बलरामपुर जिले में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक गांव को जल समृद्ध बनाना, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भू-जल स्तर में सुधार लाना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी कड़ी में, जनपद पंचायत शंकरगढ़, राजपुर और कुसमी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षण देकर जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी के निर्देश पर जिले में जल संरक्षण संबंधी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर क्रियान्वित किया जा रहा है। प्रशिक्षणों के दौरान प्रतिभागियों को '5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक' के निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई, जिसे वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए एक अत्यंत प्रभावी चार स्तरीय संरचना बताया गया है, जिसकी जल संचयन क्षमता लगभग 1458 लीटर है। जनपद पंचायत स्तर पर इस संरचना का ले-आउट और नमूना प्रदर्शन भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक ज्ञान मिला। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण की 'रिज टू वैली' अवधारणा के तहत स्ट्रेगर्ड कंटूर ट्रेंच, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच, गली प्लग, बोल्डर चेक, सोख्ता गड्ढा और अन्य संरचनाओं के निर्माण, स्थान चयन व उपयोगिता के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया, ताकि गांवों में वैज्ञानिक तरीकों से वर्षा जल को रोककर भू-जल पुनर्भरण किया जा सके। प्रशिक्षण में यह भी समझाया गया कि '5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक', सोख्ता गड्ढा और अन्य संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल की बर्बादी कम होती है, पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होकर भू-जल स्तर को बढ़ाता है। इससे कुओं, हैंडपंपों और बोरवेलों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होता है और कृषि गतिविधियों को भी लाभ मिलता है। इन संरचनाओं से बंजर एवं कम उपजाऊ भूमि को कृषि योग्य बनाने में भी मदद मिलती है। इन प्रशिक्षणों में सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, एनआरएलएम के एरिया कोऑर्डिनेटर, पीआरपी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, कैडर सदस्य और तकनीकी सहायक शामिल हुए। जिला प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार प्रशिक्षण, जनजागरूकता और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण संबंधी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर प्रत्येक गांव को जल समृद्ध बनाना है, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर की इस पहल से जल संरक्षण वास्तव में एक जनआंदोलन बन गया है और पानी बचाने की यह मुहिम गांव-गांव तक पहुँच रही है।
बलरामपुर जिले में कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के मार्गदर्शन और जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर के नेतृत्व में 'मोर गांव-मोर पानी' महाअभियान प्रभावी ढंग से चलाया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक गांव को जल समृद्ध बनाना, वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देना, भू-जल स्तर में सुधार लाना तथा आने वाली पीढ़ियों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसी कड़ी में, जनपद पंचायत शंकरगढ़, राजपुर और कुसमी में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, साथ ही ग्राम पंचायत स्तर पर भी प्रशिक्षण देकर जनभागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी के निर्देश पर जिले में जल संरक्षण संबंधी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर क्रियान्वित किया जा रहा है। प्रशिक्षणों के दौरान प्रतिभागियों को '5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक' के निर्माण की विस्तृत जानकारी दी गई, जिसे वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए एक अत्यंत प्रभावी चार स्तरीय संरचना बताया गया है, जिसकी जल संचयन क्षमता लगभग 1458 लीटर है। जनपद पंचायत स्तर पर इस संरचना का ले-आउट और नमूना प्रदर्शन भी किया गया, जिससे प्रतिभागियों को व्यवहारिक ज्ञान मिला। इसके अतिरिक्त, जल संरक्षण की 'रिज टू वैली' अवधारणा के तहत स्ट्रेगर्ड कंटूर ट्रेंच, कंटीन्यूअस कंटूर ट्रेंच, गली प्लग, बोल्डर चेक, सोख्ता गड्ढा और अन्य संरचनाओं
के निर्माण, स्थान चयन व उपयोगिता के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया, ताकि गांवों में वैज्ञानिक तरीकों से वर्षा जल को रोककर भू-जल पुनर्भरण किया जा सके। प्रशिक्षण में यह भी समझाया गया कि '5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज टैंक', सोख्ता गड्ढा और अन्य संरचनाओं के निर्माण से वर्षा जल की बर्बादी कम होती है, पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होकर भू-जल स्तर को बढ़ाता है। इससे कुओं, हैंडपंपों और बोरवेलों में पानी की उपलब्धता बढ़ती है, पर्यावरणीय संतुलन मजबूत होता है और कृषि गतिविधियों को भी लाभ मिलता है। इन संरचनाओं से बंजर एवं कम उपजाऊ भूमि को कृषि योग्य बनाने में भी मदद मिलती है। इन प्रशिक्षणों में सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक, एनआरएलएम के एरिया कोऑर्डिनेटर, पीआरपी, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं, कैडर सदस्य और तकनीकी सहायक शामिल हुए। जिला प्रशासन द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार प्रशिक्षण, जनजागरूकता और जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण संबंधी गतिविधियां चलाई जा रही हैं। प्रशासन का लक्ष्य जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाकर प्रत्येक गांव को जल समृद्ध बनाना है, ताकि भविष्य में जल संकट की चुनौतियों का प्रभावी समाधान सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर की इस पहल से जल संरक्षण वास्तव में एक जनआंदोलन बन गया है और पानी बचाने की यह मुहिम गांव-गांव तक पहुँच रही है।
- एक गरीब और असहाय परिवार को संत रामपाल जी महाराज का सहारा मिला है। इस घटना से जुड़ी पूरी वीडियो देखने के लिए दर्शक 'AnnaPurna Muhim' नामक YouTube चैनल पर जा सकते हैं।1
- कंकर जिले के पिड़चोड़ ग्राम में कम्युनिटी पुलिसिंग के अंतर्गत एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय और पुलिस के बीच बेहतर तालमेल और समझ स्थापित करना था।1
- छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक गुमशुदा युवक से जुड़ी सनसनीखेज हत्याकांड को महज 72 घंटों के भीतर सुलझाने का दावा किया है। यह मामला 28 मई को तब शुरू हुआ, जब बैहरसारी गांव के कोमल वर्मा अचानक लापता हो गए। उनकी गुमशुदगी के ठीक अगले दिन, पांडातराई के सोंढा गांव में एक बोरी के भीतर कोमल का शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने सक्रियता से जांच शुरू की। पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए कॉल डिटेल्स खंगाली, जिसके आधार पर शक की सुई एक महिला मंदाकिनी वर्मा की ओर घूमी। हिरासत में लिए जाने पर मंदाकिनी वर्मा ने चौंकाने वाला सच उजागर किया। महिला का आरोप है कि कोमल उसे अश्लील वीडियो दिखाकर लगातार ब्लैकमेल कर रहा था। घटना की रात जब ब्लैकमेलिंग का दबाव बहुत बढ़ गया, तो महिला ने कोमल को अपने घर बुलाया और लोहे के पाने से उस पर हमला कर दिया। इसके बाद, महिला ने अपने पति के साथ मिलकर कोमल को मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद, शव को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने महिला के भाई की मदद ली। भाई ने ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर शव को दूर सुनसान जगह पर फेंक दिया था। हालांकि, कबीरधाम पुलिस की गहन जांच के आगे यह शातिर चाल नाकाम रही। इस मामले में अब पति, पत्नी और भाई तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, जिससे ब्लैकमेलिंग का यह खौफनाक अंत सामने आया है।1
- पानी की गंभीर समस्या का सामना कर रही इंदौर की जनता अब सड़कों पर उतर आई है, जहाँ वे 'पानी दो, पानी दो' के नारे लगाते हुए शासन-प्रशासन से तत्काल पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। लोगों को पानी नहीं मिलने के कारण वे इसके लिए तरस रहे हैं, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। शहरवासी इस बात को लेकर बेहद परेशान हैं कि उन्हें आखिर पानी क्यों नहीं मिल रहा है और वे इसके 'असल कारण' जानना चाहते हैं। पानी की कमी के कारण जनता में भारी असंतोष है और वे चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे।1
- राज टॉकीज रायपुर अब दर्शकों के लिए ऑनलाइन टिकट बुकिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है। दर्शक बुक माय शो (Book My Show) के माध्यम से अपनी टिकटें ऑनलाइन बुक कर सकते हैं। अधिक जानकारी या सहायता के लिए 0771-2229223 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके साथ ही, राज टॉकीज ने एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बनाया है, जिसमें जुड़ने के लिए लिंक दिया गया है। दर्शकों से अनुरोध किया गया है कि वे खुद ग्रुप से जुड़ें और यह लिंक अन्य लोगों के साथ भी साझा करें।1
- पखांजूर पुलिस ने 'ऑपरेशन उजियारा' नामक अभियान के तहत बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने दो गांजा तस्करों को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की।1
- गरियाबंद के न्यू सर्किट हाउस में रविवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। इस भीषण आग में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग स्टोर रूम से शुरू हुई और शॉर्ट सर्किट के कारण किचन तक फैल गई। आग की चपेट में आने से फ्रिज, अलमारी, सीलिंग फैन सहित बड़ी मात्रा में रखा सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने में जुट गई। घटना की जानकारी मिलते ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।4