नीतीश के पैतृक जिले में सुशासन डूबा: 10 बीघा जमीन और 20 घर गंदे पानी में समाए एंकर, बिहार में विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच नीतीश कुमार सरकार के अपने ही पैतृक जिले नालंदा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इन दावों की जमीनी हकीकत को बेनकाब कर रही है। नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत गिलानी पंचायत के अम्बा बिगहा गांव में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि गांव की करीब 10 बीघा रैयती जमीन और 15 से 20 घर पिछले कई वर्षों से नाली और पईन के गंदे, बदबूदार पानी में डूबे हुए हैं। पानी निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने से गांव की सड़कें अब तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिलानी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि विजय चौधरी चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते। न कोई समस्या का समाधान करते हैं और न ही प्रशासन से समाधान करवाते हैं। घर से बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं। ग्रामीण घुटनों तक गंदे पानी में उतरकर रोज़मर्रा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा असर मासूम बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। ठंड और बदबूदार पानी से होकर स्कूल जाने में बच्चे डरने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह डूबी हुई रैयती जमीन जदयू नेता अफरोज आलम की है, जहां कभी खेती होती थी, लेकिन पिछले 5 वर्षों से एक दाना भी उपज नहीं पाया। सवाल यह है कि जब सत्ताधारी दल के नेता की जमीन का समाधान नहीं हो पा रहा, तो आम ग्रामीणों की हालत क्या होगी? वार्ड नंबर 10 की मिन्ता देवी, संगीता देवी, प्रविला देवी, उर्मिला देवी, सुकरी देवी, कारी देवी, मारो देवी, मीना देवी, अभिन्न शर्मा, सोनू आलम, रविन्द्र शर्मा, विनोद चौधरी, उपेन्द्र राम, पप्पू यादव और नायोब आलम समेत दर्जनों ग्रामीणों का दर्द एक जैसा है। ग्रामीणों का कहना है— चारों तरफ गंदगी और बदबू फैली है, बीमारी फैलने का डर हर वक्त बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी और अंचल अधिकारी रविंदर कुमार चौपाल को भी दी गई। यहां तक कि सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं। वहीं, बीडीओ सीमा कुमारी का कहना है कि समस्या की जानकारी उन्हें है और कई बार पानी निकलवाया गया है। कुछ मकान गैरमजरूआ जमीन पर अतिक्रमण कर बने हैं, इसलिए स्थायी समाधान के लिए अतिक्रमण हटाने का आवेदन जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है— 👉 जब पूरा गांव गंदे पानी में डूबा हो, तो जिम्मेदारी सिर्फ ग्रामीणों की है या सिस्टम की भी? अम्बा बिगहा की यह तस्वीर सिर्फ नालंदा की नहीं, बल्कि सरकार के विकास और सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
नीतीश के पैतृक जिले में सुशासन डूबा: 10 बीघा जमीन और 20 घर गंदे पानी में समाए एंकर, बिहार में विकास और सुशासन के बड़े-बड़े दावों के बीच नीतीश कुमार सरकार के अपने ही पैतृक जिले नालंदा से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो इन दावों की जमीनी हकीकत को बेनकाब कर रही है। नालंदा जिले के अस्थावां प्रखंड अंतर्गत गिलानी पंचायत के अम्बा बिगहा गांव में हालात इतने भयावह हो चुके हैं कि गांव की करीब 10 बीघा रैयती जमीन और 15 से 20 घर पिछले कई वर्षों से नाली और पईन के गंदे, बदबूदार पानी में डूबे हुए हैं। पानी निकासी की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं होने से गांव की सड़कें अब तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि गिलानी पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि विजय चौधरी चुनाव के समय वोट मांगने आते हैं, लेकिन जीतने के बाद गांव की सुध तक नहीं लेते। न कोई समस्या का समाधान करते हैं और न ही प्रशासन से समाधान करवाते हैं। घर से बाहर निकलना किसी सजा से कम नहीं। ग्रामीण घुटनों तक गंदे पानी में उतरकर रोज़मर्रा की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सबसे ज्यादा असर मासूम बच्चों की पढ़ाई पर पड़ा है। ठंड और बदबूदार पानी से होकर स्कूल जाने में बच्चे डरने लगे हैं। ग्रामीणों के अनुसार यह डूबी हुई रैयती जमीन जदयू नेता अफरोज आलम की है, जहां कभी खेती होती थी, लेकिन पिछले 5 वर्षों से एक दाना भी उपज नहीं पाया। सवाल यह है कि जब सत्ताधारी दल के नेता की जमीन का समाधान नहीं हो पा रहा, तो आम ग्रामीणों की हालत क्या होगी? वार्ड नंबर 10 की मिन्ता देवी, संगीता देवी, प्रविला देवी, उर्मिला देवी, सुकरी देवी, कारी देवी, मारो देवी, मीना देवी, अभिन्न शर्मा, सोनू आलम, रविन्द्र शर्मा, विनोद चौधरी, उपेन्द्र राम, पप्पू यादव और नायोब आलम समेत दर्जनों ग्रामीणों का दर्द एक जैसा है। ग्रामीणों का कहना है— चारों तरफ गंदगी और बदबू फैली है, बीमारी फैलने का डर हर वक्त बना रहता है। ग्रामीणों ने बताया कि इस गंभीर समस्या की जानकारी प्रखंड विकास पदाधिकारी सीमा कुमारी और अंचल अधिकारी रविंदर कुमार चौपाल को भी दी गई। यहां तक कि सड़क जाम कर प्रदर्शन भी किया गया, लेकिन हालात आज भी जस के तस हैं। वहीं, बीडीओ सीमा कुमारी का कहना है कि समस्या की जानकारी उन्हें है और कई बार पानी निकलवाया गया है। कुछ मकान गैरमजरूआ जमीन पर अतिक्रमण कर बने हैं, इसलिए स्थायी समाधान के लिए अतिक्रमण हटाने का आवेदन जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है— 👉 जब पूरा गांव गंदे पानी में डूबा हो, तो जिम्मेदारी सिर्फ ग्रामीणों की है या सिस्टम की भी? अम्बा बिगहा की यह तस्वीर सिर्फ नालंदा की नहीं, बल्कि सरकार के विकास और सुशासन के दावों पर एक बड़ा सवाल खड़ा करती है।
- 1 दिन का सांकेतिक भूख हड़ताल कर मनरेगा का नाम भि जी राम जी बदले जाने पर लोगों ने जताया विरोध1
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- मजा मिली नाही बाहर के कचौरी में ✨😀😂😂1
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- 1 दिन का सांकेतिक भूख हड़ताल कर मनरेगा का नाम भि जी राम जी बदले जाने पर लोगों ने जताया विरोध1
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- बिहार शरीफ से एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है, जहाँ 13 वर्षीय किशोर पिछले दो महीने से लापता है। परिजनों का आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद पुलिस और जिला प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। देखिए हमारी ये खास रिपोर्ट।1