लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार, पत्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हुआ मीडिया* इटावा ***********************. उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा में अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इटावा के सांसद *जितेंद्र दोहरे* के करीबियों के इशारे पर स्थानीय पत्रकार *असित यादव* को कथित तौर पर षड्यंत्र के तहत थाने में बुलाकर घंटों बैठाया गया और उन पर *झूठा मुकदमा* दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना ने जनपद के पत्रकार जगत में भारी रोष व्याप्त कर दिया है। सत्ता की हनक और पुलिसिया कार्यप्रणाली के विरोध में इटावा के समस्त पत्रकार लामबंद हो गए हैं और थाने के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए हैं। प्रमुख घटनाक्रम और पत्रकारों का आक्रोश घटना की गंभीरता को देखते हुए इटावा के वरिष्ठ पत्रकारों और विभिन्न मीडिया संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी पत्रकारों का कहना है कि: *निर्भीक पत्रकारिता का दमन:* क्या लोकतंत्र में एक पत्रकार का निडर होकर सच्चाई को उजागर करना अपराध है? *असित यादव* जैसे पत्रकारों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि सत्ता पक्ष के लोग जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। *झूठे मुकदमों का भय:* पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि माननीय जनप्रतिनिधि और उनके सहयोगी अपनी कमियों को छिपाने के लिए पत्रकारों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। *शांतिपूर्ण प्रदर्शन:* पत्रकारों का जत्था थाने के मुख्य द्वार पर न्याय की मांग को लेकर डटा हुआ है। उनकी मांग है कि *असित यादव* को तत्काल प्रभाव से ससम्मान छोड़ा जाए और उन पर लगाए जा रहे निराधार आरोपों को खारिज किया जाए। *गंभीर सवाल:* क्या सुरक्षित है लोकतंत्र का प्रहरी? यह घटना केवल एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार नहीं है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। इटावा के जनप्रतिनिधियों के आचरण पर सवाल उठाते हुए पत्रकारों ने पूछा है कि: *"क्या जनपद के माननीय जनप्रतिनिधि अपनी शक्ति का उपयोग इसी प्रकार पत्रकारों को झूठे मुकदमों में फंसाने के लिए करते रहेंगे?* यदि सच्चाई लिखने वालों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो समाज की समस्याओं को कौन उठाएगा?" प्रशासनिक उदासीनता पर रोष खबर लिखे जाने तक पत्रकारों का धरना जारी है। इटावा के ब्यूरो चीफ और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जब तक पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं देता और पत्रकार के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को वापस नहीं लेता, तब तक यह आंदोलन और उग्र होगा। इस प्रकरण ने पूरे उत्तर प्रदेश के मीडिया गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में न्याय की रक्षा करता है या सत्ता के दबाव में आकर पत्रकारिता का गला घोंटने की इस कोशिश का हिस्सा बना रहता है।
लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर प्रहार, पत्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ एकजुट हुआ मीडिया* इटावा ***********************. उत्तर प्रदेश के जनपद इटावा में अभिव्यक्ति की आजादी और पत्रकारिता की गरिमा को ठेस पहुँचाने वाला एक गंभीर मामला प्रकाश में आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, इटावा के सांसद *जितेंद्र दोहरे* के करीबियों के इशारे पर स्थानीय पत्रकार *असित यादव* को कथित तौर पर षड्यंत्र के तहत थाने में बुलाकर घंटों बैठाया गया और उन पर *झूठा मुकदमा* दर्ज कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस घटना ने जनपद के पत्रकार जगत में भारी रोष व्याप्त कर दिया है। सत्ता की हनक और पुलिसिया कार्यप्रणाली के विरोध में इटावा के समस्त पत्रकार लामबंद हो गए हैं और थाने के बाहर शांतिपूर्वक धरने पर बैठ गए हैं। प्रमुख घटनाक्रम और पत्रकारों का आक्रोश घटना की गंभीरता को देखते हुए इटावा के वरिष्ठ पत्रकारों और विभिन्न मीडिया संगठनों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। प्रदर्शनकारी पत्रकारों का कहना है कि: *निर्भीक पत्रकारिता का दमन:* क्या लोकतंत्र में एक पत्रकार का निडर होकर सच्चाई को उजागर करना अपराध है? *असित यादव* जैसे पत्रकारों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि सत्ता पक्ष के लोग जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। *झूठे मुकदमों का भय:* पत्रकारों ने आरोप लगाया है कि माननीय जनप्रतिनिधि और उनके सहयोगी अपनी कमियों को छिपाने के लिए पत्रकारों को फर्जी मुकदमों में फंसाकर उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं। *शांतिपूर्ण प्रदर्शन:* पत्रकारों का जत्था थाने के मुख्य द्वार पर न्याय की मांग को लेकर डटा हुआ है। उनकी मांग है कि *असित यादव* को तत्काल प्रभाव से ससम्मान छोड़ा जाए और उन पर लगाए जा रहे निराधार आरोपों को खारिज किया जाए। *गंभीर सवाल:* क्या सुरक्षित है लोकतंत्र का प्रहरी? यह घटना केवल एक पत्रकार के साथ दुर्व्यवहार नहीं है, बल्कि स्वतंत्र पत्रकारिता के भविष्य पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती है। इटावा के जनप्रतिनिधियों के आचरण पर सवाल उठाते हुए पत्रकारों ने पूछा है कि: *"क्या जनपद के माननीय जनप्रतिनिधि अपनी शक्ति का उपयोग इसी प्रकार पत्रकारों को झूठे मुकदमों में फंसाने के लिए करते रहेंगे?* यदि सच्चाई लिखने वालों के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो समाज की समस्याओं को कौन उठाएगा?" प्रशासनिक उदासीनता पर रोष खबर लिखे जाने तक पत्रकारों का धरना जारी है। इटावा के ब्यूरो चीफ और अन्य वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि जब तक पुलिस प्रशासन निष्पक्ष जांच का आश्वासन नहीं देता और पत्रकार के विरुद्ध की जा रही कार्रवाई को वापस नहीं लेता, तब तक यह आंदोलन और उग्र होगा। इस प्रकरण ने पूरे उत्तर प्रदेश के मीडिया गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में न्याय की रक्षा करता है या सत्ता के दबाव में आकर पत्रकारिता का गला घोंटने की इस कोशिश का हिस्सा बना रहता है।
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- इटावा जनपद के विकास खंड महेवा अंतर्गत थाना लवेदी क्षेत्र में ग्राम नगला शिव सिंह के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जिसमें एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। बताया जा रहा है कि अज्ञात वाहन की टक्कर से ईकरी निवासी सुधीर त्रिपाठी उर्फ प्रीतम त्रिपाठी की जान चली गई। मिली जानकारी के अनुसार, मृतक युवक युवक कृषि कार्य हेतु गये थे वही से लौट रहे थे, तभी रास्ते में यह हादसा हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि उन्हें संभलने का मौका भी नहीं मिला और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई। सुधीर त्रिपाठी मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। इसके अलावा वह टंकी पर संविदा के तहत चौकीदारी का कार्य भी करते थे। उनकी असमय मौत से परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मृतक अपने पीछे पत्नी संजू देवी, जो बोल नहीं सकती हैं, बड़ी बेटी रिद्धि, बेटा कुश त्रिपाठी, और एक नवजात बच्ची छोड़ गए हैं, जिसका जन्म करीब 15 दिन पहले ही हुआ था और अभी उसका नामकरण व अन्य संस्कार भी नहीं हो पाए हैं। घटना की सूचना मिलते ही थाना लवेदी की थानाध्यक्ष प्रीति सेगर भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस अज्ञात वाहन की तलाश में जुटी हुई है। इस हृदयविदारक घटना से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है और ग्रामीणों में गहरा दुख व्याप्त है।4
- सीओ ने संभाला मोर्चा,हाईवे पर सघन चेकिंग में 110 वाहनों के चालान 2.19लगाया जुर्माना जसवंतनगर। राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार रात सीओ आयुषी सिंह ने स्वयं मोर्चा संभालते हुए सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस दौरान जोनई चौकी और बस स्टैंड चौराहे के आसपास थानाध्यक्ष कमल भाटी, उपनिरीक्षक कृष्ण कुमार व शिवशंकर समेत भारी पुलिस बल मौजूद रहा। अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस ने करीब 110 वाहनों के चालान किए, जिनमें मोटरसाइकिल सवार, प्रेशर हॉर्न का उपयोग करने वाले और काली फिल्म लगी गाड़ियां शामिल रहीं। इसके अलावा 10 वाहनों को सीज भी किया गया। पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कुल लगभग 2 लाख 19 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। चेकिंग के दौरान बिना हेलमेट, बिना कागजात और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करने वालों को भी चेतावनी दी गई। सीओ आयुषी सिंह ने कहा कि सड़क सुरक्षा को लेकर अभियान लगातार जारी रहेगा और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने और सुरक्षित ड्राइविंग की अपील के साथ विना हेल्मेट और विना कागजात के वाहन को नहीं चलाये इस दौरान नव विवाहित महिलाओं को समझाया कि मेरी इस बात की गांठ बांध लो कि जब भी आपके पति घर से वाहन लेकर निकल कर बाहर जाएं तो चाबी से पहले अपने पति को हेल्मेट लगाने के लिए दे। फोटो: राष्ट्रीय राजमार्ग पर रविवार रात वाहन चेकिंग अभियान चलाती सीओ आयुषी सिंह व मौजूद पुलिस बल।1
- इटावा कलम की आवाज दबाने की कोशिश करने वालों को करारा जवाब —पत्रकार झुकेगा नहीं, लड़ेगा। इटावा में सच दिखाने की सज़ा—सवाल पूछने वाले पत्रकार पर दर्ज कराया गया गंभीर मुकदमा।सत्ता के दबाव में सच को कुचलने की कोशिश लेकिन पत्रकारिता डरने वाली नहीं। क्या अब जनता की आवाज उठाना जुर्म हो गया है? क्या सवाल पूछने वालों को जेल भेजना ही नया कानून है? फर्जी मुकदमों के सहारे सच को दबाने की कोशिश — लेकिन इतिहास गवाह है, कलम हमेशा जीतती है।पत्रकार असित यादव की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि पूरे मीडिया की स्वतंत्रता पर सीधा वार है।लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कमजोर करने की साजिश — जनता सब देख रही है और जवाब भी देगी।यदि पत्रकार सवाल पूछेगा तो मुकदमा लिखोगे, जेल भेजोगे — यह कैसा लोकतंत्र है? सत्ता के अहंकार में बैठे लोगों को याद रखना चाहिए — पत्रकार की आवाज दबाने से सच्चाई नहीं बदलती।आज असित यादव को फंसाया गया है, कल किसी और की बारी हो सकती है — इसलिए चुप रहना भी अपराध है।पत्रकारों और समाजसेवियों का साफ संदेश — डर और दबाव की राजनीति अब नहीं चलेगी।यदि न्याय नहीं मिला तो आंदोलन होगा, आवाज उठेगी और सड़कों पर संघर्ष भी होगा।यह लड़ाई केवल एक पत्रकार की नहीं, बल्कि सच और लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई है।।2
- *ब्रेकिंग न्यूज़ औरैया* *ग्राम सुरान, थाना कोतवाली औरैया क्षेत्र में अग्निशमन सेवा सप्ताह के दौरान चला व्यापक जन-जागरूकता अभियान।* *मुख्य अग्निशमन अधिकारी तेजवीर सिंह के निर्देशन में टीम ने संभाली कमान।* *फायरमैन गौरव शाक्य, गजेंद्र सिंह व विशाल कुमार ने गांव-गांव जाकर लोगों को किया जागरूक।* *ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर आग से बचाव और सुरक्षा उपायों की दी गई जानकारी।* *घरों, खेतों और बिजली उपकरणों से लगने वाली आग से बचने के तरीके समझाए गए।* *आपात स्थिति में तुरंत सूचना देने और सतर्क रहने की अपील की गई।* *ग्रामीणों को जागरूक करने के लिए पंपलेट भी वितरित किए गए।*1
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