logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

अन्नदाता या केवल 'वोटदाता'? आज़ाद देश के मजबूर किसान की कहानी आज का दौर तकनीक और प्रगति का कहा जाता है, लेकिन जब हम गांव की पगडंडियों और मंडी के गेट पर खड़े किसान को देखते हैं, तो सवाल उठता है— क्या हम वाकई आज़ाद हुए हैं? 1. नियमों का बोझ: सिर्फ़ आम आदमी की पीठ पर? हवा साफ़ होनी चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन सारा दोष किसान की पराली पर ही क्यों? साल भर फैक्ट्रियों की चिमनियों से जो ज़हरीला धुआं निकलता है, जो नदियों में केमिकल बहाया जाता है, उन पर कानून के हाथ ढीले क्यों पड़ जाते हैं? किसान अगर मजबूरी में पराली जला दे तो उसे 'अपराधी' की नज़र से देखा जाता है, लेकिन बड़े उद्योगों के प्रदूषण पर सन्नाटा क्यों है? क्या सारे कानून और जुर्माना सिर्फ़ उस हाथ पर लगेंगे जो हल चलाता है? 2. डिजिटल इंडिया या डिजिटल बाधा? आज किसान अपना गेहूं लेकर सरकारी केंद्र पर जाने को तैयार है, लेकिन वहां 'सैटेलाइट स्लॉट' बुक नहीं हो रहे। फसल तैयार है, पसीना बहाकर कमाई गई उपज मंडियों में पड़ी है, लेकिन एक सॉफ्टवेयर किसान का भाग्य तय कर रहा है। पहले ही लागत बढ़ रही है और दाम कम मिल रहे हैं, ऊपर से ये कड़े नियम किसान की कमर तोड़ रहे हैं। 3. चुनाव का 'अन्नदाता', चुनाव बाद का 'दुश्मन' यह हमारे देश की सबसे कड़वी हकीकत है। जब चुनाव आते हैं, तो राजनेताओं के लिए किसान 'माय-बाप' और 'अन्नदाता' बन जाता है। बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, कर्ज माफ़ी और सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए जाते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, वही किसान सरकारी फाइलों और सर्वर एरर के बीच अपनी पहचान ढूंढता रह जाता है। वादे हवा हो जाते हैं और नीतियां ऐसी बनती हैं जो ज़मीन से कोसों दूर होती हैं। 4. बच्चों का भविष्य और हमारी उम्मीदें एक आम आदमी और किसान आज डरा हुआ है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ी खेती से मुंह मोड़ लेगी। हमारे बच्चों का क्या भविष्य होगा? क्या वे भी इसी व्यवस्था की चक्की में पिसते रहेंगे? निष्कर्ष: बदलाव तभी आएगा जब नियम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि निष्पक्षता से लागू होंगे। जब तकनीक किसान की मदद के लिए होगी, उसे परेशान करने के लिए नहीं। किसान आज़ाद तब महसूस करेगा जब उसे अपनी फसल का सही दाम और सम्मान मिलेगा, न कि केवल 'वोट बैंक' का एक आंकड़ा बनकर। हमें अपनी आवाज़ बुलंद रखनी होगी, क्योंकि सोया हुआ समाज कभी अपना हक नहीं पा सकता। "जब तक किसान के पैरों की बेड़ियाँ नहीं कटेंगी, देश की तरक्की का हर दावा अधूरा है।" मुझसे जुड़ें (Contact for more updates): Instagram: @mr.karanveerchanal WhatsApp: +91 62652 42530

2 hrs ago
user_Karan Chanal
Karan Chanal
जावद, नीमच, मध्य प्रदेश•
2 hrs ago
9b17f392-bbf4-4246-b0d4-3e1d822e6d05

अन्नदाता या केवल 'वोटदाता'? आज़ाद देश के मजबूर किसान की कहानी आज का दौर तकनीक और प्रगति का कहा जाता है, लेकिन जब हम गांव की पगडंडियों और मंडी के गेट पर खड़े किसान को देखते हैं, तो सवाल उठता है— क्या हम वाकई आज़ाद हुए हैं? 1. नियमों का बोझ: सिर्फ़ आम आदमी की पीठ पर? हवा साफ़ होनी चाहिए, इसमें कोई दो राय नहीं है। लेकिन सारा दोष किसान की पराली पर ही क्यों? साल भर फैक्ट्रियों की चिमनियों से जो ज़हरीला धुआं निकलता है, जो नदियों में केमिकल बहाया जाता है, उन पर कानून के हाथ ढीले क्यों पड़ जाते हैं? किसान अगर मजबूरी में पराली जला दे तो उसे 'अपराधी' की नज़र से देखा जाता है, लेकिन बड़े उद्योगों के प्रदूषण पर सन्नाटा क्यों है? क्या सारे कानून और जुर्माना सिर्फ़ उस हाथ पर लगेंगे जो हल चलाता है? 2. डिजिटल इंडिया या डिजिटल बाधा? आज किसान अपना गेहूं लेकर सरकारी केंद्र पर जाने को तैयार है, लेकिन वहां 'सैटेलाइट स्लॉट' बुक नहीं हो रहे। फसल तैयार है, पसीना बहाकर कमाई गई उपज मंडियों में पड़ी है, लेकिन एक सॉफ्टवेयर किसान का भाग्य तय कर रहा है। पहले ही लागत बढ़ रही है और दाम कम मिल रहे हैं, ऊपर से ये कड़े नियम किसान की कमर तोड़ रहे हैं। 3. चुनाव का 'अन्नदाता', चुनाव बाद का 'दुश्मन' यह हमारे देश की सबसे कड़वी हकीकत है। जब चुनाव आते हैं, तो राजनेताओं के लिए किसान 'माय-बाप' और 'अन्नदाता' बन जाता है। बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, कर्ज माफ़ी और सुनहरे भविष्य के सपने दिखाए जाते हैं। लेकिन जैसे ही चुनाव खत्म होते हैं, वही किसान सरकारी फाइलों और सर्वर एरर के बीच अपनी पहचान ढूंढता रह जाता है। वादे हवा हो जाते हैं और नीतियां ऐसी बनती हैं जो ज़मीन से कोसों दूर होती हैं। 4. बच्चों का भविष्य और हमारी उम्मीदें एक आम आदमी और किसान आज डरा हुआ है। अगर यही हाल रहा, तो आने वाली पीढ़ी खेती से मुंह मोड़ लेगी। हमारे बच्चों का क्या भविष्य होगा? क्या वे भी इसी व्यवस्था की चक्की में पिसते रहेंगे? निष्कर्ष: बदलाव तभी आएगा जब नियम केवल कागजों पर नहीं, बल्कि निष्पक्षता से लागू होंगे। जब तकनीक किसान की मदद के लिए होगी, उसे परेशान करने के लिए नहीं। किसान आज़ाद तब महसूस करेगा जब उसे अपनी फसल का सही दाम और सम्मान मिलेगा, न कि केवल 'वोट बैंक' का एक आंकड़ा बनकर। हमें अपनी आवाज़ बुलंद रखनी होगी, क्योंकि सोया हुआ समाज कभी अपना हक नहीं पा सकता। "जब तक किसान के पैरों की बेड़ियाँ नहीं कटेंगी, देश की तरक्की का हर दावा अधूरा है।" मुझसे जुड़ें (Contact for more updates): Instagram: @mr.karanveerchanal WhatsApp: +91 62652 42530

More news from राजस्थान and nearby areas
  • अजमेर/पुष्कर। राजस्थान के अजमेर जिले स्थित पुष्कर घाटी में रविवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों से भरे परिवार को मातम में बदल दिया। यात्रियों से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 31 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में कुल 33 यात्री सवार थे, जो पीसांगन क्षेत्र के भडसुरी गांव में पारिवारिक कार्यक्रम में मायरा लेकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि पुष्कर घाटी में सांझी छत के पास बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। बस पहले सड़क किनारे बनी रेलिंग से टकराई और फिर पलटियां खाते हुए गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में विमला देवी और पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से खाई से निकालकर पुष्कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर घायलों को अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया। कपड़ों की रस्सी बनाकर बचाई जानें हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे। खाई गहरी होने के कारण लोगों ने अपने कपड़ों की रस्सी बनाकर घायलों को बाहर निकाला। कई लोग घायल यात्रियों को कंधों पर उठाकर सड़क तक लाए। स्थानीय लोगों की तत्परता से कई जिंदगियां बच सकीं। झाड़ियों ने रोकी बस की रफ्तार प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस स्थान पर बस गिरी, वहां नीचे पेड़ और कंटीली झाड़ियां थीं। बस सीधे नीचे गिरने के बजाय झाड़ियों में अटकती हुई पलटती गई, जिससे उसकी रफ्तार कम हो गई। यही वजह रही कि बड़ा हादसा और अधिक भयावह होने से बच गया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पुष्कर घाटी जैसे संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। तीखे मोड़, पुराने वाहन, कमजोर सुरक्षा रेलिंग और तकनीकी जांच की कमी जैसी समस्याएं लगातार हादसों को न्योता दे रही हैं। पुष्कर घाटी का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और कमजोर व्यवस्था का गंभीर संकेत है। दो महिलाओं की मौत ने परिवारों की खुशियां छीन लीं, जबकि स्थानीय लोगों की बहादुरी ने मानवता की मिसाल कायम की। अब देखना यह है कि प्रशासन इससे सबक लेता है या नहीं।
    1
    अजमेर/पुष्कर। राजस्थान के अजमेर जिले स्थित पुष्कर घाटी में रविवार दोपहर एक भीषण सड़क हादसे ने खुशियों से भरे परिवार को मातम में बदल दिया। यात्रियों से भरी एक बस अचानक अनियंत्रित होकर करीब 200 फीट गहरी खाई में जा गिरी। हादसे में दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 31 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार बस में कुल 33 यात्री सवार थे, जो पीसांगन क्षेत्र के भडसुरी गांव में पारिवारिक कार्यक्रम में मायरा लेकर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि पुष्कर घाटी में सांझी छत के पास बस का स्टेयरिंग अचानक फेल हो गया, जिससे चालक बस पर नियंत्रण नहीं रख सका। बस पहले सड़क किनारे बनी रेलिंग से टकराई और फिर पलटियां खाते हुए गहरी खाई में जा गिरी।
हादसे में विमला देवी और पूजा की मौके पर ही मौत हो गई। अन्य घायलों को स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से खाई से निकालकर पुष्कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से गंभीर घायलों को अजमेर के जेएलएन अस्पताल रेफर किया गया।
कपड़ों की रस्सी बनाकर बचाई जानें
हादसे के बाद आसपास के ग्रामीण और राहगीर सबसे पहले मौके पर पहुंचे। खाई गहरी होने के कारण लोगों ने अपने कपड़ों की रस्सी बनाकर घायलों को बाहर निकाला। कई लोग घायल यात्रियों को कंधों पर उठाकर सड़क तक लाए। स्थानीय लोगों की तत्परता से कई जिंदगियां बच सकीं।
झाड़ियों ने रोकी बस की रफ्तार
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जिस स्थान पर बस गिरी, वहां नीचे पेड़ और कंटीली झाड़ियां थीं। बस सीधे नीचे गिरने के बजाय झाड़ियों में अटकती हुई पलटती गई, जिससे उसकी रफ्तार कम हो गई। यही वजह रही कि बड़ा हादसा और अधिक भयावह होने से बच गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर पुष्कर घाटी जैसे संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है। तीखे मोड़, पुराने वाहन, कमजोर सुरक्षा रेलिंग और तकनीकी जांच की कमी जैसी समस्याएं लगातार हादसों को न्योता दे रही हैं।
पुष्कर घाटी का यह हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि लापरवाही और कमजोर व्यवस्था का गंभीर संकेत है। दो महिलाओं की मौत ने परिवारों की खुशियां छीन लीं, जबकि स्थानीय लोगों की बहादुरी ने मानवता की मिसाल कायम की। अब देखना यह है कि प्रशासन इससे सबक लेता है या नहीं।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    17 hrs ago
  • Post by DS7NEWS NETWORK
    1
    Post by DS7NEWS NETWORK
    user_DS7NEWS NETWORK
    DS7NEWS NETWORK
    News Anchor चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    21 hrs ago
  • “आज एक मिस कॉल… कल हजारों की सेवा 🐄🔥 गौ सेवा आह्वान अभियान से अभी जुड़ें _माधव लाल बैरवा, कपासन_ संरक्षक - श्री राधे कृष्ण बजरंग गौशाला सेवा संस्थान पंजी. मातृकुण्डियां
    1
    “आज एक मिस कॉल…
कल हजारों की सेवा 🐄🔥
गौ सेवा आह्वान अभियान से अभी जुड़ें _माधव लाल बैरवा, कपासन_
संरक्षक - श्री राधे कृष्ण बजरंग गौशाला सेवा संस्थान पंजी. मातृकुण्डियां
    user_Madhav lal Bairwa
    Madhav lal Bairwa
    Artist कपासन, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • Post by Shamshuddin Sheikh
    1
    Post by Shamshuddin Sheikh
    user_Shamshuddin Sheikh
    Shamshuddin Sheikh
    प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • kishan
    1
    kishan
    user_Kishan Garg
    Kishan Garg
    भींडर, उदयपुर, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • Post by Parmeshvar redash
    1
    Post by Parmeshvar redash
    user_Parmeshvar redash
    Parmeshvar redash
    Photographer Pratapgarh, Rajasthan•
    7 hrs ago
  • Post by Alert Nation News
    1
    Post by Alert Nation News
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • Post by Parmeshvar redash
    1
    Post by Parmeshvar redash
    user_Parmeshvar redash
    Parmeshvar redash
    Photographer Pratapgarh, Rajasthan•
    7 hrs ago
  • ब्रेकिंग न्यूज जिले में भीषण गर्मी के चलते आग लगने का सिलसिला जारी है। वही शाम होते-होते सीतामऊ के नवीन भवन हॉस्पिटल के पास भीषण आग लग गई जिसमें सुवासरा और आसपास के क्षेत्र से फायर ब्रिगेड और पानी के प्राइवेट ट्रेन करो को मौके पर बुलाकर आग बुझी गई वहीं पुलिस के द्वारा इस मामले की जांच चल रही है। जब सीतामऊ का नया हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया है। लेकिन अभी तक इसका उद्घाटन नहीं हो पा रहा है। आखिर क्या कारण है। जनता पूछ रही है। जिले के जनप्रतिनिधियों से आज मन्दसौर जिले के सीतामऊ नवीन सिविल अस्पताल भवन के पास शाम होते होते अज्ञात कारणों के चलते भीषण आग लग गई खबर की सूचना मिलते ही आसपास के नागरिक मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया और पुलिस के द्वारा पानी के प्राइवेट टैंकर और सीतामऊ सुवासरा की फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर बुलाकर आग बुझाई गई यह आंग कैसे लगी है। इस मामले की जांच चल रही है।
    2
    ब्रेकिंग न्यूज
जिले में भीषण गर्मी के चलते आग लगने का सिलसिला जारी है। वही शाम होते-होते सीतामऊ के नवीन भवन हॉस्पिटल के पास भीषण आग लग गई जिसमें सुवासरा और आसपास के क्षेत्र से फायर ब्रिगेड और पानी के प्राइवेट ट्रेन करो को मौके पर बुलाकर आग बुझी गई वहीं पुलिस के द्वारा इस मामले की जांच चल रही है।
जब सीतामऊ का नया हॉस्पिटल बनकर तैयार हो गया है। लेकिन अभी तक इसका उद्घाटन नहीं हो पा रहा है। आखिर क्या कारण है। जनता पूछ रही है। जिले के जनप्रतिनिधियों से
आज मन्दसौर जिले के सीतामऊ नवीन सिविल अस्पताल भवन के पास शाम होते होते अज्ञात कारणों के चलते भीषण आग लग गई खबर की सूचना मिलते ही आसपास के नागरिक मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस को सूचना देकर मौके पर बुलाया और पुलिस के द्वारा पानी के प्राइवेट टैंकर और सीतामऊ सुवासरा की फायर ब्रिगेड की गाड़ियों को मौके पर बुलाकर आग बुझाई गई यह आंग कैसे लगी है। इस मामले की जांच चल रही है।
    user_Mangal Dev rathore
    Mangal Dev rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.