योग को केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने वाली एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति बताया गया है। यह शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करके व्यक्ति को आंतरिक शांति, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक चेतना प्रदान करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और मानसिक अशांति के बीच, योग मनुष्य को स्वयं से जोड़ते हुए ईश्वर की अनुभूति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग का मूल उद्देश्य मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित कर आत्मिक विकास करना है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, भय और तनाव जैसी नकारात्मक भावनाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं और मन शांत, स्थिर तथा एकाग्र बनता है। जब मन संतुलित होता है, तो व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक धैर्य और विवेक के साथ कर पाता है। भारतीय संस्कृति में योग को आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन माना गया है, जिसे महर्षि पतंजलि ने 'चित्तवृत्ति निरोध' या मन की वृत्तियों को नियंत्रित करने का विज्ञान बताया है। योगाभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और जीवन के गूढ़ उद्देश्यों को समझने लगता है, जिससे वह परमात्मा के निकट जाता है। योग के महत्वपूर्ण अंगों में ध्यान और प्राणायाम का विशेष स्थान है; ध्यान मन को एकाग्र करता है, जबकि प्राणायाम जीवन ऊर्जा को संतुलित कर मानसिक शुद्धता प्रदान करता है। जब मन पूरी तरह शांत और निर्मल हो जाता है, तब व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव करता है, जो उसे आत्मिक संतोष, आनंद और परम शांति की अनुभूति कराता है। आज विश्वभर में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, क्योंकि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन भी स्थापित करता है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति स्वस्थ, प्रसन्न, आत्मविश्वासी और संतुलित जीवन जी सकता है। योग को आंतरिक शांति, मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करने वाला एक अमूल्य उपहार माना गया है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में योग को स्थान देना चाहिए, ताकि वह स्वस्थ शरीर, शांत मन और ईश्वर से गहरे संबंध का अनुभव कर सके। बालयोगी करन गुरु का मत है कि योग आंतरिक शांति प्रदान कर ईश्वर से जोड़ता है। यह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष पर बताया गया कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान और जीवन के परम कल्याण का मार्ग है।
योग को केवल एक शारीरिक व्यायाम नहीं, बल्कि संपूर्ण जीवन को संतुलित और सार्थक बनाने वाली एक प्राचीन भारतीय जीवन-पद्धति बताया गया है। यह शरीर, मन और आत्मा के बीच सामंजस्य स्थापित करके व्यक्ति को आंतरिक शांति, मानसिक स्थिरता और आध्यात्मिक चेतना प्रदान करता है। आधुनिक जीवन की भागदौड़, तनाव और मानसिक अशांति के बीच, योग मनुष्य को स्वयं से जोड़ते हुए ईश्वर की अनुभूति के मार्ग पर अग्रसर करने वाला एक प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है। योग का मूल उद्देश्य मन की चंचल वृत्तियों को नियंत्रित कर आत्मिक विकास करना है। नियमित योगाभ्यास, प्राणायाम और ध्यान से मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे क्रोध, लोभ, ईर्ष्या, भय और तनाव जैसी नकारात्मक भावनाएं धीरे-धीरे समाप्त हो जाती हैं और मन शांत, स्थिर तथा एकाग्र बनता है। जब मन संतुलित होता है, तो व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना अधिक धैर्य और विवेक के साथ कर पाता है। भारतीय संस्कृति में योग को आत्म-साक्षात्कार और ईश्वर प्राप्ति का महत्वपूर्ण साधन माना गया है, जिसे महर्षि पतंजलि ने 'चित्तवृत्ति निरोध' या मन की वृत्तियों को नियंत्रित करने का विज्ञान बताया है। योगाभ्यास के माध्यम से व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानता है और जीवन के गूढ़ उद्देश्यों को समझने लगता है, जिससे वह परमात्मा के निकट जाता है। योग के महत्वपूर्ण अंगों में ध्यान और प्राणायाम का विशेष स्थान है; ध्यान मन को एकाग्र करता है, जबकि प्राणायाम जीवन ऊर्जा को संतुलित कर मानसिक शुद्धता प्रदान करता है। जब मन पूरी तरह शांत और निर्मल हो जाता है, तब व्यक्ति अपने भीतर स्थित दिव्य चेतना का अनुभव करता है, जो उसे आत्मिक संतोष, आनंद और परम शांति की अनुभूति कराता है। आज विश्वभर में योग की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, क्योंकि यह न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है, बल्कि मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक संतुलन भी स्थापित करता है। नियमित योगाभ्यास से व्यक्ति स्वस्थ, प्रसन्न, आत्मविश्वासी और संतुलित जीवन जी सकता है। योग को आंतरिक शांति, मानसिक दृढ़ता और आध्यात्मिक जागरूकता प्रदान करने वाला एक अमूल्य उपहार माना गया है, जो आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को अपने दैनिक जीवन में योग को स्थान देना चाहिए, ताकि वह स्वस्थ शरीर, शांत मन और ईश्वर से गहरे संबंध का अनुभव कर सके। बालयोगी करन गुरु का मत है कि योग आंतरिक शांति प्रदान कर ईश्वर से जोड़ता है। यह अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस विशेष पर बताया गया कि योग केवल एक अभ्यास नहीं, बल्कि आत्मिक उत्थान और जीवन के परम कल्याण का मार्ग है।
- देशभर के विद्यालयों की पाठ्यपुस्तकों में इतिहास के साथ उपहास किया जा रहा है, जिसे 'दो वर्षों की उपलब्धि' बताया गया है। इस स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा गया है कि इन किताबों में यह तक बताया जा रहा है कि 'न्यूटन हवाई जहाज़ उड़ा रहे थे'।1
- एक शिकायतकर्ता के अनुसार, एक सरकारी नल कई दिनों से खराब पड़ा हुआ है।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के जन्मदिन के अवसर पर उनके जन्मभूमि गांव पहुंचकर शुभकामनाएं व्यक्त कीं।1
- नल जल योजना के तहत लगाए गए नल लगभग दो साल से भी अधिक समय से बंद पड़े हैं। बताया गया है कि नलों की टेस्टिंग के बाद से अब तक उनमें कभी पानी नहीं आया है। मौजूदा स्थिति यह है कि नल जल योजना के अंतर्गत लगे कई नल टूटे हुए हैं।1
- Post by Nitin Zakane1
- पश्चिमी सिंहभूम जिले के गुदड़ी प्रखंड अंतर्गत कमरगांव में शनिवार शाम एक दर्दनाक सड़क दुर्घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब सेरेंगदा हाट से लौट रही एक सवारी गाड़ी को पीछे से आ रही एक जेसीबी मशीन ने टक्कर मार दी। जानकारी के अनुसार, शाम करीब चार बजे हुई इस दुर्घटना के समय सवारी गाड़ी में नीचे और छत पर लगभग 25 लोग सवार होकर अपने घर लौट रहे थे। कमरगांव के पास जेसीबी से हुई इस टक्कर में कुल सात लोग घायल हुए थे। घायलों को तत्काल इलाज के लिए सोनुवा अस्पताल ले जाया गया, जहाँ 50 वर्षीय एतवा मोतिया की रास्ते में ही मौत हो गई। सोनुवा अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद, गंभीर रूप से घायल 50 वर्षीय डेबो मछुवाईंन, 40 वर्षीय बासु नाग और 18 वर्षीय आर्यन मांझी को बेहतर इलाज के लिए चाईबासा सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। घटना की सूचना मिलने पर जिला परिषद सदस्य सुनीता लुगुन ने वाहन की व्यवस्था की, और सहिया बसंती मांझी सहित अन्य समाजसेवियों के सहयोग से तीनों घायलों को चाईबासा सदर अस्पताल पहुँचाया गया। सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने डेबो मछुवाईंन की हालत चिंताजनक बताई है, उनके शरीर की कई हड्डियां टूट गई हैं। अन्य घायलों का इलाज भी जारी है। पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।1
- गढ़दुआर के स्कूलपाड़ा क्षेत्र में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो गया है, जहाँ सप्लाई का पानी लोगों की प्यास बुझाने के लिए पर्याप्त नहीं है। इस स्थिति के कारण स्कूलपाड़ा के निवासी पीने के पानी के लिए बुरी तरह से परेशान हैं। अपनी इस समस्या के समाधान हेतु स्थानीय लोगों ने एक नया नलकूप खोदने की मांग की है।1
- बलांगीर जिले के पाटनागढ़ और लरंभा के बीच मुख्य सड़क पर धान से लदा एक ट्रक पलट गया।1