बस्ती मंडल: बांसी गैस एजेंसी की गुंडागर्दी, बुकिंग धरी की धरी... ‘सुविधा शुल्क’ पर मिल रहा सिलेंडर! बस्ती/धर्मसिंहवा: उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल के धर्मसिंहवा क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस का वितरण उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन चुका है। बांसी गैस एजेंसी के कारनामों ने सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और 'पारदर्शी वितरण' के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। यहाँ सिलेंडर की बुकिंग महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है, जबकि असल खेल 'कैश' और 'साँठगाँठ' का चल रहा है। सील तोड़कर लूट: नियमों को ठेंगे पर रख रहे डिलीवरी कर्मचारी क्षेत्र से आ रही गंभीर शिकायतों के अनुसार, डिलीवरी मैन सरेआम गैस सिलेंडरों की सील से छेड़छाड़ कर रहे हैं। बिना सील वाले या कटी-फटी सील वाले सिलेंडर उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे हैं, जो न केवल आर्थिक चपत है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े खतरे को दावत भी है। हद तो तब हो जाती है जब इन सिलेंडरों के लिए तय कीमत से कहीं अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। बुकिंग वाले कतार में, 'बिना बुकिंग' वालों की मौज एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने हफ्तों पहले नियमानुसार बुकिंग कराई है, वे सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वहीं, जो लोग 'सुविधा शुल्क' (अतिरिक्त पैसा) देने को तैयार हैं, उन्हें बिना किसी बुकिंग के हाथों-हाथ सिलेंडर मुहैया कराया जा रहा है। यह सीधे तौर पर कालाबाजारी का मामला है। विवाद की जड़ बनी एजेंसी की मनमानी वितरण केंद्रों और गांवों में इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण आए दिन विवाद और मारपीट की स्थिति बन रही है। उपभोक्ता जब अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो डिलीवरी कर्मचारी और एजेंसी के लोग बदतमीजी पर उतारू हो जाते हैं। प्रशासन की चुप्पी ने इन भ्रष्ट तत्वों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। “यह वितरण नहीं, सरेआम डकैती है। गरीब आदमी बुकिंग कराकर इंतजार करता रहता है और रसूखदार लोग पैसा फेंककर गैस ले जा रहे हैं। सील टूटे सिलेंडर देना जानलेवा हो सकता है।” > — पीड़ित उपभोक्ता, धर्मसिंहवा क्षेत्र प्रशासन से तीखे सवाल और मांग: इस पूरे मामले में ब्यूरो चीफ (बस्ती मंडल) की ओर से स्थानीय प्रशासन और रसद विभाग से कुछ कड़े सवाल हैं: जांच का इंतजार क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जन-आक्रोश के भड़कने का इंतजार कर रहा है? लाइसेंस रद्द क्यों नहीं? नियमों का उल्लंघन करने वाली बांसी गैस एजेंसी पर अब तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रिकॉर्ड की जांच हो: बुकिंग और वास्तविक वितरण के आंकड़ों का मिलान किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। हमारी मांग: उच्चाधिकारी तत्काल मामले का संज्ञान लें। दोषी डिलीवरी कर्मियों को निलंबित किया जाए और एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर पारदर्शी वितरण प्रणाली सुनिश्चित की जाए। रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
बस्ती मंडल: बांसी गैस एजेंसी की गुंडागर्दी, बुकिंग धरी की धरी... ‘सुविधा शुल्क’ पर मिल रहा सिलेंडर! बस्ती/धर्मसिंहवा: उत्तर प्रदेश के बस्ती मंडल के धर्मसिंहवा क्षेत्र में इन दिनों रसोई गैस का वितरण उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बन चुका है। बांसी गैस एजेंसी के कारनामों ने सरकार के 'डिजिटल इंडिया' और 'पारदर्शी वितरण' के दावों की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। यहाँ सिलेंडर की बुकिंग महज एक कागजी खानापूर्ति बनकर रह गई है, जबकि असल खेल 'कैश' और 'साँठगाँठ' का चल रहा है। सील तोड़कर लूट: नियमों को ठेंगे पर रख रहे डिलीवरी कर्मचारी क्षेत्र से आ रही गंभीर शिकायतों के अनुसार, डिलीवरी मैन सरेआम गैस सिलेंडरों की सील से छेड़छाड़ कर रहे हैं। बिना सील वाले या कटी-फटी सील वाले सिलेंडर उपभोक्ताओं को थमाए जा रहे हैं, जो न केवल आर्थिक चपत है बल्कि सुरक्षा के लिहाज से एक बड़े खतरे को दावत भी है। हद तो तब हो जाती है जब इन सिलेंडरों के लिए तय कीमत से कहीं अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। बुकिंग वाले कतार में, 'बिना बुकिंग' वालों की मौज एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन उपभोक्ताओं ने हफ्तों पहले नियमानुसार बुकिंग कराई है, वे सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रहे हैं। वहीं, जो लोग 'सुविधा शुल्क' (अतिरिक्त पैसा) देने को तैयार हैं, उन्हें बिना किसी बुकिंग के हाथों-हाथ सिलेंडर मुहैया कराया जा रहा है। यह सीधे तौर पर कालाबाजारी का मामला है। विवाद की जड़ बनी एजेंसी की मनमानी वितरण केंद्रों और गांवों में इस पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण आए दिन विवाद और मारपीट की स्थिति बन रही है। उपभोक्ता जब अपने हक के लिए आवाज उठाते हैं, तो डिलीवरी कर्मचारी और एजेंसी के लोग बदतमीजी पर उतारू हो जाते हैं। प्रशासन की चुप्पी ने इन भ्रष्ट तत्वों के हौसले और बुलंद कर दिए हैं। “यह वितरण नहीं, सरेआम डकैती है। गरीब आदमी बुकिंग कराकर इंतजार करता रहता है और रसूखदार लोग पैसा फेंककर गैस ले जा रहे हैं। सील टूटे सिलेंडर देना जानलेवा हो सकता है।” > — पीड़ित उपभोक्ता, धर्मसिंहवा क्षेत्र प्रशासन से तीखे सवाल और मांग: इस पूरे मामले में ब्यूरो चीफ (बस्ती मंडल) की ओर से स्थानीय प्रशासन और रसद विभाग से कुछ कड़े सवाल हैं: जांच का इंतजार क्यों? क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या जन-आक्रोश के भड़कने का इंतजार कर रहा है? लाइसेंस रद्द क्यों नहीं? नियमों का उल्लंघन करने वाली बांसी गैस एजेंसी पर अब तक दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? रिकॉर्ड की जांच हो: बुकिंग और वास्तविक वितरण के आंकड़ों का मिलान किया जाए, ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके। हमारी मांग: उच्चाधिकारी तत्काल मामले का संज्ञान लें। दोषी डिलीवरी कर्मियों को निलंबित किया जाए और एजेंसी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई कर पारदर्शी वितरण प्रणाली सुनिश्चित की जाए। रिपोर्ट: ब्यूरो चीफ, बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1
- *अंबेडकरनगर* बसखारी थाना क्षेत्र अंतर्गत मसडा मोहनपुर डिहवा, के रहने वाली आफरीन बानो की 6 वर्षीय बच्ची जो कि आज सुबह तड़के ही खेत में रखें भूसे पर खेलने गई थी, भूसे पर बच्चों को खेलता हुआ देख , सभई व अमन आग बबूला हो गए, बच्ची जब वहां से जाने की कोशिश करने लगी तो सभई व अमन डंडे से बच्ची का पिटाई करने लगे। बच्ची की मां इलमाफिरदौस ने बच्ची को बेरहमी से पिटता हुआ देख बचाने के लिए दौड़ी, तब जाकर बच्ची की जान बची। पीड़ित परिवार ने थाने में तहरीर देकर न्याय की गुहार लगाई है। बच्ची के शरीर पर अनगिनत चोट के निशान साफ-साफ देखे जा सकते हैं। *ब्यूरो रिपोर्ट वैभव सिंह* ✍️2
- आलापुर अरमा बसंत पट्टी जोगीपुर ग्राम प्रधान उम्मीदवार मोहम्मद वसीम अपना पूरा छाप छोड़ चुके हैं बस सीट का है इंतजार1
- Post by Dushyant Kumar Journalist1
- बसखारी थाना क्षेत्र में बाइक पर सवार दो लुटेरों ने एक ज्वेलर्स को अपना निशाना बनाया और कनपटी पर पिस्टल लगाते हुए 10 लाख से अधिक का जेवर लूट लिया। सूचना पर पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। पुलिस जांच करते हुए नजर आ रही है।1
- अम्बेडकरनगर में आग लगने से करीब 6 बीघा फसल जलकर राख, आधा दर्जन किसान प्रभावित, भारी नुकसान, तेज हवा के चलते तेजी से फैली आग, ग्रामीणों और फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू, राजस्व टीम मौके पर पहुंचकर कर रही नुकसान का आकलन, अकबरपुर तहसील क्षेत्र के महाये गांव में गेहूं के खेत में भीषण आग1
- संतकबीरनगर । जनपद में चलाए जा रहे “क्रैक साइबर क्राइम अभियान” के तहत साइबर क्राइम थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। साइबर ठगी के शिकार एक पीड़ित के खाते से निकाली गई 5,31,000 रुपये की पूरी धनराशि पुलिस की त्वरित कार्रवाई से वापस करा दी गई। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर संदीप कुमार मीना के निर्देशन में साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पीड़ितों को शीघ्र राहत दिलाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे अभियान के अंतर्गत साइबर क्राइम थाना टीम ने प्रभावी कार्यवाही करते हुए यह सफलता हासिल की। प्राप्त जानकारी के अनुसार, वादी राकेश मौर्या की पत्नी शशिकला मौर्या, निवासी प्लॉट नंबर ई-78, इंडस्ट्रियल एरिया खलीलाबाद, के नाम से पंजीकृत फर्म “सम्राट इंडस्ट्रीज” के बैंक ऑफ बड़ौदा खाते से आरटीजीएस के माध्यम से 5,31,000 रुपये अज्ञात खाते में ट्रांसफर हो गए थे। मामले की सूचना मिलते ही साइबर क्राइम थाना पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए आवश्यक तकनीकी कार्रवाई की, जिसके परिणामस्वरूप पूरी धनराशि पीड़ित के खाते में वापस करा दी गई। पुलिस की अपील: जनपद पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात कॉल, लिंक या संदेश पर अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी, पासवर्ड या यूपीआई पिन साझा न करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है। इस कार्रवाई में प्रभारी निरीक्षक जयप्रकाश चौबे, उपनिरीक्षक रमेश यादव, हेड कांस्टेबल मोहम्मद हिन्दे आजाद, कांस्टेबल रामप्रवेश मद्देशिया एवं कांस्टेबल धीरेन्द्र कुमार प्रसाद की महत्वपूर्ण भूमिका रही।1
- Post by रवि चन्द्र पत्रकार1
- इस संबंध में एएसपी पश्चिमी हरेन्द्र कुमार ने बताया कि जनपद में अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जा रहा है, जिसके तहत किसी भी घटना को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है। उन्होंने कहा कि पुलिस टीम की मुस्तैदी और समन्वय के चलते ही इतनी कम समय में घटना का सफल अनावरण संभव हो सका। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आमजन में विश्वास और मजबूत हुआ है।1