दौसा के झाझीरामपुरा में बिजली विभाग के नवनिर्मित ग्रिड सब-स्टेशन (GSS) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि यह सरकारी बजट का दुरुपयोग और ठेकेदार के भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। उद्घाटन से पहले ही इस सरकारी संपत्ति की हालत बेहद खराब है, जिसे जनता के टैक्स के पैसों से बनाया गया है। निरीक्षण में GSS परिसर में सुरक्षा से लेकर तकनीकी बारीकियों तक, हर जगह मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। GSS परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है, जहाँ मुख्य प्रवेश द्वार की कुंडी गायब है और ऑफिस के लकड़ी के दरवाजों में इतने बड़े गैप हैं कि कोई भी आवारा जानवर या असामाजिक तत्व आसानी से अंदर दाखिल हो सकता है। यार्ड में रोड़ी (गिट्टी) का सही भराव न होने के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है, और ऑफिस के पीछे व गेट के पास मिट्टी का भराव न होने से जमीन कभी भी धंस सकती है, जिससे एक बड़े हादसे का डर है। तकनीकी लापरवाही का आलम यह है कि यार्ड के फ्यूज इतनी ऊंचाई पर लगाए गए हैं जहाँ सामान्य तौर पर पहुंचना नामुमकिन है, और चार-चार फीडर होने के बावजूद पूरे GSS में केवल एक टूटी-फूटी सीढ़ी है, जो कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल रही है। पानी के बोरिंग का पाइप भी जमीन के बिल्कुल बराबर छोड़ा गया है, जिससे बारिश का गंदा पानी सीधे बोरिंग में जाकर पूरे वाटर सोर्स को दूषित करने की कगार पर है। इसके अलावा, पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैलोजन या हाई-मास्ट लाइटों की जगह छोटी-छोटी लाइटें लगाई गई हैं, और कमरों में ट्यूबलाइट तक नहीं हैं। ठेकेदार की 'ईमानदारी' का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिसर का सेप्टिक टैंक अभी से क्षतिग्रस्त हो चुका है, शौचालय की टाइलें उखड़कर गिरने को तैयार हैं, और फ्लश टैंक की फिटिंग टूटी पड़ी है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इस पूरे मामले में बिजली विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिनकी देखरेख में यह निर्माण कार्य हुआ था, और जिन्होंने कथित तौर पर आंखें मूंदकर ठेकेदार को भुगतान की हरी झंडी दी। इस 'भ्रष्टाचार की भेंट' चढ़े GSS के मामले में उच्च अधिकारियों से व्यक्तिगत संज्ञान लेने और दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को दोबारा मानकों के अनुरूप दुरुस्त करवाने की मांग की जा रही है। अब देखना यह होगा कि महकमा इस अंधेरे को दूर करता है या फिर भ्रष्टाचार की इस फाइल को हमेशा के लिए दबा दिया जाता है।
दौसा के झाझीरामपुरा में बिजली विभाग के नवनिर्मित ग्रिड सब-स्टेशन (GSS) को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसमें दावा किया गया है कि यह सरकारी बजट का दुरुपयोग और ठेकेदार के भ्रष्टाचार का जीता-जागता सबूत है। उद्घाटन से पहले ही इस सरकारी संपत्ति की हालत बेहद खराब है, जिसे जनता के टैक्स के पैसों से बनाया गया है। निरीक्षण में GSS परिसर में सुरक्षा से लेकर तकनीकी बारीकियों तक, हर जगह मानकों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। GSS परिसर में सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है, जहाँ मुख्य प्रवेश द्वार की कुंडी गायब है और ऑफिस के लकड़ी के दरवाजों में इतने बड़े गैप हैं कि कोई भी आवारा जानवर या असामाजिक तत्व आसानी से अंदर दाखिल हो सकता है। यार्ड में रोड़ी (गिट्टी) का सही भराव न होने के कारण जलभराव की स्थिति बनी हुई है, और ऑफिस के पीछे व गेट के पास मिट्टी का भराव न होने से जमीन कभी भी धंस सकती है, जिससे एक बड़े हादसे का डर है। तकनीकी लापरवाही का आलम यह है कि यार्ड के फ्यूज इतनी ऊंचाई पर लगाए गए हैं जहाँ सामान्य तौर पर पहुंचना नामुमकिन है, और चार-चार फीडर होने के बावजूद पूरे GSS में केवल एक टूटी-फूटी सीढ़ी है, जो कर्मचारियों की जान जोखिम में डाल रही है। पानी के बोरिंग का पाइप
भी जमीन के बिल्कुल बराबर छोड़ा गया है, जिससे बारिश का गंदा पानी सीधे बोरिंग में जाकर पूरे वाटर सोर्स को दूषित करने की कगार पर है। इसके अलावा, पूरे परिसर में सुरक्षा के लिए पर्याप्त हैलोजन या हाई-मास्ट लाइटों की जगह छोटी-छोटी लाइटें लगाई गई हैं, और कमरों में ट्यूबलाइट तक नहीं हैं। ठेकेदार की 'ईमानदारी' का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परिसर का सेप्टिक टैंक अभी से क्षतिग्रस्त हो चुका है, शौचालय की टाइलें उखड़कर गिरने को तैयार हैं, और फ्लश टैंक की फिटिंग टूटी पड़ी है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि निर्माण में बेहद घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। इस पूरे मामले में बिजली विभाग के उन जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं जिनकी देखरेख में यह निर्माण कार्य हुआ था, और जिन्होंने कथित तौर पर आंखें मूंदकर ठेकेदार को भुगतान की हरी झंडी दी। इस 'भ्रष्टाचार की भेंट' चढ़े GSS के मामले में उच्च अधिकारियों से व्यक्तिगत संज्ञान लेने और दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए निर्माण कार्य को दोबारा मानकों के अनुरूप दुरुस्त करवाने की मांग की जा रही है। अब देखना यह होगा कि महकमा इस अंधेरे को दूर करता है या फिर भ्रष्टाचार की इस फाइल को हमेशा के लिए दबा दिया जाता है।
- दौसा में जिला कलक्टर डॉ. सौम्या झा ने सोमवार, 15 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि शिविरों में आमजन की समस्याओं का प्रभावी और वास्तविक समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि लोगों को धरातल पर राहत मिल सके। जिला कलक्टर ने कहा कि इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य लंबित कार्यों का मौके पर ही निस्तारण कर आमजन को त्वरित राहत प्रदान करना है, जो राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। समीक्षा बैठक में डॉ. झा ने आगामी सप्ताह से आयोजित होने वाले शिविरों के लिए 'प्री-कैंप' आयोजित करने और इस सप्ताह संपन्न हुए शिविरों के लिए 'फॉलोअप कैंप' लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्राम पंचायतों और नगरीय निकाय क्षेत्रों में विभिन्न विभागों से संबंधित लंबित प्रकरणों को शिविरों में प्राथमिकता के साथ हल किया जाए, जिससे लंबित प्रकरणों की कुल संख्या को न्यूनतम स्तर तक लाया जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शिविरों में आने वाली प्रत्येक समस्या के समाधान के लिए विभागीय अधिकारी संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करें। जिला कलक्टर ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, नामांतरण और फार्मर रजिस्ट्री जैसी विभिन्न सेवाओं से जुड़े लंबित आवेदनों की शत-प्रतिशत पेंडेंसी समाप्त करने का निर्देश दिया। उन्होंने शिविरों के व्यापक प्रचार-प्रसार और जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा, ताकि अधिक से अधिक पात्र व्यक्तियों को इन सेवाओं का लाभ मिल सके। इसके अतिरिक्त, उन्होंने उपखण्ड अधिकारियों को ग्रामीण सेवा शिविरों के साथ-साथ शहरी सेवा शिविरों का भी नियमित निरीक्षण और प्रभावी पर्यवेक्षण करने के निर्देश दिए, जिससे शिविरों का उद्देश्य पूरी तरह से सफल हो सके। इस समीक्षा बैठक में अतिरिक्त जिला कलक्टर अरविंद शर्मा और जिला परिषद के अतिरिक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश कुमार मीणा सहित कई जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। जिले के सभी उपखण्ड अधिकारी, तहसीलदार, नगर परिषद आयुक्त और अधिशासी अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़े।1
- दौसा के कोलवा थाना क्षेत्र में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस वे पर एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जिसमें कार चालक की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना शनिवार रात लगभग 2 बजे जयपुर-दिल्ली एक्सप्रेस वे पर पीलर संख्या 171.4 के पास हुई, जब एक कार लोहे की रेलिंग से टकरा गई। कोलवा पुलिस के अनुसार, कार में कुल तीन लोग सवार थे। पंजाब से एक पति-पत्नी टैक्सी करके उज्जैन महाकाल के दर्शन के लिए जा रहे थे। इस हादसे में दिल्ली निवासी 42 वर्षीय सुमित कुमार पुत्र जगदीश जैन, जो कार चला रहे थे, उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, पति-पत्नी बाल-बाल बच गए और सुरक्षित रहे। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति का जायजा लिया। मृतक के शव को एंबुलेंस की सहायता से जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका पोस्टमार्टम कराया गया। शव को फिलहाल मोर्चरी में रखा गया है।2
- सवाई माधोपुर जिले के लिवाली गांव में सड़कों पर गंदा पानी बह रहा है। इस गंदे पानी के जमाव से पूरे क्षेत्र में गंदगी फैल रही है, जिससे ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- राजस्थान के सोठाना ग्राम स्थित अटल सेवा केंद्र पर जनसेवा और जनकल्याण के संकल्प को साकार करने हेतु 'ग्रामीण सेवा शिविर' का सफल आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रवासियों की समस्याओं का सीधा संवाद स्थापित कर उनका त्वरित समाधान सुनिश्चित करना था। शिविर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों से सीधा संवाद किया, जिन्होंने पानी, बिजली, सड़क, राजस्व और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी विभिन्न स्थानीय समस्याओं से अवगत कराया। मौके पर ही इन शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय अधिकारियों को उनके शीघ्र और प्रभावी निराकरण के कड़े निर्देश दिए गए। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। सरकार का प्राथमिक लक्ष्य सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक पूरी पारदर्शिता के साथ पहुंचाना है। शिविर के दौरान कई पात्र लाभार्थियों को तुरंत सरकारी योजनाओं से लाभान्वित भी किया गया। इस आयोजन में विभिन्न विभागों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी, कर्मचारी और भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।1
- माननीय जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अलवर तथा अध्यक्ष ताल्लुका विधिक सेवा समिति, अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश राजगढ़ श्री लेखपाल शर्मा के निर्देशानुसार, विश्व वृद्धजन दुर्व्यवहार जागरूकता दिवस के अवसर पर एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। ताल्लुका सचिव भाग्यश्री मीणा ने बताया कि यह शिविर पैरा लीगल वॉलेंटियर श्री सुबेंद्र कुमार सैनी द्वारा राजगढ़ तहसील के मुनपुर गांव में आयोजित किया गया था। शिविर के दौरान, पैरा लीगल वॉलेंटियर श्री सुबेंद्र कुमार सैनी ने नालसा (वरिष्ठ नागरिकों के लिए विधिक सेवाएं) योजना 2016 के संबंध में विस्तृत कानूनी जानकारी प्रदान की। उन्होंने वृद्धजनों के अधिकारों, वृद्ध पेंशन और निःशुल्क विधिक सहायता जैसी महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला। इसके अतिरिक्त, नालसा की संवाद और जागृति जैसी योजनाओं तथा इसके हेल्पलाइन नंबर के बारे में भी जानकारी दी गई।4
- निम्बाहेड़ा नगर के काबरा टेंट हाउस क्षेत्र में स्थित एक बिल्डिंग में आज सोमवार सुबह भीषण आग लग गई, जिस पर काबू पाने के लिए पिछले लगभग 2 घंटे से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इस घटना में कुछ पड़ोसी घायल हो गए हैं, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। सोमवार सुबह काबरा टेंट हाउस के पास स्थित इस बिल्डिंग में अचानक आग भड़क उठी और देखते ही देखते इसने पूरी बिल्डिंग को अपनी चपेट में ले लिया। आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि धुएं का गुबार दूर तक दिखाई दिया, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सूचना मिलने के तुरंत बाद कोतवाली थानाधिकारी राम सुमेर मीणा पुलिस जाप्ते के साथ मौके पर पहुंचे, और जनप्रतिनिधि भी घटनास्थल पर मौजूद रहे। आग बुझाने के लिए नगर पालिका की दमकल के साथ-साथ आसपास के प्लांटों से भी दमकल की कई गाड़ियां बुलाई गईं। राहत कार्यों के तहत, आग की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल के आसपास के मकानों को तत्काल खाली करा लिया गया ताकि कोई जनहानि न हो। आग की चपेट में आने से घायल हुए कुछ पड़ोसियों को उपचार के लिए राजकीय जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर भीड़ को नियंत्रित किया। पुलिस उप अधीक्षक बद्रीलाल और कोतवाली CI राम सुमेर मीणा भी मौके पर मौजूद हैं। फिलहाल, आग पर काबू पाने की हर संभव कोशिश जारी है, लेकिन सुबह से लगी इस आग पर करीब 2 घंटे बाद भी पूरी तरह नियंत्रण नहीं पाया जा सका है। आग का कारण अभी अज्ञात है और नुकसान का सही आंकलन आग बुझने के बाद ही हो पाएगा।4