कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतकर भिवानी लौटे सचिन सिवाच, मिताथल में हुआ ऐतिहासिक स्वागत गोल्डन बॉय सचिन सिवाच का गांव में भव्य स्वागत, अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर नजर भिवानी के लाल ने बढ़ाया देश का मान, गोल्ड जीतकर गांव पहुंचे सचिन सिवाच का जोरदार अभिनंदन मिताथल का बेटा बना देश का गौरव, गोल्ड मेडलिस्ट सचिन सिवाच के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब 'गोल्ड तो जीत लिया, अब ओलंपिक का सपना'—भिवानी पहुंचे सचिन सिवाच का बड़ा लक्ष्य गोल्डन पंच से रचा इतिहास, सचिन सिवाच के स्वागत में जश्न में डूबा पूरा गांव देश का मान बढ़ाकर घर लौटे सचिन सिवाच, मां बोलीं—अब एशियन गेम्स में भी गोल्ड लाएगा बेटा कोच का दावा—'सचिन ओलंपिक में भी देश को पदक दिलाएगा', गोल्डन बॉय का भव्य स्वागत भिवानी के चैंपियन सचिन सिवाच का शानदार स्वागत, गांव ने फूलों की बारिश से किया सम्मान कॉमनवेल्थ का गोल्ड, अब ओलंपिक का लक्ष्य... सचिन सिवाच के स्वागत में झूम उठा मिताथल Anchoring: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाले हरियाणा के होनहार मुक्केबाज सचिन सिवाच जब अपने पैतृक गांव मिताथल, जिला भिवानी पहुंचे, तो पूरा गांव जश्न में डूब गया। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता के जयकारों के बीच अपने चैंपियन का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। सबसे पहले सचिन ने गांव के मंदिर में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लिया और फिर ग्रामीणों का अभिवादन स्वीकार किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई अपने गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी की एक झलक पाने को उत्साहित नजर आया। सचिन ने कहा कि गांव वालों का प्यार और सम्मान उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि गांव वालों को उन पर पूरा विश्वास था और उन्हें खुद भी भरोसा था कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटेंगे। फाइनल मुकाबले को याद करते हुए सचिन ने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने कोच की ट्रेनिंग और खुद पर भरोसे के दम पर शानदार वापसी करते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। अब सचिन का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में होने वाले एशियन गेम्स में भी पदक जीतना और फिर ओलंपिक में देश के लिए इतिहास रचना उनका सपना है। अपने प्रेरणास्रोत के बारे में बात करते हुए सचिन ने बताया कि गांव में उनके कोच ने ही उन्हें बॉक्सिंग की शुरुआत कराई। वहीं भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह और अमित पंघाल उनके आदर्श हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह पूरी तरह देसी खान-पान अपनाते हैं और उनका पसंदीदा भोजन चूरमा है। सचिन ने भारतीय सेना, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें हर स्तर पर पूरा सहयोग मिलता है, जिससे वह बिना किसी चिंता के अपने खेल पर ध्यान दे पाते हैं। सचिन के कोच अनिल टेकराम ने बताया कि फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। अंतिम कुछ सेकंड तक मुकाबला किसी भी ओर जा सकता था, लेकिन आखिरी क्षणों में सचिन के दमदार पंच ने मुकाबले का रुख बदल दिया और गोल्ड भारत की झोली में आ गया। *कोच अनिल टेकराम–* कोच ने बताया कि सचिन करीब 10-11 वर्षों से लगातार मेहनत कर रहा है। गांव की बाबा कविनाथ अकादमी से शुरू हुआ यह सफर आज भारत को गोल्ड दिलाने तक पहुंचा है। अब पूरा फोकस एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है और उन्हें विश्वास है कि सचिन देश के लिए ओलंपिक पदक भी जरूर जीतेगा।
कॉमनवेल्थ गोल्ड जीतकर भिवानी लौटे सचिन सिवाच, मिताथल में हुआ ऐतिहासिक स्वागत गोल्डन बॉय सचिन सिवाच का गांव में भव्य स्वागत, अब एशियन गेम्स और ओलंपिक पर नजर भिवानी के लाल ने बढ़ाया देश का मान, गोल्ड जीतकर गांव पहुंचे सचिन सिवाच का जोरदार अभिनंदन मिताथल का बेटा बना देश का गौरव, गोल्ड मेडलिस्ट सचिन सिवाच के स्वागत में उमड़ा जनसैलाब 'गोल्ड तो जीत लिया, अब ओलंपिक का सपना'—भिवानी पहुंचे सचिन सिवाच का बड़ा लक्ष्य गोल्डन पंच से रचा इतिहास, सचिन सिवाच के स्वागत में जश्न में डूबा पूरा गांव देश का मान बढ़ाकर घर लौटे सचिन सिवाच, मां बोलीं—अब एशियन गेम्स में भी गोल्ड लाएगा बेटा कोच का दावा—'सचिन ओलंपिक में भी देश को पदक दिलाएगा', गोल्डन बॉय का भव्य स्वागत भिवानी के चैंपियन सचिन सिवाच का शानदार स्वागत, गांव ने फूलों की बारिश से किया सम्मान कॉमनवेल्थ का गोल्ड, अब ओलंपिक का लक्ष्य... सचिन सिवाच के स्वागत में झूम उठा मिताथल Anchoring: कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत के लिए गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रचने वाले हरियाणा के होनहार मुक्केबाज सचिन सिवाच जब अपने पैतृक गांव मिताथल, जिला भिवानी पहुंचे, तो पूरा गांव जश्न में डूब गया। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और भारत माता के जयकारों के बीच अपने चैंपियन का ग्रामीणों ने भव्य स्वागत किया। सबसे पहले सचिन ने गांव के मंदिर में पहुंचकर भगवान का आशीर्वाद लिया और फिर ग्रामीणों का अभिवादन स्वीकार किया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर कोई अपने गोल्ड मेडलिस्ट खिलाड़ी की एक झलक पाने को उत्साहित नजर आया। सचिन ने कहा कि गांव वालों का प्यार और सम्मान उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने बताया कि गांव वालों को उन पर पूरा विश्वास था और उन्हें खुद भी भरोसा था कि वह देश के लिए गोल्ड मेडल जीतकर लौटेंगे। फाइनल
मुकाबले को याद करते हुए सचिन ने बताया कि शुरुआती दो राउंड में वह पीछे चल रहे थे, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। अपने कोच की ट्रेनिंग और खुद पर भरोसे के दम पर शानदार वापसी करते हुए उन्होंने गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया। अब सचिन का अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलंपिक है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में होने वाले एशियन गेम्स में भी पदक जीतना और फिर ओलंपिक में देश के लिए इतिहास रचना उनका सपना है। अपने प्रेरणास्रोत के बारे में बात करते हुए सचिन ने बताया कि गांव में उनके कोच ने ही उन्हें बॉक्सिंग की शुरुआत कराई। वहीं भारतीय मुक्केबाज विजेंदर सिंह और अमित पंघाल उनके आदर्श हैं। उन्होंने यह भी बताया कि वह पूरी तरह देसी खान-पान अपनाते हैं और उनका पसंदीदा भोजन चूरमा है। सचिन ने भारतीय सेना, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और भारतीय मुक्केबाजी महासंघ (BFI) का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें हर स्तर पर पूरा सहयोग मिलता है, जिससे वह बिना किसी चिंता के अपने खेल पर ध्यान दे पाते हैं। सचिन के कोच अनिल टेकराम ने बताया कि फाइनल मुकाबला बेहद रोमांचक रहा। अंतिम कुछ सेकंड तक मुकाबला किसी भी ओर जा सकता था, लेकिन आखिरी क्षणों में सचिन के दमदार पंच ने मुकाबले का रुख बदल दिया और गोल्ड भारत की झोली में आ गया। *कोच अनिल टेकराम–* कोच ने बताया कि सचिन करीब 10-11 वर्षों से लगातार मेहनत कर रहा है। गांव की बाबा कविनाथ अकादमी से शुरू हुआ यह सफर आज भारत को गोल्ड दिलाने तक पहुंचा है। अब पूरा फोकस एशियन गेम्स और ओलंपिक पर है और उन्हें विश्वास है कि सचिन देश के लिए ओलंपिक पदक भी जरूर जीतेगा।
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