*नानपारा में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का आरोप, 1500 से 2000 रुपये तक बेचे जा रहे सिलेंडर* *सप्लाई की कमी का बहाना, उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा सिलेंडर — अवैध रिफिलिंग कारोबारियों के पास भरमार* नानपारा (बहराइच)। कस्बा नानपारा में घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियों द्वारा सप्लाई न आने का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया जा रहा, जबकि बाजार में वही सिलेंडर 1500 से 2000 रुपये तक में ब्लैक में बेचे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान और इजरायल के बीच तनाव को मुद्दा बनाकर कुछ लोग गैस सिलेंडरों की कमी का माहौल बना रहे हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनी से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही, जिसके कारण उपभोक्ताओं को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शासन और प्रशासन का दावा है कि उत्तर प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सप्लाई सामान्य है तो उपभोक्ताओं को सिलेंडर क्यों नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मचारी और अवैध गैस रिफिलिंग का कारोबार करने वाले लोग खुलेआम सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जो लोग अधिक पैसे देने को तैयार हैं, उन्हें 1500 से 2000 रुपये तक में सिलेंडर आसानी से मिल जा रहा है, जबकि आम उपभोक्ता को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कस्बा नानपारा में भारत गैस, एचपी गैस और इंडेन गैस की एजेंसियां संचालित हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि लगभग सभी जगहों पर यही स्थिति बनी हुई है। यदि एजेंसियों के अनुसार गैस का लोड नहीं आ रहा है, तो फिर अवैध रिफिलिंग करने वालों को सिलेंडर कहां से उपलब्ध हो रहे हैं — यह बड़ा सवाल बना हुआ है। स्थानीय उपभोक्ताओं ने इस मामले में जिलाधिकारी बहराइच और उपजिलाधिकारी नानपारा से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी तो आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
*नानपारा में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी का आरोप, 1500 से 2000 रुपये तक बेचे जा रहे सिलेंडर* *सप्लाई की कमी का बहाना, उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा सिलेंडर — अवैध रिफिलिंग कारोबारियों के पास भरमार* नानपारा (बहराइच)। कस्बा नानपारा में घरेलू गैस सिलेंडरों की कथित कालाबाजारी का मामला सामने आया है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि गैस एजेंसियों द्वारा सप्लाई न आने का बहाना बनाकर उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं दिया जा रहा, जबकि बाजार में वही सिलेंडर 1500 से 2000 रुपये तक में ब्लैक में बेचे जा रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार वर्तमान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे ईरान और इजरायल के बीच तनाव को मुद्दा बनाकर कुछ लोग गैस सिलेंडरों की कमी का माहौल बना रहे हैं। एजेंसी संचालकों का कहना है कि कंपनी से पर्याप्त सप्लाई नहीं मिल रही, जिसके कारण उपभोक्ताओं को बार-बार एजेंसी के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर शासन और प्रशासन का दावा है कि उत्तर प्रदेश में घरेलू गैस सिलेंडरों की कोई कमी नहीं है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब सप्लाई सामान्य है
तो उपभोक्ताओं को सिलेंडर क्यों नहीं मिल रहा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एजेंसी से जुड़े कुछ कर्मचारी और अवैध गैस रिफिलिंग का कारोबार करने वाले लोग खुलेआम सिलेंडरों की कालाबाजारी कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि जो लोग अधिक पैसे देने को तैयार हैं, उन्हें 1500 से 2000 रुपये तक में सिलेंडर आसानी से मिल जा रहा है, जबकि आम उपभोक्ता को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कस्बा नानपारा में भारत गैस, एचपी गैस और इंडेन गैस की एजेंसियां संचालित हैं। उपभोक्ताओं का कहना है कि लगभग सभी जगहों पर यही स्थिति बनी हुई है। यदि एजेंसियों के अनुसार गैस का लोड नहीं आ रहा है, तो फिर अवैध रिफिलिंग करने वालों को सिलेंडर कहां से उपलब्ध हो रहे हैं — यह बड़ा सवाल बना हुआ है। स्थानीय उपभोक्ताओं ने इस मामले में जिलाधिकारी बहराइच और उपजिलाधिकारी नानपारा से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस पर रोक नहीं लगी तो आम उपभोक्ताओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
- #BigNews : एक्शन में सरकार, आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू, ताकि देश में बनी रहे पेट्रोलियम उत्पाद-प्राकतिक गैस की उपलब्धता #EssentialCommoditiesAct #IranWar #LPGShortage #MiddleEastWar #GasShortage #LPGCrisis #ZeeNEWS1
- बहराइच। खैरीघाट थाना क्षेत्र अंतर्गत शिवपुर ग्राम पंचायत के लोधनपुरवा गांव में निर्माणाधीन मंदिर की दीवार गिराए जाने को लेकर विवाद बढ़ गया। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया और दो दर्जन से अधिक लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने डायल 112 पर सूचना दी, जिसके बाद मौके पर पहुंची पीआरवी पुलिस ने लोगों को समझाकर मामला शांत कराने का प्रयास किया। इस दौरान ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए मंदिर निर्माण कार्य जारी रखने की मांग की। गांव निवासी बरकत अली, नफीस, राम चन्द्र, वीरसेन, ओमकार, संतोष, मनीराम, सुरेन्द्र नाथ, कंधई लाल, कृपा राम, राम अचल, चांदनी, रूपा, कांति देवी, पुष्पा, गीता, प्रेमावती, बिट्टा और राधा समेत दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों का कहना है कि उक्त स्थान करीब दो दशकों से देवस्थान के रूप में पूजित है। लगभग 30 वर्षों से यहां पूजा-पाठ होता रहा है और पिछले दो वर्षों से दुर्गा पूजा व मूर्ति पूजन भी किया जा रहा है। गांव के लोगों के सहयोग से मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था, जिसकी पश्चिम दिशा की दीवार कुछ लोगों द्वारा गिरा दी गई। वहीं दूसरे पक्ष के मन्नू का दावा है कि जिस जमीन पर मंदिर का निर्माण किया जा रहा है वह उनकी निजी भूमि है और ग्रामीण जबरन निर्माण करा रहे हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय लेखपाल राकेश कुमार ने बताया कि भूमि अभिलेखों में मन्नू के नाम दर्ज है जबकि खैरीघाट थानाध्यक्ष आनंद सिंह ने बताया कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है तहरीर मिलने पर जांच करवाई जाएगी।4
- भारत-नेपाल सीमा पर 30 ग्राम स्मैक के साथ दो तस्कर गिरफ्तार बहराइच। 59वीं वाहिनी सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) नानपारा और थाना मोतीपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने भारत-नेपाल सीमा पर कार्रवाई करते हुए 30 ग्राम स्मैक के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार, कमांडेंट कैलाश चन्द्र रमोला के निर्देशन में खुफिया सूचना के आधार पर एसएसबी की सीमा चौकी लौकाही और मोतीपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने बॉर्डर पिलर संख्या 663/1 के पास संयुक्त नाका लगाया। इसी दौरान शाम करीब 8:05 बजे एक मोटरसाइकिल पर सवार दो व्यक्ति संदिग्ध परिस्थितियों में आते दिखाई दिए, जिन्हें रोककर पूछताछ की गई। पूछताछ में उन्होंने अपनी पहचान अर्श खान (21) पुत्र वसीम खान निवासी ग्राम सालारगंज, जिला बहराइच तथा अमन (28) पुत्र दीपु सिंह निवासी ग्राम काजीपुरा, जिला बहराइच के रूप में बताई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत तलाशी लेने पर उनके पास से 30 ग्राम संदिग्ध स्मैक बरामद हुई। इसके बाद दोनों अभियुक्तों को गिरफ्तार कर बरामद स्मैक के साथ आगे की विधिक कार्रवाई के लिए थाना मोतीपुर पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया। एसएसबी 59वीं वाहिनी नानपारा द्वारा सीमावर्ती क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है।1
- महसी, बहराइच: जनपद बहराइच के महसी तहसील क्षेत्र अंतर्गत घाघरा कछार के इलाकों में मुसीबतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भेड़ियों और अन्य जंगली जानवरों के खौफ के बीच अब जलीय जीवों ने भी आबादी वाले क्षेत्रों में अपनी दस्तक दे दी है, जिससे स्थानीय निवासियों की नींद उड़ी हुई है। आधी रात को गांव की गलियों में दिखा मगरमच्छ ताजा मामला थाना हरदी क्षेत्र के ग्राम बम्भौरी पाण्डेय पुरवा का है। बीती रात गांव के रिहाइशी इलाके में अचानक एक विशालकाय घड़ियाल (या मगरमच्छ) दिखाई देने से हड़कंप मच गया। जलीय जीव को गांव के बीचों-बीच रेंगते देख ग्रामीणों के होश उड़ गए। कुछ साहसी युवाओं ने दूर से इसका वीडियो बना लिया और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। वन विभाग की लापरवाही से बढ़ा खतरा ग्रामीणों का आरोप है कि सूचना देने के बाद भी वन विभाग की टीम मौके पर नहीं पहुंची । इस बीच, अंधेरे का फायदा उठाकर वह विशालकाय जीव गांव की ही किसी झाड़ी या सुरक्षित स्थान पर ओझल हो गया। सुबह होने तक उसका कोई सुराग नहीं मिल सका, जिससे पूरे गांव में असुरक्षा का माहौल व्याप्त है। अनहोनी की आशंका से सहमे ग्रामीण बम्भौरी पाण्डेय पुरवा के निवासियों का कहना है कि गांव में छोटे बच्चे और मवेशी बाहर ही रहते हैं। अगर समय रहते इस हिंसक जलीय जीव को रेस्क्यू नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि जल्द से जल्द कॉम्बिंग कर मगरमच्छ को पकड़ा जाए ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें।1
- पुलिस अधीक्षक बहराइच मेहरबान इसलिए 50 सालों से ऊपर के थाने दार मनमाना ढंग से सुरक्षा के नाम पर पीड़ित को चक्कर लगवा रहे। देखिए कैसे पीड़ित बिलख बिलख कर रो रो कर अपनी दर्द भरी आंखों से इंसाफ की गुहार लगा रहे।1
- सड़क किनारे लघुशंका करते समय करंट की चपेट में आया युवक बहराइच के नानपारा इलाके में एक युवक करंट की चपेट में आकर झुलस गया। 22 वर्षीय छुट्टन कुरैशी सड़क किनारे लघुशंका कर रहे थे, तभी अचानक करंट की चपेट में आ गए। उन्हें बहराइच मेडिकल कॉलेज के बर्न वार्ड में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है। घायल युवक बकरा के कारोबार से जुड़े हैं और नानपारा नई बस्ती देहाती के निवासी हैं। उनके भाई सद्दाम कुरैशी ने बताया कि अचानक हुए हादसे से परिवार में हड़कंप मच गया। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और घायल युवक के स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है।3
- मिहींपुरवा CHC विवाद: महिला कर्मचारियों के आरोप, वीडियो वायरल और राजनीति की एंट्री मिहींपुरवा बहराइच। मोतीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। महिला कर्मचारियों के धरना-प्रदर्शन, अधीक्षक पर लगे गंभीर आरोप और जांच पर उठते सवालों के बीच अब इस पूरे विवाद में राजनीति की भी एंट्री होती दिख रही है। महिला कर्मचारियों का धरना, अधीक्षक पर गंभीर आरोप कुछ दिन पहले एएनएम, आशा और संगिनी कार्यकर्ताओं ने अस्पताल परिसर में उग्र धरना-प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि अधीक्षक डॉ. थानेदार ने एक महिला एएनएम के साथ कथित छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार किया। आरोप यह भी है कि कथित तौर पर आपत्तिजनक मैसेज भेजे गए और बाद में दबाव बनाकर उनसे सिग्नेचर कराने की कोशिश की गई। धरने में शामिल महिलाओं का कहना था कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो कथित तौर पर धमकी भरे अंदाज में कहा गया —“सिग्नेचर कर दो, नहीं भी करोगी तो मेरा कुछ नहीं होगा।” वीडियो भी चर्चा में इस पूरे विवाद के बीच एक वीडियो भी सामने आने की चर्चा है, जिसमें बताया जा रहा है कि डॉ. थानेदार महिला कर्मचारियों से आक्रोशित और तीखे शब्दों में बात करते नजर आ रहे हैं। यह वीडियो स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है और इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। जांच पर सवाल मामले की जांच के लिए टीम गठित की गई, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहे हैं कि क्या जांच पूरी तरह निष्पक्ष हुई। कुछ सूत्रों का दावा है कि जांच एकतरफा रही और मामले को ठंडा करने की कोशिश की गई। राजनीति: संरक्षण के आरोपों से गरमाया मामला सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, इतने गंभीर आरोपों और विवाद के बावजूद डॉ. थानेदार को फिर से चार्ज मिल गया है। स्थानीय चर्चाओं में यह भी कहा जा रहा है कि उन्हें कथित रूप से सरोज सोनकर (बलहा विधायक) और अक्षयवर लाल गोंड (बहराइच सांसद) के संरक्षण में दोबारा जिम्मेदारी दी गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह सवाल जरूर उठ रहा है कि गंभीर आरोपों के बाद भी उन्हें वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार कैसे सौंप दिए गए। जनता के सवाल महिला कर्मचारियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन तय करेगा? अगर आरोप सही हैं तो एफआईआर क्यों नहीं हुई? जांच रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही? क्या यह मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? स्वास्थ्य केंद्र, जो जनता के भरोसे का प्रतीक होना चाहिए, वहां अगर महिला कर्मचारियों को ही सम्मान और सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरना पड़े, तो यह पूरे सिस्टम के लिए चिंताजनक संकेत है। अब निगाहें प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पर टिकी हैं— क्या सच्चाई सामने आएगी या फिर सत्ता और सिस्टम के दबाव में यह मामला भी दब जाएगा?1
- लखनऊ में शिया मुसलमानों ने हज़रत इमाम अली अ० की शहादत के मौक़े पर निकाला प्रंपरागत ग्लीम का जुलूस।1