नालंदा से फिर उदय होगा ज्ञान का सूर्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजगीर/नालंदा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार (31 मार्च, 2026) को बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कीं और विश्वविद्यालय के नए परिसरों का अवलोकन किया। मुख्य बातें: ज्ञान का केंद्र: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक विश्व के लिए ज्ञान का आलोक रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संस्कृति और सहअस्तित्व: मुर्मू ने जोर देकर कहा कि नालंदा केवल एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता के लिए संवाद, नैतिकता और सहअस्तित्व का प्रतीक है। छात्रों का उत्साह: दीक्षांत समारोह में वर्ष 2017 से 2025 के बीच स्नातक हुए भारतीय और विदेशी छात्रों को उपाधियां दी गईं। राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग समाज के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए करें। भव्य स्वागत: राजगीर पहुंचने पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच राष्ट्रपति सुबह करीब 10:50 बजे परिसर पहुंचीं और शाम 4:20 बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुईं। राष्ट्रपति का संदेश: > "जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, नालंदा जैसे संस्थानों को अपनी गौरवशाली विरासत को आधुनिक संदर्भ में फिर से स्थापित करना होगा।"
नालंदा से फिर उदय होगा ज्ञान का सूर्य: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राजगीर/नालंदा: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार (31 मार्च, 2026) को बिहार के ऐतिहासिक शहर राजगीर में अंतरराष्ट्रीय नालंदा विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने देश-विदेश से आए छात्र-छात्राओं को डिग्रियां प्रदान कीं और विश्वविद्यालय के नए परिसरों का अवलोकन किया। मुख्य बातें: ज्ञान का केंद्र: राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय लगभग आठ शताब्दियों तक विश्व के लिए ज्ञान का आलोक
रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि आधुनिक नालंदा विश्वविद्यालय एक बार फिर भारत को विश्व गुरु बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। संस्कृति और सहअस्तित्व: मुर्मू ने जोर देकर कहा कि नालंदा केवल एक शिक्षा संस्थान नहीं, बल्कि मानवता के लिए संवाद, नैतिकता और सहअस्तित्व का प्रतीक है। छात्रों का उत्साह: दीक्षांत समारोह में वर्ष 2017 से 2025 के बीच स्नातक हुए भारतीय और विदेशी छात्रों को उपाधियां दी गईं। राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी शिक्षा का उपयोग
समाज के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण के लिए करें। भव्य स्वागत: राजगीर पहुंचने पर राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच राष्ट्रपति सुबह करीब 10:50 बजे परिसर पहुंचीं और शाम 4:20 बजे तक विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुईं। राष्ट्रपति का संदेश: > "जैसे-जैसे भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की ओर बढ़ रहा है, नालंदा जैसे संस्थानों को अपनी गौरवशाली विरासत को आधुनिक संदर्भ में फिर से स्थापित करना होगा।"
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- Post by Garibnath Sahani1