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आमने-सामने: नालों की सफाई करने पर लाखों खर्च। कई इलाकों में सड़के बनी तालाब। *रेवाड़ी में जलभराव के बीच सड़क पर बंद हुई बाइक।* रेवाड़ी शहर में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। नालों और सीवर की सफाई पर हर साल लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। कई इलाकों में बरसाती पानी घंटों तक जमा रहने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। हालात से नाराज नागरिक अब अपनी शिकायतें लेकर सीधे उपायुक्त (डीसी) के पास पहुंच रहे हैं। इस बीच नगर परिषद की चेयरपर्सन विनिता पीपल और वार्ड-3 के पार्षद प्रवीण उर्फ शॉलू चौधरी आमने-सामने आ गए हैं। *चेयरपर्सन बोलीं- पहले से कम समय में निकल रहा पानी* नगर परिषद चेयरपर्सन विनिता पीपल ने कहा कि पिछले कुछ समय में जल निकासी व्यवस्था में सुधार हुआ है। उनके अनुसार, पहले जहां बरसात का पानी निकलने में दो से तीन घंटे लगते थे, अब अधिकांश स्थानों पर आधे से एक घंटे में पानी की निकासी हो रही है। उन्होंने माना कि सरकुलर रोड सहित कुछ क्षेत्रों में समस्या बनी हुई है, लेकिन वहां सुधार के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

1 hr ago
user_Dainik news rewari
Dainik news rewari
Local News Reporter Rewari, Haryana•
1 hr ago

आमने-सामने: नालों की सफाई करने पर लाखों खर्च। कई इलाकों में सड़के बनी तालाब। *रेवाड़ी में जलभराव के बीच सड़क पर बंद हुई बाइक।* रेवाड़ी शहर में बरसात के दौरान जलभराव की समस्या एक बार फिर चर्चा में है। नालों और सीवर की सफाई पर हर साल लाखों रुपए खर्च होने के बावजूद हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिख रहा। कई इलाकों में बरसाती पानी घंटों तक जमा रहने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। हालात से नाराज नागरिक अब अपनी शिकायतें लेकर सीधे उपायुक्त (डीसी) के पास पहुंच रहे हैं। इस बीच नगर परिषद की चेयरपर्सन विनिता पीपल और वार्ड-3 के पार्षद प्रवीण उर्फ शॉलू चौधरी आमने-सामने आ गए हैं। *चेयरपर्सन बोलीं- पहले से कम समय में निकल रहा पानी* नगर परिषद चेयरपर्सन विनिता पीपल ने कहा कि पिछले कुछ समय में जल निकासी व्यवस्था में सुधार हुआ है। उनके अनुसार, पहले जहां बरसात का पानी निकलने में दो से तीन घंटे लगते थे, अब अधिकांश स्थानों पर आधे से एक घंटे में पानी की निकासी हो रही है। उन्होंने माना कि सरकुलर रोड सहित कुछ क्षेत्रों में समस्या बनी हुई है, लेकिन वहां सुधार के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है और व्यवस्था को बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

More news from हरियाणा and nearby areas
  • जापान में भयंकर तबाही
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    जापान में भयंकर तबाही
    user_Manish Singh
    Manish Singh
    Voice of people मानेसर, गुरुग्राम, हरियाणा•
    18 hrs ago
  • हरियाणा में 28 से 30 सितंबर तक बैंकों की हड़ताल रहेगी जिला महेंद्रगढ़, नारनौल। ग्राहको ने फोन पर भेज मैसेज। Haryana breaking news *यूनियन बैंक नारनौल, जिला महेंद्रगढ़।* हरियाणा में बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को लेकर ग्राहकों को बैंकों की ओर से मैसेज भेजे जा रहे हैं। 28 से 30 सितंबर तक बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे। इससे पहले 26 सितंबर को चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं, ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए 27 सितंबर रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रखने का निर्णय लिया गया है। *ग्राहकों को आ रहे संदेश* पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंकों की ओर से ग्राहकों को भेजे जा रहे संदेशों में जरूरी बैंकिंग कार्य पहले ही पूरा करने की सलाह दी गई है। पीएनबी की ओर से ग्राहक को बताया गया है कि 28 से 30 सितंबर की हड़ताल के दौरान एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी।
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    हरियाणा में 28 से 30 सितंबर तक बैंकों की हड़ताल रहेगी जिला महेंद्रगढ़, नारनौल।
ग्राहको ने फोन पर भेज मैसेज। Haryana breaking news
*यूनियन बैंक नारनौल, जिला महेंद्रगढ़।*
हरियाणा में बैंक कर्मचारियों की प्रस्तावित तीन दिवसीय हड़ताल को लेकर ग्राहकों को बैंकों की ओर से मैसेज भेजे जा रहे हैं। 28 से 30 सितंबर तक बैंक कर्मचारी हड़ताल पर रहेंगे।
इससे पहले 26 सितंबर को चौथा शनिवार होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। वहीं, ग्राहकों की सुविधा को देखते हुए 27 सितंबर रविवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक खुले रखने का निर्णय लिया गया है।
*ग्राहकों को आ रहे संदेश*
पंजाब नेशनल बैंक समेत कई बैंकों की ओर से ग्राहकों को भेजे जा रहे संदेशों में जरूरी बैंकिंग कार्य पहले ही पूरा करने की सलाह दी गई है। पीएनबी की ओर से ग्राहक को बताया गया है कि 28 से 30 सितंबर की हड़ताल के दौरान एटीएम, मोबाइल बैंकिंग, इंटरनेट बैंकिंग, यूपीआई जैसी डिजिटल सेवाएं चालू रहेंगी।
    user_Haryana Mahendragarh News
    Haryana Mahendragarh News
    Local News Reporter महेंद्रगढ़, महेंद्रगढ़, हरियाणा•
    1 hr ago
  • संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त? खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी। *यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।* एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया। *नतीजे दिलचस्प रहे।* पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है। वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई। सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया। इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया। गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी। लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में। संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए। यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है। *आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?* अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा। बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा? क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी? क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी? क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी? या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा? क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है। संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई। यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है। क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं? कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं? खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा। क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत। फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए। अब अगला अध्याय जनता लिखेगी— संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
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    संघर्ष समिति से निकले सियासी चेहरे: किसका उदय, किसका अस्त?
खैरथल। नगरपरिषद चुनाव खत्म हो चुके हैं। नतीजे सामने हैं, चेहरे साफ हैं और सियासी तस्वीर पहले से कहीं ज्यादा स्पष्ट। लेकिन इन नतीजों के बीच खैरथल की उस सियासी कहानी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता, जिसकी पटकथा नगरपरिषद चुनाव से काफी पहले लिखी जा चुकी थी।
*यह कहानी है खैरथल जिला मुख्यालय बचाओ संघर्ष समिति की।*
एक साल से ज्यादा समय तक चला आंदोलन। धरने, प्रदर्शन, सभाएं और जिला मुख्यालय के मुद्दे पर सड़क से लेकर सत्ता के गलियारों तक संघर्ष। इस आंदोलन ने सिर्फ एक मांग को आवाज नहीं दी, बल्कि खैरथल की स्थानीय राजनीति में कई नए चेहरों को जन्म दिया। आंदोलन की जमीन से निकले इन चेहरों ने अब नगरपरिषद चुनाव में अपनी-अपनी राजनीतिक ताकत का इम्तिहान दिया।
*नतीजे दिलचस्प रहे।*
पंकज रोघा संघर्ष समिति के युवा चेहरों में तेजी से उभरे और पार्षद निर्वाचित हुए। आंदोलन की जमीन से चुनावी राजनीति तक का यह सफर उनके लिए सियासी उपलब्धि के तौर पर देखा जा सकता है।
वहीं संघर्ष समिति के सबसे चर्चित चेहरों में शुमार कृष्णा चौधरी को कांग्रेस का टिकट नहीं मिला। उन्होंने निर्दलीय मैदान संभाला, लेकिन जनता ने इस बार उनका साथ नहीं दिया। टिकट न मिलने से शुरू हुई कहानी हार पर जाकर खत्म हुई।
सर्वेश गुप्ता, जो व्यापार समिति के अध्यक्ष होने के साथ संघर्ष समिति के मजबूत आधार स्तंभों में रहे, कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। आंदोलन की सियासी पूंजी को चुनावी जीत में बदलने वाले चेहरों में उनका नाम भी शामिल हो गया।
इसके उलट ओमप्रकाश रोघा का चुनावी सफर बेहद दिलचस्प रहा। संघर्ष समिति के प्रखर चेहरों में रहे रोघा कांग्रेस के टिकट पर पार्षद का चुनाव हार गए। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। कांग्रेस ने हार के बावजूद उन पर भरोसा जताया और सभापति पद के लिए मैदान में उतार दिया। मुकाबला लॉटरी तक पहुंचा और किस्मत ने इस बार भी साथ नहीं दिया। यानी पार्षद चुनाव में हार और सभापति चुनाव में लॉटरी से हार—सियासत ने उन्हें दो बार मौका दिया, लेकिन दोनों बार परिणाम उनके पक्ष में नहीं आया।
गिरीश डाटा की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं रही। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सदस्य और कांग्रेस के प्रमुख स्थानीय चेहरों में शामिल डाटा महज दो वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। राजनीति में कभी-कभी दो वोट भी पूरी कहानी बदल देते हैं और इस चुनाव ने इसकी मिसाल पेश कर दी।
लेकिन सबसे बड़ा राजनीतिक मोड़ आया विक्की चौधरी के मामले में।
संघर्ष समिति से निकले युवा और मुखर चेहरों में शामिल तथा नगरपरिषद में तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष रहे विक्की चौधरी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते। लेकिन जीत के बाद राजनीतिक पाला बदल गया। उन्होंने भाजपा का दामन थामा और अंततः नगरपरिषद की सभापति की कुर्सी तक पहुंच गए।
यानी संघर्ष समिति की जमीन से निकला एक चेहरा उस कुर्सी तक पहुंच गया, जो नगरपरिषद की स्थानीय सत्ता का सबसे बड़ा केंद्र मानी जाती है।
*आंदोलन की जमीन, राजनीति की मंजिल?*
अब सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन जीता और कौन हारा।
बड़ा सवाल यह है कि जिस संघर्ष समिति ने इन चेहरों को पहचान दी, उसका आगे क्या होगा?
क्या आंदोलन की वह ऊर्जा फिर से जिला मुख्यालय के मुद्दे पर दिखाई देगी?
क्या संघर्ष समिति एक बार फिर सड़क पर उतरेगी?
क्या जिला मुख्यालय की लड़ाई नगरपरिषद चुनाव के बाद भी उतनी ही प्राथमिकता रहेगी, जितनी चुनाव से पहले थी?
या फिर यह पूरा आंदोलन धीरे-धीरे चुनावी राजनीति की सीढ़ी बनकर रह जाएगा?
क्योंकि तस्वीर का दूसरा पहलू भी है।
संघर्ष समिति से जुड़े कई चेहरे चुनावी राजनीति में उतरे। किसी ने जीत हासिल की, किसी को हार मिली, किसी की राजनीतिक दिशा बदली और किसी की उम्मीद लॉटरी के फैसले पर आकर अटक गई।
यानी संघर्ष समिति ने चेहरे तो बहुत दिए, लेकिन अब सवाल उसके अपने भविष्य का है।
क्या संघर्ष समिति फिर खड़ी होगी या उसके योद्धा अपनी-अपनी राजनीतिक मंजिलों की ओर निकल चुके हैं?
कहीं ऐसा तो नहीं कि जिस आंदोलन ने नेताओं को जन्म दिया, वही नेता अब आंदोलन से आगे निकल गए हैं?
खैरथल की राजनीति में आने वाले दिनों में इस सवाल का जवाब बेहद महत्वपूर्ण होगा।
क्योंकि जिला मुख्यालय का मुद्दा अभी खत्म नहीं हुआ है। और अगर मुद्दा जिंदा है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि संघर्ष समिति भी जिंदा रहती है या सिर्फ उसकी राजनीतिक विरासत।
फिलहाल नगरपरिषद चुनाव ने इतना तो साफ कर दिया है कि संघर्ष समिति की कहानी में कई किरदार थे—कुछ चुनाव जीतकर आगे बढ़े, कुछ हारकर पीछे छूट गए और कुछ सत्ता की सीढ़ियां चढ़ गए।
अब अगला अध्याय जनता लिखेगी—
संघर्ष समिति के आंदोलन का या फिर उसके आंदोलन से निकले नेताओं की राजनीति का।
    user_Pramod Kewlani
    Pramod Kewlani
    Local News Reporter खैरथल, अलवर, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • *रोंझवाला बाबा मंदिर में दिव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब* अटेली 24 सितम्बर। (सतीश कुमार शर्मा) गांव बौचड़िया स्थित प्राचीन रोंझवाला बाबा मंदिर में बुधवार को दिव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। सुबह वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। समारोह में क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर को फूल-मालाओं, गेंदे के फूलों और झालरों से भव्य रूप से सजाया गया था। दिनभर मंदिर में भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और संतों के प्रवचन का दौर चलता रहा। इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई, जो ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर तक पहुंची। समारोह में संत-महात्माओं ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि समाज में धर्म, शांति और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देती है। *इस पावन अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे:* महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज, खोजाद्वाराचार्य रामरिछपालदास, महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद महाराज, उंकार दास महाराज, महंत अनिल पुरोहित महाराज, आचार्य प्रवीण शास्त्री घड़ीमहासर धाम, महामंडलेश्वर रामेश्वर दास महाराज, जिला उपायुक्त अनुपम अंजलि, महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव, पूर्व विधायक सीताराम यादव, पूर्व सरपंच कुलदीप यादव सहित समस्त ग्रामवासी। आयोजकों ने बताया कि रोंझवाला बाबा मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है और ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा और एकता का संदेश जाता है।
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    *रोंझवाला बाबा मंदिर में दिव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह, विशाल भंडारे में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब*

अटेली 24 सितम्बर। 
(सतीश कुमार शर्मा)
गांव बौचड़िया स्थित प्राचीन रोंझवाला बाबा मंदिर में बुधवार को दिव्य प्राण प्रतिष्ठा समारोह बड़ी श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। सुबह वैदिक मंत्रोच्चार एवं हवन-पूजन के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

समारोह में क्षेत्र के साथ-साथ दूर-दराज से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और बाबा के दरबार में माथा टेककर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर को फूल-मालाओं, गेंदे के फूलों और झालरों से भव्य रूप से सजाया गया था। दिनभर मंदिर में भजन-कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और संतों के प्रवचन का दौर चलता रहा।

इस अवसर पर मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें लगभग 5 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं द्वारा कलश यात्रा निकाली गई, जो ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर तक पहुंची।

समारोह में संत-महात्माओं ने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा केवल एक रस्म नहीं, बल्कि समाज में धर्म, शांति और सद्भाव की भावना को बढ़ावा देती है।

*इस पावन अवसर पर विशेष रूप से उपस्थित रहे:* महामंडलेश्वर स्वामी धर्मदेव जी महाराज, खोजाद्वाराचार्य रामरिछपालदास, महामंडलेश्वर स्वामी दिनेशानंद महाराज, उंकार दास महाराज, महंत अनिल पुरोहित महाराज, आचार्य प्रवीण शास्त्री घड़ीमहासर धाम, महामंडलेश्वर रामेश्वर दास महाराज, जिला उपायुक्त अनुपम अंजलि, महेंद्रगढ़ के विधायक कंवर सिंह यादव, पूर्व विधायक सीताराम यादव, पूर्व सरपंच कुलदीप यादव सहित समस्त ग्रामवासी।

आयोजकों ने बताया कि रोंझवाला बाबा मंदिर क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र है और ऐसे आयोजनों से समाज में सेवा और एकता का संदेश जाता है।
    user_सतीश कुमार
    सतीश कुमार
    Local News Reporter महेंद्रगढ़, महेंद्रगढ़, हरियाणा•
    4 hrs ago
  • किशनगढ़ बास के बासडा रोड पर स्थित कर्मचारी कॉलोनी के सामने वाली गली में शिवाजी महाराज के मंदिर में पिछले कई दिनों से चल रहे गणेश स्थापना कार्यक्रम का आज समापन हुआ इस मौके पर कॉलोनी वासियों द्वारा दिन में भंडारे का आयोजन किया गया और गणेश महाराज जी का विसर्जन भी किया गया इस मौके पर डीजे के साथ झांकी निकाली गई
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    किशनगढ़ बास के बासडा रोड पर स्थित कर्मचारी कॉलोनी के सामने वाली गली में शिवाजी महाराज के मंदिर में पिछले कई दिनों से चल रहे गणेश स्थापना कार्यक्रम का आज समापन हुआ इस मौके पर कॉलोनी वासियों द्वारा दिन में भंडारे का आयोजन किया गया और गणेश महाराज जी का विसर्जन भी किया गया इस मौके पर डीजे के साथ झांकी निकाली गई
    user_सुनील कान्त गोल्डी
    सुनील कान्त गोल्डी
    रिपोर्टर किशनगढ़ बास, अलवर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • बहरोड़ में नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा, शेरपुर के पास अनियंत्रित पिकअप पलटी, सर्विस लाइन पर खड़ी ईको को मारी टक्कर। नेशनल हाईवे पर गांव शेरपुर के पास सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया, जिससे हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार कोटपूतली की ओर से आ रही एक पिकअप अचानक अनियंत्रित होकर पलटते हुए सर्विस लाइन पर जा पहुंची। इसी दौरान पिकअप ने वहां सवारी के लिए खड़ी ईको गाड़ी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों वाहनों के चालकों को अस्पताल पहुंचाया।
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    बहरोड़ में नेशनल हाईवे पर बड़ा हादसा, शेरपुर के पास अनियंत्रित पिकअप पलटी, सर्विस लाइन पर खड़ी ईको को मारी टक्कर।
नेशनल हाईवे पर गांव शेरपुर के पास सुबह-सुबह बड़ा हादसा हो गया, जिससे हड़कंप मच गया।
जानकारी के अनुसार कोटपूतली की ओर से आ रही एक पिकअप अचानक अनियंत्रित होकर पलटते हुए सर्विस लाइन पर जा पहुंची। इसी दौरान पिकअप ने वहां सवारी के लिए खड़ी ईको गाड़ी को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों वाहनों के चालकों को अस्पताल पहुंचाया।
    user_NARESH Kumar Khanna
    NARESH Kumar Khanna
    Local News Reporter बहरोड़, अलवर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • नूंह में रोजगार के साथ विकास को गति, 3,991 श्रमिकों को मिला काम नूंह में वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीणों के लिए रोजगार और विकास का जरिया बन रही है। उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि सितंबर तक जिले में 3,991 श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया है, जिससे 35,902 मानव दिवस सृजित हुए और 142.58 लाख रुपये खर्च किए गए। योजना के तहत गांवों में रास्ते, जल संरक्षण और भूमि सुधार जैसे विकास कार्य किए जा रहे हैं। उपायुक्त ने अधिकारियों को पात्र ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार देने और कार्यों को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
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    नूंह में रोजगार के साथ विकास को गति, 3,991 श्रमिकों को मिला काम
नूंह में वीबी-जी राम जी योजना ग्रामीणों के लिए रोजगार और विकास का जरिया बन रही है। उपायुक्त अखिल पिलानी ने बताया कि सितंबर तक जिले में 3,991 श्रमिकों को काम उपलब्ध कराया गया है, जिससे 35,902 मानव दिवस सृजित हुए और 142.58 लाख रुपये खर्च किए गए। योजना के तहत गांवों में रास्ते, जल संरक्षण और भूमि सुधार जैसे विकास कार्य किए जा रहे हैं। उपायुक्त ने अधिकारियों को पात्र ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार देने और कार्यों को गुणवत्ता के साथ समय पर पूरा करने के निर्देश दिए।
    user_Mk
    Mk
    नूंह, नूंह, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • 10000 सैलरी के लिए जला दिया 24 करोड़ का कंपनी
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    10000 सैलरी के लिए जला दिया 24 करोड़ का कंपनी
    user_Manish Singh
    Manish Singh
    Voice of people मानेसर, गुरुग्राम, हरियाणा•
    18 hrs ago
  • सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन नारनौल, 24 सितंबर: (सतीश कुमार शर्मा) विभिन्न संगठनों द्वारा भीम आर्मी के तत्वावधान में महेंद्रगढ़ रोड स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टैच्यू प्रांगण में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। भीम आर्मी अध्यक्ष संदीप चेडवाल की अगुवाई और संघर्ष समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला गया। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति के नाम नारनौल के तहसीलदार लच्छी राम को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन लाजपत महाशय द्वारा किया गया। धरने को संबोधित करते हुए धरना प्रदर्शन के अध्यक्ष बिरदी चंद गोठवाल और भीम आर्मी के अध्यक्ष संदीप चेडवाल ने स्पष्ट कहा कि देश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक न्याय के बिना देश का लोकतंत्र अधूरा है । प्रमुख मांगें: महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसमें SC, ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए 'कोटे के अंदर कोटा' (सब-कोटा) लागू हो और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाए। मेडिकल कॉलेजों में 70% आरक्षण की बहाली: उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में समाप्त की गई SC/ST विद्यार्थियों की 70% आरक्षण व्यवस्था को विशेष अधिनियम बनाकर तत्काल पुनः लागू किया जाए। OBC समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आबादी के अनुपात में लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए। कार्यक्रम में गुरु रविदास महासभा के प्रधान बाबूलाल नारनोलिया, जगराम कालिया, सोमवीर आर्य और शेर सिंह बाछोदिया ने भी अपने विचार रखे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा। उपस्थित गण: भीम आर्मी की महासचिव प्रियंका, सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, भूपेंद्र नांगल सोडा, पूर्ण चंद, जिले सिंह, अमरनाथ सिरोहा, महावीर प्रसाद, अतर सिंह खिंची, दुष्यंत, रीना कुमारी, राकेश, धर्मपाल, संदीप, राहुल, पूर्व सरपंच बनवारी लाल, पूर्णमल, मुकेश बौद्ध, सुखवीर, सोमवीर कुमार, सुमेरसिंह गोठवाल, सोमवीर, सुनील, हरिराम सिरोहा, तुलसी राम, सुनील मिस्त्री, मनोज बौद्ध, संदीप बौद्ध, धर्मवीर, जोनी, मनीषा, सुनील, सुणा राम, अनूप सिंह, राजेश, यादराम, दीपक, महेश, प्रवेश, हजारीलाल खटावला, सीमा, राजबाला, निहालसिंह, राजकपूर, धर्मवीर, मनोज, रोशन, जोनी, सुमित, मनीष आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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    सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
सामाजिक न्याय और आरक्षण की मांगों को लेकर भीम आर्मी ने किया विशाल प्रदर्शन, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
नारनौल, 24 सितंबर: 
(सतीश कुमार शर्मा)
विभिन्न संगठनों द्वारा भीम आर्मी के तत्वावधान में महेंद्रगढ़ रोड स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टैच्यू प्रांगण में एक दिवसीय विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया गया। भीम आर्मी अध्यक्ष संदीप चेडवाल की अगुवाई और संघर्ष समिति के महासचिव एवं कबीर सामाजिक उत्थान संस्था के वाइस चेयरमैन बिरदी चंद गोठवाल की अध्यक्षता में आयोजित इस प्रदर्शन के बाद कार्यकर्ताओं द्वारा एक विशाल आक्रोश जुलूस निकाला गया। प्रदर्शन के अंत में राष्ट्रपति के नाम नारनौल के तहसीलदार लच्छी राम को ज्ञापन सौंपा गया। कार्यक्रम का सफल संचालन लाजपत महाशय द्वारा किया गया।
धरने को संबोधित करते हुए धरना प्रदर्शन के अध्यक्ष बिरदी चंद गोठवाल और भीम आर्मी के अध्यक्ष संदीप चेडवाल ने स्पष्ट कहा कि देश में दलितों, आदिवासियों, पिछड़ों और महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सामाजिक न्याय के बिना देश का लोकतंत्र अधूरा है ।
प्रमुख मांगें:
महिला आरक्षण, नारी शक्ति वंदन अधिनियम में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही इसमें SC, ST और OBC वर्ग की महिलाओं के लिए 'कोटे के अंदर कोटा' (सब-कोटा) लागू हो और स्थानीय निकायों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया जाए।
मेडिकल कॉलेजों में 70% आरक्षण की बहाली: उत्तर प्रदेश के कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर के मेडिकल कॉलेजों में समाप्त की गई SC/ST विद्यार्थियों की 70% आरक्षण व्यवस्था को विशेष अधिनियम बनाकर तत्काल पुनः लागू किया जाए।
OBC समाज का राजनीतिक प्रतिनिधित्व: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आबादी के अनुपात में लोकसभा और विधानसभाओं में उचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाए।
कार्यक्रम में गुरु रविदास महासभा के प्रधान बाबूलाल नारनोलिया, जगराम कालिया, सोमवीर आर्य और शेर सिंह बाछोदिया ने भी अपने विचार रखे। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो देशभर में उग्र आंदोलन किया जाएगा।
उपस्थित गण:
भीम आर्मी की महासचिव प्रियंका, सर्व अजा संघर्ष समिति के प्रधान चन्दन सिंह जालवान, भूपेंद्र नांगल सोडा, पूर्ण चंद, जिले सिंह, अमरनाथ सिरोहा, महावीर प्रसाद, अतर सिंह खिंची, दुष्यंत, रीना कुमारी, राकेश, धर्मपाल, संदीप, राहुल, पूर्व सरपंच बनवारी लाल, पूर्णमल, मुकेश बौद्ध, सुखवीर, सोमवीर कुमार, सुमेरसिंह गोठवाल, सोमवीर, सुनील, हरिराम सिरोहा, तुलसी राम, सुनील मिस्त्री, मनोज बौद्ध, संदीप बौद्ध, धर्मवीर, जोनी, मनीषा, सुनील, सुणा राम, अनूप सिंह, राजेश, यादराम, दीपक, महेश, प्रवेश, हजारीलाल खटावला, सीमा, राजबाला, निहालसिंह, राजकपूर, धर्मवीर, मनोज, रोशन, जोनी, सुमित, मनीष आदि अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
    user_सतीश कुमार
    सतीश कुमार
    Local News Reporter महेंद्रगढ़, महेंद्रगढ़, हरियाणा•
    5 hrs ago
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