गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500 रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
गुमला के सिसई प्रखंड से उत्तर प्रदेश के बनारस स्थित एक ईंट भट्ठे में काम करने गए मज़दूरों के साथ अमानवीय व्यवहार, मारपीट और बकाया मजदूरी का भुगतान न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। बनारस से वापस लौटे पीड़ित मज़दूरों ने अपनी आपबीती समाजसेवी संजय वर्मा को सुनाई, जिसके बाद उनके नेतृत्व में मज़दूरों ने श्रम विभाग गुमला में शिकायत दर्ज कराई है। सिसई के इन मज़दूरों ने बनारस के 'सागर ब्रिक्स ईंट भट्ठा' के मालिक और एक स्थानीय एजेंट पर बंधक बनाकर दिन-रात काम कराने, मारपीट करने और बाल मज़दूरी कराने के साथ-साथ तय वेतन न देने का आरोप लगाया है। पीड़ित मज़दूर सिसई के लकेया बांसटोली निवासी जगरनाथ तुरी ने बताया कि अक्टूबर 2025 में (यह तिथि मूल पाठ में दी गई है) एक स्थानीय एजेंट ने लगभग 20 मज़दूरों को 15 हज़ार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर भट्ठे पर ले गया था, लेकिन वहां उन्हें गुज़ारे के नाम पर मात्र 1500
रुपये दिए जाते थे और उनसे कड़ी मेहनत कराई जाती थी। मज़दूरों का आरोप है कि बकाया मज़दूरी मांगने पर भट्ठा मालिक डब्लू सिंह गाली-गलौज और मारपीट करता था। उन्होंने यह भी बताया कि ईंट भट्ठे में नाबालिग बच्चों से भी जबरन काम कराया जाता था और उनके साथ भी मारपीट की जाती थी, जिससे कई मज़दूर प्रताड़ना से परेशान होकर पहले ही वहां से भाग निकले थे। जगरनाथ तुरी सहित चार मज़दूरों ने किसी तरह 6 माह 15 दिन तक वहां काम किया, जिसके बाद भट्ठा मालिक ने उन्हें भी बिना मज़दूरी दिए मारपीट कर भगा दिया। वापस लौटने के लिए पैसे न होने पर, उन्होंने किसी दूसरे ईंट भट्ठे में एक सप्ताह काम करके पैसे जुटाए और फिर सिसई लौटे। पीड़ित मज़दूरों का कहना है कि उनके चार मज़दूरों के कुल 3 लाख 90 हज़ार रुपये की मज़दूरी भट्ठा मालिक के पास बकाया है। उन्होंने श्रम अधीक्षक से भट्ठा मालिक और एजेंट के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई
करने और उनकी बकाया राशि दिलाने की मांग की है। समाजसेवी संजय वर्मा ने इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गुमला ज़िले के मज़दूरों के साथ दूसरे राज्यों में ऐसी अमानवीय घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, जिसमें मारपीट और बकाया मजदूरी न दिए जाने के मामले पहले भी डिब्रुगढ़, असम से सामने आए थे। उन्होंने इन घटनाओं के लिए स्थानीय एजेंटों को सबसे अधिक दोषी ठहराया, जो अपनी मोटी कमाई के लालच में भोले-भाले गरीब मज़दूरों को पैसे का लालच देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं और उन्हें 'बेचने' का काम करते हैं। वर्मा ने बताया कि इन एजेंटों के पास मज़दूर भेजने का कोई वैध दस्तावेज़ या लाइसेंस नहीं है, फिर भी वे धड़ल्ले से ऐसे गैर-कानूनी कार्यों में लिप्त हैं, जो सीधे तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा है। उन्होंने प्रशासन से आग्रह किया है कि सख्ती दिखाते हुए इन एजेंटों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
- झारखंड के गुमला जिले के पालकोट स्थित केराटोली निवासी 38 वर्षीय तीर्थनाथ सिंह को उनके छोटे भाई मनोहर सिंह ने शनिवार सुबह धान रोपने को लेकर हुए विवाद में हथौड़ी से मारकर घायल कर दिया। यह घटना सुबह करीब 8 बजे हुई। परिजनों ने तीर्थनाथ सिंह को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ जमीन विवाद में मारपीट के बाद वे ज़ख़्मी हालत में उपचाराधीन हैं।1
- सोशल मीडिया पर लोहरदगा से एक हैरान कर देने वाला सवाल वायरल हो रहा है, जिसमें सीधे तौर पर पूछा गया है कि क्या ईसाई और आदिवासी 'एक ही मां के औलाद' हैं। यह पोस्ट ईसाई और आदिवासी पहचान के बीच के संबंध पर एक तीव्र और विवादास्पद प्रश्न उठाता है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।1
- सवाल पूछे जाने पर एक भाजपा नेता ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि भारत को आज़ादी मिलने के इतने समय बाद भी अब तक सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो पाया था। उन्होंने इस बात पर हैरानी जताई कि जब राज्यपाल महोदय को आना था, तो वही सड़क मात्र एक दिन के भीतर बनकर तैयार हो गई।1
- कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले में भटकल के पास एक नदी में सीपियां इकट्ठा करने गए आठ लोगों की डूबने से मौत हो गई है। इस दर्दनाक हादसे के बाद दो अन्य लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। मरने वालों में सात महिलाएं शामिल थीं। यह घटना तब हुई जब ये लोग नदी में सीपियां चुन रहे थे।1
- बसिया प्रखंड मुख्यालय स्थित बसिया स्टेडियम सरना मैदान में बसिया प्रीमियर क्रिकेट लीग सीजन 2 टूर्नामेंट का फाइनल मुकाबला सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। जिला परिषद सदस्य बसंती डूंगडुंग ने मुख्य अतिथि के तौर पर टॉस करके और खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर मैच का उद्घाटन किया। इस रोमांचक फाइनल में बीएसडी लायंस और बीएसडी चैलेंजर्स के बीच भिड़ंत हुई, जिसमें बीएसडी चैलेंजर्स ने जीत हासिल की। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि बसंती डूंगडुंग ने इस क्रिकेट प्रतियोगिता को क्षेत्र के लिए एक मील का पत्थर बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में इन्हीं खिलाड़ियों में से कोई राष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करेगा, जिससे उनके माता-पिता, बसिया सबडिवीजन क्रिकेट अकादमी के अध्यक्ष अंजनी कुमार मिश्रा, हेड कोच सह सचिव राजू राम और पूरे झारखंड का नाम रोशन होगा। डूंगडुंग ने विशेष रूप से लड़कियों द्वारा लड़कों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खेलने की प्रशंसा की, इसे गौरवशाली क्षण और महिला सशक्तिकरण का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने लड़कों और लड़कियों को एक साथ खेलते देखना एक सुखद अनुभव करार दिया। इस प्रीमियम लीग में कुल चार टीमें - बीएसडी लॉयंस, बीएसडी चैलेंजर, बीएसडी सुपरकिंग और बीएसडी रॉयल्स - शामिल थीं। फाइनल मैच के दौरान नीलेश कंसारी को 'मैन ऑफ द मैच' घोषित किया गया, जबकि 'मैन ऑफ द सीरीज' का खिताब अर्णव मिश्रा ने जीता। यह टूर्नामेंट अंजनी कुमार मिश्रा और हेड कोच राजू राम के अथक प्रयासों से सफल हुआ। इस अवसर पर डीएसओ गुमला भी उपस्थित थे।3
- रांची जिले के राठू थाना क्षेत्र के अंतर्गत काठीटांड चौक पर एक भीषण वाहन हादसा हो गया। इस दुर्घटना में कुल नौ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।1
- आदिवासी महिलाएँ अपने अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली पहुँची हैं।1
- गुमला जिले के चैनपुर बाजार टांड़ रोड स्थित राज बैग पैलेस एंड सिंगार दुकान में सोमवार दोपहर करीब 2:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। इस दौरान आसपास के दुकानदारों, ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने एकजुट होकर मानवता और साहस का परिचय दिया। उन्होंने बाल्टी से पानी डालकर घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आखिरकार आग पर काबू पाया। हालांकि, आग बुझने तक दो गुमटी दुकानें पूरी तरह जलकर राख हो चुकी थीं, जबकि तीसरी दुकान का एक हिस्सा भी आग की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया। इस अग्निकांड में लाखों रुपये के नुकसान का अनुमान है।1
- गुमला में सोमवार को उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पीएम जनमन (PM-JANMAN) योजना समेत विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की गहन समीक्षा हुई। उपायुक्त ने सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को लंबित कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने और योजनाओं के क्रियान्वयन में उच्च गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के सख्त निर्देश दिए। पीएम जनमन योजना के तहत, उपायुक्त ने निर्माणाधीन आंगनबाड़ी केंद्रों के कार्यों में तेजी लाने और उन्हें जल्द से जल्द पूरा करने का आदेश दिया। इसी योजना के अंतर्गत बनने वाले स्कूल भवनों के लिए संबंधित विभाग को निविदा प्रक्रिया तुरंत पूर्ण कर कार्य शुरू करने को कहा गया। उन्होंने जिले के सभी चिन्हित क्षेत्रों और घरों में विद्युत कनेक्शन सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया, ताकि कोई भी योग्य परिवार बिजली सुविधा से वंचित न रहे। इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों में बेहतर मोबाइल नेटवर्क कनेक्टिविटी के लिए लंबित कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी दिए गए। कल्याण और शिक्षा विभाग से जुड़ी योजनाओं की समीक्षा करते हुए, उपायुक्त ने सभी स्कूली बच्चों के बैंक खातों को एनपीसीआई (NPCI) से लिंक करने की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया। एलडीएम को बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट के माध्यम से विद्यालयों में विशेष कैंप लगाकर शत-प्रतिशत एनपीसीआई मैपिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सरकारी भवन निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर उपायुक्त ने कड़ा रुख अपनाते हुए अभियंताओं और अधिकारियों को निर्देशित किया कि सभी निर्माण कार्य निर्धारित मानकों और उच्च गुणवत्ता के साथ हों, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के छूटे हुए योग्य विद्यार्थियों के बीच साइकिल वितरण कार्य को तत्काल पूरा करने के लिए भी निर्देश दिए गए, और आगामी सत्र 2026-27 के लिए लाभुकों की सूची जल्द उपलब्ध कराने हेतु प्रखंड कल्याण पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की समीक्षा के दौरान, उपायुक्त ने डुमरी क्षेत्र में पाइपलाइन निर्माण कार्य को बिना किसी देरी के शीघ्र पूरा करने का आदेश दिया, ताकि ग्रामीणों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध हो सके। उपायुक्त ने दोहराया कि सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और सभी अधिकारियों को गंभीरता एवं जवाबदेही के साथ कार्य करने का निर्देश दिया। बैठक में निदेशक आईटीडीए लिली एनोला लकड़ा, सिविल सर्जन गुमला शंभूनाथ चौधरी, जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी, विद्युत आपूर्ति कार्यपालक अभियंता, और एलडीएम गुमला सहित अन्य संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।1