तीन केंद्रीय मंत्रियों ने किया राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का किया दौरा l बीकानेर, 28 जनवरी। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री बुधवार देर शाम राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र पहुंचे। जहां उन्होंने ऊँट गाड़े की सवारी के साथ साथ ऊंट फॉर्म का विजिट भी किया।एनआरसीसी के कॉन्फ्रेंस हॉल में जिले में स्थित आईसीएआर के सभी 7 इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की तरह ही आत्मनिर्भर थार बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। साथ ही कहा कि ऊंट, घोड़े, भेड़ इत्यादि पशुओं को प्रासंगिक बनाने को लेकर जिले में स्थित आईसीएआर के सातों इंस्टीट्यूट के सभी वैज्ञानिक मिलकर पूरा रोडमैप करें ताकि इनके अस्तित्व को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब युद्ध ऊंट, घोड़ों और हाथियों से ही लड़ा जाता था। अब इनका स्थान ड्रोन ने ले लिया है। लिहाजा अब इनके अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।श्री चौहान ने कहा कि अस्तित्व के संकट को मिटाने के लिए इन्हें हर हाल में प्रासंगिक बनाना होगा। इसको लेकर आईसीएआर के सभी सातों इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक मिलकर ऐसा रोड़मैप तैयार करें कि इन्हें पर्यटन, स्वास्थ्य इत्यादि की दृष्टि से प्रासंगिक बनाया जा सके।उन्होेंने कहा कि ऊंटनी का दूध गुणकारी है उसका दूध पीने से शुगर नहीं होता। इसी तरह इनके पर्यटन, परिवहन इत्यादि क्षेत्र में भी प्रासंगिक बनाया जाएगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि खेती को भी इस तरह विकसित किया जाए कि वह स्थानीय जलवायु, मिट्टी, पानी इत्यादि के अनुरूप हो और किसानों को बिना बीमारी के क्वालिटी के साथ ज्यादा उत्पादन मिल सके। इसको लेकर सभी वैज्ञानिक मिलकर कार्य करें। औषधीय खेती को लेकर भी सही रिसर्च हो जाए तो यह क्षेत्र कमाल कर सकता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वे करीब एक महीने बाद ही यहां फिर आएंगे और इन सब पर वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। इससे पूर्व आईसीएआर के डायरेक्टर प्रो. एम.एल. जाट ने कहा कि जिले की सातों इंस्टीट्यूट एक टीम के रूप में काम करे तो थार में खुशहाली ला सकते हैं। इससे पूर्व तीनों केन्द्रीय मंत्रियों का एनआरसीसी के वैज्ञानिकों ने साफा पहनाकर और बुके भेंट कर स्वागत किया। कॉन्फ्रेंस हॉल में राजुवास के कुलगुरु प्रो. सुमंत व्यास, एसकेआरएयू कुलगुरु श्री राजेन्द्र बाबू दुबे, एनआरसीसी के डायरेक्टर डॉ अनिल कुमार पूनियां, एनआरसीई हिसार के डॉ टी.के. भट्टाचार्य, काजरी जोधपुर के डायरेक्टर डॉ एस.पी.एस.तंवर, सीआईएएच के डायरेक्टर डॉ जगदीश राणे समेत अन्य वैज्ञानिक, श्रीमती सुमन छाजेड़, श्री श्याम पंचारिया, श्री अशोक प्रजापत, श्री सत्य प्रकाश आचार्य, समेत अन्य जनप्रतिनिधि व स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
तीन केंद्रीय मंत्रियों ने किया राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र का किया दौरा l बीकानेर, 28 जनवरी। केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कानून राज्य मंत्री ( स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल और केन्द्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग राज्य मंत्री बुधवार देर शाम राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र पहुंचे। जहां उन्होंने ऊँट गाड़े की सवारी के साथ साथ ऊंट फॉर्म का विजिट भी किया।एनआरसीसी के कॉन्फ्रेंस हॉल में जिले में स्थित आईसीएआर के सभी 7 इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की तरह ही आत्मनिर्भर थार बनाने के लिए पूरी ताकत लगाएंगे। साथ ही कहा कि ऊंट, घोड़े, भेड़ इत्यादि पशुओं को प्रासंगिक बनाने को लेकर जिले में स्थित आईसीएआर के सातों इंस्टीट्यूट के सभी वैज्ञानिक मिलकर पूरा रोडमैप करें ताकि इनके अस्तित्व को बचाया जा सके। उन्होंने कहा कि एक वक्त था जब युद्ध ऊंट, घोड़ों और हाथियों से ही लड़ा जाता था। अब इनका स्थान ड्रोन ने ले लिया है। लिहाजा अब इनके अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।श्री चौहान ने कहा कि अस्तित्व के संकट को मिटाने के लिए इन्हें हर हाल में प्रासंगिक बनाना होगा। इसको लेकर आईसीएआर के सभी सातों इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक मिलकर ऐसा रोड़मैप तैयार करें कि इन्हें पर्यटन, स्वास्थ्य इत्यादि की दृष्टि से प्रासंगिक बनाया जा सके।उन्होेंने कहा कि ऊंटनी का दूध गुणकारी है उसका दूध पीने से शुगर नहीं होता। इसी तरह इनके पर्यटन, परिवहन इत्यादि क्षेत्र में भी प्रासंगिक बनाया जाएगा। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि खेती को भी इस तरह विकसित किया जाए कि वह स्थानीय जलवायु, मिट्टी, पानी इत्यादि के अनुरूप हो और किसानों को बिना बीमारी के क्वालिटी के साथ ज्यादा उत्पादन मिल सके। इसको लेकर सभी वैज्ञानिक मिलकर कार्य करें। औषधीय खेती को लेकर भी सही रिसर्च हो जाए तो यह क्षेत्र कमाल कर सकता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि वे करीब एक महीने बाद ही यहां फिर आएंगे और इन सब पर वैज्ञानिकों के साथ विस्तृत चर्चा करेंगे। इससे पूर्व आईसीएआर के डायरेक्टर प्रो. एम.एल. जाट ने कहा कि जिले की सातों इंस्टीट्यूट एक टीम के रूप में काम करे तो थार में खुशहाली ला सकते हैं। इससे पूर्व तीनों केन्द्रीय मंत्रियों का एनआरसीसी के वैज्ञानिकों ने साफा पहनाकर और बुके भेंट कर स्वागत किया। कॉन्फ्रेंस हॉल में राजुवास के कुलगुरु प्रो. सुमंत व्यास, एसकेआरएयू कुलगुरु श्री राजेन्द्र बाबू दुबे, एनआरसीसी के डायरेक्टर डॉ अनिल कुमार पूनियां, एनआरसीई हिसार के डॉ टी.के. भट्टाचार्य, काजरी जोधपुर के डायरेक्टर डॉ एस.पी.एस.तंवर, सीआईएएच के डायरेक्टर डॉ जगदीश राणे समेत अन्य वैज्ञानिक, श्रीमती सुमन छाजेड़, श्री श्याम पंचारिया, श्री अशोक प्रजापत, श्री सत्य प्रकाश आचार्य, समेत अन्य जनप्रतिनिधि व स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
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