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सरकार को तीन काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर करने वाले भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। आज देश का युवा अपने भविष्य और न्याय के लिए अडिग खड़ा है। किसान और छात्र एक साथ मैदान में आ चुके हैं, और जब किसान और छात्र एक साथ आते हैं, तो सत्ता को झुकना ही पड़ता है। इस आंदोलन की मंशा पूरी तरह साफ है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। 'साथ लड़ेंगे, साथ जीतेंगे' के संकल्प के साथ इस लड़ाई को जारी रखने का आह्वान किया गया है।
हिंदी मंच ख़बर
सरकार को तीन काले कानून वापस लेने के लिए मजबूर करने वाले भारतीय किसान यूनियन के राकेश टिकैत जंतर-मंतर पहुंच गए हैं। आज देश का युवा अपने भविष्य और न्याय के लिए अडिग खड़ा है। किसान और छात्र एक साथ मैदान में आ चुके हैं, और जब किसान और छात्र एक साथ आते हैं, तो सत्ता को झुकना ही पड़ता है। इस आंदोलन की मंशा पूरी तरह साफ है कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं मिल जाता, तब तक यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। 'साथ लड़ेंगे, साथ जीतेंगे' के संकल्प के साथ इस लड़ाई को जारी रखने का आह्वान किया गया है।
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- नीट आंदोलन को सफल बनाने के लिए देश के कोने-कोने से लोग एकजुट हुए हैं। इस दौरान प्रदर्शन में शामिल लोगों ने देशभक्ति गीत गाकर वहां मौजूद सभी लोगों के अंदर ऊर्जा और उत्साह का संचार किया।1
- दिल्ली की रेखा सिंह ने अपने सभी दोस्तों को गुड मॉर्निंग का संदेश भेजा है। उन्होंने अपने दोस्तों से उनका हाल-चाल पूछते हुए सभी का अभिवादन किया है।4
- CJP के प्रदर्शन के दौरान जमकर हुए बवाल के बाद आप ने एक हेल्पलाइन नंबर जारी किया है। इससे पहले कल तमाम दलों ने पीएम मोदी के घर के बाहर धरना दिया था। इस पूरे घटनाक्रम के बीच दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी लोगों से अपील की है।1
- प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ पहुंचीं और विरोध प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन में राहुल गांधी भी उपस्थित रहे।1
- लोगों को नशा छोड़कर जीवन बचाने की सलाह दी गई है। जारी किए गए संदेश में कहा गया है कि आप घर बैठे ही नशें से छुटकारा पा सकते हैं। इसके लिए संपर्क नंबर 7568628143 भी दिया गया है।1
- आंदोलन के दौरान दिल्ली पुलिस के रवैये और क्रूरता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान की गई लाठीचार्ज की कार्रवाई पर तीखा आक्रोश जताया जा रहा है और यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में पुलिस का ऐसा क्रूर रुख और लाठीचार्ज किसी भी तरह से शोभा देता है।1
- दिल्ली के जंतर मंतर पर शिक्षक को पीटे जाने के मामले में एक महिला ने रोते-रोते अपनी आप बीती बयां की है। इस दौरान महिला का दर्द छलक पड़ा और उसने सीधे पुलिस प्रशासन तथा व्यवस्था की कार्यशैली पर तीखे सवाल खड़े किए। महिला ने रोते हुए आक्रोश व्यक्त किया कि क्या ये पुलिस वाले भी किसी की औलाद हैं? उसने कहा कि इन पुलिस वालों की भी अपनी औलाद होगी, जो आगे चलकर इसी सिस्टम से त्रस्त होगी। जंतर मंतर पर घटी इस घटना के बाद महिला के भीतर का दर्द और व्यवस्था के प्रति उसका गुस्सा साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।1