साच में रंगों की बौछार, हर्षोल्लास से मनाया गया होली पर्व PANGI NEWS 24 जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के साच उपक्षेत्र में इस वर्ष होली पर्व पूरे उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही गांवों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की टोलियां घर-घर जाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देती नजर आईं। साच बाजार और आसपास के गांवों में चारों ओर रंगों की बौछार से माहौल पूरी तरह सराबोर हो गया। छोटे बच्चे हाथों में पिचकारी लिए गलियों में दौड़ते दिखाई दिए, तो वहीं युवाओं की टोलियां लोकगीतों की धुन पर थिरकती नजर आईं। महिलाओं ने भी पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर होली उत्सव में भाग लिया और आपसी प्रेम व सद्भाव का संदेश दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले जनजातीय समुदाय में होली जैसे पारंपरिक हिंदू पर्वों को मनाने की परंपरा नहीं थी, लेकिन बदलते समय के साथ अब यहां भी यह पर्व बड़े धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाने लगा है। यह बदलाव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक माना जा रहा है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि ऐसे त्योहार आपसी मतभेद भुलाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। रंगों के इस त्योहार ने साच क्षेत्र में भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश दिया। दिनभर चली रंगों की मस्ती और लोकगीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। होली पर्व के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे के घरों में जाकर पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया और सुख-समृद्धि की कामना की। शाम तक पूरा क्षेत्र रंगों से सराबोर नजर आया और हर चेहरे पर खुशियों की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
साच में रंगों की बौछार, हर्षोल्लास से मनाया गया होली पर्व PANGI NEWS 24 जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के साच उपक्षेत्र में इस वर्ष होली पर्व पूरे उत्साह, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया गया। सुबह की पहली किरण के साथ ही गांवों में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों की टोलियां घर-घर जाकर एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देती नजर आईं। साच बाजार और आसपास के गांवों में
चारों ओर रंगों की बौछार से माहौल पूरी तरह सराबोर हो गया। छोटे बच्चे हाथों में पिचकारी लिए गलियों में दौड़ते दिखाई दिए, तो वहीं युवाओं की टोलियां लोकगीतों की धुन पर थिरकती नजर आईं। महिलाओं ने भी पारंपरिक परिधानों में सज-धज कर होली उत्सव में भाग लिया और आपसी प्रेम व सद्भाव का संदेश दिया। ग्रामीणों ने बताया कि पहले जनजातीय समुदाय में होली जैसे पारंपरिक हिंदू
पर्वों को मनाने की परंपरा नहीं थी, लेकिन बदलते समय के साथ अब यहां भी यह पर्व बड़े धूमधाम और उल्लास के साथ मनाया जाने लगा है। यह बदलाव सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक माना जा रहा है। स्थानीय बुजुर्गों का कहना है कि ऐसे त्योहार आपसी मतभेद भुलाकर समाज को एक सूत्र में पिरोने का कार्य करते हैं। रंगों के इस त्योहार ने साच क्षेत्र
में भाईचारे, प्रेम और एकता का संदेश दिया। दिनभर चली रंगों की मस्ती और लोकगीतों की गूंज से पूरा क्षेत्र उत्सवमय बना रहा। होली पर्व के अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे के घरों में जाकर पारंपरिक पकवानों का आनंद लिया और सुख-समृद्धि की कामना की। शाम तक पूरा क्षेत्र रंगों से सराबोर नजर आया और हर चेहरे पर खुशियों की चमक साफ दिखाई दे रही थी।
- हिमालय की दुर्गम और प्राकृतिक रूप से समृद्ध घाटियों में वन्यजीवों की मौजूदगी एक सुखद संकेत मानी जाती है। इसी कड़ी में 3 अप्रैल 2026 को पांगी घाटी के चस्क क्षेत्र में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा हिमालयन आइबेक्स (Himalayan Ibex) का कैमरे में कैद होना न केवल रोमांचक क्षण है, बल्कि यह क्षेत्र में जैव विविधता की समृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्लभ दृश्य चस्क की ऊंची पहाड़ियों में देखा गया, जहां आइबेक्स अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करता नजर आया। हिमालयन आइबेक्स एक जंगली बकरी प्रजाति है, जो ऊबड़-खाबड़ चट्टानी इलाकों में रहने के लिए जानी जाती है और इसे देख पाना बेहद कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की वन्यजीव उपस्थिति यह संकेत देती है कि क्षेत्र का पर्यावरण अभी भी संतुलित है और मानव हस्तक्षेप सीमित है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस दुर्लभ क्षण को साझा करते हुए वन्यजीव पर्यटन (Wildlife Tourism) को बढ़ावा देने की अपील की है, ताकि लोग प्रकृति के करीब आ सकें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक बनें। पांगी घाटी, जो अपनी अनछुई सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है, अब धीरे-धीरे एडवेंचर और इको-टूरिज्म का केंद्र बनती जा रही है। ऐसे में हिमालयन आइबेक्स जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से भी यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और क्षेत्र में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। 👉 यह दृश्य न केवल एक फोटोग्राफर की उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, जो हमें प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।1
- Post by Varun Slathia1
- नेरचौक में ठेकेदारों का प्रदर्शन 🔥 31 मार्च तक पेमेंट न मिलने पर फूटा गुस्सा | Mandi News Himachal1
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- सुजानपुर सुजानपुर के विश्व प्रसिद्ध काली माता मंदिर प्रांगण में शनिवार को विशेष पूजा अर्चना हवन इत्यादि करने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया गया मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ो लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया बताते चले की मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र संपन्न होने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया जाता है जिसके चलते यह कार्यक्रम आयोजित हुआ भंडारा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा पाठ हवन इत्यादि करवाया गया यहां पंडित आचार्य संजय शर्मा द्वारा तमाम वैदिक रस्मों को निभाते हुए सर्वजन मंगल कल्याण की कामना की गई3
- देवभूमि कुल्लू हिमाचल प्रदेश1
- हमीरपुर कांगड़ा घाटी में 4 अप्रैल 1905 को आए विनाशकारी भूकंप की 121वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर शनिवार को यहां उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक जागरुकता कार्यक्रम, रैली और मॉक ड्रिल आयोजित की गई। इस अवसर पर मिनी सचिवालय परिसर में मॉक ड्रिल करवाई गई तो भंूकंप आने पर किस तरह से बचाव किया जाए इस पर कर्मचारियों व लोगों को जागरूक किया गया है। एसडीएम संजीत सिंह की देखरेख में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दमकल विभाग, पुलिस व कर्मचारियों ने मॉक ड्रिल में हिस्सा लिया और लोगों को बचाव की जानकारी दी। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय से लेकर नगर निगम कार्यालय तक एक जागरुकता रैली भी निकाली गई। रैली के बाद उपायुक्त कार्यालय परिसर में एक मॉक ड्रिल भी की गई, जिसमें होमगार्ड्स और अग्निशमन विभाग के बचाव दल ने रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम दिया। उपायुक्त एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) की अध्यक्ष गंधर्वा राठौड़ ने कहा है कि 121 वर्ष पूर्व कांगड़ा में आया विनाशकारी भूकंप एक बहुत बड़ी त्रासदी थी। उस समय आपदा प्रबंधन के लिए न तो कोई सिस्टम विकसित हुआ था और न ही आम लोगों में इसके प्रति जागरुकता थी। लेकिन, आज के दौर में किसी भी तरह की आपदा से निपटने के लिए हर जिला स्तर पर डीडीएमए से लेकर उपमंडल स्तर तक एक प्रभावी तंत्र और आधुनिक संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि भूकंप और अन्य आपदाओं के दौरान बचाव एवं राहत कार्यों को तत्परता तथा प्रभावी ढंग से अंजाम देने के लिए हमारी पहले से ही तैयारी होनी चाहिए, ताकि वास्तव में आपदा आने पर जान-माल के नुक्सान को कम किया जा सके। इस अवसर पर एसडीएम संजीत सिंह ने उपायुक्त, अन्य अधिकारियों, आईटीआई हमीरपुर और अन्य शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों का स्वागत किया तथा कांगड़ा घाटी की भूकंप त्रासदी के इतिहास पर प्रकाश डाला।2
- करीब दो हफ्तों तक चली लगातार मेहनत, चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों और कठिन संघर्ष के बाद आज विद्युत विभाग ने साच खास पावर हाउस को पूरी तरह बहाल कर क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी है। भूस्खलन के कारण ठप पड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना को फिर से चालू करने के लिए विभागीय अधिकारियों, तकनीकी कर्मचारियों और ठेकेदार की टीम ने दिन-रात एक कर दिया। बताया जा रहा है कि साच घराट स्थित पावर हाउस में अचानक हुए भूस्खलन ने भारी नुकसान पहुंचाया था, जिससे बिजली उत्पादन पूरी तरह रुक गया था। इस घटना के चलते साच खास सहित आसपास के कई गांवों में अंधेरा छा गया था और लोगों को रोजमर्रा के कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। विशेष रूप से विद्यार्थियों, छोटे कारोबारियों और घरेलू उपभोक्ताओं को इस दौरान काफी परेशानी झेलनी पड़ी। विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता सुरेश चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया कि जैसे ही भूस्खलन की सूचना मिली, विभाग ने तत्काल मौके पर टीम भेजकर स्थिति का आकलन किया और बिना देरी किए बहाली कार्य शुरू कर दिया। उन्होंने बताया कि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र, लगातार बदलते मौसम और तकनीकी चुनौतियों के बावजूद विभाग की टीम ने पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य किया। उन्होंने आगे कहा कि इस दौरान क्षतिग्रस्त उपकरणों की मरम्मत, मलबा हटाने, लाइन व्यवस्था को दुरुस्त करने और पावर हाउस की संरचना को सुरक्षित बनाने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य एक साथ किए गए। यह कार्य बेहद जोखिमपूर्ण था, लेकिन टीम की तत्परता और समन्वय के कारण इसे सफलतापूर्वक पूरा किया जा सका। वहीं, ठेकेदार बलदेव ने बताया कि पिछले दो हफ्तों से मजदूरों और तकनीकी स्टाफ ने विपरीत परिस्थितियों में लगातार काम किया। कई बार मौसम ने भी बाधा डाली, लेकिन टीम ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा कि सभी ने मिलकर लक्ष्य तय किया था कि जल्द से जल्द क्षेत्र में बिजली बहाल की जाए, और आज वह प्रयास सफल हुआ। बिजली आपूर्ति बहाल होने से स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। लंबे समय तक अंधेरे में रहने के बाद अब जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है। लोगों ने विद्युत विभाग और कार्य में जुटी टीम की सराहना करते हुए आभार व्यक्त किया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली बहाली से न केवल घरों में रोशनी लौटी है, बल्कि मोबाइल नेटवर्क, छोटे उद्योग और बच्चों की पढ़ाई जैसी आवश्यक सेवाएं भी फिर से पटरी पर आ जाएंगी।1