विशेष देवास से सय्यद साजिद अली देवास कलेक्टर का 'हंटर': निजी स्कूलों की 'कमीशनखोरी' के साम्राज्य पर प्रहार, अब अभिभावकों को मिली बड़ी राहत! देवास। शिक्षा के नाम पर चल रहे 'कमीशन' के खेल और निजी स्कूलों की मनमानी पर अब देवास प्रशासन ने कड़ा पहरा लगा दिया है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के एक आदेश ने उन स्कूल संचालकों की नींद उड़ा दी है, जो अभिभावकों को किसी खास दुकान से ही महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विवश करते थे। प्रमुख बिंदु जिन्होंने स्कूलों की 'मोनोपोली' को ध्वस्त किया: दुकानों की गुलामी से आजादी: अब कोई भी स्कूल आपको यह नहीं बता पाएगा कि आपको सामान कहाँ से लेना है। आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार शहर की किसी भी दुकान से किताबें और ड्रेस खरीद सकेंगे। NCERT की अनिवार्यता: निजी पब्लिशर्स की महंगी और भारी-भरकम किताबों का दौर खत्म। अब CBSE में NCERT और MP बोर्ड में सरकारी किताबें ही मान्य होंगी। 3 साल तक यूनिफॉर्म पर 'लॉक-इन': हर साल रंग और डिजाइन बदलकर अभिभावकों की जेब काटने का खेल बंद होगा। अब 3 साल तक स्कूल अपनी यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। हल्का होगा 'बस्ते का बोझ': शिक्षा अब बच्चों के कंधों पर बोझ नहीं बनेगी, प्रशासन ने स्कूल बैग का वजन भी निर्धारित कर दिया है। सीधे FIR की चेतावनी: प्रशासन का सख्त रुख यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल संचालक या विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 223 के तहत सीधे FIR दर्ज की जाएगी। टिप्पणी: प्रशासन का यह कदम स्वागत योग्य है। लंबे समय से देवास के मध्यमवर्गीय परिवार इस 'शैक्षणिक लूट' का शिकार हो रहे थे। ' देवास की' हमेशा से जनता के हक की बात करता आया है, और हम प्रशासन के इस जनहितैषी फैसले की सराहना करते हैं। अब जिम्मेदारी अभिभावकों की भी है कि वे अपनी जागरूकता दिखाएं और किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं। जनता की राय: क्या आपको लगता है कि इस आदेश से स्कूलों की दादागिरी पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी? अपनी राय हमें जरूर बताएं।
विशेष देवास से सय्यद साजिद अली देवास कलेक्टर का 'हंटर': निजी स्कूलों की 'कमीशनखोरी' के साम्राज्य पर प्रहार, अब अभिभावकों को मिली बड़ी राहत! देवास। शिक्षा के नाम पर चल रहे 'कमीशन' के खेल और निजी स्कूलों की मनमानी पर अब देवास प्रशासन ने कड़ा पहरा लगा दिया है। कलेक्टर ऋतुराज सिंह के एक आदेश ने उन स्कूल संचालकों की नींद उड़ा दी है, जो अभिभावकों को किसी खास दुकान से ही महंगी किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए विवश करते थे। प्रमुख बिंदु जिन्होंने स्कूलों की 'मोनोपोली' को ध्वस्त किया: दुकानों की गुलामी से आजादी: अब कोई भी स्कूल आपको यह नहीं बता पाएगा कि आपको सामान कहाँ से लेना है। आप अपनी सुविधा और बजट के अनुसार शहर की किसी भी दुकान से किताबें और ड्रेस खरीद सकेंगे। NCERT की अनिवार्यता: निजी पब्लिशर्स की महंगी और भारी-भरकम किताबों का दौर खत्म। अब CBSE में NCERT और MP बोर्ड में सरकारी किताबें ही मान्य होंगी। 3 साल तक यूनिफॉर्म पर 'लॉक-इन': हर साल रंग और डिजाइन बदलकर अभिभावकों की जेब काटने का खेल बंद होगा। अब 3 साल तक स्कूल अपनी यूनिफॉर्म नहीं बदल सकेंगे। हल्का होगा 'बस्ते का बोझ': शिक्षा अब बच्चों के कंधों पर बोझ नहीं बनेगी, प्रशासन ने स्कूल बैग का वजन भी निर्धारित कर दिया है। सीधे FIR की चेतावनी: प्रशासन का सख्त रुख यह आदेश सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है। कलेक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि कोई भी स्कूल संचालक या विक्रेता इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 223 के तहत सीधे FIR दर्ज की जाएगी। टिप्पणी: प्रशासन का यह कदम स्वागत योग्य है। लंबे समय से देवास के मध्यमवर्गीय परिवार इस 'शैक्षणिक लूट' का शिकार हो रहे थे। ' देवास की' हमेशा से जनता के हक की बात करता आया है, और हम प्रशासन के इस जनहितैषी फैसले की सराहना करते हैं। अब जिम्मेदारी अभिभावकों की भी है कि वे अपनी जागरूकता दिखाएं और किसी भी प्रकार के दबाव में न आएं। जनता की राय: क्या आपको लगता है कि इस आदेश से स्कूलों की दादागिरी पर पूरी तरह लगाम लग पाएगी? अपनी राय हमें जरूर बताएं।
- देवास से (साजिद अली)✍️ यह तस्वीर शहर के रेवा बाग स्थित स्वास्थ्य केंद्र की है। शाम करीब 5:30 बजे बच्चों को लगने वाली वैक्सीन का डब्बा लावारिस हालत में पड़ा मिला, जबकि केंद्र बंद होने का समय 6:30 बजे है। गौरतलब है कि इन वैक्सीन को विशेष तापमान में सुरक्षित रखना आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर इतनी संवेदनशील दवाओं को इस तरह असुरक्षित क्यों छोड़ा गया? यदि इस लापरवाही के कारण कल को किसी बच्चे के साथ कोई हादसा होता है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?1
- पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने अपने ही सेवादारों की पर्ची खोल दी, कहा– हमारे यहां मालपानी अच्छा मिलता है इसलिए बनते हैं सेवादार और कुछ लौंडे तो लौंडियाबजी के लिए सेवादार बन रहे हैं, अब जब पंडित जी को इतना सब कुछ पता है तो ऐसे सेवादारों को बाहर कर दो क्योंकि हो सकता है कभी कोई ऐसा सेवादार किसी के साथ छेड़खानी कर दे, और फिर इन्हें बदनामी का दाग झेलना पड़े आपकी क्या राय है कमेंट में जरूर बताएं 👇1
- इंदौर में एक ऑटो चालक की सतर्कता से 18 चोरी के मोबाइल बरामद किए गए। ऑटो चालक की समझदारी और जागरूकता से पुलिस को बड़ी सफलता मिली। पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। 👉 ताज़ा ब्रेकिंग और स्थानीय खबरों के लिए चैनल को Subscribe करें । 👉 वीडियो को Like, Share और Comment ज़रूर करें ।1
- इंदौर में उत्साह के आगे धरे रह गए सुरक्षा इंतज़ाम! लोगों के जोश और भारी भीड़ के सामने प्रशासन के लगाए गए बैरिकेट्स भी टिक नहीं पाए। हजारों की संख्या में लोग राजवाड़ा पहुंचने के लिए उमड़ पड़े, जिससे कई जगह सुरक्षा इंतज़ाम बिखरते नजर आए। भीड़ के दबाव में बैरिकेट्स की हालत खराब हो गई और व्यवस्था संभालना प्रशासन के लिए चुनौती बन गया। देखिए मौके का LIVE वीडियो — कैसे उत्साह के आगे धरे रह गए सारे सुरक्षा प्रबंध!1
- This is the situation of muslim living Uttam Nagar is the new definition of justice?1
- इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर में जूनियर डॉक्टरों (JUDA) ने अपनी लंबित मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को जूडा के बैनर तले डॉक्टरों ने एक विशाल बाइक रैली निकाली, जो एमवाई अस्पताल से शुरू होकर एमजीएम और एमटीएस होते हुए वापस एमवाई अस्पताल पर समाप्त हुई। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों का मुख्य आरोप है कि वर्ष 2021 में सरकार के साथ हुए समझौते के तहत उनके मानदेय में सालाना 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि होनी थी, जिसे अब तक लागू नहीं किया गया है। जूडा अध्यक्ष डॉ. अंशुल ने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि पड़ोसी राज्यों जैसे दिल्ली और राजस्थान में जूनियर डॉक्टरों का मानदेय 1 लाख रुपये से अधिक है, जबकि मध्य प्रदेश में यह अब भी 70 से 80 हजार रुपये के बीच अटका हुआ है। उन्होंने बताया कि पिछले 11 महीनों का एरियर भी बकाया है। डॉक्टरों का कहना है कि वे पिछले एक साल से सरकार को पत्र और ईमेल के माध्यम से अपनी समस्याओं से अवगत करा रहे हैं, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। भोपाल में भी इसी तरह का आंदोलन जारी है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो वे अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने को मजबूर होंगे।1
- आखिरी लोक अदालत है इसलिए उन्होंने इंदौर के नागरिक को से अपील की की अपने जलकर व संपत्ति कर का इस लोक अदालत में भुगतान करें और एक जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें1
- इंदौर में सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर जतिन शुक्ला पहुंचे क्राइम ब्रांच एडिशनल डीसीपी (क्राइम) के सामने जतिन शुक्ला ने कहा —“मुझसे गलती हुई है, मैं पहले भी माफी मांग चुका हूं। मेरा उद्देश्य इंदौर शहर या किसी भी व्यक्ति का अपमान करने का नहीं था।” उन्होंने इंदौर के सांसद शंकर लालवानी से भी माफी मांगते हुए कहा कि आगे से ऐसी गलती दोबारा नहीं होगी। इस पूरे मामले के बाद अब उनका माफी मांगने वाला वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। देखें जतिन शुक्ला का माफी मांगने वाला वीडियो1