चित्तौड़गढ़ में फर्टिलाइज़र प्लांट पर बढ़ा विवाद: जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों का उग्र विरोध चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है। भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है। आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है। पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन? पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है। भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है। 39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है। प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं” जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया। ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है। ‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई। “हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए” कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।” पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। “सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। कंपनी का पक्ष कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है। उग्र आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार? चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है? अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
चित्तौड़गढ़ में फर्टिलाइज़र प्लांट पर बढ़ा विवाद: जनसुनवाई में हजारों ग्रामीणों का उग्र विरोध चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चंदेरिया क्षेत्र में प्रस्तावित हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के फर्टिलाइज़र प्लांट को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। 10 मार्च 2026 को आजोलिया का खेड़ा स्थित सगरा माता मंदिर प्रांगण में आयोजित पर्यावरणीय जनसुनवाई के दौरान हजारों ग्रामीणों ने एकजुट होकर परियोजना का तीखा विरोध किया। प्रभावित गांवों से पहुंचे लोगों ने एक स्वर में कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, जल स्रोतों और कृषि भूमि के लिए खतरा बने। ग्रामीणों का आरोप है कि पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त होने से पहले ही संयंत्र का बड़ा हिस्सा तैयार कर दिया गया है, ऐसे में जनसुनवाई की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कई ग्रामीणों ने इसे “जनसुनवाई नहीं, केवल औपचारिकता” बताया। उनका कहना है कि जब केंद्र स्तर पर पर्यावरण मंजूरी बार-बार अटकी हुई है, तब इस तरह की जनसुनवाई आयोजित करना केवल औपचारिकता निभाने और नियमों को दरकिनार करने की कोशिश प्रतीत होता है। भारी सुरक्षा के बीच हुई जनसुनवाई जनसुनवाई के दौरान प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की थी। अतिरिक्त जिला पुलिस अधीक्षक, पुलिस उपाधीक्षक, निरीक्षक स्तर के अधिकारी, सैकड़ों पुलिसकर्मी, रैपिड एक्शन टास्क फोर्स के जवान तथा निजी सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे। इसके बावजूद आजोलिया का खेड़ा, पुठोली, बिलिया, नगरी, धोरडिया, मूंगा का खेड़ा, सुवानिया और आसपास के आठ-दस गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई स्थल पर पहुंचे और परियोजना के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। ग्रामीणों का आरोप है कि यह जनसुनवाई वास्तविक जनमत जानने की प्रक्रिया नहीं बल्कि पहले से तय परियोजना को औपचारिक मंजूरी दिलाने का प्रयास है। आरोप: बिना मंजूरी 70 प्रतिशत निर्माण जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने दावा किया कि प्रस्तावित फर्टिलाइज़र संयंत्र का लगभग 70 प्रतिशत निर्माण पहले ही किया जा चुका है, जबकि परियोजना को अभी तक पर्यावरणीय स्वीकृति प्राप्त नहीं हुई है। ग्रामीणों का सवाल है कि यदि निर्माण पहले ही हो चुका है तो जनसुनवाई का उद्देश्य क्या रह जाता है। उनके अनुसार यह पूरी प्रक्रिया “सुनवाई” से अधिक “औपचारिकता” बनकर रह गई है। पर्यावरण कानूनों का संभावित उल्लंघन? पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट के लिए पहले पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट तैयार होती है, इसके बाद सार्वजनिक जनसुनवाई, विशेषज्ञ समिति की समीक्षा और अंत में पर्यावरणीय मंजूरी दी जाती है। भारत में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रमुख कानूनों में Environment Protection Act 1986 और EIA Notification 2006 शामिल हैं। इन नियमों के अनुसार किसी भी बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य पर्यावरणीय मंजूरी मिलने के बाद ही शुरू किया जा सकता है। यदि इससे पहले निर्माण किया जाता है तो यह गंभीर नियम उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए देश में National Green Tribunal (NGT) की स्थापना की गई है, जो पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन पर परियोजनाओं को रोकने या मुआवजा लगाने जैसे आदेश दे सकता है। 39 लोगों ने रखी अपनी बात, अधिकांश ने किया विरोध जनसुनवाई के दौरान कुल 39 लोगों ने अपनी बात रखी, जिनमें से 33 लोगों ने प्रस्तावित संयंत्र का विरोध किया, जबकि 6 लोगों ने परियोजना के समर्थन में अपनी राय व्यक्त की। विरोध करने वाले ग्रामीणों ने कहा कि क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण की समस्या गंभीर हो चुकी है और नया संयंत्र लगने से स्थिति और खराब हो सकती है। प्रदूषण के आरोप: पशुओं की मौत और बढ़ती बीमारियां जनसुनवाई में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चंदेरिया क्षेत्र में पहले से संचालित औद्योगिक इकाइयों के कारण वायु और जल प्रदूषण का स्तर काफी बढ़ चुका है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में जहरीली गैसों और रासायनिक प्रभाव के कारण हजारों गाय-भैंसों की मौत हो चुकी है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र में कैंसर, लकवा, त्वचा रोग और अन्य गंभीर बीमारियों के मामले बढ़ रहे हैं। कुछ किसानों ने दावा किया कि प्रदूषण के कारण उनकी जमीन की उर्वरता कम हो रही है और कई कुओं तथा तालाबों का पानी पीने योग्य नहीं रहा। ग्रामीणों की चुनौती: “अधिकारी हमारे गांव का पानी पीकर दिखाएं” जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने प्रशासन और कंपनी अधिकारियों को खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि क्षेत्र का पानी सुरक्षित है तो अधिकारी गांव के कुओं और तालाबों से लाया गया पानी पीकर दिखाएं। ग्रामीणों के अनुसार इस चुनौती को स्वीकार करने के लिए कोई भी अधिकारी आगे नहीं आया। ग्राम सभाओं ने दर्ज कराया विरोध प्रस्ताव आजोलिया का खेड़ा और पुठोली ग्राम पंचायतों द्वारा आयोजित विशेष ग्राम सभाओं में पारित विरोध प्रस्ताव को भी जनसुनवाई के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। ग्रामीणों का कहना है कि इन प्रस्तावों से स्पष्ट है कि प्रभावित गांवों की सामूहिक राय इस परियोजना के खिलाफ है। ‘प्रायोजित समर्थन’ के आरोप जनसुनवाई के दौरान कुछ ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन पर यह आरोप भी लगाया कि विरोध को कम दिखाने के लिए कुछ लोगों को पैसे देकर समर्थन में बोलने के लिए खड़ा किया गया। इस आरोप को लेकर कार्यक्रम स्थल पर कुछ समय के लिए तनावपूर्ण स्थिति भी बन गई। “हमें विकास नहीं, सुरक्षित जीवन चाहिए” कंपनी की ओर से बताया गया कि लगभग 2700 करोड़ रुपये के निवेश से बनने वाले इस संयंत्र से हजारों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकता है और किसानों को उर्वरक उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। हालांकि ग्रामीणों ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें ऐसा विकास स्वीकार नहीं जो उनके स्वास्थ्य, पशुधन और कृषि भूमि के लिए खतरा बन जाए। ग्रामीणों का कहना था कि यदि नया संयंत्र स्थापित होता है तो क्षेत्र में प्रदूषण और बढ़ने का खतरा है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें रोजगार या विकास के नाम पर ऐसा उद्योग स्वीकार नहीं जो उनके जीवन, जल, जंगल और जमीन के लिए खतरा बने। उनका कहना था—“हमें विकास नहीं, शुद्ध हवा और पानी चाहिए।” पहले भी विवाद में रहा प्रोजेक्ट यह परियोजना पहले भी विवादों में रह चुकी है। पूर्व में राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित दौरे और भूमिपूजन कार्यक्रम को भी विवाद के बाद रद्द करना पड़ा था। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय भी परियोजना से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई थी। “सुनवाई का अधिकार” और प्राकृतिक न्याय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यावरणीय परियोजनाओं में जनसुनवाई केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं होती, बल्कि यह नागरिकों के “सुनवाई के अधिकार” से जुड़ी होती है। भारत के संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के आधार पर प्राकृतिक न्याय का सिद्धांत लागू होता है, जिसमें दोनों पक्षों को सुनने का सिद्धांत शामिल है। इसका उद्देश्य किसी भी न्यायिक या प्रशासनिक निर्णय में निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यदि किसी परियोजना में जनसुनवाई से पहले ही निर्माण हो चुका हो तो पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। कंपनी का पक्ष कंपनी की ओर से जारी प्रेस नोट में दावा किया गया कि जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने रोजगार, कौशल विकास, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास से जुड़े सुझाव दिए तथा परियोजना को क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। हालांकि विरोध कर रहे ग्रामीणों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि वास्तविक स्थिति को दबाने की कोशिश की जा रही है। उग्र आंदोलन की चेतावनी क्षेत्र के युवाओं और ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि इस विवादित जनसुनवाई के आधार पर परियोजना को मंजूरी दी गई तो व्यापक जनआंदोलन शुरू किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि वे अपने गांवों के अस्तित्व और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की रक्षा के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। बड़ा सवाल: पर्यावरण पहले या औद्योगिक विस्तार? चित्तौड़गढ़ में उठे इस विवाद ने एक बड़ा प्रश्न खड़ा कर दिया है—क्या औद्योगिक विकास के नाम पर पर्यावरणीय नियमों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं को नजरअंदाज किया जा सकता है? अब निगाहें प्रशासन, पर्यावरण मंत्रालय और न्यायिक संस्थाओं पर हैं कि वे जनसुनवाई में उठे सवालों और आरोपों की जांच कर क्या निर्णय लेते हैं।
- चित्तौड़गढ़,16 अप्रैल 2026 । राजस्थान पुलिस का 77 वां स्थापना दिवस गुरुवार को पुलिस लाइन में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सराहनीय कार्य करने पर 130 पुलिसकर्मियों का सम्मान किया गया। पौधारोपण व रक्तदान शिविर सहित अन्य कई कार्यक्रम आयोजित हुए। पुलिस अधीक्षक श्री मनीष त्रिपाठी सहित जिले के कई पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे। पुलिस स्थापना दिवस पर आयोजित परेड का निरीक्षण श्री मनीष त्रिपाठी ने किया, परेड कमांडर अनिल पांडे संचित निरीक्षक के नेतृत्व में सलामी दी गई। पुलिस अधीक्षक ने राजस्थान पुलिस दिवस पर मौजूद पुलिसकर्मियों को शुभकामनाएं और बधाई दी। पुलिस विभाग में कर्तव्य निष्ठा एवं सराहनीय सेवाओं के लिए 10 वर्ष की लगातार बेदाग सेवा पूर्ण करने पर जिले के 20 पुलिसकर्मियों सर्वोत्तम सेवा चिन्ह तथा 54 पुलिसकर्मियों को अति उत्तम सेवा चिन्ह व 56 पुलिस कर्मी को उत्तम सेवा चिन्ह तथा प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। पुलिस स्थापना दिवस के अवसर पर पुलिस लाइन परिसर में पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें अधिकारियों एवं कार्मिकों द्वारा उत्साहपूर्वक भाग लेकर विभिन्न प्रकार के पौधे लगाए गए। इसी क्रम में जनसेवा एवं मानवता के प्रति समर्पण की भावना को प्रदर्शित करते हुए पुलिस लाइन में रक्तदान शिविर का आयोजन किया जिसमें पुलिस अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए 34 यूनिट रक्तदान किया। उल्लेखनीय है कि प्रत्येक वर्ष राजस्थान में पुलिस के समस्त विभागों द्वारा 16 अप्रैल को राजस्थान पुलिस स्थापना दिवस मनाया जाता है। 16 अप्रैल 1949 को सभी रियासतों की पुलिस ने विलीनीकरण करके राजस्थान पुलिस की स्थापना की थी। पुलिस अधीक्षक श्री मनीष त्रिपाठी ने इस अवसर पर कहा कि राजस्थान पुलिस अपनी गौरवशाली परंपराओं के अनुरूप कानून व्यवस्था शांति एवं सद्भाव को बनाए रखने के साथ हिंसा और अपराध की रोकथाम के लिए संकल्पबद्ध होकर कार्य कर रही है। पुलिस के जवानों ने नागरिकों की जान माल की सुरक्षा के लिए अनेक अवसरों पर त्याग एवं बलिदान के अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किए हैं। पुलिस की कार्य प्रणाली में निरंतर सुधार लाने के साथ ही आम नागरिकों के प्रति संवेदनशीलता के साथ कार्य कर पुलिस और निरंतर जनमित्र की भूमिका निभाने के लिए तत्पर है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मी अपने ध्येय वाक्य आमजन में विश्वास और अपराधियों में डर को ध्यान में रखकर सदैव नागरिकों की सेवा के लिए तत्पर रहें। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्री मनीष त्रिपाठी के अलावा एएसपी सरिता सिंह , एएसपी भगवत सिंह ही़गड़ सहित जिले के पुलिस उप अधीक्षक व कई थानाधिकारियों के साथ पुलिस कर्मी उपस्थित थे। पुलिस दिवस की पूर्व संध्या पर बुधवार को पुलिस लाइन में पुलिस के जवानों अधिकारियों व परिवार के सदस्यों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें पुलिसकर्मी के बच्चों ने अपनी प्रस्तुतियों से वहां उपस्थित सभी लोगों व अधिकारियों का मन मोह लिया। इसी तरह से विभिन्न परीक्षाओं में बेहतर नंबर प्राप्त करने वाले बच्चों, मेधावी छात्रों व खेलकूद प्रतियोगिता में पुरस्कार प्राप्त को भी सम्मानित किया गया। जिन्हें पुलिस अधीक्षक ने मोमेंटो व प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया।1
- Post by DS7NEWS NETWORK1
- 🌹🙏SRI LAKSHMINATH ♥️ BHAGVAN SIV ♥️ SANKAR JI VASAKRAJ ♥️ MAHARAJ GOVIND SAWARIYA SETH 🌺 🙏🏽 ♥️ JI AAPKI ♥️ 🙏🏽 JAY HO ♥️ 🙏🏽 SDA SARVDA AAP HI AAP HO HARI OM 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 🌹 🌷 🙏🏽 🕉 NMO BHAGVATE VASUYDEVAY HARI 🕉 🌹 🌷 🙏🏽 🕉 SIVAY NAMAH ♥️⚘️1
- 50 बेड की सुविधा मिलेगी, विधायक बोले-जल्द मिलेगा नवीन अस्पताल भवन। बेगूं। विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने बुधवार को उप जिला अस्पताल में दो नए वार्डों का लोकार्पण किया। इन वार्डों के शुरू होने से अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं का विस्तार होगा और क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी। उप जिला अस्पताल में ये नव-निर्मित वार्ड डीएमएफटी (जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट) फंड से तैयार किए गए हैं। इन वार्डों में 50 बेड की सुविधा उपलब्ध होगी । विधायक डॉ. धाकड़ ने इस अवसर पर कहा कि सरकार जनता को अच्छी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में लगातार कार्य कर रही है। उप जिला अस्पताल का नया भवन भी शीघ्र ही बनकर तैयार होगा, जिससे मरीजों को और अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी। विधायक ने क्षेत्र के विकास कार्यों की जानकारी देते हुए यह भी कहा कि प्रदेश की भजनलाल शर्मा सरकार में विकास के लिए बजट की कोई कमी नहीं है। लोकार्पण के बाद विधायक डॉ. धाकड़ ने अस्पताल का निरीक्षण किया और भर्ती मरीजों से उनकी स्वास्थ्य स्थिति व मिल रही सुविधाओं के बारे में चर्चा की। विधायक ने इसके बाद अधिकारियों की बैठक ली और आवश्यक निर्देश भी दिए ।4
- Post by Bharu jaat duriya1
- Post by Dev karan Mali1
- छोटी सादड़ी खंडेला मार्ग पर सगस बावजी के कलश स्थापित करने पर नगर में एक भव्य जुलुस निकाला गया जिसमें कई श्रद्धालुओं ने भाग लिया नाचते गाते इस जुलूस की शोभा बढ़ाने के लिए ऊंट गाड़ी घोड़ा आदि जुलूस में कलश यात्रा की शोभा बढ़ा रहे थे तेज गर्मी के बावजूद काफी उत्साह बना रहा लोगों ने जगह-जगह पर जुलूस का भव्य स्वागत भी किया पानी की व्यवस्था भी की4
- बेगूं - एडीएम रावतभाटा विनोद मल्होत्रा की अध्यक्षता में बुधवार 15 अप्रैल 2026 को पंचायत समिति सभागार बेगूं में अधिकारियों की बैठक लेकर फ्लैगशिप योजनाओं, विभागीय योजनाओं, बजट घोषणाओं की समीक्षा की और योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने सहित आवश्यक दिशा निर्देश दिए। उपखंड अधिकारी अंकित सामरिया ने बताया कि बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर ने समस्त ग्राम पंचायतों में स्थित सामुदायिक स्वच्छता परिसर में पानी एवं सफाई व्यवस्था हेतु विकास अधिकारी पंचायत समिति बेगूं को निर्देशित किया गया। पुलिस उप अधीक्षक बेगूं को क्षेत्र में शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के साथ ही बेगूं शहर में ट्रैफिक समस्या को दुरुस्त करने हेतु निर्देशित किया । तहसीलदार बेगूं एवं समस्त भू.अभि. निरीक्षक को फार्मर रजिस्ट्री से शेष रहे किसानों के रजिस्ट्रेशन हेतु एवं शेष रही पत्थरगढी को जल्द ही पूर्ण कर उपखण्ड अधिकारी बेगूं को रिपोर्ट भिजवाने के साथ ही पीडी पालना रिपोर्ट एवं 251 ए नवीन रास्तों के प्रस्ताव भिजवाने हेतु निर्देशित किया। अधिशाषी अभियंता एवीवीएनएल बेगूं द्वारा बताया गया कि कुसुम सी योजना के तहत 7 प्लान्ट है जिनकी क्षमता 17.39 मेगावाट है जिसमें से 3 प्लान्ट 8.19 मेगावाट के चालू कर दिये है। कुसुम ए के तहत 10 प्लान्ट है जिनकी क्षमता 15 मेगावाट है जिनमें से 2 पर कार्य प्रगति पर है। पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत 232 प्लान्ट स्थापित किये जा चुके है। एसडीएम द्वारा स्मार्ट मीटर के संबंध अपेक्षानुरूप प्रगति लाने हेतु अधिशाषी अभियंता एवीवीएनएल बेगूं एवं समस्त विभागध्यक्षों को अपने घरों पर सोलर पैनल लगवाने हेतु एवं आमजन को सोलर पेनल के संबंध में अवगत करवाने हेतु निर्देशित किया। सहायक अभियंता जन स्वा.अभि. विभाग बेगूं द्वारा बताया गया कि अमृत 2.0 के तहत 3 नये उच्च जलाशय को निर्माण होना है जिसमें से 1 का निर्माण कार्य चल रहा है। जिसके संबंध में एसडीएम द्वारा नियत समय में कार्य पूर्ण करने के साथ ही सहायक अभियंता को निरीक्षण दैनिक चार्ट तैयार कर पंचायतों में खराब हेडपंपों को सही करवाने एवं ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण जलापूर्ति हेतु नियमित रूप से सैम्पल लेने हेतु निर्देशित किया। शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्र बेगूं में क्षतिग्रस्त पाईपलाईन की मरम्मत हेतु अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका बेगूं एवं सहायक अभियंता जन स्वा.अभि. विभाग बेगूं को निर्देशित किया जिससे जल को दूषित होने से बचाया जाकर बीमारियां फैलने से रोका जा सके। शहरी क्षेत्र बेगूं मानसून पूर्व नालों की साफ-सफाई हेतु अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका बेगूं को निर्देशित किया एवं विभिन्न प्रकार के बकाया पट्टा आवेदन का निर्धारित समय सीमा में निस्तारण करने हेतु निर्देशित किया गया। प्रवर्तन अधिकारी रसद विभाग बेगूं से एनएफएसए अपीलों का समयबद्ध निस्तारण करवाने एवं एलपीजी गैस के स्टॉक के संबंध में चर्चा की गई तथा समय-समय पर निरीक्षण कर वर्तमान स्टॉक की सूचना उपखण्ड अधिकारी बेगूं को प्रेषित करने हेतु निर्देशित किया। एडीएम ने ब्राह्मणी रिवार फ्रंट बेगूं की प्रगति के बारे में अधिशाषी अधिकारी नगरपालिका बेगूं से चर्चा की एवं नियमानुसार नियत समयावधि में कार्य पूर्ण करवाये जाने हेतु निर्देशित किया। नोडल अधिकारी पशुपालन विभाग बेगूं से स्वयं के कार्यालय के वर्किंग केपेसिटी के बारे में जानकारी ली एवं उपखण्ड अधिकारी बेगूं को समय-समय पर निरीक्षण हेतु निर्देशित किया। एडीएम मल्होत्रा ने बैठक के अंत में समस्त ब्लॉक स्तरीय अधिकारीगण को अपने कार्यालयों में साफ-सफाई रखने एवं समय पर कार्यालय में उपस्थित होने तथा रिकार्ड रूम में अनावश्यक रिकार्ड का नियमानुसार निस्तारण करने, सम्पर्क पोर्टल पर दर्ज परिवादों का गुणवत्तपूर्णा निस्तारण, अपने कार्यालय में प्रतिदिन नियमित जनसुनवाई की व्यवस्था करने हेतु निर्देशित किया। बैठक में एसडीएम बेगूं अंकित सामरिया सहित ब्लॉक स्तरीय अधिकारी मौजूद रहे।1