुर्ग नागरिकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है। अतः संबंधित प्रकरण की जांच कर दोषी कर्मचारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की जाती है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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    उपडाकघर खेरागढ़ में दिनांक 27 मार्च 2026 को समय लगभग 02:54 बजे एक गंभीर घटना सामने आई। एक बुजुर्ग व्यक्ति अपने निजी कार्य से उपडाकघर पहुंचे थे। चश्मा घर पर भूल आने के कारण उन्होंने वहां उपस्थित कर्मचारी से फॉर्म भरने में सहायता का अनुरोध किया।
इस पर संबंधित कर्मचारी ने सहायता करने के बजाय बुजुर्ग के साथ अभद्र व्यवहार किया और उनसे तू-तड़ाक की भाषा में बात की। कर्मचारी ने बुजुर्ग को अपमानित करते हुए यह तक कह दिया कि "इतने पढ़े-लिखे हो तो खुद क्यों नहीं भर लेते।"
सरकारी कार्यालय में इस प्रकार का असंवेदनशील और अपमानजनक व्यवहार न केवल सेवा की मूल भावना के विरुद्ध है, बल्कि बुजुर्ग नागरिकों के सम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है।
अतः संबंधित प्रकरण की जांच कर दोषी कर्मचारी के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई किए जाने की अपेक्षा की जाती है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
    user_Rahul thakur
    Rahul thakur
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • आगरा के थाना रकाबगंज क्षेत्र के छिपीटोला चौराहे पर वाहन खड़ा करने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष पड़ोसी दुकानदार हैं। मामूली कहासुनी के बाद मामला बढ़ा और पहले गाली-गलौज हुई, फिर सड़क पर ही जमकर लात-घूंसे चले। मारपीट के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत कराया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
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    आगरा के थाना रकाबगंज क्षेत्र के छिपीटोला चौराहे पर वाहन खड़ा करने को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद हो गया।
बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष पड़ोसी दुकानदार हैं। मामूली कहासुनी के बाद मामला बढ़ा और पहले गाली-गलौज हुई, फिर सड़क पर ही जमकर लात-घूंसे चले।
मारपीट के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने बीच-बचाव कर किसी तरह मामला शांत कराया।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।
फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर रही है और आगे की कार्रवाई की जा रही है।
    user_Braj kishor Sharma Reporter
    Braj kishor Sharma Reporter
    Content Creator (YouTuber) आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by Babiu
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    Post by Babiu
    user_Babiu
    Babiu
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • यूरोप से बड़ी खबर! यूरोपियन संसद ने अब तक का सबसे सख्त कानून पास कर दिया है! अब यूरोप से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना अब आसान हो जाएगा। यूरोप के वामपंथी इस फैसले से काफी नाराज़ हैं!
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    यूरोप से बड़ी खबर!
यूरोपियन संसद ने अब तक का सबसे सख्त कानून पास कर दिया है!
अब यूरोप से अवैध प्रवासियों को बाहर निकालना अब आसान हो जाएगा।
यूरोप के वामपंथी इस फैसले से काफी नाराज़ हैं!
    user_राजीव सिकरवार, पत्रकार (ब्यूरो चीफ) डिस्ट्रिक्ट हैंड प्रैस रिपोर्टर आगरा ( उ.प्र)
    राजीव सिकरवार, पत्रकार (ब्यूरो चीफ) डिस्ट्रिक्ट हैंड प्रैस रिपोर्टर आगरा ( उ.प्र)
    Chef आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by Babiu
    1
    Post by Babiu
    user_Babiu
    Babiu
    आगरा, आगरा, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • 🛕⛳
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    🛕⛳
    user_Majnal
    Majnal
    Librarian Agra, Uttar Pradesh•
    5 hrs ago
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