झारखंड में विस्थापन का मुद्दा एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है, जिसके तहत हाल ही में विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कोनार डैम परियोजना के विस्थापित रैयतों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय पर सैकड़ों की संख्या में इन विस्थापितों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि का मालिकाना हक दिलाना है, जिसे लेकर उन्होंने उपायुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। विस्थापितों का कहना है कि उन्हें पुनर्वास तो मिला, लेकिन लगभग सात दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी जमीन का वैधानिक अधिकार नहीं मिला है। आंदोलनकारियों ने अपनी समस्याओं को बयां करते हुए बताया कि कोनार डैम परियोजना के लिए वर्ष 1946 में भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था और 1952 में डैम बनकर तैयार हो गया। इसके बाद उन्हें पुनर्वास स्थल पर बसाया गया, लेकिन आवंटित भूमि का आज तक दाखिल-खारिज नहीं हुआ है और न ही उनके नाम से रसीद निर्गत की गई है। इस अभाव के कारण उन्हें पहचान का संकट झेलना पड़ रहा है, और आवासीय, जाति व आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज बनवाने में भी कठिनाई होती है। उन्होंने वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की, क्योंकि वैध दस्तावेजों के बिना इसमें शामिल होना मुश्किल है। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जब भी कोई अंचल अधिकारी उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करता है, उसका तबादला कर दिया जाता है, जिससे उनके कार्यों में बाधा आती है। उन्होंने वर्तमान अंचल अधिकारी नित्यानंद दास के तबादले के प्रयास का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि कुछ बिचौलियों और कंपनी से जुड़े प्रभावशाली लोगों के हितों के कारण उन्हें जानबूझकर भूमिहीन बनाए रखा जा रहा है। विस्थापितों के अनुसार, 70 साल बाद भी मालिकाना हक न मिलना व्यवस्था की बड़ी विफलता है, और उन्हें आशंका है कि दस्तावेजों के अभाव में उनकी मूल पहचान और अधिकार दोनों संकट में पड़ सकते हैं। उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा तथा न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सात दशक से अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे कोनार डैम विस्थापितों का यह आंदोलन केवल जमीन का सवाल नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और न्याय की उस लड़ाई का प्रतीक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी जारी है। इस घेराव में नवाटांड़, बनासो, गरहमुर्गी, महतोईया, बरहमोरिया, उदयपुर, नवादा, कुसुंभा, गोविंदपुर, परसाटांड़, कारीटांड़ सहित अनेक गांवों से हजारों की संख्या में रैयत-विस्थापित शामिल हुए, जिनमें सुशील महतो, माही पटेल, हीरामन महतो, चंद्रशेखर पटेल, सुरेश राम, राजू महतो, इश्तियाक अहमद, कैलाश महतो, डूमरचंद महतो, कालीचरण महतो, टेकलाल महतो, वासुराम मेहता, नेमचंद महतो, किशोर महतो, विशेश्वर महतो, पिंकी देवी, मोहिनी देवी, सीता देवी, चिंता कुमारी, बृजी देवी, चितु राम, चंचला देवी, अमित राज, नेहा कुमारी और शांति देवी जैसे लोग प्रमुख थे।
झारखंड में विस्थापन का मुद्दा एक गंभीर सामाजिक चुनौती बना हुआ है, जिसके तहत हाल ही में विष्णुगढ़ प्रखंड स्थित कोनार डैम परियोजना के विस्थापित रैयतों का दर्द एक बार फिर सामने आया है। मंगलवार को हजारीबाग उपायुक्त कार्यालय पर सैकड़ों की संख्या में इन विस्थापितों ने घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग पुनर्वास के तहत आवंटित भूमि का मालिकाना हक दिलाना है, जिसे लेकर उन्होंने उपायुक्त को एक विस्तृत मांग पत्र भी सौंपा। विस्थापितों का कहना है कि उन्हें पुनर्वास तो मिला, लेकिन लगभग सात दशक बीत जाने के बाद भी उन्हें उनकी जमीन का वैधानिक अधिकार नहीं मिला है। आंदोलनकारियों ने अपनी समस्याओं को बयां करते हुए बताया कि कोनार डैम परियोजना के लिए वर्ष 1946 में भूमि अधिग्रहण शुरू हुआ था और 1952 में डैम बनकर तैयार हो गया। इसके बाद उन्हें पुनर्वास स्थल पर बसाया गया, लेकिन आवंटित भूमि का आज तक दाखिल-खारिज नहीं हुआ है और न ही उनके नाम से रसीद निर्गत की गई है। इस अभाव के कारण उन्हें पहचान का संकट झेलना पड़ रहा है, और आवासीय, जाति व आय प्रमाण पत्र जैसे आवश्यक दस्तावेज बनवाने में भी कठिनाई होती है। उन्होंने वर्तमान में चल रही एसआईआर प्रक्रिया को लेकर भी गहरी चिंता व्यक्त की, क्योंकि वैध दस्तावेजों के बिना इसमें शामिल होना मुश्किल है। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि जब भी कोई अंचल अधिकारी उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करता है, उसका तबादला कर दिया जाता है, जिससे उनके कार्यों में बाधा आती है। उन्होंने वर्तमान अंचल अधिकारी नित्यानंद दास के तबादले के प्रयास का भी जिक्र किया। उनका आरोप है कि कुछ बिचौलियों और कंपनी से जुड़े प्रभावशाली लोगों के हितों के कारण उन्हें जानबूझकर भूमिहीन बनाए रखा जा रहा है। विस्थापितों के अनुसार, 70 साल बाद भी मालिकाना हक न मिलना व्यवस्था की बड़ी विफलता है, और उन्हें आशंका है कि दस्तावेजों के अभाव में उनकी मूल पहचान और अधिकार दोनों संकट में पड़ सकते हैं। उपायुक्त ने प्रतिनिधिमंडल की समस्याओं को गंभीरता से सुना और उन्हें आश्वस्त किया कि उनकी मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाएगा तथा न्यायसंगत कार्रवाई सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। सात दशक से अधिकारों की प्रतीक्षा कर रहे कोनार डैम विस्थापितों का यह आंदोलन केवल जमीन का सवाल नहीं, बल्कि पहचान, सम्मान और न्याय की उस लड़ाई का प्रतीक है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी जारी है। इस घेराव में नवाटांड़, बनासो, गरहमुर्गी, महतोईया, बरहमोरिया, उदयपुर, नवादा, कुसुंभा, गोविंदपुर, परसाटांड़, कारीटांड़ सहित अनेक गांवों से हजारों की संख्या में रैयत-विस्थापित शामिल हुए, जिनमें सुशील महतो, माही पटेल, हीरामन महतो, चंद्रशेखर पटेल, सुरेश राम, राजू महतो, इश्तियाक अहमद, कैलाश महतो, डूमरचंद महतो, कालीचरण महतो, टेकलाल महतो, वासुराम मेहता, नेमचंद महतो, किशोर महतो, विशेश्वर महतो, पिंकी देवी, मोहिनी देवी, सीता देवी, चिंता कुमारी, बृजी देवी, चितु राम, चंचला देवी, अमित राज, नेहा कुमारी और शांति देवी जैसे लोग प्रमुख थे।
- हजारीबाग के जिला कांग्रेस कार्यालय कृष्ण बल्लभ आश्रम में जन नायक धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 126वीं पुण्यतिथि मनाई गई, जहाँ कांग्रेसियों द्वारा उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री और जिला अध्यक्ष जय प्रकाश भाई पटेल ने बिरसा मुंडा की जीवनी पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि बिरसा मुंडा भारतीय आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे, जिन्होंने ब्रिटिश राज के दौरान 19वीं शताब्दी के अंत में बंगाल प्रेसीडेंसी (जो अब झारखंड है) में हुए एक आदिवासी धार्मिक सहस्राब्दी आंदोलन का नेतृत्व किया। इसी कारण वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति बन गए हैं, और भारत के आदिवासी उन्हें भगवान मानते हुए धरती आबा के नाम से भी जानते हैं। कार्यक्रम के पश्चात, कांग्रेसियों ने पुराना बस स्टैंड स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और “भगवान बिरसा मुंडा अमर रहे” के नारे लगाए। इस अवसर पर प्रदेश कॉर्डिनेटर बिनोद कुशवाहा, प्रदेश सचिव रेणु कुशवाहा, पूर्व प्रदेश सचिव शशि मोहन सिंह, जिला कांग्रेस के मीडिया अध्यक्ष निसार खान, नगर अध्यक्ष परवेज अहमद, पूर्व नगर अध्यक्ष मनोज नारायण भगत, वरिष्ठ कांग्रेसी राजू चौरसिया, दीपक गुप्ता, सुनिल अग्रवाल, नरेश गुप्ता, जावेद इकबाल, विजय कुमार सिंह, सदरूल होदा, बाबर अंसारी, मुस्ताक अंसारी, माशूक अंसारी, नौशाद आलम, लाल बाबु, गिरजा शंकर, अनिल कुमार राय और तोमस आन्नद सहित कई अन्य कांग्रेसी उपस्थित थे।4
- बिहार के बरबीघा प्रखण्ड के रमजानपुर गाँव में चल रहा एक निर्माण कार्य अब लोगों के लिए 'मौत को न्योता देता' साबित हो रहा है। बताया गया है कि यहाँ एक पुल का निर्माण अधूरा छोड़ दिया गया है, जिसके कारण यह आए दिन होने वाले हादसों की वजह बन गया है।1
- हजारीबाग के जमुना इलाके में एक कथित भूत देखे जाने की खबर ने स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना दिया है। दावा किया जा रहा है कि घटनास्थल पर करीब 30 सेकंड का एक ऑडियो भी रिकॉर्ड किया गया है, जिसमें किसी महिला के रोने जैसी आवाज सुनाई देती है। हालांकि, इस ऑडियो और उससे जुड़ी तस्वीर की सत्यता की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह स्पष्ट नहीं है कि ऑडियो में सुनाई देने वाली आवाज वास्तव में किसकी है और संबंधित तस्वीर कब तथा किन परिस्थितियों में ली गई थी। इस घटना को लेकर स्थानीय लोगों में तरह-तरह की बातें चल रही हैं; कुछ लोग इसे एक रहस्यमयी घटना मान रहे हैं, जबकि अन्य का कहना है कि बिना उचित जांच-पड़ताल के किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। फिलहाल, इस ऑडियो और तस्वीर की सच्चाई की जांच होना अभी बाकी है, और जब तक कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आता, तब तक इस मामले को केवल एक दावा ही माना जा सकता है। इससे जुड़ी हर नई जानकारी और अपडेट के लिए बने रहने का आग्रह किया गया है।1
- हजारीबाग शहर में कूड़े-कचरे का भारी जमावड़ा होने के कारण नागरिकों और गौमाता को नारकीय स्थिति में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। यह गंभीर स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब शहर के मेयर को 'गौ रक्षक' और 'गौ माता का प्रेमी' बताया जाता है। नगर निगम हजारीबाग का पूरा क्षेत्र कूड़ा-कचरा का केंद्र बन गया है, जिससे सड़कों पर जमा गंदगी को खाने के लिए गौमाता विवश हैं। स्थानीय नागरिकों ने इस मामले पर गहरा दुख और आश्चर्य व्यक्त किया है। उनका आरोप है कि नगर निगम हजारीबाग द्वारा चारगुना होल्डिंग टैक्स वसूलने के बावजूद शहरवासी दुर्गंध और गंदगी के बीच रहने को मजबूर हैं। नगर आयुक्त पर भी निशाना साधा गया है, यह कहते हुए कि वे स्वयं एसी कारों और आरामदायक मकानों में रहते हैं, इसलिए उन्हें शहर की इस बदहाल स्थिति से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह भी बताया गया है कि हजारीबाग के उपायुक्त शहर के प्रति सक्रिय रहते हैं, इसके बावजूद गौमाता का कूड़ा खाने को मजबूर होना एक 'अद्भुत' और चिंताजनक पहलू है। इस प्रकार, शहरवासी और गौमाता दोनों ही कूड़े-कचरे में रहने को विवश हैं, जो नगर निगम और उसके अधिकारियों की कार्यशैली पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।1
- भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान के अनुसार, झारखंड में 12 और 13 जून को मौसम में बदलाव आने की संभावना है। राज्य के कई जिलों के लिए गरज-चमक, तेज़ हवाओं और भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। मौसम विभाग ने कुछ क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने के साथ वज्रपात होने की भी आशंका जताई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी और सक्रिय मौसम प्रणाली के प्रभाव से राज्य में वर्षा की गतिविधियां बढ़ेंगी। इस मौसमी बदलाव का असर विशेष रूप से रांची, हजारीबाग, रामगढ़, बोकारो, गिरिडीह, कोडरमा, धनबाद, देवघर, दुमका, जामताड़ा सहित आसपास के जिलों में देखने को मिल सकता है।1
- हजारीबाग जिले में लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं को थामने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिला प्रशासन ने अब कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। उपायुक्त के निर्देश पर सोमवार को जिला परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और सड़क सुरक्षा टीम ने संयुक्त रूप से जिले के प्रमुख ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों का सघन निरीक्षण किया। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य दुर्घटनाओं के कारणों का बारीकी से अध्ययन करना और सुरक्षा मानकों की समीक्षा करना था। इस निरीक्षण अभियान का नेतृत्व जिला परिवहन पदाधिकारी संतोष कुमार चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक (यातायात) और मोटर यान निरीक्षक विजय गौतम ने किया। जांच के दौरान मासीपिढ़ी चौक, डेमोटांड़ और मोरंगी जैसे स्थानों पर वाहनों की तेज रफ्तार को दुर्घटनाओं का मुख्य कारण पाया गया। वहीं, चर्चित यूपी मोड़ पर सड़क की तीव्र ढलान और अंधा मोड़ लगातार सड़क हादसों की वजह बन रहा है, जिससे लोगों की जान को खतरा हो रहा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, संयुक्त टीम ने मौके पर ही तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। NHAI रांची को आदेश दिया गया है कि सभी चिन्हित स्थलों पर तुरंत साइनबोर्ड, रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर और गति सीमा संकेतक स्थापित किए जाएं, ताकि वाहन चालकों को समय पर चेतावनी मिल सके और दुर्घटनाओं को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मोरंगी स्थित एक पेट्रोल पंप संचालक को भी सड़क सुरक्षा मानकों का पालन करने और पहुंच मार्ग पर आवश्यक सुरक्षा इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। प्रशासन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि सड़क सुरक्षा से जुड़े किसी भी निर्देश की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जिला प्रशासन की इस पहल की आम जनता और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने सराहना की है। लोगों का मानना है कि उपायुक्त के नेतृत्व में जिस गंभीरता और तत्परता से सड़क सुरक्षा के संबंध में कार्रवाई की जा रही है, उससे आने वाले समय में सड़क दुर्घटनाओं में महत्वपूर्ण कमी आएगी और लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। प्रशासन ने नागरिकों से भी अपील की है कि वे निर्धारित गति सीमा का पालन करें, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करें और मोड़ों तथा भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतें, क्योंकि सड़क सुरक्षा केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि हर नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी भी है। हजारीबाग प्रशासन द्वारा “सुरक्षित सड़क, सुरक्षित जीवन” के संकल्प के साथ चलाया जा रहा यह अभियान जिले में सड़क सुरक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देने में सहायक सिद्ध हो रहा है।4
- हजारीबाग जिले में अवैध शराब के निर्माण, बिक्री, संचय और परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे सघन छापेमारी अभियान के तहत, आज तड़के उत्पाद विभाग ने कोर्रा थाना क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई की है। उपायुक्त हेमन्त सती के निर्देशानुसार सहायक आयुक्त उत्पाद, हजारीबाग के निर्देशन में प्रातः 4:30 बजे सिंदूर चौक के समीप एक वाहन जांच अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप एक वाहन से भारी मात्रा में अवैध विदेशी शराब बरामद की गई। वाहन जांच के दौरान एक सफेद रंग की मारुति सुजुकी एर्टिगा को संदिग्ध मानते हुए रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक वाहन लेकर भागने लगा। उत्पाद विभाग की टीम ने पीछा किया, जिसके बाद चालक कटकमदाग थाना क्षेत्र के ग्राम सालगाँव स्थित हाई स्कूल के समीप वाहन खड़ा कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए मौके से फरार हो गया। वाहन की विधिवत तलाशी लेने पर उसमें कुल 55 कार्टन अवैध विदेशी शराब लदी हुई मिली, जिसमें लंदन ब्रेवरेज निर्मित George William ब्रांड की 180 एमएल क्षमता वाली कुल 475.2 लीटर शराब तथा Royal Green ब्रांड की 375 एमएल क्षमता की 6 बोतलें शामिल थीं। बरामद शराब और अवैध परिवहन में प्रयुक्त वाहन को नियमानुसार जब्त कर लिया गया है। मामले में संलिप्त व्यक्तियों की पहचान कर उनके विरुद्ध उत्पाद अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। इस छापेमारी दल में अवर निरीक्षक उत्पाद भुवनेश्वर नायक, उत्पाद आरक्षी अनूप कुमार सिंह तथा सशस्त्र गृह रक्षा वाहिनी के जवान शामिल थे। उत्पाद विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध गतिविधियों में शामिल किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।1
- सुप्रभात की शुभकामनाओं के साथ धार्मिक जयघोष किए गए, जिनमें 'हर हर महादेव', 'जय श्रीराम' और 'भक्त हनुमान की जय' शामिल थे। यह संदेश ईश्वर के प्रति भक्ति और सुबह के अभिनंदन को दर्शाता है।1
- हजारीबाग जिले के बरही थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात उस समय सनसनी फैल गई, जब अपराधियों ने करसो पुल के पास एक युवक को बेहद करीब से गोली मारकर मौत के घाट उतार दिया। मृतक की पहचान हजारीबाग शहर के ओकनी निवासी विक्की सोनी के रूप में हुई है, जिसे गर्दन में सटाकर गोली मारी गई थी।1