रायसेन जिले के सांचेत गाँव में स्वयं को 'नाना गुरु सरकार' और 'काल भैरव पीठाधीश्वर' बताने वाले सुनील सराठे एक बार फिर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में हुई एक मारपीट की घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आ रहे आरोप-प्रत्यारोपों के बीच उनके अतीत से लेकर वर्तमान तक की कहानी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सुनील सराठे का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था; उनकी माँ एक निजी स्कूल में कार्यरत थीं, जबकि पिता गाँव में हेयर कटिंग की दुकान चलाते थे। परिवार की मुख्य जिम्मेदारी पिता और बड़े भाई पर थी। बताया जाता है कि दसवीं कक्षा में असफल होने के बाद सुनील विदिशा में एक सैलून पर काम करने चले गए थे, जहाँ उनकी शादी आरती नामक युवती से हुई। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, कुछ वर्षों बाद आर्थिक मामलों और एक कथित ऋष्टा विवाद के कारण पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ गया, जिससे उनका अलगाव हो गया। आरोप है कि पत्नी ने न्याय के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए, लेकिन उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। समय के साथ सुनील सराठे ने धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई और बाद में 'नाना गुरु सरकार' तथा 'काल भैरव पीठाधीश्वर' के रूप में प्रसिद्ध हो गए। उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने के साथ उनका प्रभाव भी बढ़ा। समर्थकों का दावा है कि वे लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं, जबकि विरोधी पक्ष उनके दावों और कार्यशैली पर लगातार सवाल उठाता रहा है। बीते कुछ समय में उन पर कथित हमलों और जान के खतरे की बातें भी सामने आती रही हैं। विरोधी पक्ष सुरक्षा की मांग और हमलों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करता है, वहीं समर्थकों का कहना है कि उन्हें वास्तविक खतरा है और प्रशासन को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। 24 मई से शुरू हुए विवाद और उसके बाद हुई मारपीट की घटना ने पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। गाँव में इसे लेकर विभिन्न तरह की बातें हो रही हैं; कुछ लोग इसे व्यक्तिगत विवाद से जोड़ रहे हैं तो कुछ इसे लंबे समय से चल रहे तनाव का परिणाम बता रहे हैं। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं और विवाद की शुरुआत किन कारणों से हुई। इस मामले में एक पक्ष के लोग गंभीर धाराओं में जेल पहुँच चुके हैं, जबकि दूसरे पक्ष को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएँ जारी हैं। सांचेत और आसपास के क्षेत्रों में अब प्रमुख मांग यह है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से नहीं हुई तो भविष्य में इस तरह के विवाद और बढ़ सकते हैं। यह मामला धार्मिक प्रभाव, सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत संबंधों और हालिया हिंसक घटनाक्रम के कारण जिले में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसकी वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
रायसेन जिले के सांचेत गाँव में स्वयं को 'नाना गुरु सरकार' और 'काल भैरव पीठाधीश्वर' बताने वाले सुनील सराठे एक बार फिर चर्चाओं और विवादों के केंद्र में आ गए हैं। हाल ही में हुई एक मारपीट की घटना के बाद सोशल मीडिया पर सामने आ रहे आरोप-प्रत्यारोपों के बीच उनके अतीत से लेकर वर्तमान तक की कहानी पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, सुनील सराठे का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था; उनकी माँ एक निजी स्कूल में कार्यरत थीं, जबकि पिता गाँव में हेयर कटिंग की दुकान चलाते थे। परिवार की मुख्य जिम्मेदारी पिता और बड़े भाई पर थी। बताया जाता है कि दसवीं कक्षा में असफल होने के बाद सुनील विदिशा में एक सैलून पर काम करने चले गए थे, जहाँ उनकी शादी आरती नामक युवती से हुई। स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, कुछ वर्षों बाद आर्थिक मामलों और एक कथित ऋष्टा विवाद के कारण पति-पत्नी के बीच तनाव बढ़ गया, जिससे उनका अलगाव हो गया। आरोप है कि पत्नी ने न्याय के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए, लेकिन उसे अपेक्षित राहत नहीं मिली। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। समय के साथ सुनील सराठे ने धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से अपनी पहचान बनाई और बाद में 'नाना गुरु सरकार' तथा 'काल भैरव पीठाधीश्वर' के रूप में प्रसिद्ध हो गए। उनके अनुयायियों की संख्या बढ़ने के साथ उनका प्रभाव भी बढ़ा। समर्थकों का दावा है कि वे लोगों की समस्याओं का समाधान करते हैं, जबकि विरोधी पक्ष उनके दावों और कार्यशैली पर लगातार सवाल उठाता रहा है। बीते कुछ समय में उन पर कथित हमलों और जान के खतरे की बातें भी सामने आती रही हैं। विरोधी पक्ष सुरक्षा की मांग और हमलों से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग करता है, वहीं समर्थकों का कहना है कि उन्हें वास्तविक खतरा है और प्रशासन को उन्हें सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। 24 मई से शुरू हुए विवाद और उसके बाद हुई मारपीट की घटना ने पूरे क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। गाँव में इसे लेकर विभिन्न तरह की बातें हो रही हैं; कुछ लोग इसे व्यक्तिगत विवाद से जोड़ रहे हैं तो कुछ इसे लंबे समय से चल रहे तनाव का परिणाम बता रहे हैं। इस घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि वास्तविक परिस्थितियाँ क्या थीं और विवाद की शुरुआत किन कारणों से हुई। इस मामले में एक पक्ष के लोग गंभीर धाराओं में जेल पहुँच चुके हैं, जबकि दूसरे पक्ष को लेकर भी तरह-तरह की चर्चाएँ जारी हैं। सांचेत और आसपास के क्षेत्रों में अब प्रमुख मांग यह है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और गहन जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक तथ्य सामने आ सकें। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच पारदर्शी तरीके से नहीं हुई तो भविष्य में इस तरह के विवाद और बढ़ सकते हैं। यह मामला धार्मिक प्रभाव, सामाजिक प्रतिष्ठा, व्यक्तिगत संबंधों और हालिया हिंसक घटनाक्रम के कारण जिले में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसकी वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
- मध्य प्रदेश के रायसेन जिले के दीवानगंज क्षेत्र के ग्राम सेमरी की अंतरराष्ट्रीय पर्वतारोही अंजना यादव ने 27 मई 2026 को सुबह 5:24 बजे विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट (8848.86 मीटर) को सफलतापूर्वक फतह कर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया है। एक साधारण ग्रामीण परिवार से आने वाली अंजना की यह उपलब्धि उनकी अथक मेहनत, साहस और दृढ़ संकल्प का परिणाम है। अपने एवरेस्ट अभियान के दौरान अंजना यादव ने राष्ट्रभक्ति का भी संदेश दिया। उन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के एक वर्ष पूर्ण होने पर पहले 6119 मीटर ऊँची लाबुचे पीक पर इसका बैनर लहराकर भारतीय सेना के शौर्य और बलिदान को नमन किया था। इसके बाद, उन्होंने विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट पर भी 'ऑपरेशन सिंदूर' का बैनर फहराकर देशवासियों तक राष्ट्रप्रेम और वीर सैनिकों के सम्मान का संदेश पहुँचाया। अंजना ने अपने अभियान के माध्यम से "फिट इंडिया, हिट इंडिया" का संदेश देते हुए लोगों से स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की। इसके साथ ही, उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के लिए "माँ के नाम एक पेड़" अभियान का संदेश देते हुए नागरिकों से अपनी माता के सम्मान में कम से कम एक पौधा लगाने का आग्रह भी किया। अंजना यादव ने अपनी इस ऐतिहासिक सफलता का श्रेय मध्य प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी के प्रोत्साहन, सहयोग एवं मार्गदर्शन को देते हुए उनका विशेष आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के समर्थन और शुभकामनाओं ने उनके इस कठिन एवरेस्ट अभियान को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अंजना ने पूरे भारतवर्ष के आशीर्वाद, शुभकामनाओं और प्रेम को भी अपनी सफलता का आधार बताया, जिसकी बदौलत वे इस चुनौतीपूर्ण अभियान को पूरा कर सकीं। उन्होंने देशवासियों, अपने परिवार, पति, माता-पिता, मित्रों, समर्थकों और उन सभी लोगों का हृदय से धन्यवाद किया जिन्होंने हर कदम पर उनका उत्साहवर्धन किया। अपनी इस उपलब्धि को देश, प्रदेश, परिवार, समर्थकों और उन सभी लोगों को समर्पित करते हुए जिन्होंने उनके सपनों को साकार करने में सहयोग दिया, अंजना यादव ने कहा कि यह सफलता विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों की बेटियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी है। एवरेस्ट विजय के बाद अंजना यादव 1 जून 2026 को भारत वापस लौट रही हैं, जहाँ उनके भव्य स्वागत की तैयारियाँ की जा रही हैं। उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि मजबूत इरादों और निरंतर प्रयासों से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।1
- विदिशा जिले के नटेरन में एक बेहद दुखद घटना सामने आई है, जहाँ घर के बाथरूम में नहाते समय 13 वर्षीय किशोर महेंद्र रघुवंशी की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। परिवार के सदस्य तत्काल उसे नटेरन अस्पताल लेकर पहुँचे, जिसके बाद उसे विदिशा मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। वहाँ डॉक्टरों ने जाँच के बाद महेंद्र को मृत घोषित कर दिया। परिवार के सदस्यों ने बताया कि घर में नहाने के लिए रखी बड़ी टंकी में वह अज्ञात कारण से डूब गया था। मृतक महेंद्र रघुवंशी का पोस्टमार्टम शुक्रवार दोपहर 12:30 बजे मेडिकल कॉलेज में कराया गया।4
- राजधानी में 120 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से आंधी-तूफान आया, जिसके कारण शहर की बिजली गुल हो गई और चारों ओर अंधेरा छा गया।1
- रायसेन में, 'काल भैरव के नाम पर भौकाल काटने वाले' के रूप में जाने जाने वाले 'नाना सरकार' उर्फ सुनील सराठे की पत्नी ने एफआईआर दर्ज कराई है। इस घटनाक्रम में गाँववालों ने भी एक पंचनामा बनाया है, और इसे 'बाबा, बीवी और बवाल' श्रंखला के तीसरे भाग के रूप में संदर्भित किया गया है। इस पूरे मामले के बाद अब यह सवाल उठ खड़ा हुआ है कि क्या 'नाना सरकार' के रसूखदार आकाओं ने उनसे मुँह मोड़ लिया है।1
- रायसेन जिले के सिलवानी में पुलिस ने लाल घाटी से चोरी हुई एक बाइक के मामले में बड़ा खुलासा किया है। इस दौरान पुलिस ने दो शातिर चोरों, असगर अली और शाहिद खान को रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया। ये दोनों चोर एक बंद टपरिया में चोरी की गई बाइक के पुर्जे खोलकर उन्हें कबाड़ में बेचने की तैयारी कर रहे थे।1