कांकेर जिले की ग्राम पंचायत देवडोंगर के पास स्थित ढेकलावन गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मासूम बच्चे पर तेंदुए ने हमला कर उसे अपना शिकार बनाने की कोशिश की। खुशकिस्मती से, बच्चे की जान बच गई और वह फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन है, जहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है, जिसकी गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी है। यह घटना जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में आने और मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक बड़ा उदाहरण है, जो न केवल शारीरिक चोट पहुँचाती है बल्कि ग्रामीणों के मन में गहरा मनोवैज्ञानिक डर भी पैदा करती है। ऐसी स्थितियों में घबराने के बजाय सतर्कता और सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा बचाव हैं। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे विशेषकर छोटे बच्चों को घर के आंगन या बाहर अकेला न छोड़ें और शाम ढलने के बाद या सुबह जल्दी बाहर निकलते समय समूह में रहें। तेंदुए के खतरे से बचाव के लिए उचित रोशनी का प्रबंध करने, रात के समय घरों के आसपास और गलियों में मशाल या टॉर्च का उपयोग करने की बात कही गई है, क्योंकि तेंदुए अंधेरे का फायदा उठाकर हमला करते हैं। जंगल के पास या खेत जाते समय शोर मचाने, गाना गाने या तेज आवाज़ में रेडियो/फोन चलाने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि मानवीय आवाज़ सुनकर जानवर रास्ता बदल लें। इसके अतिरिक्त, घर के आसपास की घनी झाड़ियों और ऊँची घास को साफ रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये तेंदुए के छिपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं। पालतू जानवरों, जैसे मवेशियों और कुत्तों को रात में सुरक्षित बाड़े में रखने को कहा गया है, क्योंकि ये तेंदुए को बस्ती की ओर आकर्षित कर सकते हैं। वन्यजीव को देखने पर स्वयं उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करने और तुरंत वन विभाग को सूचित कर उनके निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया है। निष्कर्ष में, प्रशासन और वन विभाग से आग्रह किया गया है कि वे क्षेत्र में गश्त बढ़ाएं और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे या सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करें। इस संकट का सबसे प्रभावी समाधान ग्रामीणों की सतर्कता को ही बताया गया है, और सभी से सावधान तथा सुरक्षित रहने का आह्वान किया गया है।
कांकेर जिले की ग्राम पंचायत देवडोंगर के पास स्थित ढेकलावन गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ एक मासूम बच्चे पर तेंदुए ने हमला कर उसे अपना शिकार बनाने की कोशिश की। खुशकिस्मती से, बच्चे की जान बच गई और वह फिलहाल अस्पताल में उपचाराधीन है, जहाँ उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है, जिसकी गंभीरता को देखते हुए वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू कर दी है। यह घटना जंगली जानवरों के रिहायशी इलाकों में आने और मानव-वन्यजीव संघर्ष का एक बड़ा उदाहरण है, जो न केवल शारीरिक चोट पहुँचाती है बल्कि ग्रामीणों के मन में गहरा मनोवैज्ञानिक डर भी पैदा करती है। ऐसी स्थितियों में घबराने के बजाय सतर्कता और सामूहिक प्रयास ही सबसे बड़ा बचाव हैं। ग्रामीणों को सलाह दी गई है कि वे विशेषकर छोटे बच्चों को घर के आंगन या बाहर अकेला न छोड़ें और शाम ढलने के बाद या सुबह जल्दी बाहर निकलते समय समूह में रहें। तेंदुए के खतरे से बचाव के लिए उचित रोशनी का प्रबंध करने, रात के समय घरों के आसपास और गलियों में मशाल या टॉर्च का उपयोग करने की बात कही गई है, क्योंकि तेंदुए अंधेरे का फायदा उठाकर हमला करते हैं। जंगल के पास या खेत जाते समय शोर मचाने, गाना गाने या तेज आवाज़ में रेडियो/फोन चलाने का भी सुझाव दिया गया है, ताकि मानवीय आवाज़ सुनकर जानवर रास्ता बदल लें। इसके अतिरिक्त, घर के आसपास की घनी झाड़ियों और ऊँची घास को साफ रखने की सलाह दी गई है, क्योंकि ये तेंदुए के छिपने के लिए आदर्श स्थान होते हैं। पालतू जानवरों, जैसे मवेशियों और कुत्तों को रात में सुरक्षित बाड़े में रखने को कहा गया है, क्योंकि ये तेंदुए को बस्ती की ओर आकर्षित कर सकते हैं। वन्यजीव को देखने पर स्वयं उसे पकड़ने या मारने की कोशिश न करने और तुरंत वन विभाग को सूचित कर उनके निर्देशों का पालन करने पर जोर दिया गया है। निष्कर्ष में, प्रशासन और वन विभाग से आग्रह किया गया है कि वे क्षेत्र में गश्त बढ़ाएं और संवेदनशील इलाकों में पिंजरे या सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था करें। इस संकट का सबसे प्रभावी समाधान ग्रामीणों की सतर्कता को ही बताया गया है, और सभी से सावधान तथा सुरक्षित रहने का आह्वान किया गया है।
- छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में अवैध शराब की आपूर्ति करते हुए ग्रामीणों ने कुछ कोचियों को रंगे हाथों पकड़ा है। यह घटना बालोद के गोटिया देसी कंबोजित मदीना दुकान में हुई, जहाँ से कोचिए शराब की सप्लाई करने का आरोप है। ग्रामीणों ने इन पकड़े गए कोचियों को पंचायत भवन ले गए। इस दौरान ग्रामीणों ने शराब दुकान संचालकों पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं कि वे सरकारी रेट से भी ज्यादा कीमत पर इन कोचियों को नियम विरुद्ध तरीके से दारू बेच रहे हैं, जिससे दारूकोचियों का वर्चस्व बढ़ रहा है।1
- यह जानकारी दी गई है कि लोग अपनी टिकटें अभी बुक कर सकते हैं।1
- राजधानी रायपुर के वृन्दावन सभागृह में प्रदेश की अग्रणी सामाजिक व साहित्यिक संस्था वक्ता मंच ने आज एक भव्य "काव्य महाकुंभ" का आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न किया। इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रदेश भर से चयनित 151 रचनाकारों को उनकी सृजनशीलता, रचनाधर्मिता, मूल्य चेतना एवं नैतिक मूल्यों हेतु "शब्द शिखर सम्मान" से विभूषित किया गया। कार्यक्रम के दौरान महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद के शब्दों को उद्धृत करते हुए अतिथियों ने जोर देकर कहा कि साहित्य राजनीति के आगे चलनेवाली मशाल है। वक्ता मंच के अध्यक्ष राजेश पराते ने बताया कि रायपुर, बस्तर, धमतरी, महासमुंद, जगदलपुर, राजनांदगांव, कोरबा, दुर्ग, बालोद, रायगढ़, बिलासपुर, गरियाबंद, बलौदाबाजार, दल्ली राजहरा और बेमेतरा से उपस्थित 151 रचनाकारों ने काव्य पाठ किया और सम्मान प्राप्त किया। आयोजन के मुख्य अतिथि चिकित्सक व साहित्यकार डॉ. गीतेश अमरोहित थे, जबकि डॉ. संयुक्ता गांधी ने अध्यक्षता की। छ.ग. सन्निर्माण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल, वरिष्ठ पत्रकार राजकुमार धर द्विवेदी व पंडित पी.के. तिवारी, वरिष्ठ साहित्यकार सीमा पांडेय, लोकभवन में उपसचिव डॉ. रूपेंद्र कवि तथा वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजीत मिश्रा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में जांजगीर चांपा के लेखक उमेश कुमार श्रीवास की दो पुस्तकों— "पांच आगर एक कोरी" तथा "काव्य प्रत्यूषा"— और रायपुर के डॉ. लुनेश कुमार वर्मा की पुस्तक "माँ की रोटी" का विमोचन भी हुआ। वक्ता मंच विगत 34 वर्षों से निरंतर कलमकारों का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित करता आ रहा है, जिसमें नवोदित व प्रतिष्ठित दोनों धाराओं के रचनाकारों को मंच मिलता है। अतिथियों ने इस बात पर बल दिया कि साहित्यकारों को वर्तमान परिवेश की चुनौतियों का सामना करने के लिए रचनात्मक हस्तक्षेप करना होगा, क्योंकि साहित्यकार युग चेतना का वाहक होता है। साहित्य मानव जीवन की पीड़ाओं, संवेदनाओं और संघर्षों का एक जीवंत दस्तावेज है, जो जनमानस को संघर्षों की प्रेरणा व ऊर्जा प्रदान करता है। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन वक्ता मंच के संयोजक शुभम साहू द्वारा किया गया, जबकि काव्य गोष्ठी के सत्र का संचालन भिलाई के साहित्यकार राजाराम रसिक ने किया। संस्था की संरक्षिका ज्योति शुक्ला के आभार प्रदर्शन के साथ आयोजन समाप्त हुआ। इस अवसर पर राजेश पराते, शुभम साहू, विवेक बेहरा, ज्योति शुक्ला, दुष्यंत साहू, परम कुमार, पूर्णेश डडसेना, करण बघेल, आशा साहू, डॉ. गोपा शर्मा, डॉ. इंद्रदेव यदु, पंडित खेमेश्वर पुरी गोस्वामी, राजाराम रसिक, देव मानिकपुरी, तुकाराम कंसारी, डॉ. रमेश सोनसायटी, कोमल सिंह साहू सहित टीम वक्ता मंच के समस्त कार्यकर्ता उपस्थित थे।4
- छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में पुलिस ने एक गुमशुदा युवक से जुड़ी सनसनीखेज हत्याकांड को महज 72 घंटों के भीतर सुलझाने का दावा किया है। यह मामला 28 मई को तब शुरू हुआ, जब बैहरसारी गांव के कोमल वर्मा अचानक लापता हो गए। उनकी गुमशुदगी के ठीक अगले दिन, पांडातराई के सोंढा गांव में एक बोरी के भीतर कोमल का शव बरामद हुआ, जिसके बाद पुलिस ने सक्रियता से जांच शुरू की। पुलिस ने मामले की तह तक जाने के लिए कॉल डिटेल्स खंगाली, जिसके आधार पर शक की सुई एक महिला मंदाकिनी वर्मा की ओर घूमी। हिरासत में लिए जाने पर मंदाकिनी वर्मा ने चौंकाने वाला सच उजागर किया। महिला का आरोप है कि कोमल उसे अश्लील वीडियो दिखाकर लगातार ब्लैकमेल कर रहा था। घटना की रात जब ब्लैकमेलिंग का दबाव बहुत बढ़ गया, तो महिला ने कोमल को अपने घर बुलाया और लोहे के पाने से उस पर हमला कर दिया। इसके बाद, महिला ने अपने पति के साथ मिलकर कोमल को मौत के घाट उतार दिया। हत्या के बाद, शव को ठिकाने लगाने के लिए आरोपियों ने महिला के भाई की मदद ली। भाई ने ट्रैक्टर का इस्तेमाल कर शव को दूर सुनसान जगह पर फेंक दिया था। हालांकि, कबीरधाम पुलिस की गहन जांच के आगे यह शातिर चाल नाकाम रही। इस मामले में अब पति, पत्नी और भाई तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, जिससे ब्लैकमेलिंग का यह खौफनाक अंत सामने आया है।1
- पानी की गंभीर समस्या का सामना कर रही इंदौर की जनता अब सड़कों पर उतर आई है, जहाँ वे 'पानी दो, पानी दो' के नारे लगाते हुए शासन-प्रशासन से तत्काल पानी उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं। लोगों को पानी नहीं मिलने के कारण वे इसके लिए तरस रहे हैं, जिससे उनमें गहरा आक्रोश है। शहरवासी इस बात को लेकर बेहद परेशान हैं कि उन्हें आखिर पानी क्यों नहीं मिल रहा है और वे इसके 'असल कारण' जानना चाहते हैं। पानी की कमी के कारण जनता में भारी असंतोष है और वे चाहते हैं कि प्रशासन जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करे।1
- मूल पाठ में 'मैं जैसी हूँ' का सीधा और स्पष्ट बयान प्रस्तुत किया गया है।1
- गरियाबंद के न्यू सर्किट हाउस में रविवार सुबह करीब 6:30 बजे अचानक आग लगने से हड़कंप मच गया। इस भीषण आग में लाखों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आग स्टोर रूम से शुरू हुई और शॉर्ट सर्किट के कारण किचन तक फैल गई। आग की चपेट में आने से फ्रिज, अलमारी, सीलिंग फैन सहित बड़ी मात्रा में रखा सामान जलकर राख हो गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाने में जुट गई। घटना की जानकारी मिलते ही लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और नुकसान का जायजा लिया। फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है और नुकसान का आकलन किया जा रहा है।4