पन्ना जिले में पदस्थ एक पुलिस आरक्षक सोनू खटीक ने टीकमगढ़ जिले के भड़रा जंगल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा है, जहाँ मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम किया जाएगा। मृतक आरक्षक सोनू खटीक टीकमगढ़ जिले के जतारा नगर का निवासी था और वर्तमान में पन्ना जिले के धर्मपुरा थाने में पदस्थ था। परिजनों के अनुसार, वह पन्ना से टीकमगढ़ आया था और जतारा की ओर जा रहा था, तभी टीकमगढ़-जतारा मार्ग पर स्थित भड़रा के जंगल में एक पेड़ पर उसका शव लटका मिला। पुलिस को सूचना मिलने पर तत्काल सर्चिंग अभियान चलाया गया, जिसके बाद शव बरामद हुआ। मौके पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए क्षेत्र को सुरक्षित किया और एफएसएल टीम को जांच के लिए बुलाया। टीकमगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने बताया कि मजना पुलिस चौकी में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एफएसएल अधिकारी प्रदीप यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बताया कि कोई संदिग्ध वस्तु या संघर्ष के निशान नहीं मिले। मृतक की कार सड़क किनारे खड़ी मिली थी, जबकि शव जंगल के भीतर एक पेड़ से लटका हुआ था। प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। एफएसएल अधिकारी के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक कारणों से जुड़ा लग रहा है, हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और मृतक के परिजनों व परिचितों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सके। फिलहाल, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य तथ्यों का इंतजार कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
पन्ना जिले में पदस्थ एक पुलिस आरक्षक सोनू खटीक ने टीकमगढ़ जिले के भड़रा जंगल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और एफएसएल टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला चिकित्सालय भेजा है, जहाँ मंगलवार सुबह पोस्टमार्टम किया जाएगा। मृतक आरक्षक सोनू खटीक टीकमगढ़ जिले के जतारा नगर का निवासी था और वर्तमान में पन्ना जिले के धर्मपुरा थाने में पदस्थ था। परिजनों के अनुसार, वह पन्ना से टीकमगढ़ आया था और जतारा की ओर जा रहा था, तभी टीकमगढ़-जतारा मार्ग पर स्थित भड़रा के जंगल में एक पेड़ पर उसका शव लटका मिला। पुलिस को सूचना मिलने पर तत्काल सर्चिंग अभियान चलाया गया, जिसके बाद शव बरामद हुआ। मौके पर पुलिस ने आवश्यक कार्रवाई करते हुए क्षेत्र को सुरक्षित किया और एफएसएल टीम को जांच के लिए बुलाया। टीकमगढ़ के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विक्रम सिंह कुशवाहा ने बताया कि मजना पुलिस चौकी में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। एफएसएल अधिकारी प्रदीप यादव ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और बताया कि कोई संदिग्ध वस्तु या संघर्ष के निशान नहीं मिले। मृतक की कार सड़क किनारे खड़ी मिली थी, जबकि शव जंगल के भीतर एक पेड़ से लटका हुआ था। प्रारंभिक जांच में यह मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है। एफएसएल अधिकारी के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला पारिवारिक कारणों से जुड़ा लग रहा है, हालांकि अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है और मृतक के परिजनों व परिचितों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं ताकि घटना के वास्तविक कारणों का पता चल सके। फिलहाल, पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के अन्य तथ्यों का इंतजार कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
- जतारा की ग्राम पंचायत बैरवार में सरपंच सुरेंद्र दांगी ने शिक्षा को बढ़ावा देने और बच्चों की शत-प्रतिशत स्कूल उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए एक सराहनीय पहल की है। 'स्कूल चले हम' अभियान के तहत उन्होंने पूरे गांव में मुनादी करवाई, जिसके माध्यम से अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित और समय पर विद्यालय भेजने का आग्रह किया गया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य गांव में शिक्षा का बेहतर माहौल तैयार करना और प्रत्येक बच्चे को विद्यालय से जोड़ना है। सरपंच सुरेंद्र दांगी ने जोर देकर कहा कि किसी भी गांव का सच्चा विकास तभी संभव है जब वहां के बच्चे शिक्षित हों, क्योंकि शिक्षा ही उनके उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत नींव है। उन्होंने सभी अभिभावकों से बच्चों की पढ़ाई को प्राथमिकता देने, उन्हें प्रतिदिन समय पर विद्यालय भेजने और उनकी शिक्षा में सहयोग करने की अपील की। मुनादी के जरिए ग्रामीणों को शिक्षा के महत्व से अवगत कराया गया और बच्चों के स्कूल छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने का संदेश दिया गया। सरपंच की इस अनूठी पहल की ग्रामीणों ने खुले दिल से सराहना की है। लोगों का मानना है कि अगर जनप्रतिनिधि इसी तरह शिक्षा के प्रति जागरूकता फैलाते रहें, तो गांव में शिक्षा का स्तर निश्चित रूप से बेहतर होगा और बच्चों का भविष्य उज्ज्वल बनेगा।1
- टीकमगढ़ के शासकीय प्राथमिक विद्यालय आनंदपुरा (बल्देवगढ़) में पदस्थ शिक्षक घनश्याम दास वर्मा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई शिक्षक के स्कूल देरी से आने और ग्रामीणों के साथ अभद्र व्यवहार करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद की गई। कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तुरंत संज्ञान लिया और निलंबन के आदेश जारी किए। इस कदम से जिला प्रशासन ने यह कड़ा संदेश दिया है कि शासकीय कार्यों में लापरवाही और आमजन से बदसलूकी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो और कलेक्टर के त्वरित एक्शन की क्षेत्र में जमकर सराहना हो रही है।1
- टीकमगढ़ जिले के पलेरा थाना क्षेत्र में प्रशासन ने अतिक्रमण के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इस अभियान के दौरान, प्रशासन ने लगभग 175 बीघा जमीन को अतिक्रमण के रूप में चिन्हित किया है। यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि प्रशासन इस मुद्दे पर सख्ती से निपट रहा है।1
- टीकमगढ़ जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन तथा पर्यटन विकास को गति देने के उद्देश्य से आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर श्री विवेक श्रोत्रिय की अध्यक्षता में जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद (DATCC) की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में जिले की प्राचीन धरोहरों के जीर्णोद्धार एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के विस्तार से संबंधित कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा हुई और अहम निर्णय लिए गए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिले के 75 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक स्मारकों और विरासत स्थलों पर 'हेरिटेज टीकमगढ़' लोगोयुक्त विशेष विवरण पट्टिकाएं स्थापित की जाएंगी, जिन पर भवन के निर्माण वर्ष और ऐतिहासिक महत्व का संक्षिप्त विवरण अंकित होगा। इसके अतिरिक्त, नजरबाग स्थित ऐतिहासिक प्राचीन स्कूल भवन को संरक्षित करते हुए उसे 'गीता भवन एवं संस्कृति केंद्र' के रूप में विकसित किया जाएगा। इस केंद्र में एक जिला पुस्तकालय, संग्रहालय, दुर्लभ पुस्तकों का संकलन तथा नृत्य, नाटक, साहित्यिक गोष्ठियों एवं सांस्कृतिक आयोजनों के लिए आधुनिक सुविधाओं से युक्त बहुउद्देशीय सभागार बनाया जाएगा। बैठक में यह भी तय किया गया कि जिले के विभिन्न क्षेत्रों में असुरक्षित अवस्था में रखी प्राचीन मूर्तियों का संरक्षण कर उन्हें राजमहल भवन में सुरक्षित स्थापित किया जाएगा। स्थानीय बुंदेली कलाकारों, साहित्यकारों और रंगकर्मियों के लिए अभ्यास, संवाद एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन हेतु स्वतंत्र भवन उपलब्ध कराने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश भी दिए गए। जिले की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल माध्यमों से व्यापक पहचान दिलाने के लिए आधिकारिक वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म विकसित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) एवं राज्य शासन की राशि से संचालित विभिन्न विकास एवं संरक्षण कार्यों की समीक्षा भी की गई। लोक निर्माण विभाग को नजरबाग मंदिर, हनुमान चालीसा स्थल और जानकीबाग मंदिर में प्रकाश व्यवस्था के कार्यों तथा मड़खेरा स्थित प्राचीन सूर्य मंदिर परिसर में पर्यटकों की सुविधा के लिए स्मृति-विक्रय केंद्र एवं रिसेप्शन सेंटर के निर्माण कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। ज्ञान भारतम मिशन की समीक्षा के दौरान बताया गया कि 30 जून 2026 तक जिले में 1141 आवेदकों का पंजीयन किया जा चुका है और अन्य लोगों से भी संपर्क कर निरंतर कार्य किया जा रहा है। कुंडेश्वर मंदिर के पीछे स्थित खेरई वन को इको पर्यटन क्षेत्र में विकसित करने पर भी चर्चा हुई, जिस पर डीएफओ श्री राजाराम परमार ने बताया कि वन विभाग द्वारा इस क्षेत्र में विकास कार्य करने हेतु अनुमति का प्रस्ताव भेजा गया है। बैठक में जिला वनमण्डलाधिकारी श्री राजाराम परमार, अपर कलेक्टर श्री शिवप्रसाद मंडराह, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती अंजली शर्मा एवं श्री निशांत भूरिया, सीएमओ टीकमगढ़ श्री ओमपाल सिंह भदौरिया सहित अन्य संबंधित नागरिक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- टिकमगढ़ जिले की ग्राम पंचायत बेरवार, जो शिक्षा और स्वच्छता के क्षेत्र में अपनी पहचान रखती है और जिले की अग्रणी पंचायतों में गिनी जाती है, इन दिनों जलभराव की गंभीर समस्या से जूझ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ असामाजिक तत्वों की लापरवाही और हरकतों के कारण गांव की अच्छी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। बेरवार-दिगौड़ा मार्ग पर हुई बारिश के चलते सड़क पर घुटनों तक पानी भर गया है, जिससे आवागमन मुश्किल हो गया है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी निकासी का रास्ता अवरुद्ध कर दिए जाने के कारण यह स्थिति कई दिनों से बनी हुई है। इसका परिणाम यह है कि राहगीरों, वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर जमा यह पानी किसी स्विमिंग पूल जैसा दिख रहा है, जिससे दुर्घटना की आशंका भी बनी हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। साथ ही, उन्होंने ऐसी स्थिति पैदा करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की भी अपील की है, ताकि ग्राम पंचायत बेरवार की अच्छी छवि प्रभावित न हो और लोगों को इस मुसीबत से राहत मिल सके।4
- टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ विकासखंड अंतर्गत खरगापुर थाना की देरी चौकी क्षेत्र के ग्राम कडराई में जमीनी विवाद को लेकर पाल समाज के दो पक्षों के बीच एक बड़ा विवाद हो गया। आरोप है कि इस विवाद के दौरान लाठी-डंडों एवं कुल्हाड़ी का इस्तेमाल करते हुए मारपीट की गई, जिसमें कुछ लोग घायल भी हुए। घटना के बाद पीड़ित पक्ष ने प्रशासन एवं पुलिस से निष्पक्ष जांच करने, दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने और उन्हें न्याय दिलाने की मांग की है। मामले में फिलहाल पुलिस द्वारा शिकायत के आधार पर जांच की जा रही है, और जांच के बाद तथ्य सामने आने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई करने की बात कही गई है।1
- छतरपुर जिले के राजनगर तहसील अंतर्गत ग्राम डुमरा में बन रहे रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण में हो रही देरी और कथित लापरवाही को लेकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। इस निर्माण कार्य के चलते लवकुशनगर-छतरपुर मुख्य मार्ग लगभग बंद हो गया है, जिससे क्षेत्र के कई गांवों के लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। डुमरा, बरा, डिगोनी, उमरिया, सुरा और बम्हौरी जैसे गांवों के हजारों निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, जिनमें छात्र, मरीज और किसान सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। अपनी समस्याओं को लेकर ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग तुरंत खोला जाए और ओवरब्रिज के निर्माण कार्य में तेजी लाई जाए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।1
- टीकमगढ़ जिले के प्रसिद्ध आस्था केंद्र सिद्ध बाबा हवेली मंदिर के जीर्णोद्धार को लेकर एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। लंबे समय से प्रस्तावित इस कार्य के लिए ₹23.60 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से ₹15.58 लाख की पहली किस्त भी जारी कर दी गई है। इससे उम्मीद है कि मंदिर का निर्माण कार्य जल्द ही शुरू हो जाएगा। प्रशासनिक स्तर पर इस जीर्णोद्धार कार्य को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक स्वीकृतियां प्रदान की गई हैं। राशि जारी होने के बाद लोक निर्माण विभाग (PWD) को निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी गई है, और विभाग ने अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं। बताया गया है कि जिला प्रशासन के प्रयासों से यह परियोजना तेजी से आगे बढ़ी है। इस जीर्णोद्धार से न केवल श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि यह जिले के धार्मिक और पर्यटन विकास को भी नई गति प्रदान करेगा। स्थानीय नागरिकों और व्यापारियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए विश्वास जताया है कि मंदिर का नया स्वरूप क्षेत्र की पहचान को और मजबूत करेगा, साथ ही धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर रोजगार और व्यापार के अवसरों में भी वृद्धि होगी।1