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Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 29 *श्लोक:* आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन - माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्च‍ैनमन्यः श‍ृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ॥ २९ ॥ *अनुवाद:* कोई आत्मा को आश्चर्य से देखता है, कोई इसे आश्चर्य की तरह बताता है तथा कोई इसे आश्चर्य की तरह सुनता है, किन्तु कोई-कोई इसके विषय में सुनकर भी कुछ नहीं समझ पाते। *तात्पर्य:* चूँकि गीतोपनिषद् उपनिषदों के सिद्धान्त पर आधारित है, अत: कठोपनिषद् में (१.२.७) इस श्लोक का होना कोई आश्चर्यजनक नहीं है— श्रवणयापि बहुभिर्यो न लभ्य: शृण्वन्तोऽपि बहवो यं न विद्यु:। आश्चर्यो वक्ता कुशलोऽस्य लब्धा आश्चर्योऽस्य ज्ञाता कुशलानुशिष्ट: ॥ विशाल पशु, विशाल वटवृक्ष तथा एक इंच स्थान में लाखों करोड़ों की संख्या में उपस्थित सूक्ष्मकीटाणुओं के भीतर अणु-आत्मा की उपस्थिति निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है। अल्पज्ञ तथा दुराचारी व्यक्ति अणु-आत्मा के स्फुलिंग के चमत्कारों को नहीं समझ पाता, भले ही उसे बड़े से बड़ा ज्ञानी, जिसने विश्व के प्रथम प्राणी ब्रह्मा को भी शिक्षा दी हो, क्यों न समझाए। वस्तुओं के स्थूल भौतिक बोध के कारण इस युग के अधिकांश व्यक्ति इसकी कल्पना नहीं कर सकते कि इतना सूक्ष्मकण किस प्रकार इतना विराट तथा इतना लघु बन सकता है। अत: लोग आत्मा को उसकी संरचना या उसके विवरण के आधार पर ही आश्चर्य से देखते हैं। इन्द्रियतृप्ति की बातों में फँस कर लोग भौतिक शक्ति (माया) से इस तरह मोहित होते हैं कि उनके पास आत्मज्ञान को समझने का अवसर ही नहीं रहता यद्यपि यह तथ्य है कि आत्म-ज्ञान के बिना सारे कार्यों का दुष्परिणाम जीवन-संघर्ष में पराजय के रूप में होता है। सम्भवत: उन्हें इसका कोई अनुमान नहीं होता कि मनुष्य को आत्मा के विषय में चिन्तन करना चाहिए और दुखों का हल खोज निकालना चाहिए। ऐसे थोड़े से लोग, जो आत्मा के विषय में सुनने के इच्छुक हैं, अच्छी संगति पाकर भाषण सुनते हैं, किन्तु कभी-कभी अज्ञानवश वे परमात्मा तथा अणु-आत्मा को एक समझ बैठते हैं। ऐसा व्यक्ति खोज पाना कठिन है जो परमात्मा, अणु-आत्मा, उनके पृथक-पृथक कार्यों तथा सम्बन्धों एवं अन्य विस्तारों को सही ढंग से समझ सके। इससे अधिक कठिन है ऐसा व्यक्ति खोज पाना जिसने आत्मा के ज्ञान से पूरा-पूरा लाभ उठाया हो और जो सभी पक्षों से आत्मा की स्थिति का सही-सही निर्धारण कर सके। किन्तु यदि कोई किसी तरह से आत्मा के इस विषय को समझ लेता है तो उसका जीवन सफल हो जाता है। इस आत्म-ज्ञान को समझने का सरलतम उपाय यह है कि अन्य मतों से विचलित हुए बिना परम प्रमाण भगवान् कृष्ण द्वारा कथित भगवद्गीता के उपदेशों को ग्रहण कर लिया जाय। किन्तु इसके लिए भी इस जन्म में या पिछले जन्मों में प्रचुर तपस्या की आवश्यकता होती है, तभी कृष्ण को श्रीभगवान् के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। पर कृष्ण को इस रूप में जानना शुद्ध भक्तों की अहैतुकी कृपा से ही होता है, अन्य किसी उपाय से नहीं। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 30. इत्येवं निगूढनिर्वेदो विसृज्य मृगीं मातरं पुनर्भगवत्क्षेत्रमुपशमशीलमुनिगणदयितं शालग्रामं पुलस्त्यपुलहाश्रमं कालञ्जरात्प्रत्याजगाम ॥ ३०॥ यद्यपि भरत महाराज को मृग शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु निरन्तर पश्चात्ताप करते रहने से वे सांसारिक वस्तुओं से पूर्णत: विरक्त हो गये थे । उन्होंने ये बातें किसी को प्रकट नहीं होने दीं । उन्होंने अपनी मृगी माता को अपने जन्मस्थान कालंजर पर्वत पर ही छोड़ दिया और स्वयं शालग्राम के बन में पुलस्त्य तथा पुलह के आश्रम में पुनः चले आये । महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वासुदेव के अनुग्रह से महाराज भरत को अपना पूर्व जीवन स्मरण रहा। उन्होंने एक क्षण भी नष्ट नहीं किया । वे पुलह - आश्रम में, उस गांव में, जिसे शालग्राम कहते हैं, लौट आये । संगति अत्यन्त सार्थक होती है, इसीलिए इस संघ में प्रविष्ट करने वाले प्रत्येक सदस्य को इस्कान पूर्ण बनाना चाहता है । इस संघ के सदस्यों को सदैव स्मरण रखना चाहिए कि संघ एक मुफ्त का भोजनालय नहीं है। इस संघ के सभी सदस्यों को अपने आध्यात्मिक कर्तव्यों का सावधानी के साथ पालन करना चाहिए जिससे नवागत सदस्य स्वतः भक्त बनकर इसी जीवन में ही परम धाम को प्राप्त हो । यद्यपि भरत महाराज को मृग का शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु उन्होंने अपने घर, कालंजर पर्वत का फिर परित्याग कर दिया । मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी जन्मस्थान तथा परिवार से बँधा न रहे; उसे चाहिए कि भक्तों की संगति प्राप्त कर कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करे । श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 31. तस्मिन्नपि कालं प्रतीक्षमाणः सङ्गाच्च भृशमुद्विग्न आत्मसहचरः शुष्कपर्णतृणवीरुधा वर्तमानो मृगत्वनिमित्तावसानमेव गणयन्मृगशरीरं तीर्थोदकक्लिन्नमुत्ससर्ज. ॥ ३१॥ उस आश्रम में रहते हुए महाराज भरत अब कुसंगति का शिकार न होने के प्रति सतर्क रहने लगे। किसी को भी अपना विगत जीवन बताये बिना वे उस आश्रम में मात्र सूखी पत्तियाँ खाकर रहते थे। वास्तव में वे अकेले न थे क्योंकि उनके साथ परमात्मा जो थे । इस प्रकार वे इस मृग शरीर के अन्त की प्रतीक्षा करते रहे । अन्त में उस तीर्थस्थल में स्नान करते हुए उन्होंने वह शरीर छोड़ दिया । वृन्दावन, हरद्वार, प्रयाग तथा जगन्नाथ पुरी जैसे तीर्थस्थान विशेष रूप से भक्ति-साधना के निमित्त हैं, विशेषतः वृन्दावन श्रीकृष्ण के उन वैष्णव भक्तों के लिए जो वैकुंठ लोक को वापस प्राप्त करना चाहते हैं अत्युत्तम तीर्थस्थान है । वृन्दावन में ऐसे अनेक भक्त हैं, जो नित्य यमुना में स्नान करते हैं जिससे उनके सारे भौतिक कल्मष धुल जाते हैं । परमेश्वर के पवित्र नामों तथा लीलाओं का निरन्तर संकीर्तन तथा श्रवण करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है और मुक्ति का पात्र बन जाता है । किन्तु यदि कोई जानबूझ कर इन्द्रियतृप्ति का शिकार होता है, तो उसे कम से कम एक बार महाराज भरत की भाँति दण्ड भोगना ही पड़ता है । इस प्रकार श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध के अन्तर्गत भरत महाराज के चरित्र का वर्णन नामक आठवें अध्याय के भक्तिवेदान्त तात्पर्य पूर्ण हुए। विनय एक चांडाल की पत्नी जब गर्भकाल में थी उसे आम खाने की इच्छा हुई।आम की ऋतु समाप्त हो चुकी थी।उसे जानकारी हुई कि राजा के बाग़ में बारह महीने आम आते रहते है परंतु पहरेदारों के कारण लाने की परेशानी थी।चांडाल को दो विद्यायें आती थी। एक विद्या से डाली झुक जाती थी दूसरी से डाली ऊपर हो जाती थी। उनके प्रयोग से वह बाहर से ही आम तोड़ लेता था। पहरेदार ने राजा से शिकायत की कि आम के चोर का पता नहीं लग रहा है। आम कम होते जा रहे है तो उन्होंने अपने पुत्र अभय कुमार को चोर पकड़ने हेतु नियुक्त किया। चोर पकड़ा गया। उसने आम तोड़ने की बात स्वीकार की तो राजकुमार ने पूछा यह तुम कैसे करते हो? तब उसने अपनी दो विद्याओं के बारे में बतलाया। राजा के सामने पेश किया तो राजा ने कहा यदि यह दोनों विद्यायें मुझे बतला दोगे तो मैं तुम्हें फांसी की सजा नहीं दूंगा। चांडाल ने विद्या सिखाने के लिए सहमति प्रगट कर दी। राजा कुर्सी पर बैठकर चांडाल से जो नीचे बैठा था सीखने  लगा। परंतु उसको विद्या नहीं आई तो मंत्री ने कहा कि विद्या ऐसे नहीं आएगी। गुरु(चांडाल) को कुर्सी पर बैठाओ आप नीचे बैठो तब विद्या आएगी।ऐसा हुआ तो राजा को विद्या प्राप्त हो गई। इसलिए ज्ञानियों ने कहा है कि नम्रता में विचित्र शक्ति होती है। विनय के बिना विद्या प्राप्त नहीं होती है। जय जय श्री राधे 🙏🌹 *रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन खाने से शरीर में क्या होता है? गैस, एसिडिटी से लेकर मिलते हैं ये चौंकाने वाले फायदे * रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन चबाकर गुनगुने पानी के साथ लेना पाचन तंत्र को हल्का और सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। यह गैस, एसिडिटी और पेट के भारीपन जैसी दिक्कतों को कम करने के लिए एक सरल घरेलू नुस्खा माना जाता है। अजवाइन में मौजूद थाइमॉल नामक सक्रिय तत्व पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करता है, जिससे खाना जल्दी टूटता है और आंतों में गैस जमने की संभावना घटती है। इससे पेट फूलना, डकार, और जलन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। हल्की‑फुल्की एसिडिटी या गैस से परेशान लोगों को रात में इसे लेने से सीने की जलन व पेट में जलन में आराम महसूस हो सकता है और पेट हल्का लग सकता है। जब पेट आराम में रहता है, तो नींद भी गहरी और लगातार आने लगती है, इसलिए कई लोग बताते हैं कि अजवाइन लेने के बाद रात में करवटें कम बदलनी पड़ती हैं। हालांकि ज़्यादा मात्रा में रोज़ाना अजवाइन लेने से उलटा जलन, एसिडिटी या चक्कर जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं, इसलिए आधा से एक छोटी चम्मच तक सीमित रखना और लंबे समय तक उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। जय जय श्री राधे 🙏🌹

1 hr ago
user_Suresh Chandra Agrawal
Suresh Chandra Agrawal
चौमू, जयपुर, राजस्थान•
1 hr ago

Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 29 *श्लोक:* आश्चर्यवत्पश्यति कश्चिदेन - माश्चर्यवद्वदति तथैव चान्यः । आश्चर्यवच्च‍ैनमन्यः श‍ृणोति श्रुत्वाप्येनं वेद न चैव कश्चित् ॥ २९ ॥ *अनुवाद:* कोई आत्मा को आश्चर्य से देखता है, कोई इसे आश्चर्य की तरह बताता है तथा कोई इसे आश्चर्य की तरह सुनता है, किन्तु कोई-कोई इसके विषय में सुनकर भी कुछ नहीं समझ पाते। *तात्पर्य:* चूँकि गीतोपनिषद् उपनिषदों के सिद्धान्त पर आधारित है, अत: कठोपनिषद् में (१.२.७) इस श्लोक का होना कोई आश्चर्यजनक नहीं है— श्रवणयापि बहुभिर्यो न लभ्य: शृण्वन्तोऽपि बहवो यं न विद्यु:। आश्चर्यो वक्ता कुशलोऽस्य लब्धा आश्चर्योऽस्य ज्ञाता कुशलानुशिष्ट: ॥ विशाल पशु, विशाल वटवृक्ष तथा एक इंच स्थान में लाखों करोड़ों की संख्या में उपस्थित सूक्ष्मकीटाणुओं के भीतर अणु-आत्मा की उपस्थिति निश्चित रूप से आश्चर्यजनक है। अल्पज्ञ तथा दुराचारी व्यक्ति अणु-आत्मा के स्फुलिंग के चमत्कारों को नहीं समझ पाता, भले ही उसे बड़े से बड़ा ज्ञानी, जिसने विश्व के प्रथम प्राणी ब्रह्मा को भी शिक्षा दी हो, क्यों न समझाए। वस्तुओं के स्थूल भौतिक बोध के कारण इस युग के अधिकांश व्यक्ति इसकी कल्पना नहीं कर सकते कि इतना सूक्ष्मकण किस प्रकार इतना विराट तथा इतना लघु बन सकता है। अत: लोग आत्मा को उसकी संरचना या उसके विवरण के आधार पर ही आश्चर्य से देखते हैं। इन्द्रियतृप्ति की बातों में फँस कर लोग भौतिक शक्ति (माया) से इस तरह मोहित होते हैं कि उनके पास आत्मज्ञान को समझने का अवसर ही नहीं रहता यद्यपि यह तथ्य है कि आत्म-ज्ञान के बिना सारे कार्यों का दुष्परिणाम जीवन-संघर्ष में पराजय के रूप में होता है। सम्भवत: उन्हें इसका कोई अनुमान नहीं होता कि मनुष्य को आत्मा के विषय में चिन्तन करना चाहिए और दुखों का हल खोज निकालना चाहिए। ऐसे थोड़े से लोग, जो आत्मा के विषय में सुनने के इच्छुक हैं, अच्छी संगति पाकर भाषण सुनते हैं, किन्तु कभी-कभी अज्ञानवश वे परमात्मा तथा अणु-आत्मा को एक समझ बैठते हैं। ऐसा व्यक्ति खोज पाना कठिन है जो परमात्मा, अणु-आत्मा, उनके पृथक-पृथक कार्यों तथा सम्बन्धों एवं अन्य विस्तारों को सही ढंग से समझ सके। इससे अधिक कठिन है ऐसा व्यक्ति खोज पाना जिसने आत्मा के ज्ञान से पूरा-पूरा लाभ उठाया हो और जो सभी पक्षों से आत्मा की स्थिति का सही-सही निर्धारण कर सके। किन्तु यदि कोई किसी तरह से आत्मा के इस विषय को समझ लेता है तो उसका जीवन सफल हो जाता है। इस आत्म-ज्ञान को समझने का सरलतम उपाय यह है कि अन्य मतों से विचलित हुए बिना परम प्रमाण भगवान् कृष्ण द्वारा कथित भगवद्गीता के उपदेशों को ग्रहण कर लिया जाय। किन्तु इसके लिए भी इस जन्म में या पिछले जन्मों में प्रचुर तपस्या की आवश्यकता होती है, तभी कृष्ण को श्रीभगवान् के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। पर कृष्ण को इस रूप में जानना शुद्ध भक्तों की अहैतुकी कृपा से ही होता है, अन्य किसी उपाय से नहीं। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 30. इत्येवं निगूढनिर्वेदो विसृज्य मृगीं मातरं पुनर्भगवत्क्षेत्रमुपशमशीलमुनिगणदयितं शालग्रामं पुलस्त्यपुलहाश्रमं कालञ्जरात्प्रत्याजगाम ॥ ३०॥ यद्यपि भरत महाराज को मृग शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु निरन्तर पश्चात्ताप करते रहने से वे सांसारिक वस्तुओं से पूर्णत: विरक्त हो गये थे । उन्होंने ये बातें किसी को प्रकट नहीं होने दीं । उन्होंने अपनी मृगी माता को अपने जन्मस्थान कालंजर पर्वत पर ही छोड़ दिया और स्वयं शालग्राम के बन में पुलस्त्य तथा पुलह के आश्रम में पुनः चले आये । महत्त्वपूर्ण बात यह है कि वासुदेव के अनुग्रह से महाराज भरत को अपना पूर्व जीवन स्मरण रहा। उन्होंने एक क्षण भी नष्ट नहीं किया । वे पुलह - आश्रम में, उस गांव में, जिसे शालग्राम कहते हैं, लौट आये । संगति अत्यन्त सार्थक होती है, इसीलिए इस संघ में प्रविष्ट करने वाले प्रत्येक सदस्य को इस्कान पूर्ण बनाना चाहता है । इस संघ के सदस्यों को सदैव स्मरण रखना चाहिए कि संघ एक मुफ्त का भोजनालय नहीं है। इस संघ के सभी सदस्यों को अपने आध्यात्मिक कर्तव्यों का सावधानी के साथ पालन करना चाहिए जिससे नवागत सदस्य स्वतः भक्त बनकर इसी जीवन में ही परम धाम को प्राप्त हो । यद्यपि भरत महाराज को मृग का शरीर प्राप्त हुआ था, किन्तु उन्होंने अपने घर, कालंजर पर्वत का फिर परित्याग कर दिया । मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी जन्मस्थान तथा परिवार से बँधा न रहे; उसे चाहिए कि भक्तों की संगति प्राप्त कर कृष्णभावनामृत का अनुशीलन करे । श्री मद भागवत स्कन्द 5,अधाय 8,शलोक 31. तस्मिन्नपि कालं प्रतीक्षमाणः सङ्गाच्च भृशमुद्विग्न आत्मसहचरः शुष्कपर्णतृणवीरुधा वर्तमानो मृगत्वनिमित्तावसानमेव गणयन्मृगशरीरं तीर्थोदकक्लिन्नमुत्ससर्ज. ॥ ३१॥ उस आश्रम में रहते हुए महाराज भरत अब कुसंगति का शिकार न होने के प्रति सतर्क रहने लगे। किसी को भी अपना विगत जीवन बताये बिना वे उस आश्रम में मात्र सूखी पत्तियाँ खाकर रहते थे। वास्तव में वे अकेले न थे क्योंकि उनके साथ परमात्मा जो थे । इस प्रकार वे इस मृग शरीर के अन्त की प्रतीक्षा करते रहे । अन्त में उस तीर्थस्थल में स्नान करते हुए उन्होंने वह शरीर छोड़ दिया । वृन्दावन, हरद्वार, प्रयाग तथा जगन्नाथ पुरी जैसे तीर्थस्थान विशेष रूप से भक्ति-साधना के निमित्त हैं, विशेषतः वृन्दावन श्रीकृष्ण के उन वैष्णव भक्तों के लिए जो वैकुंठ लोक को वापस प्राप्त करना चाहते हैं अत्युत्तम तीर्थस्थान है । वृन्दावन में ऐसे अनेक भक्त हैं, जो नित्य यमुना में स्नान करते हैं जिससे उनके सारे भौतिक कल्मष धुल जाते हैं । परमेश्वर के पवित्र नामों तथा लीलाओं का निरन्तर संकीर्तन तथा श्रवण करने से मनुष्य शुद्ध हो जाता है और मुक्ति का पात्र बन जाता है । किन्तु यदि कोई जानबूझ कर इन्द्रियतृप्ति का शिकार होता है, तो उसे कम से कम एक बार महाराज भरत की भाँति दण्ड भोगना ही पड़ता है । इस प्रकार श्रीमद्भागवत के पंचम स्कन्ध के अन्तर्गत भरत महाराज के चरित्र का वर्णन नामक आठवें अध्याय के भक्तिवेदान्त तात्पर्य पूर्ण हुए। विनय एक चांडाल की पत्नी जब गर्भकाल में थी उसे आम खाने की इच्छा हुई।आम की ऋतु समाप्त हो चुकी थी।उसे जानकारी हुई कि राजा के बाग़ में बारह महीने आम आते रहते है परंतु पहरेदारों के कारण लाने की परेशानी थी।चांडाल को दो विद्यायें आती थी। एक विद्या से डाली झुक जाती थी दूसरी से डाली ऊपर हो जाती थी। उनके प्रयोग से वह बाहर से ही आम तोड़ लेता था। पहरेदार ने राजा से शिकायत की कि आम के चोर का पता नहीं लग रहा है। आम कम होते जा रहे है तो उन्होंने अपने पुत्र अभय कुमार को चोर पकड़ने हेतु नियुक्त किया। चोर पकड़ा गया। उसने आम तोड़ने की बात स्वीकार की तो राजकुमार ने पूछा यह तुम कैसे करते हो? तब उसने अपनी दो विद्याओं के बारे में बतलाया। राजा के सामने पेश किया तो राजा ने कहा यदि यह दोनों विद्यायें मुझे बतला दोगे तो मैं तुम्हें फांसी की सजा नहीं दूंगा। चांडाल ने विद्या सिखाने के लिए सहमति प्रगट कर दी। राजा कुर्सी पर बैठकर चांडाल से जो नीचे बैठा था सीखने  लगा। परंतु उसको विद्या नहीं आई तो मंत्री ने कहा कि विद्या ऐसे नहीं आएगी। गुरु(चांडाल) को कुर्सी पर बैठाओ आप नीचे बैठो तब विद्या आएगी।ऐसा हुआ तो राजा को विद्या प्राप्त हो गई। इसलिए ज्ञानियों ने कहा है कि नम्रता में विचित्र शक्ति होती है। विनय के बिना विद्या प्राप्त नहीं होती है। जय जय श्री राधे 🙏🌹 *रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन खाने से शरीर में क्या होता है? गैस, एसिडिटी से लेकर मिलते हैं ये चौंकाने वाले फायदे * रात को सोने से पहले आधा चम्मच अजवाइन चबाकर गुनगुने पानी के साथ लेना पाचन तंत्र को हल्का और सक्रिय रखने में मदद कर सकता है। यह गैस, एसिडिटी और पेट के भारीपन जैसी दिक्कतों को कम करने के लिए एक सरल घरेलू नुस्खा माना जाता है। अजवाइन में मौजूद थाइमॉल नामक सक्रिय तत्व पाचन एंजाइमों को उत्तेजित करता है, जिससे खाना जल्दी टूटता है और आंतों में गैस जमने की संभावना घटती है। इससे पेट फूलना, डकार, और जलन जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है। हल्की‑फुल्की एसिडिटी या गैस से परेशान लोगों को रात में इसे लेने से सीने की जलन व पेट में जलन में आराम महसूस हो सकता है और पेट हल्का लग सकता है। जब पेट आराम में रहता है, तो नींद भी गहरी और लगातार आने लगती है, इसलिए कई लोग बताते हैं कि अजवाइन लेने के बाद रात में करवटें कम बदलनी पड़ती हैं। हालांकि ज़्यादा मात्रा में रोज़ाना अजवाइन लेने से उलटा जलन, एसिडिटी या चक्कर जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं, इसलिए आधा से एक छोटी चम्मच तक सीमित रखना और लंबे समय तक उपयोग से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। जय जय श्री राधे 🙏🌹

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    user_Muniraj Gangapur 😜❤️‍🩹🥰😜❤️‍🩹
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    Taxi Driver जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • Post by Just Jaipur Live
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    user_Just Jaipur Live
    Just Jaipur Live
    Journalist जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • कहा जाता है कि खोजने वाले को हर समस्या का हल मिल ही जाता है। ऐसा ही एक दिलचस्प वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति का अनोखा जुगाड़ देखने को मिल रहा है। वीडियो में दिखाई दे रहा है कि व्यक्ति के पास रोटी बनाने के लिए न तो चकला है और न ही बेलन। लेकिन उसने हार मानने की बजाय जुगाड़ का सहारा लिया। उसने थाली को चकले की तरह इस्तेमाल किया और बोतल को बेलन की तरह उपयोग करते हुए आराम से रोटी बेल ली। यह वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहा है। कई लोग इसे देसी जुगाड़ का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि भारतीयों की जुगाड़ तकनीक का जवाब नहीं, जहां साधन कम हों वहां भी काम रुकता नहीं।
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    कहा जाता है कि खोजने वाले को हर समस्या का हल मिल ही जाता है। ऐसा ही एक दिलचस्प वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति का अनोखा जुगाड़ देखने को मिल रहा है।
वीडियो में दिखाई दे रहा है कि व्यक्ति के पास रोटी बनाने के लिए न तो चकला है और न ही बेलन। लेकिन उसने हार मानने की बजाय जुगाड़ का सहारा लिया। उसने थाली को चकले की तरह इस्तेमाल किया और बोतल को बेलन की तरह उपयोग करते हुए आराम से रोटी बेल ली।
यह वीडियो लोगों को काफी पसंद आ रहा है। कई लोग इसे देसी जुगाड़ का बेहतरीन उदाहरण बता रहे हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि भारतीयों की जुगाड़ तकनीक का जवाब नहीं, जहां साधन कम हों वहां भी काम रुकता नहीं।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    6 hrs ago
  • Ek Chhota Sa gaon ka video hai aur yah Instagram per galat video post karta hai To is video ko Itna share kijiye social media per Aisa video Nahin Chalai main Sabko social media per Aisa video Nahin chadhana chahie yah Banda Gali galauj Karke video chalata hai aur sab Gaon Walon Ko bolata Hai Aisa Hai Vaisa hai
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    Ek Chhota Sa gaon ka video hai aur yah Instagram per galat video post karta hai To is video ko Itna share kijiye social media per Aisa video Nahin Chalai main Sabko social media per Aisa video Nahin chadhana chahie yah Banda Gali galauj Karke video chalata hai aur sab Gaon Walon Ko bolata Hai Aisa Hai Vaisa hai
    user_Pooja hu
    Pooja hu
    जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • Post by Kishan Lal jangid
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    Post by Kishan Lal jangid
    user_Kishan Lal jangid
    Kishan Lal jangid
    Real Estate Developer Jaipur, Rajasthan•
    8 hrs ago
  • मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कालीचरण जी सर्राफ विधानसभा में अपना पक्ष रखते हुए
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    मालवीय नगर विधानसभा क्षेत्र के विधायक कालीचरण जी सर्राफ विधानसभा में अपना पक्ष रखते हुए
    user_PRAVEEN BADAYA
    PRAVEEN BADAYA
    Jaipur, Rajasthan•
    8 hrs ago
  • जयपुर राजस्थान से साहिल खान की रिपोर्ट स्थान जयपुर 10 मार्च 2026 जयपुर – पुराना विद्याधर नगर में महिला की संदिग्ध मृत्यु, पुलिस जांच में जुटी राजधानी Jaipur के पुराना विद्याधर नगर जेडीए छोटे क्वार्टर सेक्टर-8 में स्वर्ण जयंती गेट के पास एक महिला की मृत्यु का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार पुराना विद्याधर नगर निवासी सोनिया (उम्र करीब 45 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही Vidyadhar Nagar Police Station की टीम मौके पर पहुंच गई। बताया जा रहा है कि महिला को कल दोपहर से किसी भी निवासी ने पड़ोसियों से नहीं देखा था विद्यानगर थाना पुलिस टीम के मौके सब इंस्पेक्टर हरे राम मीणा नें मोके पर पहुंचकर गेट को तोड़ा गया गेट अंदर से लॉक था मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी बजरंग सिंह शेखावत और एसीपी शास्त्री नगर सुरेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचेj और घटनास्थल का जायजा लिया। इसके साथ ही एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने साक्ष्य एकत्रित करने की कार्रवाई शुरू की। फिलहाल महिला की मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और Vidyadhar Nagar थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। बाइट एडिशनल एसपी जयपुर उत्तर बजरंग सिंह शेखावत
    3
    जयपुर राजस्थान से साहिल खान की रिपोर्ट
स्थान जयपुर
10 मार्च 2026
जयपुर – पुराना विद्याधर नगर में महिला की संदिग्ध मृत्यु, पुलिस जांच में जुटी
राजधानी Jaipur के पुराना विद्याधर नगर जेडीए छोटे क्वार्टर सेक्टर-8 में स्वर्ण जयंती गेट के पास एक महिला की मृत्यु का मामला सामने आया है।
जानकारी के अनुसार पुराना विद्याधर नगर निवासी सोनिया (उम्र करीब 45 वर्ष) की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। घटना की सूचना मिलते ही Vidyadhar Nagar Police Station की टीम मौके पर पहुंच गई। बताया जा रहा है कि महिला को कल दोपहर से किसी भी निवासी ने पड़ोसियों से नहीं देखा था विद्यानगर थाना  पुलिस टीम के मौके सब इंस्पेक्टर हरे राम मीणा नें मोके पर पहुंचकर गेट को तोड़ा गया गेट अंदर से लॉक था 
मामले की गंभीरता को देखते हुए एडिशनल एसपी बजरंग सिंह शेखावत और एसीपी शास्त्री नगर सुरेंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचेj और घटनास्थल का जायजा लिया। इसके साथ ही एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने साक्ष्य एकत्रित करने की कार्रवाई शुरू की।
फिलहाल महिला की मौत के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और Vidyadhar Nagar थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
बाइट 
एडिशनल एसपी जयपुर उत्तर
बजरंग सिंह शेखावत
    user_पत्रकार साहिल खान
    पत्रकार साहिल खान
    News Anchor जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • जयपुर, 10 मार्च। राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचकर वहां भर्ती हरिभाऊ बागड़े की कुशलक्षेम पूछी। इस दौरान मंत्री खींवसर ने राज्यपाल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी सहित अन्य चिकित्सकों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की। मंत्री ने चिकित्सकों को राज्यपाल के बेहतर उपचार और समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अस्पताल प्रशासन ने राज्यपाल के स्वास्थ्य को लेकर नियमित निगरानी बनाए रखने की बात कही है।
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    जयपुर, 10 मार्च।
राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मंगलवार को सवाई मानसिंह अस्पताल पहुंचकर वहां भर्ती हरिभाऊ बागड़े की कुशलक्षेम पूछी।
इस दौरान मंत्री खींवसर ने राज्यपाल के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की और डॉक्टरों से उनके स्वास्थ्य की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. दीपक माहेश्वरी और अस्पताल अधीक्षक डॉ. मृणाल जोशी सहित अन्य चिकित्सकों से उपचार की स्थिति पर चर्चा की।
मंत्री ने चिकित्सकों को राज्यपाल के बेहतर उपचार और समुचित देखभाल सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। अस्पताल प्रशासन ने राज्यपाल के स्वास्थ्य को लेकर नियमित निगरानी बनाए रखने की बात कही है।
    user_Isha sharma
    Isha sharma
    Jaipur, Rajasthan•
    6 hrs ago
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