जनपद बलिया की प्राचीन नगर पंचायत चितबड़ागांव को तहसील का दर्जा दिलाने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर तेजी पकड़ रही है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अनिल कुमार ने उपजिलाधिकारी सदर को निर्देश दिया है कि शासन द्वारा निर्धारित मानकों और राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुरूप औचित्यपूर्ण एवं सुसंगत प्रस्ताव तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए। यह मांग परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा 12 मई को और पूर्व मंत्री नारद राय द्वारा 10 मई को शासन को भेजे गए पत्रों से शुरू हुई थी, जिसमें फेफना विधानसभा क्षेत्र स्थित चितबड़ागांव को नई तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग की गई थी। वर्तमान में बलिया जनपद में बलिया सदर, रसड़ा, बांसडीह, बैरिया, सिकंदरपुर और बेल्थरारोड सहित छह तहसीलें संचालित हैं। फेफना विधानसभा क्षेत्र बलिया सदर तहसील के अंतर्गत आता है, जिसका बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण क्षेत्रवासियों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लगभग 34 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके बलिया मुख्यालय जाना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के अनुसार, चितबड़ागांव मात्र 17 किलोमीटर दूर है, और इसे तहसील बनाने से लाखों लोगों के समय और धन दोनों की बचत होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अवगत कराया जा चुका है। चितबड़ागांव जनपद की सबसे पुरानी नगर पंचायतों में से एक है, जो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित है और यहां कृषि मंडी भी संचालित है। इसकी आबादी लगभग 50 हजार बताई जाती है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मंडी परिसर में तहसील भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है। नई तहसील के गठन से फेफना विधानसभा क्षेत्र के लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिलेंगी, साथ ही बलिया सदर तहसील पर बढ़ते कार्यभार में भी कमी आएगी। क्षेत्रीय जनता लंबे समय से चितबड़ागांव को तहसील बनाए जाने की मांग कर रही है, और प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव मांगे जाने के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि उनकी यह वर्षों पुरानी मांग जल्द पूरी हो सकती है। नई तहसील के गठन की प्रक्रिया के तहत, सबसे पहले स्थानीय मांग या जनप्रतिनिधियों का प्रस्ताव प्राप्त होता है। इसके बाद जिलाधिकारी और राजस्व विभाग क्षेत्रफल, जनसंख्या, दूरी, प्रशासनिक सुविधा और उपलब्ध भूमि जैसे बिंदुओं का परीक्षण करते हैं। जिला प्रशासन द्वारा तैयार प्रस्ताव शासन को भेजा जाता है, जिसका परीक्षण राजस्व परिषद एवं राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है। अंततः उत्तर प्रदेश सरकार नई तहसील के गठन का निर्णय लेकर अधिसूचना जारी करती है। जिलाधिकारी बलिया मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश के अनुभाग-9 के आयुक्त एवं सचिव की ओर से भी इस संबंध में जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है।
जनपद बलिया की प्राचीन नगर पंचायत चितबड़ागांव को तहसील का दर्जा दिलाने की मांग अब प्रशासनिक स्तर पर तेजी पकड़ रही है। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) अनिल कुमार ने उपजिलाधिकारी सदर को निर्देश दिया है कि शासन द्वारा निर्धारित मानकों और राजस्व संहिता के प्रावधानों के अनुरूप औचित्यपूर्ण एवं सुसंगत प्रस्ताव तीन दिनों के भीतर उपलब्ध कराया जाए। यह मांग परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह द्वारा 12 मई को और पूर्व मंत्री नारद राय द्वारा 10 मई को शासन को भेजे गए पत्रों से शुरू हुई थी, जिसमें फेफना विधानसभा क्षेत्र स्थित चितबड़ागांव को नई तहसील का दर्जा दिए जाने की मांग की गई थी। वर्तमान में बलिया जनपद में बलिया सदर, रसड़ा, बांसडीह, बैरिया, सिकंदरपुर और बेल्थरारोड सहित छह तहसीलें संचालित हैं। फेफना विधानसभा क्षेत्र बलिया सदर तहसील के अंतर्गत आता है, जिसका बड़ा क्षेत्रफल होने के कारण क्षेत्रवासियों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए लगभग 34 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करके बलिया मुख्यालय जाना पड़ता है। जनप्रतिनिधियों के अनुसार, चितबड़ागांव मात्र 17 किलोमीटर दूर है, और इसे तहसील बनाने से लाखों लोगों के समय और धन दोनों की बचत होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी अवगत कराया जा चुका है। चितबड़ागांव जनपद की सबसे पुरानी नगर पंचायतों में से एक है, जो एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र के रूप में स्थापित है और यहां कृषि मंडी भी संचालित है। इसकी आबादी लगभग 50 हजार बताई जाती है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि मंडी परिसर में तहसील भवन निर्माण के लिए पर्याप्त भूमि भी उपलब्ध है। नई तहसील के गठन से फेफना विधानसभा क्षेत्र के लोगों को राजस्व एवं प्रशासनिक सेवाएं स्थानीय स्तर पर मिलेंगी, साथ ही बलिया सदर तहसील पर बढ़ते कार्यभार में भी कमी आएगी। क्षेत्रीय जनता लंबे समय से चितबड़ागांव को तहसील बनाए जाने की मांग कर रही है, और प्रशासनिक स्तर पर प्रस्ताव मांगे जाने के बाद लोगों में उम्मीद जगी है कि उनकी यह वर्षों पुरानी मांग जल्द पूरी हो सकती है। नई तहसील के गठन की प्रक्रिया के तहत, सबसे पहले स्थानीय मांग या जनप्रतिनिधियों का प्रस्ताव प्राप्त होता है। इसके बाद जिलाधिकारी और राजस्व विभाग क्षेत्रफल, जनसंख्या, दूरी, प्रशासनिक सुविधा और उपलब्ध भूमि जैसे बिंदुओं का परीक्षण करते हैं। जिला प्रशासन द्वारा तैयार प्रस्ताव शासन को भेजा जाता है, जिसका परीक्षण राजस्व परिषद एवं राजस्व विभाग द्वारा किया जाता है। अंततः उत्तर प्रदेश सरकार नई तहसील के गठन का निर्णय लेकर अधिसूचना जारी करती है। जिलाधिकारी बलिया मंगला प्रसाद सिंह ने बताया कि शासन से निर्देश मिलने के बाद प्रस्ताव तैयार कराया जा रहा है और अंतिम निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश के अनुभाग-9 के आयुक्त एवं सचिव की ओर से भी इस संबंध में जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी गई है।
- 12वें अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर एक विशेष रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है, जिसमें योग के माध्यम से बीमारियों से बचाव के तरीकों पर प्रकाश डाला गया है। यह रिपोर्ट विस्तृत रूप से उन बीमारियों की पड़ताल करती है जिनसे योग सुरक्षा प्रदान कर सकता है। इस महत्वपूर्ण विषय पर योग विशेषज्ञ प्रतीक्षा पांडे से एक खास बातचीत भी की गई है।1
- सतलोक आश्रम सीतापुर महोली उत्तर प्रदेशआपदा में फरिश्ता बनकर आई मदद! बाढ़ हो या भूकंप, संत रामपाल जी के अनुयायी सबसे पहले पहुँचते हैं। संकट की हर घड़ी में पीड़ितों को त्वरित राहत और सहयोग। आपदा में फरिश्ता बनकर आई मदद! बाढ़ हो या भूकंप, संत रामपाल जी के अनुयायी सबसे पहले पहुँचते हैं। संकट की हर घड़ी में पीड़ितों को त्वरित राहत और सहयोग।1
- अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के शुभ अवसर पर 21 जून को ग्राम सभा सरायभारती के मानसरोवर पर एक भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस मौके पर आशा गिरी ने उपस्थित सभी लोगों को योग का महत्व समझाते हुए बताया कि नियमित योगाभ्यास न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है, बल्कि मानसिक शांति भी प्रदान करता है। उन्होंने योग को जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बताया। इस गरिमामयी कार्यक्रम में ग्रामीणों के साथ-साथ भाजपा के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। कार्यक्रम में ग्राम पंचायत सरायभारती के सचिव हर्षदेव, भाजपा पश्चिम मंडल अध्यक्ष अविनाश सिंह, भाजपा किसान मोर्चा के जिला महामंत्री मंगल सिंह, और ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि रणधीर सिंह मुख्य रूप से मौजूद रहे। इनके अलावा रमेश सिंह और शमशेर सिंह सहित अन्य गणमान्य नागरिकों ने भी इसमें शिरकत की। सभी ने मिलकर मानसरोवर के शांत वातावरण में योगाभ्यास किया और 'स्वस्थ भारत' का संदेश दिया।1
- रविवार को अंतरराष्ट्रीय 12वें योग दिवस के अवसर पर सैयदराजा विधायक सुशील सिंह की अगुवाई में खजरा स्थित एक निजी विद्यालय में एक भव्य योग शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में एक योग गुरु ने शरीर को स्वस्थ रखने के सरल उपाय बताए, जिसका लाभ उठाने के लिए एक हजार भाजपा कार्यकर्ताओं और समाजसेवियों ने योग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी ली। इस मौके पर सैयदराजा विधायक सुशील सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व में 150 से अधिक देशों ने योग शिक्षा को अपनाया है। उन्होंने जोर दिया कि योग से मन और मस्तिष्क स्वस्थ रहता है, जिससे समाज में समरसता और सांप्रदायिक सद्भाव को बढ़ावा मिलता है। विधायक सिंह ने यह भी बताया कि योग के नियमित अभ्यास से व्यक्ति तमाम रोगों से मुक्ति पा सकता है, शरीर स्वस्थ और मजबूत बनता है, और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उनके अनुसार, योग करने वाले व्यक्ति को कभी चिकित्सक के पास जाने की आवश्यकता नहीं होगी, क्योंकि यह बड़े से बड़े रोगों को दूर करने में सहायक सिद्ध होता है। कार्यक्रम में धानापुर ब्लॉक प्रमुख अजय सिंह, पूर्व जिपंस सुशील सिंह जनौली, जिला महामंत्री सुजीत जायसवाल, मंडल अध्यक्ष चंद्रभान मौर्य, रमेश द्विवेदी, संतोष सिंह, इंद्रजीत बिंद, राजेश तिवारी, नंदकुमार पांडेय, अजीत पांडेय, मृत्युंजय सिंह दीपु, भगवती तिवारी, सत्यवान मौर्य, श्रीराम चौबे, अनिल श्रीवास्तव, दुलारे मौर्य, गणेश अग्रहरि, संजय मिश्रा, धन्वन्तरि पांडेय, श्यामसुंदर बिंद, जयप्रकाश उपाध्याय, हेमन्त उपाध्याय, विकास गुप्ता, रितेश पांडेय, सोनू गुप्ता सहित विधानसभा के चारों मंडल के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। विधायक सुशील सिंह ने एक बार फिर दोहराया कि योग से शरीर निरोग रहता है।4
- सकलडीहा तहसील दिवस के अवसर पर जनता की समस्याओं का निदान किया गया। इस दौरान कुंदन राज कपूर और तहसीलदार अनुराग सिंह ने जनहित के मुद्दों को सुना और उनके समाधान पर कार्य किया।1
- धीना के गुरैनी पंप कैनाल स्थित गंगा तट पर किसानों का गंगा कटान रोकथाम की मांग को लेकर चल रहा अनिश्चितकालीन धरना शनिवार को 25वें दिन भी जारी रहा। धरनारत किसानों ने प्रशासन पर उपेक्षा का गंभीर आरोप लगाते हुए अपने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। किसानों का कहना है कि यह आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुँच चुका है। किसान नेता दीनानाथ श्रीवास्तव ने बताया कि 25 दिनों से लगातार धरना प्रदर्शन के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। किसान नेता रविंद्र सिंह 'मुन्ना' ने आरोप लगाया कि प्रशासन की उदासीनता के कारण हजारों एकड़ कृषि भूमि गंगा की धारा में समाहित हो चुकी है, और सिंचाई विभाग द्वारा मिट्टी भरी बोरियां डालकर कटान रोकने का प्रयास केवल एक अस्थायी उपाय है, जो बिल्कुल भी स्थायी समाधान नहीं है। किसानों ने पत्थरों के बोल्डर, तारजाल और अन्य तकनीकी उपायों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मजबूत कटानरोधी कार्य कराने की मांग की है। धरने की अध्यक्षता कर रहे शिवराज सिंह ने यह भी कहा कि कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौके पर आकर सिर्फ औपचारिकता निभाकर लौट गए, जबकि किसानों की मूल समस्या अभी भी जस की तस बनी हुई है। दीनानाथ श्रीवास्तव ने उम्मीद जताई कि 21 जून को क्षेत्रीय विधायक के आने की संभावना है और किसान उनसे आशा भरी निगाहों से देख रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कटानरोधी कार्य की गुणवत्ता संतोषजनक नहीं पाई गई, तो किसान आर-पार की लड़ाई लड़ने को बाध्य होंगे। किसानों ने साफ किया है कि उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए। इस धरना-प्रदर्शन में आशीष कुमार, मुन्ना सिंह, प्यारेलाल, शिवराज, रामआशीष, धनंजय, गुरुप्रकाश, रामदयाल सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।3
- सदर तहसील में बीते शनिवार को एक शिकायतकर्ता ने अधिकारियों पर न्याय का 'चीर हरण' करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अपनी तीव्र नाराजगी व्यक्त की। यह घटना तहसील दिवस के दौरान सामने आई, जब शिकायतकर्ता ने बताया कि लगातार आठ बार अपनी शिकायत अधिकारियों के समक्ष रखने के बावजूद भी उसका निस्तारण नहीं किया गया था, जिससे वह बेहद आक्रोशित था।1
- गाजीपुर के महर्षि विश्वामित्र स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में किडनी के मरीजों के लिए डायलिसिस यूनिट में 10 नए बेडों का उद्घाटन किया गया है। राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने इन बेडों का उद्घाटन किया, जिससे मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर जिलाधिकारी अनुपम शुक्ला, प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर आनंद मिश्रा और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर के.एन. चौधरी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। इस मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस यूनिट की शुरुआत जुलाई 2022 में 10 बेडों के साथ हुई थी। मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बाद में इसमें 5 अतिरिक्त बेड जोड़े गए, जिससे कुल क्षमता 15 बेड हो गई थी। इसके बावजूद मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या के कारण एक लंबी प्रतीक्षा सूची बन गई थी। प्राचार्य प्रोफेसर डॉक्टर आनंद मिश्रा के प्रयासों से शासन से 10 और बेडों की स्वीकृति मिली है। अब डायलिसिस यूनिट की कुल क्षमता बढ़कर 25 बेड हो गई है। इस विस्तार से पहले जहां प्रतिदिन लगभग 45 मरीजों का डायलिसिस हो पाता था, वहीं अब करीब 75 मरीजों को यह सुविधा मिल सकेगी। राज्यसभा सांसद डॉ. संगीता बलवंत ने बताया कि इस कदम से प्रतीक्षा सूची लगभग समाप्त हो जाएगी और मरीजों को समय पर बेहतर इलाज उपलब्ध हो पाएगा।1