*श्रमिक से स्वरोज़गार तक, विशाल मंडल की स्वदेशी सोच बनी युवाओं की प्रेरणा* शक्तिफार्म। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद अंतर्गत सितारगंज सिडकुल क्षेत्र से निकली एक संघर्षपूर्ण लेकिन प्रेरणादायक कहानी आज स्वदेशी उद्यमिता की मिसाल बन चुकी है। यह कहानी है विशाल मंडल की एक ऐसे युवा की, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक निजी कंपनी में साधारण श्रमिक (लेबर) के रूप में की, लेकिन अपने सपनों और आत्मविश्वास को कभी सीमित नहीं होने दिया। कंपनी में कार्य करते हुए विशाल मंडल ने मेहनत और लगन के बल पर सुपरवाइज़र तथा क्वालिटी डिपार्टमेंट तक का सफर तय किया। इस दौरान उन्होंने केवल जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की खरीद, सप्लाई चेन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकिंग, डिस्पैच और मार्केटिंग जैसे हर पहलू को गहराई से समझा। उनका लक्ष्य हमेशा स्पष्ट रहा,नौकरी तक सीमित न रहकर स्वयं का स्वरोज़गार खड़ा करना। वर्षों के अनुभव और सतत प्रयासों के बाद विशाल मंडल ने स्वदेशी उत्पादों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। आज वे घरेलू उपयोग के किफायती, गुणवत्तापूर्ण और स्वदेशी उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। उनकी इस पहल से न केवल वे स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि कई स्थानीय युवाओं और महिलाओं को भी रोजगार और स्वरोज़गार से जोड़ा गया है।स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा को मजबूती मिली है। विशाल मंडल का मानना है कि जब स्थानीय संसाधनों और श्रम से उत्पादन होता है, तो इससे परिवारों की आय बढ़ती है और देश की आर्थिक व्यवस्था भी सशक्त होती है। श्रमिक से सफल उद्यमी बनने तक की विशाल मंडल की यह यात्रा आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के दायरे से बाहर निकलकर स्वरोज़गार का सपना देख रहे हैं। यह कहानी साबित करती है कि कठिन परिश्रम, सीखने की ललक और स्वदेशी सोच के साथ कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता ।
*श्रमिक से स्वरोज़गार तक, विशाल मंडल की स्वदेशी सोच बनी युवाओं की प्रेरणा* शक्तिफार्म। उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जनपद अंतर्गत सितारगंज सिडकुल क्षेत्र से निकली एक संघर्षपूर्ण लेकिन प्रेरणादायक कहानी आज स्वदेशी उद्यमिता की मिसाल बन चुकी है। यह कहानी है विशाल मंडल की एक ऐसे युवा की, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक निजी कंपनी में साधारण श्रमिक (लेबर) के रूप में की, लेकिन अपने सपनों और आत्मविश्वास को कभी सीमित नहीं होने दिया। कंपनी में कार्य करते हुए विशाल मंडल ने मेहनत और लगन के बल पर सुपरवाइज़र तथा क्वालिटी डिपार्टमेंट तक का सफर तय किया। इस दौरान उन्होंने केवल जिम्मेदारियां ही नहीं निभाईं, बल्कि उत्पादन प्रक्रिया, कच्चे माल की खरीद, सप्लाई चेन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकिंग, डिस्पैच और मार्केटिंग जैसे हर पहलू को गहराई से समझा। उनका लक्ष्य हमेशा स्पष्ट रहा,नौकरी तक सीमित न रहकर स्वयं का स्वरोज़गार खड़ा करना। वर्षों के अनुभव और सतत प्रयासों के बाद विशाल मंडल ने स्वदेशी उत्पादों के निर्माण की दिशा में कदम बढ़ाया। आज वे घरेलू उपयोग के किफायती, गुणवत्तापूर्ण और स्वदेशी उत्पाद तैयार कर रहे हैं, जो आम उपभोक्ताओं की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। उनकी इस पहल से न केवल वे स्वयं आत्मनिर्भर बने हैं, बल्कि कई स्थानीय युवाओं और महिलाओं को भी रोजगार और स्वरोज़गार से जोड़ा गया है।स्थानीय स्तर पर उत्पादन होने से क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं और ‘लोकल फॉर वोकल’ की अवधारणा को मजबूती मिली है। विशाल मंडल का मानना है कि जब स्थानीय संसाधनों और श्रम से उत्पादन होता है, तो इससे परिवारों की आय बढ़ती है और देश की आर्थिक व्यवस्था भी सशक्त होती है। श्रमिक से सफल उद्यमी बनने तक की विशाल मंडल की यह यात्रा आज उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो नौकरी के दायरे से बाहर निकलकर स्वरोज़गार का सपना देख रहे हैं। यह कहानी साबित करती है कि कठिन परिश्रम, सीखने की ललक और स्वदेशी सोच के साथ कोई भी व्यक्ति अपने सपनों को साकार कर सकता है और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभा सकता ।
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