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शाहदरा AATS ने 'अज्जू' नाम के एक शातिर झपटमार को गिरफ्तार किया है, जो चोरी की पल्सर बाइक पर झपटमारी की वारदातें करता था। डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा के निर्देश पर 'ऑपरेशन अज्जू' शुरू किया गया था। एसआई अनूज की टीम ने 'अज्जू' को सीमापुरी में रंगे हाथों धर दबोचा। यह अपराधी केवल 5वीं पास था, लेकिन जुर्म के क्षेत्र में उसने 'पीएचडी' कर रखी थी। वह 73 मामलों का 'क्रिमिनल रिज्यूमे' लेकर घूमता था, जो उसकी लंबी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। पुलिस ने 'अज्जू' की गिरफ्तारी के साथ ही चार चोरी की बाइक और स्कूटी बरामद की हैं, जिससे चार थानों के मामले सुलझ गए हैं। 'अज्जू' अब लॉकअप में है, जबकि उसका साथी 'जीतू' अभी भी फरार है। पुलिस की स्क्रिप्ट के अनुसार, हर अपराधी का अंजाम तय होता है और 'जीतू' का 'द एंड' भी इंटरवल से पहले ही हो जाएगा।

4 hrs ago
user_Inder Jeet
Inder Jeet
पत्रकार मयूर विहार, पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
4 hrs ago
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शाहदरा AATS ने 'अज्जू' नाम के एक शातिर झपटमार को गिरफ्तार किया है, जो चोरी की पल्सर बाइक पर झपटमारी की वारदातें करता था। डीसीपी राजेंद्र प्रसाद मीणा के निर्देश पर 'ऑपरेशन अज्जू' शुरू किया गया था। एसआई अनूज की टीम ने 'अज्जू' को सीमापुरी में रंगे हाथों धर दबोचा। यह अपराधी केवल 5वीं पास था, लेकिन जुर्म के क्षेत्र में उसने 'पीएचडी' कर रखी थी। वह 73 मामलों का 'क्रिमिनल रिज्यूमे' लेकर घूमता था, जो उसकी लंबी आपराधिक पृष्ठभूमि को दर्शाता है। पुलिस ने 'अज्जू' की गिरफ्तारी के साथ ही चार चोरी की बाइक और स्कूटी बरामद की हैं, जिससे चार थानों के मामले सुलझ गए हैं। 'अज्जू' अब लॉकअप में है, जबकि उसका साथी 'जीतू' अभी भी फरार है। पुलिस की स्क्रिप्ट के अनुसार, हर अपराधी का अंजाम तय होता है और 'जीतू' का 'द एंड' भी इंटरवल से पहले ही हो जाएगा।

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  • स्वामी अविमुक्तेश्वर नंद के दरबार में एक मुस्लिम महिला पहुंची है। इस घटना के बारे में इससे अधिक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
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    स्वामी अविमुक्तेश्वर नंद के दरबार में एक मुस्लिम महिला पहुंची है। इस घटना के बारे में इससे अधिक कोई जानकारी नहीं दी गई है।
    user_Pro hindustan tv
    Pro hindustan tv
    कोतवाली, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    13 hrs ago
  • यह पोस्ट KP TECHNOLOGY HD वॉलपेपर से संबंधित जानकारी को 'शुद्ध देसी हिंदी' भाषा शैली में प्रस्तुत करने का आग्रह करती है।
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    यह पोस्ट KP TECHNOLOGY HD वॉलपेपर से संबंधित जानकारी को 'शुद्ध देसी हिंदी' भाषा शैली में प्रस्तुत करने का आग्रह करती है।
    user_KP TECHNOLOGY HD
    KP TECHNOLOGY HD
    Tailor शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    23 hrs ago
  • उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना दयालपुर क्षेत्र के मुस्तफाबाद नेहरू विहार में अंधाधुंध गोलीबारी की एक घटना सामने आई है। इस वारदात में एक व्यक्ति की मौत हो गई है।
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    उत्तर पूर्वी दिल्ली के थाना दयालपुर क्षेत्र के मुस्तफाबाद नेहरू विहार में अंधाधुंध गोलीबारी की एक घटना सामने आई है। इस वारदात में एक व्यक्ति की मौत हो गई है।
    user_भारत हिंदी खबर
    भारत हिंदी खबर
    Local News Reporter सीलमपुर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    2 hrs ago
  • सांसद भोला सिंह ने अनूपशहर में प्रबुद्ध वर्ग के साथ एक संवाद बैठक आयोजित की। इस अवसर पर सामाजिक नेताओं ने सांसद भोला सिंह का भव्य स्वागत किया।
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    सांसद भोला सिंह ने अनूपशहर में प्रबुद्ध वर्ग के साथ एक संवाद बैठक आयोजित की। इस अवसर पर सामाजिक नेताओं ने सांसद भोला सिंह का भव्य स्वागत किया।
    user_News 22 India
    News 22 India
    TV News Anchor करावल नगर, उत्तर पूर्वी दिल्ली, दिल्ली•
    3 hrs ago
  • पुरी में श्रीमंदिर में प्रवेश और दर्शन के अधिकार को पूर्ववत बहाल करने की मांग को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता पदयात्रा को आज (15 जून को) 76 दिन पूरे हो गए हैं। यह अब केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि भक्तों के दिलों की अनकही पीड़ा, आत्मा की पुकार और भगवान श्री जगन्नाथ के प्रति अटूट प्रेम का जीवंत प्रतीक बन गया है। गत 1 अप्रैल को उत्कल दिवस के अवसर पर बलगांडी चौक स्थित भक्त सालबेग पीठ से शुरू हुई यह पदयात्रा प्रतिदिन सिंहद्वार के पास पहुंचकर एक मौन प्रश्न पूछती है कि "जो संपूर्ण विश्व के नाथ हैं, उन जगन्नाथ के दर्शन में क्या भक्तों के बीच कोई भेदभाव रह सकता है?" प्रत्येक कदम में भक्ति का अर्पण है और हर ध्वनि में आत्मा की व्याकुल पुकार। "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंजते मार्ग पर अनेक भक्तों के आँसू, कई परिवारों की वेदना और अपने प्रभु तक आसानी से पहुँचने की आकांक्षा मिल जाती है। यह पदयात्रा आज पुरीवासियों के हृदय की धड़कन, आस्था का उच्चारण और अधिकारों के लिए एक आध्यात्मिक संग्राम बन गई है। भगवान जगन्नाथ की संस्कृति समानता, सह-अस्तित्व और सार्वभौमिकता की संस्कृति है। जैसे उनके महाप्रसाद में उच्च-नीच का कोई भेदभाव नहीं, वैसे ही उनके दर्शन में भी कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। भगवान के द्वार पर वीआईपी और सामान्य का भेद करना जगन्नाथ संस्कृति के मूल आदर्श के खिलाफ है। इसलिए यह पदयात्रा केवल प्रवेश अधिकार की मांग नहीं, बल्कि "जगन्नाथ संस्कृति की समानता और मानवीय मूल्यों की सुरक्षा के लिए एक आध्यात्मिक विरोध" है। नारी-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी की स्वतःस्फूर्त भागीदारी ने इस पदयात्रा को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है। प्रत्येक चेहरे पर भक्ति की चमक है, प्रत्येक हृदय में एक मौन प्रार्थना है— "प्रभु, हमें हमारा अधिकार वापस दिलाओ; अपने द्वार पर सभी को समान स्थान दो।" 76 दिनों के बाद भी इस पदयात्रा का उत्साह कम नहीं हुआ है। हर दिन के साथ यह और अधिक गहरा, अधिक शक्तिशाली और अधिक आध्यात्मिक होता जा रहा है। यह एक ऐसी यात्रा है जहाँ आँसू प्रार्थना हैं, वेदना शक्ति है और भक्ति अहिंसक विरोध का माध्यम है। आज की पदयात्रा में सर्वश्री हरिशंकर मिश्र, अधिवक्ता विजय कुमार मिश्र, चक्रधर महापात्र, सुकांत पांडा, शिवसुंदर मिश्र, मनोरंजन रणसिंह, ममता स्वाईं, अरुणा पटनायक, राजा मोहंती, जादबा नंद राय, प्रफुल्ल कुमार साहू, जगन्नाथ मोहंती, अमूल्य दास, किशोर चंद्र दास, नृसिंह नाथ नायक, प्रदीप्त कुमार मोहंती, प्रकाश चंद्र नायक प्रमुख रूप से शामिल हुए और अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। पदयात्रा के संयोजक श्री स्वाधीन कुमार पांडा ने कहा कि यह यात्रा तब तक जारी रहेगी जब तक पुरी शहर और सदर के निवासियों के पूर्ववत दर्शन के अधिकार बहाल नहीं हो जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ संघर्ष नहीं है, बल्कि न्याय, समानता और आस्था के सम्मान के लिए एक शांत, अहिंसक और आध्यात्मिक अभियान है। जैसा कि दोहराया गया है: "जगन्नाथ का द्वार सबके लिए है। भक्ति का कोई वीआईपी नहीं, आस्था का कोई प्रोटोकॉल नहीं। प्रभु के सम्मुख सभी समान हैं।"
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    पुरी में श्रीमंदिर में प्रवेश और दर्शन के अधिकार को पूर्ववत बहाल करने की मांग को लेकर चलाए जा रहे जागरूकता पदयात्रा को आज (15 जून को) 76 दिन पूरे हो गए हैं। यह अब केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि भक्तों के दिलों की अनकही पीड़ा, आत्मा की पुकार और भगवान श्री जगन्नाथ के प्रति अटूट प्रेम का जीवंत प्रतीक बन गया है। गत 1 अप्रैल को उत्कल दिवस के अवसर पर बलगांडी चौक स्थित भक्त सालबेग पीठ से शुरू हुई यह पदयात्रा प्रतिदिन सिंहद्वार के पास पहुंचकर एक मौन प्रश्न पूछती है कि "जो संपूर्ण विश्व के नाथ हैं, उन जगन्नाथ के दर्शन में क्या भक्तों के बीच कोई भेदभाव रह सकता है?"

प्रत्येक कदम में भक्ति का अर्पण है और हर ध्वनि में आत्मा की व्याकुल पुकार। "जय जगन्नाथ" के जयघोष से गूंजते मार्ग पर अनेक भक्तों के आँसू, कई परिवारों की वेदना और अपने प्रभु तक आसानी से पहुँचने की आकांक्षा मिल जाती है। यह पदयात्रा आज पुरीवासियों के हृदय की धड़कन, आस्था का उच्चारण और अधिकारों के लिए एक आध्यात्मिक संग्राम बन गई है। भगवान जगन्नाथ की संस्कृति समानता, सह-अस्तित्व और सार्वभौमिकता की संस्कृति है। जैसे उनके महाप्रसाद में उच्च-नीच का कोई भेदभाव नहीं, वैसे ही उनके दर्शन में भी कोई विशेषाधिकार नहीं होना चाहिए। भगवान के द्वार पर वीआईपी और सामान्य का भेद करना जगन्नाथ संस्कृति के मूल आदर्श के खिलाफ है। इसलिए यह पदयात्रा केवल प्रवेश अधिकार की मांग नहीं, बल्कि "जगन्नाथ संस्कृति की समानता और मानवीय मूल्यों की सुरक्षा के लिए एक आध्यात्मिक विरोध" है।

नारी-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी की स्वतःस्फूर्त भागीदारी ने इस पदयात्रा को एक जन आंदोलन का रूप दे दिया है। प्रत्येक चेहरे पर भक्ति की चमक है, प्रत्येक हृदय में एक मौन प्रार्थना है— "प्रभु, हमें हमारा अधिकार वापस दिलाओ; अपने द्वार पर सभी को समान स्थान दो।" 76 दिनों के बाद भी इस पदयात्रा का उत्साह कम नहीं हुआ है। हर दिन के साथ यह और अधिक गहरा, अधिक शक्तिशाली और अधिक आध्यात्मिक होता जा रहा है। यह एक ऐसी यात्रा है जहाँ आँसू प्रार्थना हैं, वेदना शक्ति है और भक्ति अहिंसक विरोध का माध्यम है। आज की पदयात्रा में सर्वश्री हरिशंकर मिश्र, अधिवक्ता विजय कुमार मिश्र, चक्रधर महापात्र, सुकांत पांडा, शिवसुंदर मिश्र, मनोरंजन रणसिंह, ममता स्वाईं, अरुणा पटनायक, राजा मोहंती, जादबा नंद राय, प्रफुल्ल कुमार साहू, जगन्नाथ मोहंती, अमूल्य दास, किशोर चंद्र दास, नृसिंह नाथ नायक, प्रदीप्त कुमार मोहंती, प्रकाश चंद्र नायक प्रमुख रूप से शामिल हुए और अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

पदयात्रा के संयोजक श्री स्वाधीन कुमार पांडा ने कहा कि यह यात्रा तब तक जारी रहेगी जब तक पुरी शहर और सदर के निवासियों के पूर्ववत दर्शन के अधिकार बहाल नहीं हो जाते। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ संघर्ष नहीं है, बल्कि न्याय, समानता और आस्था के सम्मान के लिए एक शांत, अहिंसक और आध्यात्मिक अभियान है। जैसा कि दोहराया गया है: "जगन्नाथ का द्वार सबके लिए है। भक्ति का कोई वीआईपी नहीं, आस्था का कोई प्रोटोकॉल नहीं। प्रभु के सम्मुख सभी समान हैं।"
    user_Santosh Nayak PRESS
    Santosh Nayak PRESS
    Local News Reporter Civil Lines, Central Delhi•
    3 hrs ago
  • सत्यम संजीवनी ट्रस्ट द्वारा हाल ही में 'मां एवं शिक्षा जागरूकता अभियान' का आयोजन किया गया। ट्रस्ट की अध्यक्ष कंचन सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और समाज में मां के सम्मान, पारिवारिक मूल्यों तथा शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए। अपने संबोधन में, अध्यक्ष कंचन सिंह ने समाज में बढ़ती वृद्धाश्रम की समस्या पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एक बेटी बहू बनने के बाद भी अपने सास-ससुर को माता-पिता जैसा सम्मान दे और बहू को बेटी का दर्जा मिले, तो कोई भी बुजुर्ग वृद्धाश्रम जाने को मजबूर नहीं होगा। उन्होंने परिवारों में प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। कंचन सिंह ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने में संगीता श्रीवास्तव, आशा सिंह, सरोज सिंह, शोभा देवी, ओम प्रकाश अग्रवाल, स्मिता देवी, संजू शर्मा, संजू सिंह और शंभू सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ट्रस्ट ने सभी सहयोगियों और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।
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    सत्यम संजीवनी ट्रस्ट द्वारा हाल ही में 'मां एवं शिक्षा जागरूकता अभियान' का आयोजन किया गया। ट्रस्ट की अध्यक्ष कंचन सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया और समाज में मां के सम्मान, पारिवारिक मूल्यों तथा शिक्षा के महत्व पर अपने विचार साझा किए।

अपने संबोधन में, अध्यक्ष कंचन सिंह ने समाज में बढ़ती वृद्धाश्रम की समस्या पर गंभीरता से विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि एक बेटी बहू बनने के बाद भी अपने सास-ससुर को माता-पिता जैसा सम्मान दे और बहू को बेटी का दर्जा मिले, तो कोई भी बुजुर्ग वृद्धाश्रम जाने को मजबूर नहीं होगा। उन्होंने परिवारों में प्रेम, सम्मान और आपसी सहयोग की भावना को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया।

कंचन सिंह ने बताया कि इस अभियान को सफल बनाने में संगीता श्रीवास्तव, आशा सिंह, सरोज सिंह, शोभा देवी, ओम प्रकाश अग्रवाल, स्मिता देवी, संजू शर्मा, संजू सिंह और शंभू सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा। ट्रस्ट ने सभी सहयोगियों और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी तरह के जन-जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने का संकल्प लिया।
    user_अनिल कुमार गुप्ता
    अनिल कुमार गुप्ता
    Court reporter शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    5 hrs ago
  • बाबा बागेश्वर धाम सरकार इस समय प्रतापगढ़ के कोंडा में कथा वाचन कर रहे हैं।
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    बाबा बागेश्वर धाम सरकार इस समय प्रतापगढ़ के कोंडा में कथा वाचन कर रहे हैं।
    user_Pro hindustan tv
    Pro hindustan tv
    कोतवाली, मध्य दिल्ली, दिल्ली•
    14 hrs ago
  • KP TECHNOLOGY HD wallpaper Hindi mein batao shuddh Desi KP TECHNOLOGY HD wallpaper Hindi mein batao shuddh Desi
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    KP TECHNOLOGY HD wallpaper Hindi mein batao shuddh Desi 
KP TECHNOLOGY HD wallpaper Hindi mein batao shuddh Desi
    user_KP TECHNOLOGY HD
    KP TECHNOLOGY HD
    Tailor शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    23 hrs ago
  • जयपुर में 15 जून 2026 को शहीद स्मारक पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ युवकों ने थप्पड़ मार दिया। अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। घटना तब हुई जब अभिजीत दीपके धरना स्थल पर पहुंचे और समर्थक उन्हें अपने कंधों पर उठाकर ले जा रहे थे; भीड़ में मौजूद दो युवकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, उनका गमछा खींचा और उन्हें थप्पड़ जड़ दिए। इस हमले के तुरंत बाद वहां मौजूद CJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हमला करने वाले युवकों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। मौके पर तैनात जयपुर पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और थप्पड़ मारने वाले आरोपी युवकों को हिरासत में लेकर विधायकपुरी थाने ले गई। इस हमले के बावजूद, अभिजीत दीपके ने मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि "हमले डर की निशानी हैं, चाहे जितने हमले कर लो हम चुप नहीं होंगे"। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांत रहने की अपील की और घोषणा की कि CJP आगामी 20 जून को इस मांग को लेकर दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन करेगी।
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    जयपुर में 15 जून 2026 को शहीद स्मारक पर एक विरोध प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को कुछ युवकों ने थप्पड़ मार दिया। अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी NEET पेपर लीक, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। घटना तब हुई जब अभिजीत दीपके धरना स्थल पर पहुंचे और समर्थक उन्हें अपने कंधों पर उठाकर ले जा रहे थे; भीड़ में मौजूद दो युवकों ने उनके साथ धक्का-मुक्की की, उनका गमछा खींचा और उन्हें थप्पड़ जड़ दिए।

इस हमले के तुरंत बाद वहां मौजूद CJP कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने हमला करने वाले युवकों को पकड़ लिया और उनकी पिटाई कर दी। मौके पर तैनात जयपुर पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप करते हुए स्थिति को संभाला और थप्पड़ मारने वाले आरोपी युवकों को हिरासत में लेकर विधायकपुरी थाने ले गई।

इस हमले के बावजूद, अभिजीत दीपके ने मंच से प्रदर्शनकारियों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि "हमले डर की निशानी हैं, चाहे जितने हमले कर लो हम चुप नहीं होंगे"। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांत रहने की अपील की और घोषणा की कि CJP आगामी 20 जून को इस मांग को लेकर दिल्ली में एक बड़ा आंदोलन करेगी।
    user_अनिल कुमार गुप्ता
    अनिल कुमार गुप्ता
    Court reporter शाहदरा, शाहदरा, दिल्ली•
    4 hrs ago
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