कानपुर शहर में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने शहर की 'गंगा-जमुनी तहजीब' के बजाय 'थाने की तहजीब' को नई पहचान दी है। यह वाकया पनकी थाना क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एमआईजी चौकी इंचार्ज बृजेश कुमार जी ने अतिक्रमण हटाने के दौरान एक गरीब चोखा-बाटी बेचने वाले को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। जब बुलडोजर अपना काम कर रहे थे, तभी चौकी इंचार्ज बृजेश कुमार जी ने सोचा कि सिर्फ मशीनों से काम नहीं चलेगा और उन्होंने अपनी ड्यूटी का 'एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी' निर्वहन करते हुए चोखा-बाटी वाले को ऐसा थप्पड़ मारा कि उसका 'स्वाद' ही बदल गया। रिपोर्ट में कटाक्ष किया गया है कि दरोगा जी शायद यह जाँच रहे थे कि इस थप्पड़ में बुलडोजर से ज्यादा 'दम' है या नहीं। दरोगा जी की इस 'थप्पड़-ए-कानपुर' फिल्म की 'फ्री स्क्रीनिंग' तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद लोगों ने तंज कसना शुरू कर दिया कि सरकार को बुलडोजर का खर्च उठाने की क्या ज़रूरत है, जब एक दरोगा जी ही काफी हैं? स्थानीय जनता सवाल उठा रही है कि अतिक्रमण हटाना तो समझ में आता है, लेकिन क्या थप्पड़ हटाने का कोई अभियान नहीं चलेगा? इस घटना ने कानपुर में 'विकास' की नई परिभाषा गढ़ दी है, जहाँ एक इंजन बुलडोजर चलाता है और दूसरा मौके पर ही 'सुधार' कर देता है, जिससे बेचारे दुकानदार का चेहरा सोशल मीडिया पर 'स्टार' बन गया। दरोगा जी की इस 'तेजतर्रार' कार्रवाई पर वरिष्ठ अधिकारियों का क्या कहना है, यह देखना अभी बाकी है। इस घटना के बाद कानपुर में चोखा-बाटी खाने वाले भी डर-डर के खाएँगे। नसीहत दी गई है कि कानपुर में अगर अब बुलडोजर दिखे, तो उससे दूरी बनाए रखें, वरना 'अतिक्रमण' के साथ-साथ गालों का भी 'नवनिर्माण' हो सकता है। यह घटना इस सवाल को जन्म देती है कि क्या प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए अब 'थप्पड़-रहित' प्रोटोकॉल अपनाने चाहिए, या फिर यही कानपुर की 'असली' कार्यशैली है?
कानपुर शहर में चल रहे अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने शहर की 'गंगा-जमुनी तहजीब' के बजाय 'थाने की तहजीब' को नई पहचान दी है। यह वाकया पनकी थाना क्षेत्र में सामने आया, जहाँ एमआईजी चौकी इंचार्ज बृजेश कुमार जी ने अतिक्रमण हटाने के दौरान एक गरीब चोखा-बाटी बेचने वाले को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। जब बुलडोजर अपना काम कर रहे थे, तभी चौकी इंचार्ज बृजेश कुमार जी ने सोचा कि सिर्फ मशीनों से काम नहीं चलेगा और उन्होंने अपनी ड्यूटी का 'एक्स्ट्रा ऑर्डिनरी' निर्वहन करते हुए चोखा-बाटी वाले को ऐसा थप्पड़ मारा कि उसका 'स्वाद' ही बदल गया। रिपोर्ट में कटाक्ष किया गया है कि दरोगा जी शायद यह जाँच रहे थे कि इस थप्पड़ में बुलडोजर से ज्यादा 'दम' है या नहीं। दरोगा जी की इस 'थप्पड़-ए-कानपुर' फिल्म की 'फ्री स्क्रीनिंग' तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिसके बाद लोगों ने तंज कसना शुरू कर दिया कि सरकार को बुलडोजर का खर्च उठाने की क्या ज़रूरत है, जब एक दरोगा जी ही काफी हैं? स्थानीय जनता सवाल उठा रही है कि अतिक्रमण हटाना तो समझ में आता है, लेकिन क्या थप्पड़ हटाने का कोई अभियान नहीं चलेगा? इस घटना ने कानपुर में 'विकास' की नई परिभाषा गढ़ दी है, जहाँ एक इंजन बुलडोजर चलाता है और दूसरा मौके पर ही 'सुधार' कर देता है, जिससे बेचारे दुकानदार का चेहरा सोशल मीडिया पर 'स्टार' बन गया। दरोगा जी की इस 'तेजतर्रार' कार्रवाई पर वरिष्ठ अधिकारियों का क्या कहना है, यह देखना अभी बाकी है। इस घटना के बाद कानपुर में चोखा-बाटी खाने वाले भी डर-डर के खाएँगे। नसीहत दी गई है कि कानपुर में अगर अब बुलडोजर दिखे, तो उससे दूरी बनाए रखें, वरना 'अतिक्रमण' के साथ-साथ गालों का भी 'नवनिर्माण' हो सकता है। यह घटना इस सवाल को जन्म देती है कि क्या प्रशासन को अतिक्रमण हटाने के लिए अब 'थप्पड़-रहित' प्रोटोकॉल अपनाने चाहिए, या फिर यही कानपुर की 'असली' कार्यशैली है?
- बस्ती जनपद में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराधों पर नियंत्रण पाने के अभियान के तहत, कप्तानगंज पुलिस ने 5 जुलाई को ज़मीन कब्जेदारी से जुड़े विवादों में त्वरित कार्रवाई की। इस दौरान, शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न होने पर पुलिस ने कुल 12 लोगों को गिरफ्तार कर न्यायालय भेज दिया। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह के निर्देशानुसार, अपर पुलिस अधीक्षक श्यामकांत के पर्यवेक्षण में और क्षेत्राधिकारी कलवारी प्रदीप कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में थानाध्यक्ष कप्तानगंज आलोक कुमार श्रीवास्तव के नेतृत्व में संपन्न हुई। पुलिस को विभिन्न गांवों से ज़मीन कब्जेदारी को लेकर हो रहे विवादों की सूचना मिली थी, जहाँ दोनों पक्ष फौजदारी पर आमादा थे, जिससे क्षेत्र की शांति और कानून-व्यवस्था प्रभावित होने का गंभीर अंदेशा था। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुँची और स्थिति को नियंत्रित करते हुए इन लोगों को हिरासत में लिया गया। सभी के विरुद्ध धारा 170/126/135 बीएनएसएस के तहत कार्रवाई करते हुए उपजिलाधिकारी हर्रैया के न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। गिरफ्तार किए गए लोगों में मीरा देवी, प्रतिमा, सुनील तिवारी उर्फ राजन, जयशंकर, साधना, झिनकना देवी, रामबुझारत, अकाल, रामनाथ, विवेक शुक्ला, शशि प्रभा सिंह और शिखा शामिल हैं। ये सभी अलग-अलग गांवों के निवासी हैं, और ज़मीन संबंधी विवादों में उनके आमने-सामने आने की सूचना पर पुलिस ने एहतियातन यह कार्रवाई की। इस पूरी कार्रवाई में उपनिरीक्षक वीरेन्द्र कुमार सरोज, उपनिरीक्षक रविन्द्र यादव, उपनिरीक्षक वीरेन्द्र कुमार राय, चौकी प्रभारी महाराजगंज उपनिरीक्षक अनिल कुमार त्रिपाठी, हेड कांस्टेबल प्रदीप सिंह, कांस्टेबल अभिमन्यु शर्मा, महिला कांस्टेबल निशा चौहान, महिला कांस्टेबल पूजा यादव तथा कांस्टेबल रामजी तिवारी सहित कप्तानगंज पुलिस टीम की सक्रिय भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनपद में शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए इस प्रकार की कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि ज़मीन विवाद या अन्य किसी भी मामले में कानून अपने हाथ में लेने वालों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।1
- पावर और बिजली सेक्टर से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण और काम की खबरें सामने आ रही हैं।1
- राम मंदिर के चंदा चोरी मामले को लेकर 'बाबा' ने एक बड़ा खुलासा किया है। इस खुलासे के दौरान उन्होंने अपनी गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि चंदा चोरी होने पर 'हम बहुत रोए'।1
- बस्ती जिले के हरैया तहसील के परशुरामपुर थाना क्षेत्र में स्थित ग्राम नेवादा, पोस्ट नंद नगर चौरई से एक गंभीर समस्या सामने आई है। ग्रामीणों ने शिकायत की है कि उनके गांव में कोई सफाईकर्मी नियुक्त नहीं है, जिसके चलते सार्वजनिक नालियां पूरी तरह से अवरुद्ध हो गई हैं। ये नालियां गंदगी से भरी हुई हैं और इनसे लगातार तेज बदबू आ रही है, जिससे ग्रामीणों का जीवन दूभर हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए गांव के प्रधान से कई बार संपर्क किया है और उनसे नालियों की सफाई करवाने का अनुरोध किया है। हालांकि, प्रधान इस मामले पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं और न ही किसी तरह की कार्रवाई कर रहे हैं। ग्रामीणों ने स्थिति की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा है कि प्रशासन को खुद आकर इस नारकीय स्थिति का जायजा लेना चाहिए।2
- बस्ती न्यूज टाइम्स अपने 11वें स्थापना दिवस के अवसर पर कल एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन करने जा रहा है। मीडिया संस्थान 'सच की आवाज़' और 'समाज का विश्वास' के अपने मूल मंत्र के साथ, खबरों के क्षेत्र में 11 वर्षों के 'विश्वास के मजबूत सफर' का जश्न मना रहा है। इस खास मौके पर 'आपका साथ, हमारी पहचान' के संदेश को भी दोहराया जा रहा है।1
- संतकबीरनगर पुलिस ने अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत एक जिला बदर अभियुक्त को बैंड-बाजे के साथ जनपद की सीमा से बाहर कर दिया। थाना महुली क्षेत्र के ग्राम भैंसही उर्फ भईसैया निवासी मुकेश यादव पुत्र रंगीलाल यादव के विरुद्ध सक्षम न्यायालय/जिलाधिकारी द्वारा जिला बदर आदेश पारित किया गया था। पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर श्री संदीप कुमार मीना के निर्देशन और क्षेत्राधिकारी धनघटा श्री अभयनाथ मिश्र के पर्यवेक्षण में यह प्रभावी कार्रवाई की गई। थाना महुली पुलिस ने क्षेत्राधिकारी धनघटा एवं थानाध्यक्ष महुली श्री दुर्गेश कुमार पाण्डेय की मौजूदगी में पर्याप्त पुलिस बल के साथ अभियुक्त को संतकबीरनगर जनपद की सीमा से बाहर निकाला। पुलिस ने जिला बदर अभियुक्त को स्पष्ट चेतावनी दी है कि वह आगामी छह माह तक जनपद संतकबीरनगर की सीमा में प्रवेश नहीं करेगा; आदेश का उल्लंघन कर जनपद में प्रवेश करने पर उसके विरुद्ध विधिक प्रावधानों के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि इस कार्रवाई का उद्देश्य क्षेत्र में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखना, आमजन में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करना तथा असामाजिक एवं अपराधी प्रवृत्ति के व्यक्तियों पर प्रभावी अंकुश स्थापित करना है।1
- बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र में कानून का इकबाल पस्त होता दिख रहा है, जहाँ जमीनी विवादों के बीच सरेआम गुंडागर्दी का 'नंगा नाच' चल रहा है और यह सब पुलिस की नाक के नीचे हो रहा है। कप्तानगंज नगर पंचायत क्षेत्र में प्रमोद चौधरी और राम बुधारत चौधरी के बीच चल रहे लंबे जमीनी विवाद ने 05 जुलाई 2026 को हिंसक रूप ले लिया। पीड़ित पक्ष की शिकायतकर्ता शशिप्रभा ने आरोप लगाया है कि बाहर से गाड़ियों में भरकर आए उपद्रवियों ने उन्हें न केवल जान से मारने की धमकी दी, बल्कि गाड़ियों से कुचलने की कोशिश भी की। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें साफ दिख रहा है कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद लोग एक-दूसरे पर हमला कर रहे हैं। पुलिस की इस मूकदर्शक भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं कि क्या वर्दी की आड़ में कोई 'बड़ा खेल' चल रहा है। थानाध्यक्ष आलोक कुमार श्रीवास्तव ने इसे 'जमीनी विवाद का मामला' बताकर जांच जारी होने की बात कही है, जिसे केवल 'रटा-रटाया प्रशासनिक जवाब' माना जा रहा है। आरोप है कि जमीनी विवाद का हवाला देकर आपराधिक गतिविधियों और जानलेवा हमलों को नजरअंदाज करना पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। इस घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है और आम नागरिक पुलिस पर भरोसा करने से कतरा रहे हैं। जनता सवाल उठा रही है कि पुलिस की मौजूदगी में मारपीट करने वालों को किसका संरक्षण प्राप्त है, और क्या कप्तानगंज पुलिस का अपराधियों में भय समाप्त हो चुका है? यदि समय रहते ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो यह जमीनी विवाद किसी बड़ी मानवीय त्रासदी में बदल सकता है। कप्तानगंज की जनता अब आला अधिकारियों के तत्काल हस्तक्षेप और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रही है, ताकि क्षेत्र में कानून का राज पुनः बहाल हो सके।1