भारतीय इतिहास संकलन समिति की टीम ने गुरुवार को श्रीकोलायत क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित और दस्तावेजीकृत करने के उद्देश्य से एक व्यापक ऐतिहासिक सर्वेक्षण अभियान चलाया। इस दौरान बीकमपुर, बीठनोक, झझु और जकू गांवों में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए, जो इस क्षेत्र के समृद्ध अतीत और सांस्कृतिक विरासत के अहम सूत्र साबित हो सकते हैं। सर्वेक्षण में बीकमपुर में विक्रमादित्य काल से जुड़ा बताया जाने वाला एक प्राचीन किला विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां किले परिसर और उसके आसपास जैन धर्म से संबंधित प्राचीन मूर्तियों के अवशेष मिले, जो क्षेत्र में कभी जैन संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों के प्रभाव की ओर संकेत करते हैं। इसके अलावा, बीकमपुर स्थित राव साहब रघुवीर सिंह भाटी के किले में भी टीम को कई प्राचीन शिलालेख और ऐतिहासिक पत्थर मिले, जिन पर अंकित लेखन बीकानेर रियासत काल से भी पूर्व का प्रतीत होता है, जिससे क्षेत्र के इतिहास की नई परतें सामने आने की संभावना बढ़ गई है। झझु गांव में टीम को विष्णु भगवान से संबंधित कई प्राचीन तलाईयां, कुएं तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के समीप एक महत्वपूर्ण कीर्ति स्तंभ भी मिला, जिस पर बीकानेर रियासत काल से पुरानी जानकारी और संवत अंकित मिले हैं। वहीं, बीठनोक में भी किलेनुमा संरचनाएं और देवलियां चिन्हित की गईं। इतिहास प्रेमियों के अनुसार, झझु में मिला यह कीर्ति स्तंभ उस दौर के सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समिति के तहसील अध्यक्ष नेमीचंद पंचारिया के नेतृत्व में राजेंद्र पालीवाल, भंवरलाल उपाध्याय, दाऊदयाल पंचारिया और राहुल सेवग ने इस सर्वेक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने विभिन्न स्थलों पर पहुंचकर प्राचीन शिलालेखों, कीर्ति स्तंभों, मंदिर अवशेषों और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का अध्ययन कर महत्वपूर्ण जानकारी संकलित की। समिति के सदस्यों ने प्राप्त अभिलेखों के अवलोकन के बाद उनके संरक्षण और अध्ययन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कोलायत क्षेत्र का इतिहास अत्यंत समृद्ध और व्यापक है, जहाँ अनेक गांवों में आज भी ऐसी धरोहरें मौजूद हैं जो व्यवस्थित शोध और संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के सर्वेक्षण न केवल क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।
भारतीय इतिहास संकलन समिति की टीम ने गुरुवार को श्रीकोलायत क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को संरक्षित और दस्तावेजीकृत करने के उद्देश्य से एक व्यापक ऐतिहासिक सर्वेक्षण अभियान चलाया। इस दौरान बीकमपुर, बीठनोक, झझु और जकू गांवों में कई महत्वपूर्ण पुरातात्विक एवं ऐतिहासिक अवशेष प्राप्त हुए, जो इस क्षेत्र के समृद्ध अतीत और सांस्कृतिक विरासत के अहम सूत्र साबित हो सकते हैं। सर्वेक्षण में बीकमपुर में विक्रमादित्य काल से जुड़ा बताया जाने वाला एक प्राचीन किला विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां किले परिसर और उसके आसपास जैन धर्म से संबंधित प्राचीन मूर्तियों के अवशेष मिले, जो क्षेत्र में कभी जैन संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों के प्रभाव की ओर संकेत करते हैं। इसके अलावा, बीकमपुर स्थित राव साहब रघुवीर सिंह भाटी के किले में भी टीम को कई प्राचीन शिलालेख और ऐतिहासिक पत्थर मिले, जिन पर अंकित लेखन बीकानेर रियासत काल से भी पूर्व का प्रतीत होता है, जिससे क्षेत्र के इतिहास की नई परतें सामने आने की संभावना बढ़ गई है। झझु गांव में टीम को विष्णु भगवान से संबंधित कई प्राचीन तलाईयां, कुएं तथा प्राचीन विष्णु मंदिर के समीप एक महत्वपूर्ण कीर्ति स्तंभ भी मिला, जिस पर बीकानेर रियासत काल से पुरानी जानकारी और संवत अंकित मिले हैं। वहीं, बीठनोक में भी किलेनुमा संरचनाएं और देवलियां चिन्हित की गईं। इतिहास प्रेमियों के अनुसार, झझु में मिला यह कीर्ति स्तंभ उस दौर के सामाजिक, धार्मिक और प्रशासनिक इतिहास को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। समिति के तहसील अध्यक्ष नेमीचंद पंचारिया के नेतृत्व में राजेंद्र पालीवाल, भंवरलाल उपाध्याय, दाऊदयाल पंचारिया और राहुल सेवग ने इस सर्वेक्षण में सक्रिय भूमिका निभाई। टीम ने विभिन्न स्थलों पर पहुंचकर प्राचीन शिलालेखों, कीर्ति स्तंभों, मंदिर अवशेषों और अन्य ऐतिहासिक धरोहरों का अध्ययन कर महत्वपूर्ण जानकारी संकलित की। समिति के सदस्यों ने प्राप्त अभिलेखों के अवलोकन के बाद उनके संरक्षण और अध्ययन की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि कोलायत क्षेत्र का इतिहास अत्यंत समृद्ध और व्यापक है, जहाँ अनेक गांवों में आज भी ऐसी धरोहरें मौजूद हैं जो व्यवस्थित शोध और संरक्षण की प्रतीक्षा कर रही हैं। उनका मानना है कि इस प्रकार के सर्वेक्षण न केवल क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास को सामने लाने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे।
- नितिन गडकरी ने जानकारी दी है कि उन्होंने "कल रात को ही 100% एथेनॉल वाली फाइल पर साइन किया" है। उनके इस कदम को देश में वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक और बड़ा कदम बताया जा रहा है। ऐसी उम्मीद है कि 100% एथेनॉल को लेकर जल्द ही महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं।1
- यदि आप अस्थमा, नजला, जुकाम, बार-बार छींके आने, सांस लेने में दिक्कत या एलर्जी जैसी समस्याओं से पीड़ित हैं, तो आप दिए गए नंबर 7568628143 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- नागौर के नगर सेठ बंशीवाला मंदिर में सात दिनों से चल रहा ताल सप्ताह भक्तिपूर्ण माहौल में संपन्न हो गया। इस दौरान, प्रतिदिन 24 घंटे महिलाओं और पुरुषों द्वारा पूजा-अर्चना की गई, वहीं रात्रि में भजन गायकों ने नगर सेठ बंशीवाला के एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुति दी। इन भजनों पर स्त्री, पुरुष और बच्चे ऐसे नाचते-झूमते नजर आए, मानो साक्षात नगर सेठ बंशीवाला भक्तों के बीच मौजूद हों। बंशीवाला मंदिर के पुजारी महेश पारासर ने बताया कि ताल सप्ताह के अंतिम दिन बंशीवाला मंदिर प्रांगण में हवन की आहुति दी गई। शाम 5:30 बजे बंशीवाला मंदिर से नगर सेठ बंशीवाला की सवारी गाजे-बाजे के साथ शहर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण के लिए निकली। इस भ्रमण के दौरान शहर के ऐतिहासिक गिनाणी तालाब पर नगर सेठ बंशीवाला की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इसके अतिरिक्त, जगह-जगह बंशीवाला सेठ की सवारी पर पुष्प वर्षा कर आरती भी उतारी गई। इस अवसर पर, बाजार के व्यापारियों द्वारा श्रद्धालुओं को ठंडाई भी पिलाई गई। नगर सेठ बंशीवाला मंदिर में हवन और नगर सेठ बंशीवाला के इस भव्य नगर भ्रमण के साथ ही ताल सप्ताह का सफलतापूर्वक समापन हुआ।1
- रविवार दोपहर नोखा मंडी के श्रद्धालु तनोट माता के दर्शन कर अपने गांव वापस लौट रहे थे, तभी रामगढ़ रोड पर उनकी कार एक ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी। इस भीषण सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि चार अन्य श्रद्धालु गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायल श्रद्धालुओं को तत्काल जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है। पुलिस ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए घटना की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।1
- लेखक ने अपनी सोशल मीडिया फैमिली को राम राम कहकर गर्मजोशी से अभिवादन किया। उन्होंने अपने प्यारे से गांव मालसर का एक नज़ारा साझा किया, जो भानीपुरा तहसील का एक छोटा सा गांव है। लेखक ने गांव की झलक दिखाते हुए बताया कि उनके न्यूज़ चैनल पर रोज़ाना आस-पास के इलाकों की खबरें और रिपोर्ट मिलेंगी।1
- राजस्थान के बज्जू उपखंड के रणजीतपुरा थाना क्षेत्र में भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में एक संदिग्ध कबूतर मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियां तुरंत सतर्क हो गई हैं। यह कबूतर चक 13 आरडीवाई-ए में किसान रूपाराम लेघा के खेत में पाया गया था, जिसके पंखों पर नीले रंग की मोहर लगी हुई मिली। हालांकि, उस पर अंकित शब्द स्पष्ट रूप से पढ़े नहीं जा सके हैं। किसान रामचंद्र ने जब कबूतर के पंखों पर नीली स्याही की मोहर देखी तो उन्होंने तत्काल रणजीतपुरा पुलिस को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और कबूतर को अपने कब्जे में लेकर थाना परिसर ले गए। रणजीतपुरा थानाधिकारी सीआई लक्ष्मणसिंह राठौड़ ने बताया कि कबूतर को थाना परिसर में सुरक्षित रखा गया है। इस घटना की जानकारी जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बीएसएफ की जी ब्रांच और वन विभाग को भी दे दी गई है। वर्तमान में क्षेत्र में शांति बनी हुई है, लेकिन एहतियात के तौर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। गौरतलब है कि भारत-पाक सीमा से लगे क्षेत्रों में पहले भी कई बार संदिग्ध परिस्थितियों में कबूतर, गुब्बारे और अन्य वस्तुएं मिलने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिसके बाद सुरक्षा एजेंसियां ऐसे मामलों में हर पहलू की गहनता से जांच करती हैं। फिलहाल, संबंधित विभाग कबूतर पर लगी मोहर और उसके स्रोत के बारे में जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं।1
- यदि किसी व्यक्ति को अस्थमा, नजला, जुकाम, छींकें आने, साँस लेने में दिक्कत या एलर्जी जैसी समस्याएँ हैं, तो वे 7568628143 पर संपर्क कर सकते हैं।1
- बीकानेर संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है, जबकि इस क्षेत्र से आधा दर्जन विधायक चुने गए हैं और केंद्र सरकार में भी बीकानेर का प्रतिनिधित्व करने वाले एक केंद्रीय मंत्री मौजूद हैं। अस्पताल में दवाइयों की कमी, भवन से संबंधित समस्याएं और अन्य व्यवस्थाओं की बदहाली लगातार सामने आ रही है। ट्रॉमा सेंटर में बारिश का पानी टपकने जैसी घटनाओं ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। आमजन इस बात पर सवाल उठा रहे हैं कि जनप्रतिनिधियों की निगरानी के बावजूद स्वास्थ्य सेवाओं की हालत में सुधार क्यों नहीं हो रहा है। स्थिति यह है कि इतने प्रभावशाली जनप्रतिनिधियों के होने के बावजूद, पीबीएम अस्पताल बदहाल बना हुआ है।1