प्रयागराज में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री और नार्थ सेण्ट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के जोनल महामंत्री कामरेड मनोज पाण्डेय ने रेलवे को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन द्वारा खुद पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उसका मुंहतोड़ जवाब देने का एलान किया है। दरअसल, मनोज पाण्डेय की अगुवाई में संगठन ने नॉर्दर्न रेलवे मल्टी स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की लखनऊ, आलमबाग, प्रयागराज, मुरादाबाद, वाराणसी और कानपुर जैसी सभी शाखाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ 'पोल खोल हल्ला बोल' अभियान शुरू किया था। इससे बौखलाकर बैंक के प्रबंध निदेशक विजय कुमार ने प्रयागराज के शाखा प्रबंधक सी एल वर्मा के जरिए मनोज पाण्डेय पर अपराधी होने और रेलवे आवास कब्जा करने के गंभीर आरोप लगवाए हैं। इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कामरेड मनोज पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ किसी भी थाने में कोई मुकदमा नहीं है और जो भी पुराना मामला था, उसे उच्च न्यायालय के आदेश पर अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रयागराज ने पहले ही रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे कभी भी विवादित कर्मचारी नहीं रहे हैं और न ही उनके खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्रवाई हुई है। बैंक के भीतर चल रहे कथित काले कारनामों को उजागर करते हुए मनोज पाण्डेय ने आरोप लगाया कि बैंक का प्रबंधन मल्टी स्टेट को-ऑoperative एक्ट 2002 की धाराओं और पंजीकृत बायलॉज के नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से लोन बांट रहा है और इसके बदले रेल कर्मचारियों से दलालों के जरिए प्रति लोन एक लाख से चार लाख रुपये तक की रिश्वत वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रबंध निदेशक विजय कुमार ने सभी शाखाओं में रिश्वत वसूली के लिए बाकायदा एक विशेष कर्मचारी को नामित कर रखा है। गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि साल 2023 में 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर विजय कुमार की सेवानिवृत्ति तय थी, लेकिन उन्होंने खुद ही एक गजट नोटिफिकेशन का हवाला देकर अपना कार्यकाल 10 वर्षों के लिए बढ़ा लिया। इस विस्तार को न तो प्रबंध समिति ने मंजूरी दी और न ही साल 2023, 2024 और 2025 की वार्षिक आम सभा में इसे अनुमोदित कराया गया। इसके अलावा, नियमों के खिलाफ जाकर मुरादाबाद मंडल के संचालक सुनील कुमार सिंह को 14 वर्षों से लगातार तीसरी बार संचालक के पद पर रखा गया है और बिना किसी चुनाव के उन्हें उप सभापति भी नामित कर दिया गया है। लोन सुरक्षा बीमा के नाम पर स्वीकृत कर्ज का दो प्रतिशत वसूल कर उस पैसे का बंदरबांट करने और जनता के पैसे का खुलेआम सौदा करने का आरोप भी बैंक प्रबंधन पर लगाया गया है। मनोज पाण्डेय ने प्रयागराज के शाखा प्रबंधक सी एल वर्मा को 'अंधेर नगरी का चौपट राजा' बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अवैध रूप से बैंक को ही अपना निवास स्थान बना रखा है, जिसका पूरा प्रमाण बैंक के सीसीटीवी कैमरे में मौजूद है। संगठन ने याद दिलाया कि को-ऑपरेटिव बैंक की अनियमितताओं के खिलाफ पहले भी लड़ाई लड़कर आई.आर.ई.एफ. और वर्कर्स यूनियन ने बैंक के 22 डेलीगेट, 4 संचालक और 1 उप सभापति को अयोग्य घोषित कराया था। अब बैंक प्रशासन द्वारा इस भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद दोनों संगठनों ने मिलकर 'पोल खोल हल्ला बोल' आंदोलन शुरू किया है। इस संबंध में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन ने केंद्रीय निबंधक सहकारिता नई दिल्ली, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक और अन्य संबंधित जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रयागराज में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय महामंत्री और नार्थ सेण्ट्रल रेलवे वर्कर्स यूनियन के जोनल महामंत्री कामरेड मनोज पाण्डेय ने रेलवे को-ऑपरेटिव बैंक के प्रबंधन द्वारा खुद पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए उसका मुंहतोड़ जवाब देने का एलान किया है। दरअसल, मनोज पाण्डेय की अगुवाई में संगठन ने नॉर्दर्न रेलवे मल्टी स्टेट प्राइमरी को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड की लखनऊ, आलमबाग, प्रयागराज, मुरादाबाद, वाराणसी और कानपुर जैसी सभी शाखाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ 'पोल खोल हल्ला बोल' अभियान शुरू किया था। इससे बौखलाकर बैंक के प्रबंध निदेशक विजय कुमार ने प्रयागराज के शाखा प्रबंधक सी एल वर्मा के जरिए मनोज पाण्डेय पर अपराधी होने और रेलवे आवास कब्जा करने के गंभीर आरोप लगवाए हैं। इन आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताते हुए कामरेड मनोज पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि उनके खिलाफ किसी भी थाने में कोई मुकदमा नहीं है और जो भी पुराना मामला था, उसे उच्च न्यायालय के आदेश पर अपर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रयागराज ने पहले ही रद्द कर दिया है। उन्होंने कहा कि वे कभी भी विवादित कर्मचारी नहीं रहे हैं और न ही उनके खिलाफ कभी कोई विभागीय कार्रवाई हुई है। बैंक के भीतर चल रहे कथित काले कारनामों को उजागर करते हुए मनोज पाण्डेय ने आरोप लगाया कि बैंक का प्रबंधन मल्टी स्टेट को-ऑoperative एक्ट 2002 की धाराओं और पंजीकृत बायलॉज के नियमों को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से लोन बांट रहा है और इसके बदले रेल कर्मचारियों से दलालों के जरिए प्रति लोन एक लाख से चार लाख रुपये तक की रिश्वत वसूली जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रबंध निदेशक विजय कुमार ने सभी शाखाओं में रिश्वत वसूली के लिए बाकायदा एक विशेष कर्मचारी को नामित कर रखा है। गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि साल 2023 में 60 वर्ष की उम्र पूरी होने पर विजय कुमार की सेवानिवृत्ति तय थी, लेकिन उन्होंने खुद ही एक गजट नोटिफिकेशन का हवाला देकर अपना कार्यकाल 10 वर्षों के लिए बढ़ा लिया। इस विस्तार को न तो प्रबंध समिति ने मंजूरी दी और न ही साल 2023, 2024 और 2025 की वार्षिक आम सभा में इसे अनुमोदित कराया गया। इसके अलावा, नियमों के खिलाफ जाकर मुरादाबाद मंडल के संचालक सुनील कुमार सिंह को 14 वर्षों से लगातार तीसरी बार संचालक के पद पर रखा गया है और बिना किसी चुनाव के उन्हें उप सभापति भी नामित कर दिया गया है। लोन सुरक्षा बीमा के नाम पर स्वीकृत कर्ज का दो प्रतिशत वसूल कर उस पैसे का बंदरबांट करने और जनता के पैसे का खुलेआम सौदा करने का आरोप भी बैंक प्रबंधन पर लगाया गया है। मनोज पाण्डेय ने प्रयागराज के शाखा प्रबंधक सी एल वर्मा को 'अंधेर नगरी का चौपट राजा' बताते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने अवैध रूप से बैंक को ही अपना निवास स्थान बना रखा है, जिसका पूरा प्रमाण बैंक के सीसीटीवी कैमरे में मौजूद है। संगठन ने याद दिलाया कि को-ऑपरेटिव बैंक की अनियमितताओं के खिलाफ पहले भी लड़ाई लड़कर आई.आर.ई.एफ. और वर्कर्स यूनियन ने बैंक के 22 डेलीगेट, 4 संचालक और 1 उप सभापति को अयोग्य घोषित कराया था। अब बैंक प्रशासन द्वारा इस भ्रष्टाचार पर कोई कार्रवाई न किए जाने के बाद दोनों संगठनों ने मिलकर 'पोल खोल हल्ला बोल' आंदोलन शुरू किया है। इस संबंध में इण्डियन रेलवे इम्प्लॉइज फेडरेशन ने केंद्रीय निबंधक सहकारिता नई दिल्ली, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के उप महाप्रबंधक और अन्य संबंधित जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर तुरंत कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
- प्रयागराज के नैनी थाना क्षेत्र की एग्रीकल्चर चौकी के अंतर्गत पिछले 70 वर्षों से रह रहे गरीब परिवारों में नगर निगम द्वारा उनका आशियाना उजाड़ने की धमकी दिए जाने के बाद भारी आक्रोश व्याप्त है। इन पीड़ित परिवारों का कहना है कि वे इन दुकानों के सहारे ही अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन अब उनकी कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही है। इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी संदेश भेजा था, लेकिन कुछ विधायकों के कहने पर मुख्यमंत्री भी गरीबों की इस फरियाद को नहीं सुन रहे हैं। इस मामले के विरोध में समाजवादी कार्यकर्ता गुलाब चंद्र पासी, आकाश पासी, आनंद पासी, राजेश पासी, सविता कैथवास और गंगोत्री नगर से समाजसेवी भोले पाल चाचा (टी स्टॉल) मौके पर पहुंचे। पासी समाज के लोगों का कहना है कि पासी समाज से होने के कारण इस सरकार में उनका कोई वजूद नहीं समझा जा रहा है और न ही उनकी कोई सुनवाई हो रही है। उन्होंने साफ चेतावनी दी है कि यदि उनका आशियाना तोड़ा गया तो वे पीछे नहीं हटेंगे और सरकार चाहे भाजपा की हो या कोई और, वे इसके खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे। पीड़ितों ने आरोप लगाया है कि योगी सरकार में गरीबों के साथ घोर अन्याय हो रहा है और भाजपा के विधायक अपनी जेबें गर्म करके गरीबों के आशियाने उजड़वा रहे हैं। पीड़ित जनता ने मुख्यमंत्री से विनम्र निवेदन किया है कि इन विधायकों की कॉल डिटेल चेक कराई जाए कि किसके पास कितना पैसा गया है और ऐसे विधायकों के खिलाफ तत्काल कड़ी कार्रवाई कर गरीबों को न्याय दिलाया जाए।1
- प्रयागराज के इलाहाबाद अंतर्गत मनोहर दास डी ब्लॉक में नाले की टूटी दीवार के कारण जलभराव हो गया है। नाले से हो रहे इस जलभराव की वजह से स्थानीय जनता में भारी नाराजगी है।1
- कौशाम्बी के मंझनपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई हत्या की वारदात से संबंधित अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है और उनके पास से बरामदगी भी की गई है। इस कार्रवाई के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक श्रीमती अमिता सिंह ने वीडियो बाइट के जरिए आधिकारिक जानकारी दी है।1
- प्रयागराज के बारा में अदालती आदेश और एसडीएम के निर्देशों के बावजूद एक पीड़िता को उसकी खुद की जमीन पर कब्जा नहीं मिल पा रहा है। थाना शंकरगढ़ क्षेत्र के ग्राम जनवा की निवासी सीमा देवी (पत्नी राजबिहारी सिंह) का जमीन विवाद का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। सीमा देवी की दर्ज भूमि आराजी संख्या 1143/3, रकबा 0.114 हेक्टेयर पर कोर्ट का आदेश होने के बाद भी विपक्षी कब्जा छोड़ने को तैयार नहीं है। शनिवार को थाना समाधान दिवस पर एसडीएम बारा डॉ. गणेश कन्नौजिया के निर्देश पर राजस्व और पुलिस की संयुक्त टीम सीमांकन और पीड़िता को कब्जा दिलाने मौके पर पहुंची थी, लेकिन विपक्षी राम प्रताप ने अपने समर्थकों के साथ मिलकर वहाँ जमकर हंगामा खड़ा कर दिया। विपक्षियों के बढ़ते विरोध को देखकर राजस्व और पुलिस की टीम बिना कार्रवाई पूरी किए ही वापस लौट गई। बताया जा रहा है कि एसडीएम के फोन के बाद टीम को वापस बुला लिया गया। पीड़िता सीमा देवी का आरोप है कि यह पहली बार नहीं हुआ है, बल्कि इससे पहले भी 3-4 बार पुलिस-राजस्व की टीम आ चुकी है लेकिन हर बार विपक्षियों के हंगामे के आगे प्रशासन को पीछे हटना पड़ा। सीमा देवी ने चेतावनी दी है कि कोर्ट का आदेश होने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है और यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई तो गाँव में गंभीर विवाद या खूनी संघर्ष हो सकता है। इस पूरे मामले पर स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की लचर कार्रवाई के कारण ही विपक्षियों के हौसले इतने बुलंद हैं। वहीं, एसडीएम बारा डॉ. गणेश कन्नौजिया का कहना है कि कोर्ट का आदेश है तो उसका पालन कराया जाएगा और टीम विरोध के कारण वापस जरूर आई है, लेकिन अब विधिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई होगी। फिलहाल गाँव में तनाव की स्थिति को देखते हुए पुलिस सतर्क है और प्रशासन ने जल्द ही पीड़िता को कब्जा दिलाने का भरोसा दिया है, लेकिन पीड़िता के लिए थाना समाधान दिवस पर भी न्याय न मिलना प्रशासन की लाचारी को दर्शाता है।1
- अनादि टीवी के विशेष कार्यक्रम 'सत्ता और सियासत' में नीतियों का विश्लेषण करते हुए साल 2027 की चुनावी जंग पर चर्चा की गई है। समय की गति के साथ साल 2026 अब समाप्त होने के बेहद नजदीक पहुंच चुका है और साल 2027 आने में ज्यादा समय नहीं बचा है। साल 2027 की सियासत पूरी तरह से चुनावी होने वाली है, क्योंकि इस साल उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर जैसे महत्वपूर्ण राज्यों में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश और पंजाब को छोड़कर अन्य सभी चुनावी राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार सत्ता में है। ऐसे में भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश जितना महत्वपूर्ण है, उतना ही महत्व उसके लिए गुजरात और उत्तराखंड के विधानसभा चुनावों का भी है।1
- प्रयागराज के नैनी इलाके में नैनी सेंट्रल जेल के पीछे वाली रोड पर लेप्रसी हॉस्पिटल के बगल में एक 40 वर्षीय व्यक्ति की लाश मिली है। मृतक व्यक्ति लाल रंग की शर्ट पहने हुए था। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय इलाकाई पुलिस मौके पर पहुंचकर आवश्यक विधिक कार्रवाई करने में जुट गई है।1