अयोध्या में राम की पैड़ी के सामने भजन संध्या स्थल के बगल पार्किंग से लेकर लता मंगेशकर चौक तक सड़क चौड़ीकरण और दुकानों का निर्माण कार्य अधिकारियों की आपसी खींचतान की वजह से अधूरा लटका पड़ा है। सरयू के पुराने पुल से लता मंगेशकर चौक तक 300 मीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जाना था, लेकिन महज 30 मीटर का डक्ट और नाली निर्माण रुकने से पूरी योजना ठप हो गई है। इसका मुख्य कारण पीडब्ल्यूडी और एडीए के बीच तालमेल की भारी कमी है। इस परियोजना पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च करके 33 दुकानें तो बना दी गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वहां बिजली, पानी, नाली, सीवर और अंडरग्राउंड शिफ्टिंग जैसी कोई भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद, विकास प्राधिकरण इन अधूरी सुविधाओं के बीच ही दुकानों के मूल्यांकन और आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जिससे दुकानदारों की परेशानी तय मानी जा रही है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी की अधिशासी अभियंता एस.पी. भारतीय का कहना है कि दुकानें एडीए की हैं और जैसे ही ये खाली होंगी, वे महज 15 दिन में काम पूरा कर देंगी। दूसरी तरफ, एडीए सचिव आर.के. मिश्रा का तर्क है कि विस्थापित दुकानदारों के लिए नजूल भूमि तलाशी जा रही है और जमीन मिलते ही उनका पुनर्वास कर दिया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से जमीन न मिलने के कारण यह फाइल अटकी पड़ी है। दीपोत्सव जैसे विश्वस्तरीय आयोजन स्थल राम की पैड़ी के ठीक सामने विकास कार्यों का यह हाल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है। प्राधिकरण के भीतर ही यह चर्चा आम है कि यदि यह विशाल सिंह और सत्येंद्र सिंह का कार्यकाल होता, तो यह चौड़ीकरण 30 दिनों के भीतर पूरा हो जाता, लेकिन अब केवल प्रशासनिक उदासीनता के कारण फाइलें सड़ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इस लटके हुए प्रोजेक्ट का जिक्र शासन और मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में करने से भी लगातार बचा जा रहा है। अधिकारियों की इस खींचतान के कारण राम की पैड़ी को चमकाने का करोड़ों रुपये का सपना अब महज 30 मीटर की अड़चन में कैद होकर रह गया है।
अयोध्या में राम की पैड़ी के सामने भजन संध्या स्थल के बगल पार्किंग से लेकर लता मंगेशकर चौक तक सड़क चौड़ीकरण और दुकानों का निर्माण कार्य अधिकारियों की आपसी खींचतान की वजह से अधूरा लटका पड़ा है। सरयू के पुराने पुल से लता मंगेशकर चौक तक 300 मीटर सड़क का चौड़ीकरण किया जाना था, लेकिन महज 30 मीटर का डक्ट और नाली निर्माण रुकने से पूरी योजना ठप हो गई है। इसका मुख्य कारण पीडब्ल्यूडी और एडीए के बीच तालमेल की भारी कमी है। इस परियोजना पर करीब 4 करोड़ रुपये खर्च करके 33 दुकानें तो बना दी गई हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वहां बिजली, पानी, नाली, सीवर और अंडरग्राउंड शिफ्टिंग जैसी कोई भी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद, विकास प्राधिकरण इन अधूरी सुविधाओं के बीच ही दुकानों के मूल्यांकन और आवंटन की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है, जिससे दुकानदारों की परेशानी तय मानी जा रही है। इस मामले में पीडब्ल्यूडी की अधिशासी अभियंता एस.पी. भारतीय का कहना है कि दुकानें एडीए की हैं और जैसे ही ये खाली होंगी, वे महज 15 दिन में काम पूरा कर देंगी। दूसरी तरफ, एडीए सचिव आर.के. मिश्रा का तर्क है कि विस्थापित दुकानदारों के लिए नजूल भूमि तलाशी जा रही है और जमीन मिलते ही उनका पुनर्वास कर दिया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले डेढ़ साल से जमीन न मिलने के कारण यह फाइल अटकी पड़ी है। दीपोत्सव जैसे विश्वस्तरीय आयोजन स्थल राम की पैड़ी के ठीक सामने विकास कार्यों का यह हाल प्रशासनिक लापरवाही की पोल खोलता है। प्राधिकरण के भीतर ही यह चर्चा आम है कि यदि यह विशाल सिंह और सत्येंद्र सिंह का कार्यकाल होता, तो यह चौड़ीकरण 30 दिनों के भीतर पूरा हो जाता, लेकिन अब केवल प्रशासनिक उदासीनता के कारण फाइलें सड़ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, इस लटके हुए प्रोजेक्ट का जिक्र शासन और मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठकों में करने से भी लगातार बचा जा रहा है। अधिकारियों की इस खींचतान के कारण राम की पैड़ी को चमकाने का करोड़ों रुपये का सपना अब महज 30 मीटर की अड़चन में कैद होकर रह गया है।
- अयोध्या में राम मंदिर के रामधन गबन मामले को लेकर धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे की होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस (पीसी) पर रोक लगा दी गई। प्रशासन के निर्देशों के तहत किसी भी पीसी से पहले प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है और बिना अनुमति के किसी भी प्रेसवार्ता को आयोजित करने की अनुमति नहीं है। इसी कड़ी में होटल संचालक ने धर्म सेना प्रमुख संतोष दुबे से अनुमति पत्र की मांग की। होटल को भी स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ही पीसी के लिए जगह उपलब्ध कराएं। हालांकि, इन तमाम पाबंदियों के बीच ही प्रेस वार्ता का आयोजन हुआ।3
- अयोध्या के फैजाबाद में आश्रम विवाद में एक नया मोड़ आया है, जहां स्थानीय निवासियों ने खुद सामने आकर इस पर सवाल खड़े किए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले में केवल तथ्यहीन बातों के जरिए लोगों के बीच भ्रम फैलाया जा रहा है।1
- तेज गति से गाड़ी न चलाने और सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्तियों की तुरंत मदद करने की अपील की गई है। सड़क मार्ग पर किसी हादसे के शिकार व्यक्ति को तुरंत अस्पताल पहुंचाना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा के नियमों का सही तरीके से पालन करने और राहगीरों की मदद करने के लिए लोगों को लगातार प्रेरित किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दुर्घटनाग्रस्त व्यक्ति की जान बचाने वाले मददगारों को प्रोत्साहित किया जाता है और इसके लिए उन्हें प्रशंसा पत्र भी प्रदान किया जाता है। जीवन को एक अनमोल धरोहर बताते हुए सभी से दूसरों के दुख-दर्द को समझने और सड़क हादसों से बचने की जिम्मेदारी निभाने की बात कही गई है। आज सुबह टाइम्स टीम की ओर से लखनऊ से लाल चंद सोनी ने इस संबंध में विशेष रिपोर्ट साझा की है।1
- अंबेडकरनगर में तैनात इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी से बचते हुए एक पीड़ित पुलिस अधीक्षक से न्याय की गुहार लगाने पहुंचा था। वहां तैनात पीआरओ जितेन्द्र रघुवंशी ने इसकी सूचना तत्काल टांडा कोतवाली पुलिस को दे दी। इसके बाद टांडा कोतवाली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर बिना किसी एफआईआर के ही पीड़ित को गिरफ्तार करने का प्रयास किया। पुलिस की इस कार्रवाई के विरोध में पीड़ित सड़क पर ही सो गया, जिसके बाद वहां मौजूद सक्रिय लोगों ने इसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया और किसी तरह पीड़ित पुलिस के चंगुल से बच सका। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सीओ सिटी अकबरपुर का एक बयान सामने आया है। सीओ का कहना है कि इस पीड़ित व्यक्ति का आपराधिक इतिहास है। वहीं दूसरी तरफ, पीड़ित ने पुलिस के इस दावे को खुला चैलेंज दिया है। पीड़ित का कहना है कि उसके ऊपर केवल एक ही मुकदमा दर्ज है, जिसे खुद इसी इंस्पेक्टर दीपक रघुवंशी ने दर्ज किया है और इसके अलावा उसका कोई दूसरा आपराधिक इतिहास नहीं है। पीड़ित का आरोप है कि इस गरीब का दोष सिर्फ इतना ही है कि वह एक व्यक्ति से अपने बकाया ₹3 लाख बार-बार मांग रहा था, जिसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ मोर्चा संभाल लिया है। इस पूरे मामले को लेकर तीखा तंज कसते हुए कहा गया है कि बुजुर्ग कहते थे कि गरीबों की हाय नहीं लेनी चाहिए। इसके साथ ही सीओ साहब को चुनौती दी गई है कि वे तत्काल प्रभाव से उस मुकदमे का क्राइम नंबर भी सार्वजनिक करें, जिसके आधार पर उन्होंने पीड़ित का आपराधिक इतिहास होने का दावा किया था।1
- अयोध्या जनपद की मिल्कीपुर विधानसभा के कुमारगंज क्षेत्र से गुजर रही शारदा सहायक नहर की पटरी अब हादसों का रास्ता बन चुकी है। लगभग 1000 मीटर लंबी इस सड़क पर 500 से अधिक गहरे और जानलेवा गड्ढे बन गए हैं, जिनकी गहराई दो फुट तक है। इस बदहाल स्थिति के कारण वहां से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों, छात्रों और वाहन चालकों की जान हर पल जोखिम में बनी हुई है। बरसात के कारण इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी विकट हो गई है, जिससे राहगीरों के गिरकर चोटिल होने की घटनाएं आए दिन हो रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कई बार इस समस्या से अवगत कराया, लेकिन मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। ग्रामीणों में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश है। जनता जन प्रतिनिधियों की इस चुप्पी पर भी लगातार सवाल उठा रही है और उनका आरोप है कि सड़क की यह दुर्दशा विकास के दावों की पोल खोल रही है। क्षेत्रवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि किसी बड़ी अनहोनी के होने से पहले नहर पटरी की तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि आवागमन को सुरक्षित बनाया जा सके।2
- अयोध्या के जिला समाजवादी पार्टी कार्यालय पर जन-जन के नायक और पूर्व सांसद स्वर्गीय बाबू मित्र सेन यादव की जयंती के अवसर पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। श्रद्धांजलि देने के लिए पार्टी कार्यालय पर आयोजित इस कार्यक्रम की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष पारसनाथ यादव ने की। इस श्रद्धांजलि सभा में शिक्षक सभा के जिला अध्यक्ष दान बहादुर सिंह, इंद्रपाल यादव, बाबूराम गौड, अधिवक्ता सभा के जिला अध्यक्ष राम करन यादव, जिला उपाध्यक्ष ओ रौनी प्रसाद पासवान और जिला उपाध्यक्ष आकिब खान उपस्थित रहे। इनके अलावा श्रद्धांजलि कार्यक्रम में विद्या भूषण पासी, प्रदेश सचिव पवन यादव, पूर्व पार्षद राम अजोर यादव, बृजेश सिंह चौहान, जिला सचिव अंसार अहमद, बलराम यादव, जिला सचिव सीताराम यादव, जिला सचिव असलम, पूजा वर्मा, पूर्व मंत्री अमृत राजपाल, एडवोकेट राकेश कुमार, शिवदयाल, एडवोकेट विजय प्रताप यादव, युवा नेता रमन यादव, एडवोकेट विपिन यादव और युवा नेता जितेंद्र यादव सहित कई अन्य लोग भी शामिल हुए।4
- उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में सड़क चौड़ीकरण के लिए चल रहे भवन ध्वस्तीकरण कार्य के दौरान एक बड़ा हादसा सामने आया है। यहाँ सड़क के किनारे बने एक मंदिर का गुंबद अचानक भरभराकर गिर गया। इस मंदिर के गुंबद की चपेट में आने से एक पीडब्ल्यूडी कर्मचारी की दर्दनाक मौत होने की खबर है। भवन ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान गुंबद गिरने से पीडब्ल्यूडी कर्मी इसकी चपेट में आ गया और उसकी जान चली गई।1