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विपक्ष की ओछी मानसिकता से सिर्फ नारी शक्ति का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का बड़ा नुकसान हुआ है विपक्ष की ओछी मानसिकता से सिर्फ नारी शक्ति का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का बड़ा नुकसान हुआ है
Sapna thakur
विपक्ष की ओछी मानसिकता से सिर्फ नारी शक्ति का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का बड़ा नुकसान हुआ है विपक्ष की ओछी मानसिकता से सिर्फ नारी शक्ति का ही नहीं, बल्कि पूरे देश का बड़ा नुकसान हुआ है
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- बीजेपी सरकार सबसे ज्यादा खराब है1
- Post by Ramdeen1
- थाना अवागढ़, गांव शहनोआ… गांव में उस दिन धूप भी कुछ ज्यादा ही “तथ्यात्मक” थी—सब कुछ साफ दिख रहा था, बस सच छोड़कर। करीब 200 नौजवान मोटरसाइकिलों पर सवार होकर नारे लगाते हुए थाने पहुंचे। हर मोटरसाइकिल पर तीन-तीन सवार—जैसे लोकतंत्र की सीटें भी शेयरिंग पर चल रही हों। थाने में घुसते ही आवाजें गूंजने लगीं— “हमारे साथ अन्याय हुआ है!” “हम पर हमला हुआ है!” थानेदार साहब ने चश्मा ठीक किया और मन ही मन कहा— “आज फिर सच छुट्टी पर है… और कहानी ड्यूटी पर।” भीड़ में हर आदमी पीड़ित था, हर आदमी गवाह था, और हर आदमी अपनी-अपनी कहानी का हीरो भी। फर्क सिर्फ इतना था कि हर कहानी दूसरे से अलग थी। रिपोर्टर महोदय कैमरा लेकर पहुंचे। कैमरा ऑन हुआ… और सच ऑफ हो गया। अब शुरू हुआ एक नया अध्याय— “पहचान का प्रदर्शन” कैमरे के सामने हर कोई अपनी-अपनी पहचान, अपनी-अपनी जाति, अपने-अपने दर्द का बखान करने लगा। कोई बोला—“हमारे साथ इसलिए हुआ क्योंकि हम ये हैं…” दूसरा बोला—“हमारे साथ इसलिए हुआ क्योंकि हम वो हैं…” और तभी सवाल हवा में तैर गया— “आखिर हम अपनी ही पहचान को लेकर इतने संवेदनशील क्यों हैं?” जब खुद बोलते हैं तो गर्व… और जब कोई दूसरा बोल दे तो अपमान? जाति, जो कभी पहचान थी, अब जैसे बहस का हथियार बन गई थी। हर कोई उसे ढाल की तरह भी इस्तेमाल कर रहा था… और तलवार की तरह भी। कैमरा सब रिकॉर्ड कर रहा था— सिर्फ चेहरे नहीं… सोच भी। एक बुजुर्ग, जो दूर खड़े सब देख रहे थे, धीरे से बोले— “पहचान से प्यार करो… लेकिन उसे लड़ाई का कारण मत बनाओ।” लेकिन उनकी आवाज भीड़ के शोर में खो गई। इसी बीच असली कहानी चुपचाप कोने से निकलकर आई— एक छोटी सी टक्कर… एक बच्चा… थोड़ी बहस… और फिर वही पुराना फार्मूला— “छोटी बात + भीड़ = बड़ा बवाल” शाम होते-होते सब थक चुके थे— लड़ाई से नहीं… अपनी-अपनी कहानी समझाते-समझाते। फिर वही हुआ जो अक्सर होता है— समझौता… शिकायत वापस… और “भाईचारा” फिर से इंस्टॉल। एक कड़वा सवाल कहानी खत्म हुई… लेकिन सवाल बाकी रह गया— क्या हम अपनी पहचान से प्यार करते हैं… या उसे दिखाने की होड़ में खुद को ही खो देते हैं? कैमरे के सामने अपनी जाति का बखान करना आसान है… लेकिन उसी पहचान के साथ दूसरे का सम्मान करना मुश्किल क्यों? अंत में… एक संदेश अगर आप इस कहानी की सच्चाई देखना चाहते हैं, तो सिर्फ शब्द मत पढ़िए… उन चेहरों को देखिए, उन आवाजों को सुनिए— जहां हर कोई अपनी पहचान को साबित करने में लगा था… और इंसानियत कहीं पीछे छूट गई थी।1
- महिला आरक्षण के नाम से परमानेंट सांसद बनाए रखना की बकडोर से रणनीति अपना रही है बीजेपी जिसे वह सन 2047 तक सत्ता में बनी रहे, महिला आरक्षण विधेयक आज अभी क्यों नहीं सन 2029 या 34 ही क्यों, महिला आरक्षण विधेयक में #पसमांदा_मुस्लिम_महिलाओं को शामिल क्यों नहीं ? #बहुआयामी_दल की महिलाओं से अपील1
- समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आगामी 2027 के चुनावों के लिए एक बड़ा एलान किया है। इस वीडियो में देखें कि कैसे अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए जनता के लिए लोकलुभावन वादों की बौछार कर दी है। वीडियो की मुख्य बातें: 300 यूनिट मुफ्त बिजली: सपा की सरकार आने पर घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट तक कोई बिल नहीं देना होगा। महिलाओं को बड़ी मदद: महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए सालाना ₹40,000 की आर्थिक सहायता का वादा। स्मार्ट मीटर और EVM पर प्रहार: अखिलेश यादव ने स्मार्ट मीटर की तुलना EVM से करते हुए इसे 'हेराफेरी' का नया जरिया बताया। सरकार को घेरा: महंगाई, बदहाल शिक्षा व्यवस्था और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर योगी सरकार की कड़ी आलोचना।1
- वहीं दूसरी तरफ साफ सफाई की व्यवस्था इतनी गजब है कि पानी पीते समय उल्टी हो जाए तहसील व्यवस्थाओ का मैनेजमेंट शून्य1
- ali4
- ⏩पत्रकार असित यादव नें इटावा मे संचालित प्रेस संगठनों,,प्रेस क्लब की भूमिका पर खड़े किये गंभीर सवाल ⏩क्या अधिकारियों को बुके देकर फोटो खिंचाने,,क्या प्रेस क्लब भवन मे कार्यक्रमों के फोटो डालने से होंगी पत्रकारों के हितों की रक्षा ⏩चाहे प्रेस क्लब हो या कोई और,,निशुल्क बीमा का लालच देकर सदस्यता अभियान चलाने संगठन आज खोखले साबित हो रहे हैं ⏩जों पत्रकारों के संकट उनके साथ हो रहे अत्याचार की लड़ाई न लफ पाए,,पीड़ित पत्रकारों के साथ खड़ा न हो पाए ऐसे निष्क्रिय संगठनों मे जुड़नें व जिले मे ऐसे संगठन के होने का दिखावा करने का क्या फायदा ⏩जो काम प्रेस क्लब नहीं कर पाया असित यादव की गिरफ़्तारी पर ज्वलंत व ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शन कर सैफई के पत्रकार सुघर सिंह नें न सिर्फ युवा पत्रकारों का दिल जीत लिया हैं बल्कि इटावा शहर की जनता सुघर सिंह के इस कदम की जमकर सराहना कर रही है ⏩इटावा मे फर्जी मुकदमों मे पत्रकार ज़ब जेल गए होंगे तब गए होंगे वह अतीत हो गया लेकिन आज़ की वर्तमान परिस्थिति मे किसी भी पत्रकार (प्रिंट,इलेक्ट्रॉनिक,डिजिटल,यूट्यूबर) को फर्जी मुकदमे मे जेल भेजनें का यदि कोई मन बना रहा हैं तो सड़कों पर ऐतिहासिक प्रदर्शन होगा व फर्जी मुकदमे मे पत्रकार की गिरफ़्तारी करनें वाले की जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी ⏩इटावा मे नौजवान भोले भाले युवा पत्रकारों को ये प्रेस क्लब व अन्य मीडिया संगठन वाले बड़े बड़े सपने दिखाकर अपनी संख्या बढाने के लिये जोड़ लेते हैं और अधिकारियों को अपने साथ भीड़ होने का एहसास कराकर अपना प्रभाव दिखाते हैं ⏩अब जिले के अधिकारी व नेता भी समझ चुके है कि ये क्लब इलब वालों की 2 पैसे की औकाद नहीं,,,अधिकारियों के दफ्तरों मे घंटो- घंटो तक Fevicol की तरफ चिपककर बैठने वालों का मकसद पत्रकारिता नहीं दलाली हैं,,कई अधिकारी तो कुछ दलाल टाइप के चिपकू लोगों से तंग आ चुके हैं ⏩आज असित यादव की बारी हैं कल प्रेस संगठन चलाने वाले लोगों को भी जेल जाना पड़ सकता हैं इसलिए असित यादव नें अपना पैगाम भेजा हैं ⏩जिले की जनता आप भी देख लेजिए पत्रकार,,पत्रकार हितों व उनकी रक्षा की कसम खाने वाले प्रेस क्लब व अन्य प्रेस संगठन आज असित यादव की गिरफ़्तारी पर अपने अपने घरों मे घुसे हुये हैं,,,सुघर सिंह के सिवाय कोई संगठन असित यादव के आसपास झकने तक नहीं गया ⏩प्रेस संगठन के नाम पर सिर्फ अपने आप को चमकना व अधिकारियों पर अपना प्रभाव जमाना यदि मकसद हैं इन संगठनों का ⏩इटावा के युवा पत्रकारों व जनता नें ऐसे निष्क्रिय व मतलबी संगठनों का बहिष्कार क़र दिया हैं ⏩Press Club पर पत्रकार असित यादव का यह बयान भी सुन लीजिये -----1