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मूल पाठ में आरोप लगाया गया है कि 'टोटीचोर के अब्बा' के शासनकाल में अतीक और आज़म खान जैसे 'गुंडे' ही समाजवादी पार्टी (सपा) के असली 'अब्बा' (मालिक या मुखिया) थे। इसमें यह भी कहा गया है कि 'टोटीचोर' का खानदान इन लोगों का 'गुलाम' था और शासन की बागडोर असल में यही गुंडे चलाते थे।
दौलत राम शर्मा शास्त्री
मूल पाठ में आरोप लगाया गया है कि 'टोटीचोर के अब्बा' के शासनकाल में अतीक और आज़म खान जैसे 'गुंडे' ही समाजवादी पार्टी (सपा) के असली 'अब्बा' (मालिक या मुखिया) थे। इसमें यह भी कहा गया है कि 'टोटीचोर' का खानदान इन लोगों का 'गुलाम' था और शासन की बागडोर असल में यही गुंडे चलाते थे।
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