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सतना के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। अस्पताल परिसर में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक व्हीलचेयर टूटी हुई हालत में मिली, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वायरल हो रही तस्वीर से पता चलता है कि अस्पताल परिसर में एक मरीज को जिस व्हीलचेयर पर ले जाया जा रहा था, उसका एक हिस्सा पूरी तरह से टूटा हुआ था। व्हीलचेयर की खराब स्थिति के कारण उसे चलाना मुश्किल हो रहा था, जिसके चलते मरीज के परिजन खुद ही उसे ठीक करने और खींचने पर मजबूर दिखे। इस अव्यवस्था पर अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव और ऐसे पुराने व टूटे हुए उपकरण सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से चिंताजनक हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीजों को अस्पताल के अंदर ही दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द अस्पताल में उपलब्ध सभी व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की स्थिति की जांच करने और नई सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

22 hrs ago
user_Unchehra news
Unchehra news
News Anchor उंचाहरा, सतना, मध्य प्रदेश•
22 hrs ago

सतना के जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई है। अस्पताल परिसर में मरीजों को लाने-ले जाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली एक व्हीलचेयर टूटी हुई हालत में मिली, जिसके कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। वायरल हो रही तस्वीर से पता चलता है कि अस्पताल परिसर में एक मरीज को जिस व्हीलचेयर पर ले जाया जा रहा था, उसका एक हिस्सा पूरी तरह से टूटा हुआ था। व्हीलचेयर की खराब स्थिति के कारण उसे चलाना मुश्किल हो रहा था, जिसके चलते मरीज के परिजन खुद ही उसे ठीक करने और खींचने पर मजबूर दिखे। इस अव्यवस्था पर अस्पताल में आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों ने गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि गंभीर रूप से बीमार मरीजों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव और ऐसे पुराने व टूटे हुए उपकरण सुरक्षा और सुविधा के लिहाज से चिंताजनक हैं। उनका आरोप है कि प्रशासन की लापरवाही के कारण मरीजों को अस्पताल के अंदर ही दुश्वारियों का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, इस मामले पर अभी तक अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द अस्पताल में उपलब्ध सभी व्हीलचेयर और स्ट्रेचर की स्थिति की जांच करने और नई सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

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  • मैहर जिले की ग्राम पंचायत तिघरा खुर्द स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक जाने वाला रास्ता आज भी बदहाल स्थिति में है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह गंभीर मामला प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है। बारिश के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिसके कारण छोटे स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुँचना पड़ता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं, जिससे उनके अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। विद्यालय के शिक्षकों और ग्रामीणों को भी इसी रास्ते से आवागमन में रोज़ाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, कोई समाधान नहीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की यह उदासीनता समझ से परे है, खासकर जब बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का सवाल हो। यदि समय रहते इस मार्ग का निर्माण या मरम्मत नहीं की गई, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। इसी को देखते हुए, ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके और वे शिक्षा के अधिकार से वंचित न हों। समाचार प्रकाशित होने के बाद भी यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और तिघरा खुर्द के स्कूली बच्चों को इस बदहाल रास्ते से आखिर कब राहत मिलती है।
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    मैहर जिले की ग्राम पंचायत तिघरा खुर्द स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय तक जाने वाला रास्ता आज भी बदहाल स्थिति में है। मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है, जिससे बच्चों के भविष्य से जुड़ा यह गंभीर मामला प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ रहा है।

बारिश के मौसम में यह मार्ग पूरी तरह कीचड़ और जलभराव से भर जाता है, जिसके कारण छोटे स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डालकर विद्यालय पहुँचना पड़ता है। कई बार बच्चे फिसलकर गिर भी जाते हैं, जिससे उनके अभिभावकों की चिंता लगातार बढ़ रही है। विद्यालय के शिक्षकों और ग्रामीणों को भी इसी रास्ते से आवागमन में रोज़ाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला है, कोई समाधान नहीं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन की यह उदासीनता समझ से परे है, खासकर जब बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा का सवाल हो। यदि समय रहते इस मार्ग का निर्माण या मरम्मत नहीं की गई, तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। इसी को देखते हुए, ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुगम रास्ता मिल सके और वे शिक्षा के अधिकार से वंचित न हों।

समाचार प्रकाशित होने के बाद भी यदि जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब जागता है और तिघरा खुर्द के स्कूली बच्चों को इस बदहाल रास्ते से आखिर कब राहत मिलती है।
    user_Vikash soni Maihar reporter
    Vikash soni Maihar reporter
    Media Consultant मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर के जहला गांव में सीसी सड़क के ठीक बीच में खड़े एक बिजली के पोल को सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। यह कार्रवाई मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों को पोल हटाने के निर्देश जारी करने के बाद की गई। इस समस्या को लेकर प्रकाशित खबर सामने आने के बाद कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया था। कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए, संबंधित विभाग की एक टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और सड़क के बीचोंबीच स्थित बिजली के पोल को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर गहरी राहत व्यक्त की है, क्योंकि सड़क निर्माण के बाद बीच में खड़ा यह पोल भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता था। प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई उसकी तत्परता का एक प्रमुख उदाहरण मानी जा रही है। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि जब जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता है, तो प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने को आगे आता है। स्थानीय नागरिकों ने 'मध्यप्रदेश तक न्यूज़' की खबर पर त्वरित संज्ञान लेने और समस्या का समाधान करने के लिए जिला कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी का विशेष आभार प्रकट किया है।
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    मैहर जनपद पंचायत क्षेत्र के ग्राम कंचनपुर के जहला गांव में सीसी सड़क के ठीक बीच में खड़े एक बिजली के पोल को सफलतापूर्वक हटा दिया गया है। यह कार्रवाई मैहर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी द्वारा मामले का तत्काल संज्ञान लेने और संबंधित अधिकारियों को पोल हटाने के निर्देश जारी करने के बाद की गई। इस समस्या को लेकर प्रकाशित खबर सामने आने के बाद कलेक्टर ने इसे गंभीरता से लिया था।

कलेक्टर के निर्देशों का पालन करते हुए, संबंधित विभाग की एक टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंची और सड़क के बीचोंबीच स्थित बिजली के पोल को हटाने की प्रक्रिया पूरी की। स्थानीय ग्रामीणों ने इस कार्रवाई पर गहरी राहत व्यक्त की है, क्योंकि सड़क निर्माण के बाद बीच में खड़ा यह पोल भविष्य में बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बन सकता था।

प्रशासन की यह त्वरित कार्रवाई उसकी तत्परता का एक प्रमुख उदाहरण मानी जा रही है। साथ ही, इससे यह भी स्पष्ट हुआ कि जब जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाता है, तो प्रशासन उनके समाधान के लिए प्रभावी कदम उठाने को आगे आता है। स्थानीय नागरिकों ने 'मध्यप्रदेश तक न्यूज़' की खबर पर त्वरित संज्ञान लेने और समस्या का समाधान करने के लिए जिला कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी का विशेष आभार प्रकट किया है।
    user_Tej pratap Kacher
    Tej pratap Kacher
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है। हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले ने गांवों का रुख कर डुगडुगी (मुनादी) पिटवाकर आम जनता से इस मामले से संबंधित साक्ष्य मांगे हैं। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम वसुधा में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह मुनादी की गई, जिसमें ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि उनके पास मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति या उनके परिवार से संबंधित कोई भी प्रासंगिक दस्तावेज या साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें समिति के सामने प्रस्तुत करें। जानकारी के अनुसार, शनिवार को हरदुआ और मझोल गांवों में भी यह प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने 6 जुलाई को एक बैठक बुलाई है, जिसमें राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने सभी मूल दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने का नोटिस जारी किया गया है। नियमों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति का वैधानिक लाभ या प्रमाण-पत्र पाने के लिए यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति का परिवार वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार उस क्षेत्र का मूल निवासी रहा हो, और छानबीन समिति मुख्य रूप से इसी बिंदु की जांच कर रही है। यह पूरा विवाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाकर रैगांव (सुरक्षित) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल किया। याचिका में आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में 'बागरी' समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है और उनका संबंध कथित तौर पर राजपूत या ठाकुर समुदाय से है। हाई कोर्ट द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद से ही इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं काफी तेज हो गई हैं, और अब राजनीतिक व कानूनी गलियारों की नजरें 6 जुलाई को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जो मंत्री प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
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    मध्य प्रदेश सरकार की नगरीय विकास एवं आवास राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी के कथित अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर आ गया है। हाई कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद प्रशासनिक अमले ने गांवों का रुख कर डुगडुगी (मुनादी) पिटवाकर आम जनता से इस मामले से संबंधित साक्ष्य मांगे हैं।

राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर सतना जिले की नागौद तहसील के ग्राम वसुधा में प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा यह मुनादी की गई, जिसमें ग्रामीणों से अपील की गई कि यदि उनके पास मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति या उनके परिवार से संबंधित कोई भी प्रासंगिक दस्तावेज या साक्ष्य हैं, तो वे उन्हें समिति के सामने प्रस्तुत करें। जानकारी के अनुसार, शनिवार को हरदुआ और मझोल गांवों में भी यह प्रक्रिया दोहराई जाएगी। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने 6 जुलाई को एक बैठक बुलाई है, जिसमें राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपने सभी मूल दस्तावेज और साक्ष्य पेश करने का नोटिस जारी किया गया है। नियमों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति का वैधानिक लाभ या प्रमाण-पत्र पाने के लिए यह प्रमाणित करना होता है कि संबंधित व्यक्ति का परिवार वर्ष 1950 की स्थिति के अनुसार उस क्षेत्र का मूल निवासी रहा हो, और छानबीन समिति मुख्य रूप से इसी बिंदु की जांच कर रही है।

यह पूरा विवाद कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा हाई कोर्ट में दायर की गई एक याचिका से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का दावा है कि प्रतिमा बागरी ने गलत तरीके से अनुसूचित जाति का प्रमाण-पत्र बनवाकर रैगांव (सुरक्षित) विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और मंत्री पद हासिल किया। याचिका में आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में 'बागरी' समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है और उनका संबंध कथित तौर पर राजपूत या ठाकुर समुदाय से है। हाई कोर्ट द्वारा दिए गए सख्त निर्देशों के बाद से ही इस मामले में प्रशासनिक और कानूनी प्रक्रियाएं काफी तेज हो गई हैं, और अब राजनीतिक व कानूनी गलियारों की नजरें 6 जुलाई को होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जो मंत्री प्रतिमा बागरी के राजनीतिक भविष्य की दिशा तय कर सकती है।
    user_MADHYA BHARAT NEWS
    MADHYA BHARAT NEWS
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 'चंदा चोरों' के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि वे आज अपने घर पर एक बैनर लगा रहे हैं। इस बैनर पर यह स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि उनके घर में 'चंदा चोरों' का प्रवेश वर्जित है और उन्हें उनके घर नहीं आना चाहिए। इसके साथ ही, सिंह ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मंदिरों में भी इसी तरह के बैनर लगाएं, जिन पर 'चंदा चोरों से सावधान' का संदेश लिखा हो, ताकि लोग ऐसे तत्वों से सतर्क रहें।
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    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने 'चंदा चोरों' के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि वे आज अपने घर पर एक बैनर लगा रहे हैं। इस बैनर पर यह स्पष्ट रूप से लिखा होगा कि उनके घर में 'चंदा चोरों' का प्रवेश वर्जित है और उन्हें उनके घर नहीं आना चाहिए। इसके साथ ही, सिंह ने आम जनता से भी अपील की है कि वे मंदिरों में भी इसी तरह के बैनर लगाएं, जिन पर 'चंदा चोरों से सावधान' का संदेश लिखा हो, ताकि लोग ऐसे तत्वों से सतर्क रहें।
    user_Sharda Shrivastava
    Sharda Shrivastava
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • मैहर जिले के ग्राम बेरमा में सड़क निर्माण के कार्य पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह निर्माण कार्य 'विकास की उल्टी गंगा' जैसा है, जहाँ प्रक्रिया और गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
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    मैहर जिले के ग्राम बेरमा में सड़क निर्माण के कार्य पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह निर्माण कार्य 'विकास की उल्टी गंगा' जैसा है, जहाँ प्रक्रिया और गुणवत्ता को लेकर कई गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।
    user_Satyanarayan tiwari
    Satyanarayan tiwari
    Local News Reporter मैहर•
    21 hrs ago
  • सतना के कोलगवां में, तीन महीने का वेतन ₹45,000 न मिलने और मोबाइल छीनने से परेशान होकर ड्राइवर कमलेश सिंह ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। भोपाल की क्यूडी शाखा द्वारा सुसाइड नोट की पुष्टि किए जाने के बाद, कोलगवां पुलिस ने इस मामले में आरोपी कार मालिक प्रकाश पाण्डेय को बीएनएस की धारा 108 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
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    सतना के कोलगवां में, तीन महीने का वेतन ₹45,000 न मिलने और मोबाइल छीनने से परेशान होकर ड्राइवर कमलेश सिंह ने जहर खाकर अपनी जान दे दी। भोपाल की क्यूडी शाखा द्वारा सुसाइड नोट की पुष्टि किए जाने के बाद, कोलगवां पुलिस ने इस मामले में आरोपी कार मालिक प्रकाश पाण्डेय को बीएनएस की धारा 108 के तहत गिरफ्तार कर लिया है।
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    3 hrs ago
  • भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को हटाने के मुद्दे पर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।
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    भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को हटाने के मुद्दे पर ग्रामीणों और वन विभाग के बीच तनाव की स्थिति बन गई है।
    user_Sharda Shrivastava
    Sharda Shrivastava
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • बरसात का मौसम शुरू होते ही अमदरा हाई सेकेंडरी स्कूल की बदहाली सामने आ गई है, जहाँ स्कूल भवन की कई छतें लगातार टपक रही हैं। इस कारण कक्षाओं में छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है और उन्हें भीगते कमरों में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भर जाने से फिसलने और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। इसके साथ ही, बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई विद्यार्थियों को एक ही कमरे में अधिक संख्या में बैठाया जा रहा है, और पर्याप्त फर्नीचर की कमी भी असुविधा का कारण बन रही है। बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे टपकती छतों वाले कमरों में पढ़ाई कराना बेहद मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक कोई आवश्यक सुधार कार्य नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उनकी मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और जर्जर भवनों की तत्काल जांच कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए। इस पूरे मामले पर संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारी फिलहाल मौन बने हुए हैं और स्कूल की बदहाल स्थिति तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल अमदरा हाई सेकेंडरी स्कूल की जांच कराने, जर्जर भवनों की मरम्मत करने और बच्चों के लिए समुचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका उद्देश्य है कि बरसात के मौसम में विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित न हों।
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    बरसात का मौसम शुरू होते ही अमदरा हाई सेकेंडरी स्कूल की बदहाली सामने आ गई है, जहाँ स्कूल भवन की कई छतें लगातार टपक रही हैं। इस कारण कक्षाओं में छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है और उन्हें भीगते कमरों में बैठकर पढ़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी भर जाने से फिसलने और दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया है। इसके साथ ही, बच्चों के बैठने की उचित व्यवस्था न होने के कारण कई विद्यार्थियों को एक ही कमरे में अधिक संख्या में बैठाया जा रहा है, और पर्याप्त फर्नीचर की कमी भी असुविधा का कारण बन रही है। बरसात के दौरान यह समस्या और गंभीर हो गई है, जिससे टपकती छतों वाले कमरों में पढ़ाई कराना बेहद मुश्किल हो गया है।

स्थानीय लोगों और अभिभावकों का कहना है कि स्कूल भवन लंबे समय से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक कोई आवश्यक सुधार कार्य नहीं किया गया। उनका आरोप है कि कई बार संबंधित अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया है, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। अभिभावकों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं की गई तो किसी भी दिन बड़ा हादसा हो सकता है। उनकी मांग है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए और जर्जर भवनों की तत्काल जांच कर आवश्यक मरम्मत कराई जाए। इस पूरे मामले पर संबंधित शिक्षा विभाग के अधिकारी फिलहाल मौन बने हुए हैं और स्कूल की बदहाल स्थिति तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला है।

स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग से तत्काल अमदरा हाई सेकेंडरी स्कूल की जांच कराने, जर्जर भवनों की मरम्मत करने और बच्चों के लिए समुचित बैठने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका उद्देश्य है कि बरसात के मौसम में विद्यार्थियों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों प्रभावित न हों।
    user_Vikash soni Maihar reporter
    Vikash soni Maihar reporter
    Media Consultant मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    23 hrs ago
  • सतना जिले के सितपुरा गाँव में स्थित रिलायंस का कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट आसपास के इलाकों को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है और लोगों में फैक्ट्री के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है। प्लांट से लगातार उठने वाली तेज दुर्गंध, हाइड्रोजन सल्फाइड और अमोनिया जैसी जहरीली गैसें हवा में घुल रही हैं, जिससे साँस लेना तक मुश्किल हो गया है। प्लांट में बायोगैस बनने के बाद बचे तरल कचरे (स्लरी) का निपटान भी पर्यावरण नियमों के खिलाफ खुले में किया जा रहा है, बजाय उसे पक्के टैंकों में रखने के। बारिश के दिनों में यह जहरीली स्लरी जमीन में रिसकर भूजल को दूषित कर रही है और खेतों को भी बर्बाद कर रही है, जिससे हैंडपंप और कुओं का पानी पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री रात के अंधेरे में चोरी-छिपे गंदा पानी और स्लरी को खेतों व नालों में बहाती है, जिससे उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो रही है। इस प्रदूषण के कारण ग्रामीणों में साँस की बीमारियाँ, चक्कर आना और आँखों में जलन जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से इस जानलेवा प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और जोर दे रहे हैं कि पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाने वाले इस प्लांट पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
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    सतना जिले के सितपुरा गाँव में स्थित रिलायंस का कम्प्रेस्ड बायोगैस (CBG) प्लांट आसपास के इलाकों को गंभीर रूप से प्रदूषित कर रहा है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है और लोगों में फैक्ट्री के प्रति गहरा आक्रोश पनप रहा है। प्लांट से लगातार उठने वाली तेज दुर्गंध, हाइड्रोजन सल्फाइड और अमोनिया जैसी जहरीली गैसें हवा में घुल रही हैं, जिससे साँस लेना तक मुश्किल हो गया है।

प्लांट में बायोगैस बनने के बाद बचे तरल कचरे (स्लरी) का निपटान भी पर्यावरण नियमों के खिलाफ खुले में किया जा रहा है, बजाय उसे पक्के टैंकों में रखने के। बारिश के दिनों में यह जहरीली स्लरी जमीन में रिसकर भूजल को दूषित कर रही है और खेतों को भी बर्बाद कर रही है, जिससे हैंडपंप और कुओं का पानी पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री रात के अंधेरे में चोरी-छिपे गंदा पानी और स्लरी को खेतों व नालों में बहाती है, जिससे उपजाऊ मिट्टी नष्ट हो रही है।

इस प्रदूषण के कारण ग्रामीणों में साँस की बीमारियाँ, चक्कर आना और आँखों में जलन जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ लगातार बढ़ रही हैं। स्थानीय लोग प्रशासन से इस जानलेवा प्रदूषण पर तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और जोर दे रहे हैं कि पर्यावरण नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाने वाले इस प्लांट पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
    user_खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    खबर हम देंगे चित्रकूट न्यूज़
    Local News Reporter मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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