हाथरस के तालाब की लोककथा...... हाथरस के तालाब की लोककथा .... ., बहुत समय पहले हाथरस क्षेत्र में पानी की कमी होने लगी। खेत सूखने लगे और लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था। तब गाँव के बुज़ुर्गों ने मिलकर एक बड़ा तालाब खुदवाने का निर्णय लिया। कहा जाता है कि पूरे गाँव के लोग सुबह से शाम तक श्रमदान करते थे। महिलाएँ मिट्टी ढोती थीं और बच्चे पानी पिलाते थे। कई महीनों की मेहनत के बाद विशाल तालाब तैयार हुआ। पहली बारिश में तालाब इतना भर गया कि पूरे क्षेत्र में खुशहाली लौट आई। किसानों की फसलें लहलहाने लगीं और पशुओं को भी पानी मिलने लगा। तभी से लोग उस तालाब को “जीवनदाता तालाब” कहने लगे। लोकमान्यता यह भी है कि तालाब के किनारे एक छोटा मंदिर था, जहाँ हर वर्ष मेले का आयोजन होता था। लोग मानते थे कि तालाब का पानी पवित्र है और गाँव की रक्षा करता है। रात के समय दीपक जलाकर तालाब की पूजा की जाती थी। समय के साथ शहर बढ़ा, लेकिन पुराने लोग आज भी कहते हैं कि हाथरस के तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि एकता, मेहनत और प्रकृति प्रेम की पहचान हैं।
हाथरस के तालाब की लोककथा...... हाथरस के तालाब की लोककथा .... ., बहुत समय पहले हाथरस क्षेत्र में पानी की कमी होने लगी। खेत सूखने लगे और लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता था। तब गाँव के बुज़ुर्गों ने मिलकर एक बड़ा तालाब खुदवाने का निर्णय लिया। कहा जाता है कि पूरे गाँव के लोग सुबह से शाम तक श्रमदान करते थे। महिलाएँ मिट्टी ढोती थीं और बच्चे पानी पिलाते थे। कई महीनों की मेहनत के बाद विशाल तालाब तैयार हुआ। पहली बारिश में तालाब इतना भर गया कि पूरे क्षेत्र में खुशहाली लौट आई। किसानों की फसलें लहलहाने लगीं और पशुओं को भी पानी मिलने लगा। तभी से लोग उस तालाब को “जीवनदाता तालाब” कहने लगे। लोकमान्यता यह भी है कि तालाब के किनारे एक छोटा मंदिर था, जहाँ हर वर्ष मेले का आयोजन होता था। लोग मानते थे कि तालाब का पानी पवित्र है और गाँव की रक्षा करता है। रात के समय दीपक जलाकर तालाब की पूजा की जाती थी। समय के साथ शहर बढ़ा, लेकिन पुराने लोग आज भी कहते हैं कि हाथरस के तालाब केवल जलाशय नहीं, बल्कि एकता, मेहनत और प्रकृति प्रेम की पहचान हैं।
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- मथुरा के एक मंदिर में एक 62 साल के साधू ने एक 10 साल की लड़की के साथ दुष्कर्म किया. लड़की अपने परिवार के साथ मंदिर के प्रांगण में रहती थी. घटना के दिन लड़की के माँ बाप किसी काम से बाहर गए हुए थे. घटना के दौरान लड़की की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई. लोगों ने साधू को खूब मारा और उसको जूते चप्पलों का हार पहनाकर पुरे गाँव में उसकी परेड कराई उसके बाद उसको पुलिस के हवाले कर दिया. मथुरा के एक मंदिर में एक 62 साल के साधू ने एक 10 साल की लड़की के साथ दुष्कर्म किया. लड़की अपने परिवार के साथ मंदिर के प्रांगण में रहती थी. घटना के दिन लड़की के माँ बाप किसी काम से बाहर गए हुए थे. घटना के दौरान लड़की की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोगों की भीड़ जमा हो गई. लोगों ने साधू को खूब मारा और उसको जूते चप्पलों का हार पहनाकर पुरे गाँव में उसकी परेड कराई उसके बाद उसको पुलिस के हवाले कर दिया.1
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