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रक्षाबंधन पर्व पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत की मिट्टी में बसी हुई परंपराओं में कुछ त्यौहार ऐसे हैं जो दिल को छू जाते हैं। रक्षाबंधन उनमें से एक है। यह केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार, सुरक्षा और अटूट बंधन का जीवंत प्रतीक है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व घर-घर में खुशियों का संचार करता है। राखी का धागा जितना पतला दिखता है, उतना ही मजबूत होता है भाई-बहन का रिश्ता। रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है “रक्षा का बंधन”। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह वचन केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं होता। यह भावनात्मक सहारा, विश्वास और आजीवन साथ देने का वादा होता है। जब बहन राखी बांधती है तो वह भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। भाई बदले में उपहार देता है और सुरक्षा का वचन दोहराता है। यह सरल सी रस्म सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इस पर्व की जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं में गहराई तक फैली हुई हैं। एक प्रसिद्ध कथा इंद्र और इंद्राणी की है। जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ तो इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर एक पवित्र धागा बांध दिया। उस धागे की शक्ति से इंद्र विजयी हुए। इसी तरह द्रौपदी ने कृष्ण के घाव से बहते खून को अपने आंचल से पोंछा था। कृष्ण ने वचन दिया था कि वह द्रौपदी की रक्षा करेंगे। जब चीरहरण का प्रसंग आया तो कृष्ण ने उसी वचन को निभाया। ये कथाएँ बताती हैं कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, बल्कि किसी भी रिश्ते में सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक बन सकता है। इतिहास में भी कई प्रसंग मिलते हैं। रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी थी जब उनकी रक्षा का संकट था। हुमायूँ ने हिंदू-मुस्लिम भेदभाव भुलाकर उनकी मदद की। यह घटना दिखाती है कि राखी का धागा सांप्रदायिक दीवारों को भी पार कर सकता है। आज भी कई जगह पर लड़कियाँ अपने पड़ोसी भाईयों या दोस्तों को राखी बांधती हैं। यह परंपरा समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करती है। रक्षाबंधन का उत्सव घरों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई होती है। बहनें नए कपड़े पहनती हैं, राखी और पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी होती है। भाई भी तैयार होकर बैठता है। बहन राखी बांधते समय मंगल कामनाएँ करती है। कई घरों में पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। दोपहर को परिवार साथ बैठकर विशेष व्यंजन खाता है। गुजिया, लड्डू, खीर और अन्य मिठाइयाँ इस दिन खास महत्व रखती हैं। आजकल रक्षाबंधन का रूप बदल रहा है। शहरों में बहनें और भाई दूर-दूर रहते हैं। वे ऑनलाइन राखी ऑर्डर करते हैं या वीडियो कॉल पर राखी बांधते हैं। कई बहनें अब भाई को सुरक्षा का वचन भी देती हैं। यह बदलाव सकारात्मक है। पहले केवल भाई बहन की रक्षा का जिम्मेदार माना जाता था, अब यह रिश्ता समानता पर आधारित हो रहा है। कई जगह पर बहनें भाई को राखी के साथ कुछ उपहार भी देती हैं। यह दर्शाता है कि प्यार एकतरफा नहीं होता। क्षेत्रीय विविधता भी इस पर्व को और खास बनाती है। राजस्थान में “लूंटिया” नामक एक विशेष राखी बाँधी जाती है। महाराष्ट्र में “नारियल पूर्णिमा” के रूप में भी मनाया जाता है। बंगाल में यह “झापन” या अन्य रूपों में दिखाई देता है। दक्षिण भारत में भी कुछ समुदायों में यह पर्व मनाया जाता है। हर जगह रीति-रिवाज थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल भावना एक ही रहती है—रक्षा और स्नेह। रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि परिवार सबसे बड़ा सहारा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भाई-बहन अक्सर व्यस्त हो जाते हैं। साल में एक दिन ऐसा आता है जब वे एक-दूसरे के लिए समय निकालते हैं। राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं रहता, वह दिल में भी बंध जाता है। कई लोग इस दिन पुरानी यादें ताजा करते हैं—बचपन की लड़ाई-झगड़े, साथ खेलना, एक-दूसरे की शिकायतें और फिर प्यार से सुलह। ये यादें जीवन भर साथ रहती हैं। इस पर्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। यह सिखाता है कि सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं होती। भावनात्मक सुरक्षा, सम्मान और विश्वास भी उतना ही जरूरी है। जब भाई बहन को यह महसूस कराता है कि वह अकेली नहीं है, तो वह मजबूत बनती है। इसी तरह बहन का स्नेह भाई को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाता है। आधुनिक समाज में जहाँ रिश्ते अक्सर कमजोर पड़ रहे हैं, रक्षाबंधन एक मजबूत संदेश देता है कि परिवार के बंधन को संजोए रखना चाहिए। आजकल कई संगठन और स्कूल भी रक्षाबंधन मनाते हैं। बच्चे एक-दूसरे को राखी बांधते हैं और भाईचारे का पाठ सीखते हैं। कुछ जगहों पर सैनिकों को राखी भेजी जाती है। देश की सीमा पर तैनात जवानों के लिए यह राखी विशेष अर्थ रखती है। वे महसूस करते हैं कि पूरा देश उनके परिवार की तरह है। रक्षाबंधन पर्यावरण के प्रति भी जागरूकता बढ़ा रहा है। कई लोग अब प्लास्टिक की राखियों की जगह कपड़े या जैविक सामग्री से बनी राखियाँ इस्तेमाल कर रहे हैं। यह छोटा सा कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। अंत में, रक्षाबंधन केवल एक दिन का त्यौहार नहीं है। यह पूरे साल चलने वाले प्यार और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब राखी का धागा कलाई पर बंधता है तो वह कहता है—“मैं तुम्हारे साथ हूँ।” यह वाक्य जितना सरल है, उतना ही गहरा है। हर भाई-बहन को इस पर्व पर एक-दूसरे से मिलना चाहिए, बातें करनी चाहिए और अपने रिश्ते को और मजबूत बनाना चाहिए। रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ। राखी का यह धागा हमेशा आपके रिश्तों को मजबूती दे। प्यार, सुरक्षा और विश्वास का यह बंधन कभी न टूटे। जय श्री राम, जय भारत।

11 hrs ago
user_P.K. SHARMA
P.K. SHARMA
Local News Reporter साकेत, दक्षिण दिल्ली, दिल्ली•
11 hrs ago
45007c7f-3809-4fe2-965b-e7d2798d794c

रक्षाबंधन पर्व पर सभी देशवासियों को हार्दिक शुभकामनाएं। भारत की मिट्टी में बसी हुई परंपराओं में कुछ त्यौहार ऐसे हैं जो दिल को छू जाते हैं। रक्षाबंधन उनमें से एक है। यह केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के प्यार, सुरक्षा और अटूट बंधन का जीवंत प्रतीक है। हर साल श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व घर-घर में खुशियों का संचार करता है। राखी का धागा जितना पतला दिखता है, उतना ही मजबूत होता है भाई-बहन का रिश्ता। रक्षाबंधन का शाब्दिक अर्थ है “रक्षा का बंधन”। बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है। यह वचन केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं होता। यह भावनात्मक सहारा, विश्वास और आजीवन साथ देने का वादा होता है। जब बहन राखी बांधती है तो वह भाई के माथे पर तिलक लगाती है, आरती उतारती है और मिठाई खिलाती है। भाई बदले में उपहार देता है और सुरक्षा का वचन दोहराता है। यह सरल सी रस्म सदियों से चली आ रही है और आज भी उतनी ही प्रासंगिक है। इस पर्व की जड़ें प्राचीन पौराणिक कथाओं में गहराई तक फैली हुई हैं। एक प्रसिद्ध कथा इंद्र और इंद्राणी की है। जब देवताओं और असुरों के बीच युद्ध हुआ तो इंद्राणी ने इंद्र की कलाई पर एक पवित्र धागा बांध दिया। उस धागे की शक्ति से इंद्र विजयी हुए। इसी तरह द्रौपदी ने कृष्ण के घाव से बहते खून को अपने आंचल से पोंछा था। कृष्ण ने वचन दिया था कि वह द्रौपदी की रक्षा करेंगे। जब चीरहरण का प्रसंग आया तो कृष्ण ने उसी वचन को निभाया। ये कथाएँ बताती हैं कि रक्षाबंधन केवल भाई-बहन तक सीमित नहीं, बल्कि किसी भी रिश्ते में सुरक्षा और स्नेह का प्रतीक बन सकता है। इतिहास में भी कई प्रसंग मिलते हैं। रानी कर्णावती ने मुगल सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी थी जब उनकी रक्षा का संकट था। हुमायूँ ने हिंदू-मुस्लिम भेदभाव भुलाकर उनकी मदद की। यह घटना दिखाती है कि राखी का धागा सांप्रदायिक दीवारों को भी पार कर सकता है। आज भी कई जगह पर लड़कियाँ अपने पड़ोसी भाईयों या दोस्तों को राखी बांधती हैं। यह परंपरा समाज में भाईचारे की भावना को मजबूत करती है। रक्षाबंधन का उत्सव घरों में बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। सुबह जल्दी उठकर घर की साफ-सफाई होती है। बहनें नए कपड़े पहनती हैं, राखी और पूजा की थाली सजाती हैं। थाली में रोली, अक्षत, दीपक, मिठाई और राखी होती है। भाई भी तैयार होकर बैठता है। बहन राखी बांधते समय मंगल कामनाएँ करती है। कई घरों में पारंपरिक गीत गाए जाते हैं। दोपहर को परिवार साथ बैठकर विशेष व्यंजन खाता है। गुजिया, लड्डू, खीर और अन्य मिठाइयाँ इस दिन खास महत्व रखती हैं। आजकल रक्षाबंधन का रूप बदल रहा है। शहरों में बहनें और भाई दूर-दूर रहते हैं। वे ऑनलाइन राखी ऑर्डर करते हैं या वीडियो कॉल पर राखी बांधते हैं। कई बहनें अब भाई को सुरक्षा का वचन भी देती हैं। यह बदलाव सकारात्मक है। पहले केवल भाई बहन की रक्षा का जिम्मेदार माना जाता था, अब यह रिश्ता समानता पर आधारित हो रहा है। कई जगह पर बहनें भाई को राखी के साथ कुछ उपहार भी देती हैं। यह दर्शाता है कि प्यार एकतरफा नहीं होता। क्षेत्रीय विविधता भी इस पर्व को और खास बनाती है। राजस्थान में “लूंटिया” नामक एक विशेष राखी बाँधी जाती है। महाराष्ट्र में “नारियल पूर्णिमा” के रूप में भी मनाया जाता है। बंगाल में यह “झापन” या अन्य रूपों में दिखाई देता है। दक्षिण भारत में भी कुछ समुदायों में यह पर्व मनाया जाता है। हर जगह रीति-रिवाज थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल भावना एक ही रहती है—रक्षा और स्नेह। रक्षाबंधन हमें याद दिलाता है कि परिवार सबसे बड़ा सहारा है। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में भाई-बहन अक्सर व्यस्त हो जाते हैं। साल में एक दिन ऐसा आता है जब वे एक-दूसरे के लिए समय निकालते हैं। राखी का धागा सिर्फ कलाई पर नहीं रहता, वह दिल में भी बंध जाता है। कई लोग इस दिन पुरानी यादें ताजा करते हैं—बचपन की लड़ाई-झगड़े, साथ खेलना, एक-दूसरे की शिकायतें और फिर प्यार से सुलह। ये यादें जीवन भर साथ रहती हैं। इस पर्व का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। यह सिखाता है कि सुरक्षा केवल शारीरिक नहीं होती। भावनात्मक सुरक्षा, सम्मान और विश्वास भी उतना ही जरूरी है। जब भाई बहन को यह महसूस कराता है कि वह अकेली नहीं है, तो वह मजबूत बनती है। इसी तरह बहन का स्नेह भाई को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाता है। आधुनिक समाज में जहाँ रिश्ते अक्सर कमजोर पड़ रहे हैं, रक्षाबंधन एक मजबूत संदेश देता है कि परिवार के बंधन को संजोए रखना चाहिए। आजकल कई संगठन और स्कूल भी रक्षाबंधन मनाते हैं। बच्चे एक-दूसरे को राखी बांधते हैं और भाईचारे का पाठ सीखते हैं। कुछ जगहों पर सैनिकों को राखी भेजी जाती है। देश की सीमा पर तैनात जवानों के लिए यह राखी विशेष अर्थ रखती है। वे महसूस करते हैं कि पूरा देश उनके परिवार की तरह है। रक्षाबंधन पर्यावरण के प्रति भी जागरूकता बढ़ा रहा है। कई लोग अब प्लास्टिक की राखियों की जगह कपड़े या जैविक सामग्री से बनी राखियाँ इस्तेमाल कर रहे हैं। यह छोटा सा कदम पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण है। अंत में, रक्षाबंधन केवल एक दिन का त्यौहार नहीं है। यह पूरे साल चलने वाले प्यार और जिम्मेदारी का प्रतीक है। जब राखी का धागा कलाई पर बंधता है तो वह कहता है—“मैं तुम्हारे साथ हूँ।” यह वाक्य जितना सरल है, उतना ही गहरा है। हर भाई-बहन को इस पर्व पर एक-दूसरे से मिलना चाहिए, बातें करनी चाहिए और अपने रिश्ते को और मजबूत बनाना चाहिए। रक्षाबंधन की शुभकामनाएँ। राखी का यह धागा हमेशा आपके रिश्तों को मजबूती दे। प्यार, सुरक्षा और विश्वास का यह बंधन कभी न टूटे। जय श्री राम, जय भारत।

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