अति पिछड़ा एकीकरण महाअभियान के राष्ट्रीय संयोजक अनिल कुमार प्रजापति ने वर्तमान जाति जनगणना के पहले चरण के लिए एक 'जन-जागरण' अभियान शुरू किया है, जिसमें उन्होंने 17 अतिपिछड़ी जातियों को आगाह किया है। प्रजापति ने दावा किया कि इन जातियों के संवैधानिक अधिकारों को लूटने की एक गहरी साजिश चल रही है, जिसके तहत उन्हें 2027 की जाति जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही है। अनिल प्रजापति ने चेतावनी दी कि राजनीतिक दलों के टिकट दलाल और कुछ स्वयंभू धार्मिक नेता व उनके चेले अफवाहें फैला रहे हैं कि 'SC में जाने से नीची जात बन जाओगे'। उन्होंने इसे 'झूठ' बताते हुए स्पष्ट किया कि SC का अर्थ 'संवैधानिक अधिकार' है, न कि 'नीची-ऊंची जात'। उन्होंने इसे 'दुश्मन की नई चाल' करार दिया कि 'सामंतवादी IT सेल' फर्जी आईडी बनाकर प्रचार कर रहे हैं कि 'हम कुम्हार/निषाद आदि वंचित अतिपिछड़ी जातियों के हैं, हमें SC नहीं चाहिए'। इस दुष्प्रचार का मकसद 2027 की जाति जनगणना में इन जातियों की गिनती कम करना है, ताकि उन्हें SC का दर्जा न मिले और आरक्षण का कोटा कम रहे, जिससे आपसी फूट पैदा की जा सके। प्रजापति ने 1931 के साइमन कमीशन की गलती न दोहराने का आह्वान किया, जब अशिक्षा के कारण कई जातियाँ SC सूची में शामिल होने से छूट गई थीं। उन्होंने कहा कि आज EWS वर्ग 10% आरक्षण ले गया, जबकि ये जातियाँ 'इज्जत' के नाम पर 0% पर बैठी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूर्णतः संवैधानिक है, जिसके प्रमाण के रूप में बताया गया कि 15-12-2025 को लखनऊ में नियमानुसार उनकी अपील दाखिल है। भारत सरकार ने 28-05-2025 को उत्तर प्रदेश सरकार को एक पत्र भी भेजा है, और संत कबीर नगर के जिलाधिकारी 27-02-2025 को इस संबंध में आदेश दे चुके हैं। प्रजापति ने जोर देकर कहा कि अब यह बात फाइलों में नहीं, बल्कि घर आने वाले गणनाकर्मी की कलम में है। इसके मद्देनजर, उन्होंने 2027 में सभी अतिपिछड़ी जातियों से अपील की कि वे गणनाकर्मी के सामने 'सीना ठोककर' अपनी जाति जैसे 'कुम्हार/कहार/निषाद...' बताते हुए श्रेणी 'अनुसूचित जाति' और उप-श्रेणी 'शिल्पकार' लिखवाएँ, क्योंकि 'जो गणना में लिखा जाएगा, वही आपका वजूद होगा'। अनिल प्रजापति ने इस अपील पत्र को एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति भी साझा की है। उन्होंने कहा कि गणनाकर्मी को 15-12-2025 से लखनऊ में चल रहे केस का हवाला देकर यह कहने से कि 'SC लिखो वरना कोर्ट जाऊंगा', वह डर से SC लिखेगा। गाँव की चौपालों में इस लेटर की फोटोकॉपियाँ बाँटने और जनसमर्थन व चंदा इकट्ठा करने की भी अपील की गई है। तहसील और DM कार्यालयों में '103 पेज की अपील पड़ी है, SC सर्टिफिकेट जारी करो' कहकर लेखपालों पर दबाव बनाने का आह्वान किया गया है, और फेसबुक/ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #1931CensusSC, #CasteCensus2027, #AnilPrajapati हैशटैग के साथ इस फोटो को डालने से दिल्ली तक अपनी आवाज पहुँचाने का निर्देश दिया गया है। अंत में, अनिल प्रजापति ने उन 'गद्दारों को खुला ऑफर' दिया जो टिकट के लिए समाज बेच रहे हैं या 'टुकड़े-टुकड़े गैंग चला रहे हैं', कि वे खुशी से खुद को 'जनरल' में लिखवा लें, लेकिन 17 जातियों के बच्चों का भविष्य खराब न करें। यह अपील 'जय भीम जय संविधान जय 17 जाति एकता' के दृढ़ आह्वान के साथ समाप्त होती है, जिसमें कहा गया है कि 'सीना ठोककर लड़ने वाले निर्णायक जंग जीतते हैं, बकिया कायरों की उम्र बीत जाती है दूसरों की बुराई में'।
अति पिछड़ा एकीकरण महाअभियान के राष्ट्रीय संयोजक अनिल कुमार प्रजापति ने वर्तमान जाति जनगणना के पहले चरण के लिए एक 'जन-जागरण' अभियान शुरू किया है, जिसमें उन्होंने 17 अतिपिछड़ी जातियों को आगाह किया है। प्रजापति ने दावा किया कि इन जातियों के संवैधानिक अधिकारों को लूटने की एक गहरी साजिश चल रही है, जिसके तहत उन्हें 2027 की जाति जनगणना में अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा मिलने से रोकने की कोशिश की जा रही है। अनिल प्रजापति ने चेतावनी दी कि राजनीतिक दलों के टिकट दलाल और कुछ स्वयंभू धार्मिक नेता व उनके चेले अफवाहें फैला रहे हैं कि 'SC में जाने से नीची जात बन जाओगे'। उन्होंने इसे 'झूठ' बताते हुए स्पष्ट किया कि SC का अर्थ 'संवैधानिक अधिकार' है, न कि 'नीची-ऊंची जात'। उन्होंने इसे 'दुश्मन की नई चाल' करार दिया कि 'सामंतवादी IT सेल' फर्जी आईडी बनाकर प्रचार कर रहे हैं कि 'हम कुम्हार/निषाद आदि वंचित अतिपिछड़ी जातियों के हैं, हमें SC नहीं चाहिए'। इस दुष्प्रचार का मकसद 2027 की जाति जनगणना में इन जातियों की गिनती कम करना है, ताकि उन्हें SC का दर्जा न मिले और आरक्षण का कोटा कम रहे, जिससे आपसी फूट पैदा की जा सके। प्रजापति ने 1931 के साइमन कमीशन की गलती न दोहराने का आह्वान किया, जब अशिक्षा के कारण कई जातियाँ SC सूची में शामिल होने से छूट गई थीं। उन्होंने कहा कि आज EWS वर्ग 10% आरक्षण ले गया, जबकि ये जातियाँ 'इज्जत' के नाम पर 0% पर बैठी हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष पूर्णतः संवैधानिक है, जिसके प्रमाण के रूप में बताया गया कि 15-12-2025 को लखनऊ में नियमानुसार उनकी अपील दाखिल है। भारत सरकार ने 28-05-2025 को उत्तर प्रदेश सरकार को एक पत्र भी भेजा है, और संत कबीर नगर के जिलाधिकारी 27-02-2025 को इस संबंध में आदेश दे चुके हैं। प्रजापति ने जोर देकर कहा कि अब यह बात फाइलों में नहीं, बल्कि घर आने वाले गणनाकर्मी की कलम में है। इसके मद्देनजर, उन्होंने 2027 में सभी अतिपिछड़ी जातियों से अपील की कि वे गणनाकर्मी के सामने 'सीना ठोककर' अपनी जाति जैसे 'कुम्हार/कहार/निषाद...' बताते हुए श्रेणी 'अनुसूचित जाति' और उप-श्रेणी 'शिल्पकार' लिखवाएँ, क्योंकि 'जो गणना में लिखा जाएगा, वही आपका वजूद होगा'। अनिल प्रजापति ने इस अपील पत्र को एक 'हथियार' की तरह इस्तेमाल करने की रणनीति भी साझा की है। उन्होंने कहा कि गणनाकर्मी को 15-12-2025 से लखनऊ में चल रहे केस का हवाला देकर यह कहने से कि 'SC लिखो वरना कोर्ट जाऊंगा', वह डर से SC लिखेगा। गाँव की चौपालों में इस लेटर की फोटोकॉपियाँ बाँटने और जनसमर्थन व चंदा इकट्ठा करने की भी अपील की गई है। तहसील और DM कार्यालयों में '103 पेज की अपील पड़ी है, SC सर्टिफिकेट जारी करो' कहकर लेखपालों पर दबाव बनाने का आह्वान किया गया है, और फेसबुक/ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर #1931CensusSC, #CasteCensus2027, #AnilPrajapati हैशटैग के साथ इस फोटो को डालने से दिल्ली तक अपनी आवाज पहुँचाने का निर्देश दिया गया है। अंत में, अनिल प्रजापति ने उन 'गद्दारों को खुला ऑफर' दिया जो टिकट के लिए समाज बेच रहे हैं या 'टुकड़े-टुकड़े गैंग चला रहे हैं', कि वे खुशी से खुद को 'जनरल' में लिखवा लें, लेकिन 17 जातियों के बच्चों का भविष्य खराब न करें। यह अपील 'जय भीम जय संविधान जय 17 जाति एकता' के दृढ़ आह्वान के साथ समाप्त होती है, जिसमें कहा गया है कि 'सीना ठोककर लड़ने वाले निर्णायक जंग जीतते हैं, बकिया कायरों की उम्र बीत जाती है दूसरों की बुराई में'।
- विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने दावा किया है कि शीर्ष प्रबंधन के एकतरफा और अव्यावहारिक फैसलों ने राज्य की बिजली व्यवस्था को गंभीर संकट में डाल दिया है। राजधानी लखनऊ समेत पूरे प्रदेश में उपभोक्ता बिजली संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं, जबकि बिजली कर्मी अत्यधिक कार्यभार, संसाधनों की कमी और उत्पीड़नात्मक नीतियों के बीच काम करने को विवश हैं। संघर्ष समिति के केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि पहले संबंधित जेई या एसडीओ किसी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था के लिए सीधे जवाबदेह होते थे, जिससे उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान त्वरित होता था। हालांकि, वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद कार्यों को विभिन्न विंगों में बांट दिया गया है, जिससे जवाबदेही लगभग खत्म हो गई है। उपभोक्ता अब यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनकी समस्या के लिए कौन सा अधिकारी जिम्मेदार है। नई व्यवस्था ने शिकायत निस्तारण को केवल 1912 हेल्पलाइन और ऑनलाइन पोर्टलों तक सीमित कर दिया है, जहाँ शिकायतें तो दर्ज होती हैं लेकिन उनका समयबद्ध समाधान नहीं हो पाता। गलत बिलिंग, मीटर संबंधी समस्याएं, लंबे विद्युत अवरोध और तकनीकी खामियों के कारण आम जनता को भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। समिति के पदाधिकारी ई0 राम करण ने बताया कि ग्राउंड लेवल पर समन्वय पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जिससे छोटे-छोटे कार्यों के लिए उपभोक्ताओं को कई स्तरों पर भटकना पड़ता है। संघर्ष समिति ने आरोप लगाया है कि शीर्ष प्रबंधन जमीनी वास्तविकताओं से पूरी तरह कटा हुआ है और कर्मचारियों तथा अभियंताओं के अनुभवों एवं सुझावों की उपेक्षा करते हुए 'तुगलकी निर्णय' थोप रहा है। वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग लागू करने के साथ-साथ 20-25 वर्षों का अनुभव रखने वाले संविदा कर्मियों को भी काम से बाहर कर दिया गया है, जिसके दुष्परिणाम अब विद्युत व्यवस्था और उपभोक्ताओं दोनों को भुगतने पड़ रहे हैं। समिति के पदाधिकारी संजय यादव ने बताया कि भीषण गर्मी में उत्तर प्रदेश की विद्युत मांग देश में सर्वाधिक स्तर पर पहुँच चुकी है। ऐसे में प्रदेश के बिजली कर्मचारी और अभियंता माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी के निर्देशों के अनुसार उपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ दिन-रात कार्य कर रहे हैं। इसके बावजूद पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन कर्मचारियों और अभियंताओं से संवाद करने को भी तैयार नहीं है। समिति के पदाधिकारी संतोष गुप्ता ने कहा कि बिजली व्यवस्था में सुधार हेतु कर्मचारियों एवं अभियंताओं द्वारा दिए गए व्यावहारिक और सकारात्मक सुझावों पर विचार करने के बजाय प्रबंधन लगातार उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ कर रहा है, जिससे कर्मचारियों का मनोबल गिर रहा है और विद्युत व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग की विफल व्यवस्था की तत्काल समीक्षा कर उसे वापस लिया जाए। साथ ही, अनुभवी संविदा कर्मियों की सेवाएँ पुनः बहाल की जाएँ, सभी उत्पीड़नात्मक कार्यवाहियाँ समाप्त की जाएँ, और कर्मचारियों एवं अभियंताओं को विश्वास में लेकर एक व्यावहारिक व जवाबदेह व्यवस्था लागू की जाए। इसी क्रम में, आज संत कबीर नगर में आयोजित विरोध प्रदर्शन में ई0 राम करण, ई0 भागीरथी प्रसाद, सहायक लेखाकार संतोष गुप्ता, कार्यकारी सहायक अमरनाथ यादव, दिलीप सिंह, नारायण चंद्र चौरसिया, संजय यादव, सूरज प्रजापति, अशोक कुमार समेत कई अन्य विद्युत कर्मी मौजूद रहे।1
- संतकबीरनगर जिले के थाना बखिरा क्षेत्र में एक युवती के साथ छेड़खानी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद संतकबीरनगर पुलिस ने इस मामले का तत्काल संज्ञान लिया है। पुलिस ने मामले पर त्वरित कार्रवाई करते हुए आवश्यक विधिक प्रक्रिया पूरी की। इस कार्रवाई के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर ने मीडिया को जानकारी देते हुए पुलिस द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया।1
- संतकबीरनगर जिले में ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन ने एक ट्रांसपोर्ट कंपनी पर ट्रक मालिकों और चालकों के आर्थिक शोषण का गंभीर आरोप लगाया है। यूनियन ने इस संबंध में जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा है, जिसमें कहा गया है कि कंपनी मनमाने तरीके से नियम लागू कर रही है, जिससे स्थानीय ट्रक संचालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यूनियन पदाधिकारियों के अनुसार, ट्रक मालिकों और चालकों को उचित भुगतान नहीं मिल पा रहा है और उन्हें कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन का आरोप है कि बार-बार शिकायतें करने के बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है, जिससे ट्रक संचालकों में रोष बढ़ता जा रहा है। ट्रक ऑपरेटर्स यूनियन ने जिलाधिकारी से इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि ट्रक संचालकों के हितों की रक्षा हो सके। यूनियन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे। फिलहाल, यूनियन प्रशासन से मामले में उचित हस्तक्षेप की अपील कर रही है।1
- यह पोस्ट पूर्णतः भक्तिमय है, जिसमें बार-बार 'जय महाकाल जी' और 'जय माता दी' का उद्घोष किया गया है। यह भगवान महाकाल और माता देवी के प्रति गहरी श्रद्धा और भक्ति को दर्शाता है, जिसमें प्रणाम सूचक इमोजी का भी प्रयोग किया गया है।1
- Post by Narbada Rajwade1
- रुद्रपुर, देवरिया स्थित प्रसिद्ध दूधेश्वर नाथ मंदिर से सूर्यांश न्यूज़ 24 द्वारा सीधा प्रसारण किया जा रहा है। चैनल मंदिर के कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण कर रहा है।1
- अम्बेडकरनगर के कटेहरी विकासखंड स्थित खड़हरा गौशाला की व्यवस्थाओं को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। गौवंशों की देखभाल, चारे की उपलब्धता, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, जिसके चलते इनकी गहन जांच की मांग उठ रही है। इस मामले में करणी सेना से जुड़े अजय सिंह ने प्रशासन से एक निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की अपील की है। वहीं, ग्रामीणों का भी कहना है कि गौ संरक्षण के लिए शासन से प्राप्त होने वाली धनराशि के उपयोग की भी विस्तृत समीक्षा की जानी चाहिए। बताया जा रहा है कि सोशल मीडिया पर गौशाला से संबंधित एक वीडियो वायरल हो रहा है, जो लगभग दो दिन पुराना है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासन द्वारा की जाने वाली जांच रिपोर्ट का अभी इंतजार किया जा रहा है।1