Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 26 *श्लोक:* अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् । तथापि त्वं महाबाहो नैनं शोचितुमर्हसि ॥ २६ ॥ *अनुवाद:* किन्तु यदि तुम यह सोचते हो कि आत्मा (अथवा जीवन का लक्षण) सदा जन्म लेता है तथा सदा मरता है तो भी हे महाबाहु! तुम्हारे शोक करने का कोई कारण नहीं है। *तात्पर्य:* सदा से दार्शनिकों का एक ऐसा वर्ग चला आ रहा है जो बौद्धों के ही समान यह नहीं मानता कि शरीर के परे भी आत्मा का स्वतन्त्र अस्तित्व है। ऐसा प्रतीत होता है कि जब भगवान् कृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश दिया तो ऐसे दार्शनिक विद्यमान थे और लोकायतिक तथा वैभाषिक नाम से जाने जाते थे। ऐसे दार्शनिकों का मत है कि जीवन के लक्षण भौतिक संयोग की एक परिपक्वावस्था में ही घटित होते हैं। आधुनिक भौतिक विज्ञानी तथा भौतिकतावादी दार्शनिक भी ऐसा ही सोचते हैं। उनके अनुसार शरीर भौतिक तत्त्वों का संयोग है और एक अवस्था ऐसी आती है जब भौतिक तथा रासायनिक तत्त्वों के संयोग से जीवन के लक्षण विकसित हो उठते हैं। नृतत्त्व विज्ञान इसी दर्शन पर आधारित है। सम्प्रति, अनेक छद्म धर्म— जिनका अमेरिका में प्रचार हो रहा है—इसी दर्शन का पालन करते हैं और साथ ही शून्यवादी अभक्त बौद्धों का अनुसरण करते हैं। यदि अर्जुन को आत्मा के अस्तित्व में विश्वास नहीं था, जैसा कि वैभाषिक दर्शन में होता है तो भी उसके शोक करने का कोई कारण न था। कोई भी मानव थोड़े से रसायनों की क्षति के लिए शोक नहीं करता तथा अपना कर्तव्यपालन नहीं त्याग देता है। दूसरी ओर, आधुनिक विज्ञान तथा वैज्ञानिक युद्ध में शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए न जाने कितने टन रसायन फूँक देते हैं। वैभाषिक दर्शन के अनुसार आत्मा शरीर के क्षय होते ही लुप्त हो जाता है। अत: प्रत्येक दशा में चाहे अर्जुन इस वैदिक मान्यता को स्वीकार करता कि अणु-आत्मा का अस्तित्व है, या कि वह आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, उसके लिए शोक करने का कोई कारण न था। इस सिद्धान्त के अनुसार चूँकि पदार्थ से प्रत्येक क्षण असंख्य जीव उत्पन्न होते हैं और नष्ट होते रहते हैं, अत: ऐसी घटनाओं के लिए शोक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता तो अर्जुन को अपने पितामह तथा गुरु के वध करने के पापफलों से डरने का कोई कारण न था। किन्तु साथ ही कृष्ण ने अर्जुन को व्यंगपूर्वक महाबाहु कह कर सम्बोधित किया क्योंकि उसे वैभाषिक सिद्धान्त स्वीकार नहीं था जो वैदिक ज्ञान के प्रतिकूल है। क्षत्रिय होने के नाते अर्जुन का सम्बन्ध वैदिक संस्कृति से था और वैदिक सिद्धान्तों का पालन करते रहना ही उसके लिए शोभनीय था। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 कृष्ण से कुछ नहीं चाहिए। सिर्फ कृष्ण ही चाहिए। भक्ति और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुंचती है, तब भगवान और भक्त एक हो जाते है। भगवद गीता से हमें यह समझना है की कृष्ण का चरित्र कैसा है कृष्ण का स्वभाव कैसा है? कृष्ण खुद हमें यह सब बताते हैं। ताकि हम उसी के जैसे बन जाए, और उसी में समा जाए। गीता का आत्मसात करे। गीता पढ़ें और अपने परिवार मित्र को भी प्रेरित करे। लोक कल्याण की भावना से भगवद गीता सभीको बताए यह बड़े पुण्य का काम है। राधे राधे। 🕉️🌠🌌 *शुभ प्रभात * 🌌🌠🕉️ नमस्कार🙏 *🍁 कर्मों की दोलत 🍁* एक राजा था जिसने ने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठा करके (एक तरह का शाही खजाना) आबादी से बाहर जंगल में एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने में सारे खजाने को खुफिया तौर पर छुपा दिया था। खजाने की सिर्फ दो चाबियां थी एक चाबी राजा के पास और एक उसके एक खास मंत्री के पास थी। इन दोनों के अलावा किसी को भी उस खुफिया खजाने का राज मालूम ना था.. एक रोज़ किसी को बताए बगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकला, तहखाने का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गया और अपने खजाने को देख देख कर खुश हो रहा था, और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था। उसी वक्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा की खजाने का दरवाजा खुला है.. वो हैरान हो गया और ख्याल किया कि कही कल रात जब मैं खजाना देखने आया तब शायद खजाना का दरवाजा खुला रह गया होगा... उसने जल्दी जल्दी खजाने का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और वहां से चला गया। उधर खजाने को निहारने के बाद राजा जब संतुष्ट हुआ, और दरवाजे के पास आया तो ये क्या… दरवाजा तो बाहर से बंद हो गया था... उसने जोर जोर से दरवाजा पीटना शुरू किया पर वहां उनकी आवाज सुननेवाला उस जंगल में कोई ना था। राजा चिल्लाता रहा, पर अफसोस कोई ना आया.. वो थक हार के खजाने को देखता रहा.. अब राजा भूख और पानी की प्यास से बेहाल हो रहा था, पागलों सा हो गया.. वो रेंगता रेंगता हीरों के संदूक के पास गया और बोला ए दुनिया के नायाब हीरों मुझे एक गिलास पानी दे दो.. फिर मोती सोने चांदी के पास गया और बोला ए मोती चांदी सोने के खजाने मुझे एक वक़्त का खाना दे दो... राजा को ऐसा लगा की हीरे मोती उसे बोल रहे हो कि तेरे सारी ज़िन्दगी की कमाई तुझे एक गिलास पानी और एक समय का खाना नही दे सकती.. राजा भूख से बेहोश हो के गिर गया। जब राजा को होश आया तो सारे मोती हीरे बिखेर के दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया... वो दुनिया को एक पैगाम देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज़ और कलम नही था। राजा ने पत्थर से अपनी उंगली फोड़ी और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया.... उधर मंत्री और पूरी सेना लापता राजा को ढूंढते रहे पर बहुत दिनों तक राजा ना मिला तो मंत्री राजा के खजाने को देखने आया... उसने देखा कि राजा हीरे जवाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है, और उसकी लाश को कीड़े मकोड़े खा रहे थे.. राजा ने दीवार पर खून से लिखा हुआ था… ये सारी दौलत एक घूंट पानी ओर एक निवाला नही दे सकी… यही अंतिम सच है... आखिरी समय आपके साथ आपके कर्मो की दौलत जाएगी... चाहे आप कितने भी हीरे पैसा सोना चांदी इकट्ठा कर लो सब यही रह जाएगा... . इसीलिए जो जीवन आपको प्रभु ने उपहार स्वरूप दिया है, उसमें अच्छे कर्म लोगों की भलाई के काम कीजिए.. बिना किसी स्वार्थ के ओर अर्जित कीजिए अच्छे कर्मो की अनमोल दौलत.. जो आपके सदैव काम आएगी । 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏✍️⤵️ *पेट की समस्याएं करे दूर* पेट संबंधी अनेक समस्याओं से निजात पाने में नीम बहुत सहायक होता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर सेवन करें। नीम के फूलों को मसलकर गर्म पानी में डालकर छानकर पी लें इससे कब्ज दूर होती है। नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है। जय जय श्री राधे 🙏🌹
Suresh Chandra Agrawal: सभी कृष्ण भक्तों को सादर दंडवत प्रणाम 🙏🌹 सदा जपिये हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे I हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे और हमेशा खुश रहिये Ii हमेशा प्रसन्न रहो 🌹🙏🏾 *Bhagavad Gita App* *Chapter:* 2 *श्लोक:* 26 *श्लोक:* अथ चैनं नित्यजातं नित्यं वा मन्यसे मृतम् । तथापि त्वं महाबाहो नैनं शोचितुमर्हसि ॥ २६ ॥ *अनुवाद:* किन्तु यदि तुम यह सोचते हो कि आत्मा (अथवा जीवन का लक्षण) सदा जन्म लेता है तथा सदा मरता है तो भी हे महाबाहु! तुम्हारे शोक करने का कोई कारण नहीं है। *तात्पर्य:* सदा से दार्शनिकों का एक ऐसा वर्ग चला आ रहा है जो बौद्धों के ही समान यह नहीं मानता कि शरीर के परे भी आत्मा का स्वतन्त्र अस्तित्व है। ऐसा प्रतीत होता है कि जब भगवान् कृष्ण ने भगवद्गीता का उपदेश दिया तो ऐसे दार्शनिक विद्यमान थे और लोकायतिक तथा वैभाषिक नाम से जाने जाते थे। ऐसे दार्शनिकों का मत है कि जीवन के लक्षण भौतिक संयोग की एक परिपक्वावस्था में ही घटित होते हैं। आधुनिक भौतिक विज्ञानी तथा भौतिकतावादी दार्शनिक भी ऐसा ही सोचते हैं। उनके अनुसार शरीर भौतिक तत्त्वों का संयोग है और एक अवस्था ऐसी आती है जब भौतिक तथा रासायनिक तत्त्वों के संयोग से जीवन के लक्षण विकसित हो उठते हैं। नृतत्त्व विज्ञान इसी दर्शन पर आधारित है। सम्प्रति, अनेक छद्म धर्म— जिनका अमेरिका में प्रचार हो रहा है—इसी दर्शन का पालन करते हैं और साथ ही शून्यवादी अभक्त बौद्धों का अनुसरण करते हैं। यदि अर्जुन को आत्मा के अस्तित्व में विश्वास नहीं था, जैसा कि वैभाषिक दर्शन में होता है तो भी उसके शोक करने का कोई कारण न था। कोई भी मानव थोड़े से रसायनों की क्षति के लिए शोक नहीं करता तथा अपना कर्तव्यपालन नहीं त्याग देता है। दूसरी ओर, आधुनिक विज्ञान तथा वैज्ञानिक युद्ध में शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए न जाने कितने टन रसायन फूँक देते हैं। वैभाषिक दर्शन के अनुसार आत्मा शरीर के क्षय होते ही लुप्त हो जाता है। अत: प्रत्येक दशा में चाहे अर्जुन इस वैदिक मान्यता को स्वीकार करता कि अणु-आत्मा का अस्तित्व है, या कि वह आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करता, उसके लिए शोक करने का कोई कारण न था। इस सिद्धान्त के अनुसार चूँकि पदार्थ से प्रत्येक क्षण असंख्य जीव उत्पन्न होते हैं और नष्ट होते रहते हैं, अत: ऐसी घटनाओं के लिए शोक करने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आत्मा का पुनर्जन्म नहीं होता तो अर्जुन को अपने पितामह तथा गुरु के वध करने के पापफलों से डरने का कोई कारण न था। किन्तु साथ ही कृष्ण ने अर्जुन को व्यंगपूर्वक महाबाहु कह कर सम्बोधित किया क्योंकि उसे वैभाषिक सिद्धान्त स्वीकार नहीं था जो वैदिक ज्ञान के प्रतिकूल है। क्षत्रिय होने के नाते अर्जुन का सम्बन्ध वैदिक संस्कृति से था और वैदिक सिद्धान्तों का पालन करते रहना ही उसके लिए शोभनीय था। जय श्री कृष्ण 🙏🌹 कृष्ण से कुछ नहीं चाहिए। सिर्फ कृष्ण ही चाहिए। भक्ति और प्रेम जब अपनी पराकाष्ठा पर पहुंचती है, तब भगवान और भक्त एक हो जाते है। भगवद गीता से हमें यह समझना है की कृष्ण का चरित्र कैसा है कृष्ण का स्वभाव कैसा है? कृष्ण खुद हमें यह सब बताते हैं। ताकि हम उसी के जैसे बन जाए, और उसी में समा जाए। गीता का आत्मसात करे। गीता पढ़ें और अपने परिवार मित्र को भी प्रेरित करे। लोक कल्याण की भावना से भगवद गीता सभीको बताए यह बड़े पुण्य का काम है। राधे राधे। 🕉️🌠🌌 *शुभ प्रभात * 🌌🌠🕉️ नमस्कार🙏 *🍁 कर्मों की दोलत 🍁* एक राजा था जिसने ने अपने राज्य में क्रूरता से बहुत सी दौलत इकट्ठा करके (एक तरह का शाही खजाना) आबादी से बाहर जंगल में एक सुनसान जगह पर बनाए तहखाने में सारे खजाने को खुफिया तौर पर छुपा दिया था। खजाने की सिर्फ दो चाबियां थी एक चाबी राजा के पास और एक उसके एक खास मंत्री के पास थी। इन दोनों के अलावा किसी को भी उस खुफिया खजाने का राज मालूम ना था.. एक रोज़ किसी को बताए बगैर राजा अकेले अपने खजाने को देखने निकला, तहखाने का दरवाजा खोल कर अंदर दाखिल हो गया और अपने खजाने को देख देख कर खुश हो रहा था, और खजाने की चमक से सुकून पा रहा था। उसी वक्त मंत्री भी उस इलाके से निकला और उसने देखा की खजाने का दरवाजा खुला है.. वो हैरान हो गया और ख्याल किया कि कही कल रात जब मैं खजाना देखने आया तब शायद खजाना का दरवाजा खुला रह गया होगा... उसने जल्दी जल्दी खजाने का दरवाजा बाहर से बंद कर दिया और वहां से चला गया। उधर खजाने को निहारने के बाद राजा जब संतुष्ट हुआ, और दरवाजे के पास आया तो ये क्या… दरवाजा तो बाहर से बंद हो गया था... उसने जोर जोर से दरवाजा पीटना शुरू किया पर वहां उनकी आवाज सुननेवाला उस जंगल में कोई ना था। राजा चिल्लाता रहा, पर अफसोस कोई ना आया.. वो थक हार के खजाने को देखता रहा.. अब राजा भूख और पानी की प्यास से बेहाल हो रहा था, पागलों सा हो गया.. वो रेंगता रेंगता हीरों के संदूक के पास गया और बोला ए दुनिया के नायाब हीरों मुझे एक गिलास पानी दे दो.. फिर मोती सोने चांदी के पास गया और बोला ए मोती चांदी सोने के खजाने मुझे एक वक़्त का खाना दे दो... राजा को ऐसा लगा की हीरे मोती उसे बोल रहे हो कि तेरे सारी ज़िन्दगी की कमाई तुझे एक गिलास पानी और एक समय का खाना नही दे सकती.. राजा भूख से बेहोश हो के गिर गया। जब राजा को होश आया तो सारे मोती हीरे बिखेर के दीवार के पास अपना बिस्तर बनाया और उस पर लेट गया... वो दुनिया को एक पैगाम देना चाहता था लेकिन उसके पास कागज़ और कलम नही था। राजा ने पत्थर से अपनी उंगली फोड़ी और बहते हुए खून से दीवार पर कुछ लिख दिया.... उधर मंत्री और पूरी सेना लापता राजा को ढूंढते रहे पर बहुत दिनों तक राजा ना मिला तो मंत्री राजा के खजाने को देखने आया... उसने देखा कि राजा हीरे जवाहरात के बिस्तर पर मरा पड़ा है, और उसकी लाश को कीड़े मकोड़े खा रहे थे.. राजा ने दीवार पर खून से लिखा हुआ था… ये सारी दौलत एक घूंट पानी ओर एक निवाला नही दे सकी… यही अंतिम सच है... आखिरी समय आपके साथ आपके कर्मो की दौलत जाएगी... चाहे आप कितने भी हीरे पैसा सोना चांदी इकट्ठा कर लो सब यही रह जाएगा... . इसीलिए जो जीवन आपको प्रभु ने उपहार स्वरूप दिया है, उसमें अच्छे कर्म लोगों की भलाई के काम कीजिए.. बिना किसी स्वार्थ के ओर अर्जित कीजिए अच्छे कर्मो की अनमोल दौलत.. जो आपके सदैव काम आएगी । 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 🙏✍️⤵️ *पेट की समस्याएं करे दूर* पेट संबंधी अनेक समस्याओं से निजात पाने में नीम बहुत सहायक होता है। पेट के कीड़ों को नष्ट करने के लिए नीम के पत्तों के रस में शहद और काली मिर्च मिलाकर सेवन करें। नीम के फूलों को मसलकर गर्म पानी में डालकर छानकर पी लें इससे कब्ज दूर होती है। नीम की पत्तियों को सुखाकर शक्कर मिलाकर खाने से दस्त में आराम मिलता है। जय जय श्री राधे 🙏🌹
- आंधी तहसील के चांदराना में पैंथर के हमले से गिर्राज गुर्जर को हुआ भारी नुकसान1
- जयपुर राजस्थान में भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) की प्रभावशाली बैठक: नई टीम का गठन : संतोष अग्रवाल व गोपाल गुप्ता बने प्रदेश उपाध्यक्ष एवं जयपुर जिला अध्यक्ष कमलनयन सिंह एवं जिला महासचिव केशव सिंह सोलंकी बने। प्रदेश अध्यक्ष कमल कुमार झोटा ने दिए संगठन विस्तार को निर्देश जयपुर। भारतीय पत्रकार संघ (AIJ) की एक अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक शनिवार को शहर के गणगौर होटल में प्रदेश अध्यक्ष कमल कुमार झोटा के सानिध्य में संपन्न हुई। बैठक का उद्देश्य संगठन को और अधिक सुदृढ़, सक्रिय एवं प्रभावी बनाना रहा, जिसके त4
- असली कमाई तो ये ही है... कल राजस्थान विश्वविद्यालय के पास से। दो राहगीर युवक उधर से गुजर रहा था। पुलिस की गाड़ी खड़ी थी। बोनट पर काटा हुआ केक रखा था। दो-तीन वर्दीधारी और दो-तीन सिविलियन हंसी-खुशी के माहौल में केक खा रहे थे और खिला रहे थे। एक महिला के गोद में बच्चा भी था। एक युवक गाड़ी चला रहा हैं और उसका दोस्त को बोला यार थोड़ा बैक लो। बड़ा ही मस्त दृश्य लग रहा है। छोटा सा वीडियो बनाते हैं। वे अपने हिसाब से सोच रहा था कि कोई महिला पुलिसकर्मी ड्यूटी पर है और बच्चे का बर्थडे होगा इसलिए यहीं पर केक काटकर खुशी मना रहे होंगे। शायद असली बात पता ही नहीं चलती अगर उनमें से एक पुलिस का जवान वीडियो बना रहे युवकों की गाड़ी के पास नहीं आता। जवान ने पूछा कि वीडियो क्यों बना रहे हैं? एक युवक ने कहा, यार बड़ा अच्छा लग रहा है देखकर। बच्चे का बर्थडे पुलिस वाले ऐसे मनाते हैं, कितनी मुश्किल ड्यूटी होती होगी पुलिस वालों की? पुलिस का जवान धीरे से मुस्कुरा दिया। फिर बोला- सर जी, बात यह नहीं है। आप नीचे उतरेंगे तो बताऊंगा। मैंने कहा लो भाई, नीचे आ जाते हैं। अब बता दो क्या बात है। उसने जो कहानी बताई वह तो सच में ही दिल को छू गई। फिर हम भी गाड़ी के पास ही पहुंच गए। असल बात यह थी कि बर्थ-डे बच्चे का नहीं बल्कि वहां ड्यूटी पर तैनात महिला इंस्पेक्टर गुंजन सोनी का था। केक अलवर से एक दंपती लेकर आए थे। इंस्पेक्टर गुंजन सोनी ने अपनी अलवर पोस्टिंग के दौरान इस जोड़े की शादी को टूटने से बचाया था। दोनों के बीच कुछ अनबन और गलतफहमी थी जिसे समझाईश से गुंजन ने दूर कर दिया था और दोनों तभी से खुशी-खुशी साथ रहते हैं। गुंजन के हर जन्मदिन पर दोनों केक लेकर जोड़े से आते हैं। कल गुंजन की ड्यूटी दिन भर यूनिवर्सिटी के गेट पर थी तो दोनों यहीं आ गए। मैं हैरान रह गया। आप ड्यूटी के दौरान कई बार कितने अच्छे काम कर जाते हैं और उसकी छाप कितनी गहरी पड़ती होगी? हम नौकरी और प्रोफेशन में कितना कमाते हैं, कितना बचाते हैं यह मायने नहीं रखता लेकिन अगर हम लोगों का ऐसा प्यार कमाते हैं, तो मैं समझता हूं कि असली कमाई यही है। बाकी सब कुछ इसके नीचे-नीचे ही है।1
- कल हुई तेज आंधी और ओलावृष्टि ने कई इलाकों में भारी तबाही मचा दी। अचानक बदले मौसम ने आम लोगों, खासकर किसानों, मजदूरों और घुमंतू परिवारों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। तेज हवाओं के साथ गिरे बड़े-बड़े ओलों ने घरों की छतें उड़ा दीं और कच्चे मकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा में कई पशुओं की मौत हो गई, जिससे ग्रामीणों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। खेतों में खड़ी फसलें भी बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों की मेहनत पर पानी फिर गया। घुमंतू और मजदूर वर्ग के लोग अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से अभी तक पर्याप्त मदद नहीं पहुंच पाई है। पीड़ित परिवार राहत और मुआवजे की मांग कर रहे हैं, ताकि वे इस संकट से उबर सकें। फिलहाल प्रभावित इलाकों में हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं और लोग जल्द से जल्द राहत की उम्मीद कर रहे हैं।1
- जयपुर में शुक्रवार शाम को अंधड़ के चलते ब्रह्मपुरी इलाके में एक घर की टीनशेड की छत ढह गई। टीनशेड की छत के नीचे गिरने से घर में मौजूद महिला दब गई। महिला के बने की सूचना के बाद ब्रह्मपुरी थाना पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन कर महज कुछ ही मिनटों में दबी महिला को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पुलिस की ओर से प्राथमिक उपचार के लिए महिला को हॉस्पिटल भर्ती करवाया गया। पुलिस ने बताया- तेज अंधड़ के चलते शुक्रवार शाम को जोरावर सिंह गेट पर टीनशेड का घर ढह गया। अंधड़ के चलते टीनशेड की छत पूरी तरह से टूटकर नीचे आ गिरी। हादसे के समय घर के अंदर मौजूद महिला टीनशेड के नीचे दब गई। वहीं स्थानीय लोगों की सूचना पर ब्रह्मपुरी थाने की चेतक मौके पर पहुंची। चेतक में मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। टूटे बिजली तारों को देखने के बाद भी पुलिसकर्मी अंदर घुसे। काफी मशक्कत कर टीनशेड के नीचे दबी महिला को सुरक्षित बाहर निकाला। पुलिस चेतक की मदद से प्राथमिक उपचार के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया गया।1
- Post by Kishan Lal jangid1
- Post by Just Jaipur Live1
- राजस्थान के हाइवे पर रोडवेज को ओवरटेक करने से पहले रोडवेज के पीछे लिखे स्लोगन को जरूर पढ़ना आ रोड़वेज है प्रधान ठंड रख ठंड...1