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दिल्ली शराब घोटाला: पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उन्हीं के पार्टी के मनोज सिसोदिया(पूर्व डिप्टी सीएम) को बरी कर दिया गया है। दिल्ली शराब नीति मामले (एक्साइज पॉलिसी केस) में लेकर हाल के समय में कानूनी कार्यवाही हुई है। यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसमें कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) द्वारा की गई थी।

10 hrs ago
user_Ashutosh Tiwari
Ashutosh Tiwari
Computer Programmer Ballia, Uttar Pradesh•
10 hrs ago

दिल्ली शराब घोटाला: पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल और उन्हीं के पार्टी के मनोज सिसोदिया(पूर्व डिप्टी सीएम) को बरी कर दिया गया है। दिल्ली शराब नीति मामले (एक्साइज पॉलिसी केस) में लेकर हाल के समय में कानूनी कार्यवाही हुई है। यह मामला दिल्ली सरकार की 2021-22 की आबकारी नीति से जुड़ा था, जिसमें कथित अनियमितताओं और वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए थे। इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation (CBI) और Enforcement Directorate (ED) द्वारा की गई थी।

More news from बिहार and nearby areas
  • Post by Ajay yadav
    4
    Post by Ajay yadav
    user_Ajay yadav
    Ajay yadav
    Video Creator डुमरांव, बक्सर, बिहार•
    6 hrs ago
  • Baliya darauli jag Parikrama
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    Baliya darauli jag Parikrama
    user_Mukesh kumar chaubey
    Mukesh kumar chaubey
    Photographer दरौली, सीवान, बिहार•
    11 hrs ago
  • जिस सरकार की आप शिकायत कर रहे हैं, अभी आपने ही तो उसे चुना है!! #bihar #BiharPolitics
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    जिस सरकार की आप शिकायत कर रहे हैं, अभी आपने ही तो उसे चुना है!! #bihar #BiharPolitics
    user_जनसत्ता NEWS@
    जनसत्ता NEWS@
    दरौंधा, सीवान, बिहार•
    12 hrs ago
  • धन्यवाद से सिंदरी के बिच पहाड
    1
    धन्यवाद से सिंदरी के बिच पहाड
    user_Sushil kumar sharma संपादक
    Sushil kumar sharma संपादक
    Interior designer केसाठ, बक्सर, बिहार•
    13 hrs ago
  • आरा नगर निगम बन गया है गटर निगम मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार बिहार न्यूज़ 24 आरा बिहार :- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु
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    आरा नगर निगम बन गया है गटर निगम मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार
बिहार न्यूज़ 24 आरा बिहार :- निष्पक्ष पत्रकार पाठक जी विष्णु
    user_Bihar News 24
    Bihar News 24
    Journalist Bhojpur, Bihar•
    16 hrs ago
  • महराजगंज, सिवान, बिहार / ऐतिहासिक वार्ता JHVP BHARAT NEWS परवेज़ आलम भारतीय हर किसी को पता है.. विश्व महात्मा गाँधी को विश्व नागरिक के रूप में मान्यता दे चूका है. लेकिन देश की आज़ादी के दौरान महात्मा गाँधी से बहुत सारी चुकें भी हुईं थीं.. जैसे कि अंग्रेजी शासन का ललोचप्पो करना... देश से ज्यादा विदेशियों में भरोसा हो गया था... पाकिस्तान से प्रेम हो गया था... भगतसिंह से, नेताजी से नफरत भी... क्या क्या इतिहास के पन्ने कहते हैं.. अध्ययन की जरुरत है. बहुत सारी बातों को लेकर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी को सम्मान देते हुए 30 जनवरी 1948 को दोपहर बाद गोली मारी थीं.. फिर भी सभी कहते हैं... महात्मा गाँधी.. अमर रहें
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    महराजगंज, सिवान, बिहार / ऐतिहासिक वार्ता 
JHVP BHARAT NEWS 
परवेज़ आलम भारतीय 
हर किसी को पता है.. विश्व महात्मा गाँधी को विश्व नागरिक के रूप में मान्यता दे चूका है.
लेकिन देश की आज़ादी के दौरान महात्मा गाँधी से बहुत सारी चुकें भी हुईं थीं.. जैसे कि अंग्रेजी शासन का ललोचप्पो करना...
देश से ज्यादा विदेशियों में भरोसा हो गया था...
पाकिस्तान से प्रेम हो गया था... भगतसिंह से, नेताजी से नफरत भी... क्या क्या इतिहास के पन्ने कहते हैं.. अध्ययन की जरुरत है.
बहुत सारी बातों को लेकर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी को सम्मान देते हुए 30 जनवरी 1948 को दोपहर बाद गोली मारी थीं..
फिर भी सभी कहते हैं... महात्मा गाँधी.. अमर रहें
    user_JHVP BHARAT NEWS
    JHVP BHARAT NEWS
    Local News Reporter महाराजगंज, सीवान, बिहार•
    20 min ago
  • गड़हनी प्रखंड मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार बिहार न्यूज़ 24 /गडहनी। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की मौजूदा स्थिति किसी साधारण प्रशासनिक लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट का प्रतीक बन चुकी है जिसमें व्यवस्था धीरे-धीरे ढहती नजर आ रही है। सोमवार और शुक्रवार को सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनता दरबार का आयोजन नहीं होना केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि यह आम लोगों के अधिकारों और उम्मीदों पर सीधे प्रहार जैसा साबित हो रहा है।प्रतिदिन सुबह से ही विभिन्न पंचायतों और गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचते हैं। किसी को राशन से जुड़ी शिकायत है, तो किसी को जमीन विवाद का समाधान चाहिए था, तो कोई पेंशन, आवास या प्रमाणपत्र के लिए भटक रहा है। लेकिन जैसे-जैसे कार्यालय का समय बीतता जाता, लोगों की उम्मीदें निराशा में बदलती चली जाती है। *जनता दरबार बना ‘कागजी हकीकत’* सरकार की मंशा साफ है कि जनता दरबार के माध्यम से प्रशासन सीधे लोगों की समस्याएं सुने और त्वरित समाधान दे। लेकिन गड़हनी में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई है। सोमवार और शुक्रवार को न तो जनता दरबार की कोई तैयारी होता और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी इसे लेकर गंभीर नजर आता है। स्थानीय जनता ने बताया कि हमलोग कई बार पहले भी यहां जनता दरबार के नाम पर आए, लेकिन अक्सर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।विगद सोमवार को भी वही हुआ घंटों इंतजार, लेकिन न सुनवाई, न कोई व्यवस्था। *अधिकारी-कर्मचारियों की गैरहाजिरी ने खोली पोल* बुधवार को स्थिति तब और चिंताजनक दिखी जब दोपहर तक कई विभागो में सन्नाटा पसरा रहा। प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में दो दिनो से मौजूद नहीं रही वहीं बुधवार को दिन के 12:30 बजे कार्यालय पहुंची। इस बीच प्रतियोगी परीक्षा के फार्म भरने वाले छात्र छात्राएं ईडब्ल्यूएस, क्रिमिलेयर, जाति, आय, आवासीय बनवाने को लेकर कार्यालय का चक्कर लगाते रहे।वहीं ऋषि कुमार का कहना है कि 28 फरवरी तक रेलवे ग्रुप डी का हमे फार्म भरना है क्रिमिलेयर के लिए सोमवार से कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूँ लेकिन अभी तक नही बना।क्रिमिलेयर के अभाव मे फार्म नही भरा पा रहा है।करनौल चांदी गांव निवासी हरेराम, बलिगांव पंचायत अंतर्गत लालगंज गांव निवासी स्वर्गीय सत्यनारायण पाल के पत्नी सीता कुंअर, बडौरा पंचायत अंतर्गत शिवपुर डिहरी निवासी तपेश्वर तिवारी के पत्नी सहित दर्जनो ग्रामीण जनता ने कहा कि हमलोग पेंशन बनवाने के लिए और अन्य कई कार्यो को लेकर कई दिनो से दौड रहे हैं ना तो बीडीओ से भेंट हो रहा है और ना ही काम। कई महत्वपूर्ण कक्ष बंद पड़े मिले। कई कर्मियों की अनुपस्थिति ने आम लोगों के काम पूरी तरह ठप कर रखा है। केवल आरटीपीएस काउंटर पर कर्मी मौजूद थे, जहां लोगों की लंबी कतार लगी रही।विदित हो कि राजस्व कर्मचारियों के हडताल पर जाने के कारण पंचायत सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनके उपर कार्य की अधिकता के कारण अतिरिक्त कार्य करने मे वे सभी असमर्थता जता रहे हैं।वहीं कुछ पंचायत सचिव का कहीं अता-पता नहीं रहता। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदारियां तय होने के बावजूद निगरानी और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है। *घोर अव्यवस्था का प्रतीक बना कार्यालय परिसर* प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रवेश करते ही जो दृश्य सामने आता है, वह प्रशासनिक संवेदनहीनता की कहानी खुद बयान करता है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है- गंदगी, दुर्गंध और बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा।वहीं कार्यालय के अंदर स्थित शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। वहीं कुछ लोगो का कहना है कि यहां आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। गंदगी का यह आलम केवल सफाई की कमी नहीं, बल्कि यह उस मानसिकता को दर्शाता है जहां आम नागरिक की गरिमा और सुविधा को महत्व ही नहीं दिया जा रहा। *ठप पड़ी सेवाएं, भटकते रहे लोग* पदाधिकारी व कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण कई लोग सुबह से फाइल लेकर भटकते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। वहीं कुछ विभागो मे लोगों को बार-बार अगले दिन आने की सलाह दी जाती रही, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उस दौरान जनता में बढ़ता आक्रोश लोगों की नाराजगी साफ तौर पर देखी जा सकती थी। कई लोगों ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही अब रोजमर्रा की बात हो गई है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना दबाव या सिफारिश के यहां काम होना बेहद मुश्किल है। इससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है। *जवाबदेही का अभाव-सबसे बड़ा संकट* गड़हनी प्रखंड की स्थिति यह संकेत देती है कि यहां सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की कमी है। जब अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं आते, जनता दरबार महज खानापूर्ति हो और कोई पूछने वाला नहीं होता, तो पूरी व्यवस्था अपने-आप ढीली पड़ जाती है। सरकार की योजनाएं कागजों पर चलती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नहीं दिखता। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है। *स्थानीय लोगों की मांग* स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी भोजपुर एवं बिहार सरकार से मांग की है कि जनता दरबार को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।वहीं सफाई व्यवस्था को तत्काल सुधार मे लाते हुए लापरवाही पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे। *व्यवस्था सुधार की जरूरत क्यों जरूरी* प्रखंड स्तर का प्रशासन आम लोगों के लिए सरकार का सबसे नजदीकी चेहरा होता है। यहीं से लोगों को राहत, योजनाओं का लाभ और समस्याओं का समाधान मिलता है। अगर यही स्तर कमजोर पड़ जाए तो पूरी शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। गड़हनी की मौजूदा स्थिति इसी खतरे की ओर इशारा कर रही है। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की बदहाली केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जमा हो रही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम प्रतीत होती है। जनता दरबार का न लगना, अधिकारियों की अनुपस्थिति, गंदगी और ठप सेवाएं ये सभी संकेत हैं कि अब स्थिति सामान्य शिकायतों से आगे बढ़ चुकी है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह असंतोष बड़े जनआक्रोश में बदल सकता है। प्रशासन के लिए यह समय चेतावनी की घंटी है या तो व्यवस्था सुधारी जाए, या जनता का विश्वास पूरी तरह टूटने का जोखिम उठाया जाए।वहीं इस संबंध मे गडहनी बीडीओ अर्चना कुमारी से संपर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नही उठाया गया।
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    गड़हनी प्रखंड मुख्यालय में प्रशासनिक पतन की भयावह तस्वीर: गंदगी, गैरहाजिरी, टूटी व्यवस्था और जनता के अधिकारों पर खुला प्रहार
बिहार न्यूज़ 24 /गडहनी।
गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की मौजूदा स्थिति किसी साधारण प्रशासनिक लापरवाही की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस गहरे संकट का प्रतीक बन चुकी है जिसमें व्यवस्था धीरे-धीरे ढहती नजर आ रही है। सोमवार और शुक्रवार को सरकार के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जनता दरबार का आयोजन नहीं होना केवल एक कार्यक्रम का रद्द होना नहीं, बल्कि यह आम लोगों के अधिकारों और उम्मीदों पर सीधे प्रहार जैसा साबित हो रहा है।प्रतिदिन सुबह से ही विभिन्न पंचायतों और गांवों से लोग अपनी समस्याएं लेकर प्रखंड कार्यालय पहुंचते हैं। किसी को राशन से जुड़ी शिकायत है, तो किसी को जमीन विवाद का समाधान चाहिए था, तो कोई पेंशन, आवास या प्रमाणपत्र के लिए भटक रहा है। लेकिन जैसे-जैसे कार्यालय का समय बीतता जाता, लोगों की उम्मीदें निराशा में बदलती चली जाती है।
*जनता दरबार बना ‘कागजी हकीकत’*
सरकार की मंशा साफ है कि जनता दरबार के माध्यम से प्रशासन सीधे लोगों की समस्याएं सुने और त्वरित समाधान दे। लेकिन गड़हनी में यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सिमटकर रह गई है। सोमवार और शुक्रवार को न तो जनता दरबार की कोई तैयारी होता और न ही कोई जिम्मेदार अधिकारी इसे लेकर गंभीर नजर आता है। स्थानीय जनता ने बताया कि हमलोग कई बार पहले भी यहां जनता दरबार के नाम पर आए, लेकिन अक्सर उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा।विगद सोमवार को भी वही हुआ घंटों इंतजार, लेकिन न सुनवाई, न कोई व्यवस्था।
*अधिकारी-कर्मचारियों की गैरहाजिरी ने खोली पोल*
बुधवार को स्थिति तब और चिंताजनक दिखी जब दोपहर तक कई विभागो में सन्नाटा पसरा रहा। प्रखंड विकास पदाधिकारी कार्यालय में दो दिनो से मौजूद नहीं रही वहीं बुधवार को दिन के 12:30 बजे कार्यालय पहुंची। इस बीच प्रतियोगी परीक्षा के फार्म भरने वाले छात्र छात्राएं ईडब्ल्यूएस, क्रिमिलेयर, जाति, आय, आवासीय बनवाने को लेकर कार्यालय का चक्कर लगाते रहे।वहीं ऋषि कुमार का कहना है कि 28 फरवरी तक रेलवे ग्रुप डी का हमे फार्म भरना है क्रिमिलेयर के लिए सोमवार से कार्यालय का चक्कर लगा रहा हूँ लेकिन अभी तक नही बना।क्रिमिलेयर के अभाव मे फार्म नही भरा पा रहा है।करनौल चांदी गांव निवासी  हरेराम, बलिगांव पंचायत अंतर्गत लालगंज गांव निवासी स्वर्गीय सत्यनारायण पाल के पत्नी सीता कुंअर, बडौरा पंचायत अंतर्गत शिवपुर डिहरी निवासी तपेश्वर तिवारी के पत्नी सहित दर्जनो ग्रामीण जनता ने कहा कि हमलोग पेंशन बनवाने के लिए और अन्य कई कार्यो को लेकर कई दिनो से दौड रहे हैं ना तो बीडीओ से भेंट हो रहा है और ना ही काम। कई महत्वपूर्ण कक्ष बंद पड़े मिले। कई कर्मियों की अनुपस्थिति ने आम लोगों के काम पूरी तरह ठप कर रखा है। केवल आरटीपीएस काउंटर पर कर्मी मौजूद थे, जहां लोगों की लंबी कतार लगी रही।विदित हो कि राजस्व कर्मचारियों के हडताल पर जाने के कारण पंचायत सचिवों को अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन उनके उपर कार्य की अधिकता के कारण अतिरिक्त कार्य करने मे वे सभी असमर्थता जता रहे हैं।वहीं कुछ पंचायत सचिव का कहीं अता-पता नहीं रहता। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदारियां तय होने के बावजूद निगरानी और जवाबदेही पूरी तरह नदारद है।
*घोर अव्यवस्था का प्रतीक बना कार्यालय परिसर*
प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रवेश करते ही जो दृश्य सामने आता है, वह प्रशासनिक संवेदनहीनता की कहानी खुद बयान करता है। सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति बेहद खराब है- गंदगी, दुर्गंध और बदहाल साफ-सफाई व्यवस्था स्वच्छ भारत अभियान को ठेंगा दिखा रहा।वहीं कार्यालय के अंदर स्थित शौचालय भी उपयोग के लायक नहीं बचे हैं। वहीं कुछ लोगो का कहना है कि यहां आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और दिव्यांग सबसे ज्यादा परेशान होते हैं। गंदगी का यह आलम केवल सफाई की कमी नहीं, बल्कि यह उस मानसिकता को दर्शाता है जहां आम नागरिक की गरिमा और सुविधा को महत्व ही नहीं दिया जा रहा।
*ठप पड़ी सेवाएं, भटकते रहे लोग*
पदाधिकारी व कर्मियों की अनुपस्थिति के कारण  कई लोग सुबह से फाइल लेकर भटकते रहे, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था। वहीं कुछ विभागो मे लोगों को बार-बार अगले दिन आने की सलाह दी जाती रही, जिससे उनके समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती है। उस दौरान जनता में बढ़ता आक्रोश लोगों की नाराजगी साफ तौर पर देखी जा सकती थी। कई लोगों ने कहा कि प्रशासनिक लापरवाही अब रोजमर्रा की बात हो गई है। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि बिना दबाव या सिफारिश के यहां काम होना बेहद मुश्किल है। इससे आम नागरिक खुद को असहाय महसूस कर रहा है।
*जवाबदेही का अभाव-सबसे बड़ा संकट* 
गड़हनी प्रखंड की स्थिति यह संकेत देती है कि यहां सबसे बड़ी समस्या जवाबदेही की कमी है। जब अधिकारी समय पर कार्यालय नहीं आते, जनता दरबार महज खानापूर्ति हो और कोई पूछने वाला नहीं होता, तो पूरी व्यवस्था अपने-आप ढीली पड़ जाती है। सरकार की योजनाएं कागजों पर चलती रहती हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका असर नहीं दिखता। इससे लोगों का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होता जा रहा है।
*स्थानीय लोगों की मांग*
स्थानीय लोगों ने जिलाधिकारी भोजपुर एवं बिहार सरकार से मांग की है कि जनता दरबार को नियमित और पारदर्शी बनाया जाए और अधिकारियों की उपस्थिति सुनिश्चित कराई जाए।वहीं 
सफाई व्यवस्था को तत्काल सुधार मे लाते हुए 
लापरवाही पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। लोगों का कहना है कि अगर जल्द सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से विरोध प्रदर्शन करेंगे।
*व्यवस्था सुधार की जरूरत क्यों जरूरी*
प्रखंड स्तर का प्रशासन आम लोगों के लिए सरकार का सबसे नजदीकी चेहरा होता है। यहीं से लोगों को राहत, योजनाओं का लाभ और समस्याओं का समाधान मिलता है।
अगर यही स्तर कमजोर पड़ जाए तो पूरी शासन व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। गड़हनी की मौजूदा स्थिति इसी खतरे की ओर इशारा कर रही है। गड़हनी प्रखंड मुख्यालय की बदहाली केवल एक दिन की समस्या नहीं है, बल्कि यह लंबे समय से जमा हो रही प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम प्रतीत होती है। जनता दरबार का न लगना, अधिकारियों की अनुपस्थिति, गंदगी और ठप सेवाएं ये सभी संकेत हैं कि अब स्थिति सामान्य शिकायतों से आगे बढ़ चुकी है। यदि जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह असंतोष बड़े जनआक्रोश में बदल सकता है। प्रशासन के लिए यह समय चेतावनी की घंटी है या तो व्यवस्था सुधारी जाए, या जनता का विश्वास पूरी तरह टूटने का जोखिम उठाया जाए।वहीं इस संबंध मे गडहनी बीडीओ अर्चना कुमारी से संपर्क किया गया लेकिन उनके द्वारा फोन नही उठाया गया।
    user_Bihar News 24
    Bihar News 24
    Journalist Bhojpur, Bihar•
    17 hrs ago
  • बक्सर चौसा बाजार जय माला के समय प्रेमिका को फिल्मी स्टाईल मे गोली मार कर प्रेमी ने एजाम दिया।
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    बक्सर चौसा बाजार जय माला के समय  प्रेमिका को फिल्मी स्टाईल मे गोली मार कर प्रेमी ने एजाम दिया।
    user_Sushil kumar sharma संपादक
    Sushil kumar sharma संपादक
    Interior designer केसाठ, बक्सर, बिहार•
    17 hrs ago
  • बड़हरिया थाना चौक के पास एक ऐसा ग्राहक सेवा केंद्र जो तुरंत खोलता है बैंक अकाउंट और हाथो हाथ देता है पासबुक...... लहर न्यूज़ पर देखे एजाज़ अहमद की एक खास रिपोर्ट
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    बड़हरिया थाना चौक के पास एक ऐसा ग्राहक सेवा केंद्र जो तुरंत खोलता है बैंक अकाउंट और हाथो हाथ देता है पासबुक......
लहर न्यूज़ पर देखे एजाज़ अहमद की एक खास रिपोर्ट
    user_लहर न्यूज़
    लहर न्यूज़
    Local News Reporter सिवान, सीवान, बिहार•
    57 min ago
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