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उत्तराखंड जल संस्थान ने बकाएदारों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है।समय से भुगतान न करने पर अब जल संयोजन विच्छेद की चेतावनी दी जा रही है। इसके लिए बाकायदा मुनादी कराई जा रही है। आज सहायक अभियंता संजय सैनी के नेतृत्व में जल संस्थान की विभागीय टीम ने ज्वालापुर क्षेत्र के पावधोई मोहल्ले में कैंप लगाकर बकाया पानी के बिलों को वसूलते हुए क्षेत्र में पानी के अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान चला कर उनको काटते हुए हुए उनके नियमितीकरण किए जाने की कार्यवाही की। इस मौके पर अपर सहायक अभियंता राव रियासत रमेश चंद प्रमोद चौहान सुनील मिश्रा संजय शर्मा असलम विनोद कुमार प्रभास कुमार आदि मौजूद रहे।
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उत्तराखंड जल संस्थान ने बकाएदारों के खिलाफ अभियान शुरू कर दिया है।समय से भुगतान न करने पर अब जल संयोजन विच्छेद की चेतावनी दी जा रही है। इसके लिए बाकायदा मुनादी कराई जा रही है। आज सहायक अभियंता संजय सैनी के नेतृत्व में जल संस्थान की विभागीय टीम ने ज्वालापुर क्षेत्र के पावधोई मोहल्ले में कैंप लगाकर बकाया पानी के बिलों को वसूलते हुए क्षेत्र में पानी के अवैध कनेक्शनों के खिलाफ अभियान चला कर उनको काटते हुए हुए उनके नियमितीकरण किए जाने की कार्यवाही की। इस मौके पर अपर सहायक अभियंता राव रियासत रमेश चंद प्रमोद चौहान सुनील मिश्रा संजय शर्मा असलम विनोद कुमार प्रभास कुमार आदि मौजूद रहे।
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- 🚨 हरिद्वार में बिना सत्यापन रहने वालों पर पुलिस का शिकंजा 🔴 1500 लोगों की जांच, 260 मकान मालिक और प्रतिष्ठान संचालकों पर 26 लाख का चालान ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ हरिद्वार, 11 मार्च 2026। तीर्थनगरी हरिद्वार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए कोतवाली नगर पुलिस ने एक बड़ा और सख्त सत्यापन अभियान चलाया। थाना क्षेत्र में बाहरी राज्यों से आकर रह रहे मजदूरों, कर्मचारियों, किरायेदारों तथा फड़-ठेली संचालकों की पहचान सुनिश्चित करने के लिए पुलिस की कई टीमें गठित कर अलग-अलग क्षेत्रों में भेजी गईं। 🔎 होटल, धर्मशाला और कॉलोनियों में पुलिस की अचानक जांच अभियान के दौरान पुलिस टीमों ने होटल, धर्मशाला, जिम, आवासीय कॉलोनियों और किराए के मकानों में काम करने वाले कर्मचारियों तथा रहने वाले व्यक्तियों की मौके पर ही जांच और सत्यापन किया। जांच में यह भी सामने आया कि कई मकान मालिक और प्रतिष्ठान संचालक बिना सत्यापन के ही कर्मचारियों और किरायेदारों को रखे हुए थे। ⚡ 1500 लोगों का सत्यापन, लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई विशेष अभियान के दौरान अब तक करीब 1500 लोगों का सत्यापन किया जा चुका है। वहीं जिन मकान मालिकों, होटल संचालकों और धर्मशाला प्रबंधकों ने कर्मचारियों या किरायेदारों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया था, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस ने उत्तराखंड पुलिस एक्ट की धारा-83 के तहत 260 चालान करते हुए ₹26,00,000 (छब्बीस लाख रुपये) का कोर्ट चालान किया है और संबंधित रिपोर्ट माननीय न्यायालय को भेजी जा रही है। ⚠️ तीर्थनगरी की सुरक्षा से समझौता नहीं पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हरिद्वार जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक शहर में देश-विदेश से बड़ी संख्या में लोग आते हैं। ऐसे में बाहरी व्यक्तियों का सत्यापन कराना कानून व्यवस्था और सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद जरूरी है। 📢 मकान मालिकों को सख्त चेतावनी पुलिस ने मकान मालिकों, होटल संचालकों और संस्थानों को स्पष्ट चेतावनी दी है कि किरायेदारों, नौकरों और कर्मचारियों का सत्यापन अनिवार्य रूप से कराएं, अन्यथा भविष्य में भी इसी प्रकार की सख्त कार्रवाई की जाएगी। 🚔 अभियान जारी रहेगा कोतवाली नगर पुलिस के अनुसार यह सत्यापन अभियान आगे भी जारी रहेगा। पुलिस का उद्देश्य तीर्थनगरी में किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते रोक लगाना और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना है। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद हरिद्वार में बिना सत्यापन रह रहे लोगों और उन्हें शरण देने वाले मकान मालिकों में हड़कंप मच गया है।4
- खाड़ी देशों में ईरान व इजरायल के बीच युद्ध के हालात के चलते हरिद्वार में गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है। जिसके चलते आज दिनभर गैस गोदामों पर सिलेंडर लेने और बुक कराने वालों की लगी रही। एकाएक डिमांड बढ़ने से गैस आपूर्ति भी गड़बड़ा गई है। जिसके चलते पूर्ति विभाग ने भी एहतियातन कई कदम उठाए हैं। घरेलू गैस को छोड़कर अन्य सिलेंडरों की आपूर्ति अगले आदेश तक रोक दी गई है।साथ ही घरेलू गैस भी अब निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद और निर्धारित समय पर ही मिलेगी। हालांकि जिला पूर्ति अधिकारी मुकेश पाल का कहना है कि हरिद्वार में घरेलू गैस की आपूर्ति सुचारू है और इसको लेकर उपभोक्ताओं को परेशान होने की जरूरत नहीं है। (-कुमार दुष्यंत)1
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- हेडलाइट रात को रास्ता दिखाने के लिए होती है ना कि सामने वाले को अंधा करने के लिए ऐसी हेडलाइट से दुर्घटना हो सकती है कृपया नियमित हेडलाइट लगाए ताकि सामने वाला आराम से निकल जाये1
- The Aman Times हर्रा वाला/डोईवाला से खबर हैं _ देहरादून के नकरौंदा क्षेत्र में एक दर्दनाक हादसे में कार की टक्कर से 2 वर्षीय मासूम की मौत हो गई। सूचना मिलते ही हर्रावाला चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस के अनुसार परवीन (2 वर्ष) पुत्र स्वर्गीय रामलाल, निवासी गूलर घाटी भद्रकाली मंदिर नकरौंदा को टैक्सी चालक अनुराग निवासी मंगलम गार्डन नकरौंदा ने अपनी टैक्सी से कुचल दिया। चालक घायल बच्चे को लेकर खुद रायपुर अस्पताल पहुंचा, जहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए कोरोनेशन अस्पताल भेज दिया है। वहीं टैक्सी चालक और वाहन को हिरासत में लेकर आगे की कार्रवाई की जा रही है। मामले में मृतक बच्चे की मां रिंकू देवी की तहरीर पर कोतवाली डोईवाला में FIR संख्या 62/26 धारा 281 और 106(1) BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।1
- उत्तराखंड देहरादून से आ रही बड़ी खबर जानिए पूरी खबर क्या है मामला1
- Post by Graphics Solution1
- 🔴 हरकी पैड़ी से कनखल तक एनएमसीजी की विशेषज्ञ टीम का निरीक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन पर हुआ मंथन 🔴 कुंभ मेले में स्वच्छता सबसे बड़ी चुनौती, 6 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी 🔴 करोड़ों श्रद्धालुओं के आगमन से पहले गंगा की पवित्रता बचाने की रणनीति पर प्रशासन सक्रिय ✍️ स्वतंत्र पत्रकार रामेश्वर गौड़ की कलम से हरिद्वार, 11 मार्च 2026। विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में शामिल हरिद्वार कुंभ मेला की तैयारियां अब तेज होती दिखाई दे रही हैं। आगामी वर्ष कुंभ मेले में देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना को देखते हुए मेला प्रशासन ने गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखा है। इसी कड़ी में मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका की पहल पर राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) के विशेषज्ञों की टीम ने बुधवार को कुंभ क्षेत्र का व्यापक भ्रमण किया। टीम ने मेला प्रशासन के साथ ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था और सैनिटेशन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर गहन चर्चा की। 🔹 हरकी पैड़ी से बैरागी कैंप तक जमीन पर उतरी जांच एनएमसीजी की टीम ने मेला प्रशासन, नगर निगम और पेयजल निगम के अधिकारियों के साथ हरकी पैड़ी, बैरागी कैंप, दक्ष द्वीप, कनखल, नीलधारा और गौरीशंकर जैसे प्रमुख क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान इन क्षेत्रों में आगामी कुंभ मेले के दौरान कचरा प्रबंधन, सीवरेज व्यवस्था और सफाई सुविधाओं की वर्तमान स्थिति तथा प्रस्तावित व्यवस्थाओं का बारीकी से आकलन किया गया। 🔹 गंगा की पवित्रता बचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती निरीक्षण के बाद आयोजित बैठक में मेलाधिकारी सोनिका ने स्पष्ट कहा कि कुंभ मेले के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में गंगा की निर्मलता और मेला क्षेत्र की स्वच्छता बनाए रखना प्रशासन के लिए सबसे बड़ी परीक्षा होगी। उन्होंने कहा कि इतने बड़े आयोजन में कूड़ा प्रबंधन, सीवरेज नियंत्रण और पर्याप्त शौचालय व्यवस्था सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है, जिसके लिए वैज्ञानिक और प्रभावी रणनीति तैयार की जा रही है। 🔹 वैज्ञानिक तकनीक और कुंभ के अनुभव से बनेगी रणनीति बैठक के दौरान एनएमसीजी के विशेषज्ञों ने नई तकनीकों, विभिन्न शोध अध्ययनों और प्रयागराज कुंभ के अनुभवों को साझा किया। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि मेला क्षेत्र में कूड़ेदान, कचरा संग्रहण केंद्र, अपशिष्ट परिवहन व्यवस्था और अस्थायी शिविरों में कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि गंगा में प्रदूषण का खतरा कम किया जा सके। 🔹 6 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने का प्रस्ताव कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले सीवरेज दबाव को देखते हुए 06 फीकल स्लज ट्रीटमेंट प्लांट (FSTP) स्थापित करने की योजना भी प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा अस्थायी शौचालयों की स्थापना, सेप्टेज प्रबंधन, घाटों की नियमित सफाई और कचरा पृथक्करण की विस्तृत कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। 🔹 विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी में हुई अहम बैठक इस दौरान विशेषज्ञ टीम में टेरी स्कूल ऑफ एडवांस्ड स्टडीज के प्रो. शलीन सिंघल, होकाईडो यूनिवर्सिटी जापान के प्रो. राम अवतार, आईआईटी बीएचयू के रिसर्च एसोसिएट डॉ. तरुण यादव, तथा स्टेट मिशन फॉर क्लीन गंगा उत्तराखंड के आरबीएम डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव शामिल रहे। बैठक में नगर निगम हरिद्वार के आयुक्त नंदन सिंह, अपर मेलाधिकारी दयानंद सरस्वती, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह गिल, तथा पेयजल निगम की परियोजना प्रबंधक (गंगा) मीनाक्षी मित्तल वशिष्ठ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। 🔎 सवाल जो अब भी खड़े हैं हरिद्वार की पहचान गंगा की पवित्रता और कुंभ की आस्था से जुड़ी है। लेकिन हर कुंभ में करोड़ों लोगों की भीड़ के बीच स्वच्छता व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती साबित होती रही है। अब सवाल यह है कि बैठकों और योजनाओं के बाद क्या इस बार व्यवस्थाएं वास्तव में जमीन पर उतर पाएंगी, या फिर गंगा की निर्मलता केवल कागजों और बैठकों तक ही सीमित रह जाएगी। ✍️ स्वतंत्र पत्रकार – रामेश्वर गौड़3