आगामी श्रावण माह और कांवड़ यात्रा को देखते हुए बाराबंकी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू कर दिया है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा सहायक आयुक्त (खाद्य)-II के निर्देश पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन विशेष जांच टीमें गठित की गई हैं। यह टीमें लखनऊ-अयोध्या हाईवे, अयोध्या-लखनऊ मार्ग तथा बाराबंकी-गोंडा-बहराइच राजमार्ग पर स्थित ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंटों का निरीक्षण कर रही हैं। इसके साथ ही रामनगर के लोधेश्वर महादेव मंदिर और हैदरगढ़ के अवशानेश्वर मंदिर के आसपास स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों की भी विशेष निगरानी की जा रही है। अभियान के तहत श्रद्धालुओं की जानकारी और भोजन की गुणवत्ता पर फीडबैक के लिए प्रतिष्ठानों पर फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप के साइनेज लगाए जा रहे हैं। खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करने, मूल्य सूची लगाने, साफ-सफाई बनाए रखने, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने तथा कांवड़ यात्रा मार्ग पर खुले में मांस और अंडे की बिक्री पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने पर तत्काल जांच और कार्रवाई की बात कही गई है। जांच के दौरान बर्गर सिंह, द तमिल कैफे एंड फूड फैक्ट्री, कृष्णा ढाबा, डिसेंट एंड डिलाइट, शीतल छाया, कालिका हाईवे एंड रेस्टोरेंट, गुप्ता ढाबा और अवस्थी ढाबा सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। कई स्थानों पर गंदगी पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सुधार नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि रामसनेहीघाट स्थित कालिका एक्सप्रेस से शाही पनीर का नमूना जांच के लिए संग्रहित किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों में अखाद्य रंगों का प्रयोग मिलने पर लाइसेंस निलंबित करने और प्रतिष्ठान बंद कराने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही खाद्य सामग्री को धूल और कीट-पतंगों से बचाने के लिए ढककर रखना अनिवार्य किया गया है।
आगामी श्रावण माह और कांवड़ यात्रा को देखते हुए बाराबंकी में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू कर दिया है। आयुक्त, खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन तथा सहायक आयुक्त (खाद्य)-II के निर्देश पर श्रद्धालुओं को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से तीन विशेष जांच टीमें गठित की गई हैं। यह टीमें लखनऊ-अयोध्या हाईवे, अयोध्या-लखनऊ मार्ग तथा बाराबंकी-गोंडा-बहराइच राजमार्ग पर स्थित ढाबों, होटलों और रेस्टोरेंटों का निरीक्षण कर रही हैं। इसके साथ ही रामनगर के लोधेश्वर महादेव मंदिर और हैदरगढ़ के अवशानेश्वर मंदिर के आसपास स्थित खाद्य प्रतिष्ठानों की भी विशेष निगरानी की जा रही है। अभियान के तहत श्रद्धालुओं की जानकारी और भोजन की गुणवत्ता पर फीडबैक के लिए प्रतिष्ठानों पर फूड सेफ्टी कनेक्ट ऐप के साइनेज लगाए जा रहे हैं। खाद्य कारोबारियों को अपना लाइसेंस प्रमुख स्थान पर प्रदर्शित करने, मूल्य सूची लगाने, साफ-सफाई बनाए रखने, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने तथा कांवड़ यात्रा मार्ग पर खुले में मांस और अंडे की बिक्री पूरी तरह बंद रखने के निर्देश दिए गए हैं। गुणवत्ता संबंधी शिकायत मिलने पर तत्काल जांच और कार्रवाई की बात कही गई है। जांच के दौरान बर्गर सिंह, द तमिल कैफे एंड फूड फैक्ट्री, कृष्णा ढाबा, डिसेंट एंड डिलाइट, शीतल छाया, कालिका हाईवे एंड रेस्टोरेंट, गुप्ता ढाबा और अवस्थी ढाबा सहित कई प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। कई स्थानों पर गंदगी पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत सुधार नोटिस जारी किए गए हैं, जबकि रामसनेहीघाट स्थित कालिका एक्सप्रेस से शाही पनीर का नमूना जांच के लिए संग्रहित किया गया है। विभाग ने चेतावनी दी है कि खाद्य पदार्थों में अखाद्य रंगों का प्रयोग मिलने पर लाइसेंस निलंबित करने और प्रतिष्ठान बंद कराने जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी, साथ ही खाद्य सामग्री को धूल और कीट-पतंगों से बचाने के लिए ढककर रखना अनिवार्य किया गया है।
- लखनऊ में मोहन रोड से शकुंतला यूनिवर्सिटी के सामने सलेमपुर पचौरा की ओर जाने वाले रास्ते की स्थिति बेहद खराब बनी हुई है। भगत सिंह स्कूल और लक्ष्मी नारायण स्कूल के सामने लगभग 500 मीटर तक सड़क पर गहरे गड्ढे हैं और जलभराव रहता है। दोनों स्कूलों की छुट्टी के समय बच्चों की ड्रेस खराब हो जाती है, उन्हें चोटें लग रही हैं और इलाके में भीषण ट्रैफिक जाम लग जाता है। इस मामले में सरकारी अधिकारियों और नगर निगम के अफसरों पर आंखें बंद रखने का आरोप लगाया गया है। बताया गया है कि पिछले साल ही गड्ढा पूर्ति का काम किया गया था, लेकिन सड़क दोबारा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है। मासूम बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए माननीय मुख्यमंत्री और प्रशासन से तत्काल दया दृष्टि दिखाने और कार्रवाई के आदेश जारी करने की मांग की गई है ताकि जनता को समाधान मिल सके।4
- अखिलेश यादव ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार की लाठी से छात्रों और नौजवानों के सिर फूट रहे हैं। युवाओं पर आंसू गैस के गोले चलाए जा रहे हैं और उन्हें करंट लगाया जा रहा है। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या इसलिए सरकार बनी थी? इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए यह भी सवाल दागा कि क्या यही अमृतकाल है और क्या यही विश्वगुरु है?1
- सुल्तानपुर के थाना कोतवाली लंभुआ क्षेत्र में खेत में लगी झटका मशीन से करंट लगने के कारण एक 14 वर्षीय बालक की मौत हो गई। यह घटना 21/7/2026 को दोपहर लगभग सवा बारह बजे की है, जब सबसुखपुर, पटखौली रमई का निवासी बालक अपने घर जा रहा था। रास्ते में वह अचानक फिसल कर खेत में जा गिरा, जहाँ लगी झटका मशीन से उसे तेज करंट लग गया और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत सीएचसी लंभुआ ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इस दुखद घटना के संबंध में पुलिस को सूचना मिलने पर तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया है। पुलिस द्वारा पंचायतनामा और पोस्टमार्टम की कार्यवाही की जा रही है। क्षेत्राधिकारी लम्भुआ श्री ऋतिक कपूर के अनुसार मौके पर शांति व्यवस्था बनी हुई है और मामले में आगे की अग्रिम विधिक कार्यवाही जारी है।1
- सपा प्रमुख अखिलेश यादव को दिल्ली में हिरासत में लिए जाने के विरोध में लखनऊ में विधानसभा के बाहर समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। इस दौरान सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल समेत कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया है। स्थिति को देखते हुए विधानसभा और लोक भवन के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। उधर गोंडा कलेक्ट्रेट गेट पर सपा लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव लाल चंद्र गौतम और जिला प्रवक्ता जावेद मंटू के नेतृत्व में पार्टी पदाधिकारियों ने 2 घंटे तक बैठकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। मौके पर पहुंचे एसडीएम सदर जितेंद्र गौतम और सीओ नगर योगेंद्र सिंह के काफी समझाने के बावजूद जब कार्यकर्ता नहीं माने, तो नगर कोतवाली पुलिस ने उन्हें जबरदस्ती हिरासत में लेकर कोतवाली भेज दिया। हिरासत में लिए गए लोगों में मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष देवेंद्र प्रताप उर्फ दीपू यादव, समाजवादी छात्र सभा के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ सिंह और मेराज अहमद सहित कई कार्यकर्ता शामिल हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान सपा नेताओं ने सरकार पर कड़ा हमला बोला। लोहिया वाहिनी के प्रदेश सचिव लाल चंद्र गौतम ने कहा कि जब समाजवादी पार्टी युवाओं, किसानों और महिलाओं की बात उठाती है, तो राष्ट्रीय अध्यक्ष को हिरासत में लेकर परेशान किया जाता है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और भारत के अंदर लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है और राष्ट्रीय अध्यक्ष को तत्काल रिहा किया जाए। सपा जिला प्रवक्ता जावेद मंटू ने कहा कि अखिलेश यादव पेपर लीक का मुद्दा उठाने और इस्तीफा मांगने गए थे, जिन्हें हिरासत में लेकर बस में बैठाया गया है। वहीं यूथ ब्रिगेड जिलाध्यक्ष दीपू यादव ने चेतावनी दी कि पुलिस उन्हें कितनी भी देर हिरासत में रखे, वे बाहर निकलकर तब तक फिर से प्रदर्शन करेंगे जब तक राष्ट्रीय अध्यक्ष रिहा नहीं हो जाते।4
- दिल्ली में शुरू हुए छात्र आंदोलन की आंच अब प्रयागराज तक पहुंच गई है, जहां छात्र भारी संख्या में सड़कों पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारी छात्रों की बस एक ही प्रमुख मांग है कि शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा दें। इस आंदोलन का असर कोलकाता में भी देखने को मिल रहा है, जहां लोग विरोध में सड़कों पर निकल पड़े हैं। दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए शर्मनाक लाठीचार्ज ने छात्रों के भीतर भारी गुस्सा भर दिया है, जिससे यह आक्रोश अलग-अलग शहरों में फैल रहा है।1
- दिल्ली में NEET परीक्षा गड़बड़ियों और परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर युवाओं और छात्रों के प्रदर्शन पर सरकार और प्रशासन का दोहरा रुख सामने आया है। इस प्रदर्शन का आयोजन कॉकरोच जनता पार्टी और अन्य छात्र संगठनों द्वारा किया गया था। सरकार का आधिकारिक रुख शांतिपूर्ण संवाद का रहा है, जिसके तहत प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधिमंडल को केंद्रीय मंत्री जे. पी. नड्डा द्वारा मिलने का समय दिया गया और मांगों को उचित स्तर पर प्रस्तुत व विचार करने का आश्वासन दिया गया। दूसरी ओर, राहुल गांधी व कांग्रेस नेताओं के धरने और विपक्ष के हस्तक्षेप पर सरकार ने कहा है कि प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर जैसा नियत स्थान ही उपयुक्त है और इस मामले को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर दिल्ली पुलिस और प्रशासन का रुख कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर काफी कड़ा रहा। पुलिस का कहना है कि संसद घेराव के दौरान प्रदर्शनकारियों के उग्र होने, बैरिकेड तोड़ने की कोशिश करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के चलते बल प्रयोग और धारा 163 (BNSS) जैसे कदम उठाने पड़े। सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए संसद मार्ग के पास आवाजाही रोकने, मेट्रो स्टेशन बंद करने और इंटरनेट सेवाएं निलंबित करने जैसे प्रतिबंधात्मक उपाय भी किए गए।1
- दिल्ली में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़े कई वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वायरल वीडियो के साथ महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और बल प्रयोग किए जाने के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि, सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इन वीडियो और उनमें किए जा रहे दावों की अब तक कोई स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। घटना को लेकर इंटरनेट पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं और मामले में आधिकारिक पक्ष का अभी इंतजार किया जा रहा है।1