श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस माता पार्वती की तपस्या एवं भगवान शिव-विवाह का दिव्य प्रसंग सुनाया गया गुरुग्राम। जैकबपुरा स्थित दिव्य जीवन संघ श्री कृष्ण मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज (चित्रकूट वाले) ने माता पार्वती की कठोर तपस्या, भगवान शिव की महिमा तथा शिव-पार्वती के दिव्य एवं अलौकिक विवाह का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा संपूर्ण परिसर श्रद्धा, भक्ति और शिवमय वातावरण से गुंजायमान रहा। कथा के प्रारंभ में महाराज श्री ने बताया कि पूर्व जन्म में माता सती द्वारा योगाग्नि में देह त्यागने के पश्चात उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। बाल्यकाल से ही उनका मन भगवान शिव की आराधना में लगा रहा। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी अटूट श्रद्धा, धैर्य, संयम और अखंड भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। महाराज श्री ने कहा कि माता पार्वती की तपस्या हमें यह शिक्षा देती है कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प, धैर्य और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से जीवन के कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों की निष्काम भक्ति से शीघ्र प्रसन्न होकर उन्हें सुख, शांति, समृद्धि एवं मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं। कथा के दौरान भगवान शिव की अद्भुत एवं अलौकिक बारात का सजीव वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महाराज श्री ने बताया कि शिवजी की बारात में देवता, ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व, भूत-प्रेत, शिवगण तथा समस्त दिव्य शक्तियाँ सम्मिलित थीं। भगवान शिव के वैरागी स्वरूप को देखकर माता मैना क्षणभर के लिए चिंतित हुईं, किन्तु भगवान विष्णु एवं देवताओं ने शिव के दिव्य स्वरूप का परिचय कराया। तत्पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान शिव एवं माता पार्वती का दिव्य विवाह सम्पन्न हुआ, जिस पर समस्त देवताओं ने पुष्पवर्षा कर इस दिव्य मिलन का अभिनंदन किया। महाराज श्री ने कहा कि शिव और शक्ति का यह पावन मिलन केवल एक विवाह नहीं, बल्कि चेतना और ऊर्जा, पुरुष और प्रकृति तथा आत्मा और परमात्मा के दिव्य समन्वय का प्रतीक है। शिव-पार्वती का आदर्श दाम्पत्य जीवन प्रेम, विश्वास, त्याग, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करता है। कथा के उपरांत भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाहोत्सव का उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से भगवान का पूजन-अर्चन किया तथा "हर-हर महादेव" एवं "बम-बम भोले" के जयघोषों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर दिव्य जीवन संघ श्री कृष्ण मंदिर के प्रधान श्री नरेश गुप्ता द्वारा भगवान शिव के भव्य दरबार की आकर्षक एवं मनमोहक सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। रंग-बिरंगे पुष्पों, मनोहारी विद्युत सज्जा एवं आध्यात्मिक अलंकरण से सुसज्जित शिव दरबार ने ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु स्वयं को कैलाश धाम की अलौकिक अनुभूति से अभिभूत अनुभव कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दिव्य दरबार के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भव्य सजावट की मुक्त कंठ से सराहना की। इस पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित श्री सच्चा बाबा आश्रम से पधारे परम पूज्य श्री ब्रह्मचारी जी महाराज, जो कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज (चित्रकूट वाले) के पूज्य गुरुदेव भी हैं, की विशेष एवं गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव का श्रद्धापूर्वक स्वागत एवं अभिनंदन किया। पूज्य गुरुदेव ने अपने दिव्य आशीर्वचनों, ओजस्वी संदेश एवं मधुर संकीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। उनके मंगलमय आशीर्वाद से संपूर्ण वातावरण शिवमय एवं भक्तिमय हो उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए आत्मिक शांति, दिव्य आनंद एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। अंत में मंदिर के प्रधान श्री नरेश गुप्ता ने सभी श्रद्धालुओं से कथा के शेष तीन दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान शिव की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में दिव्य जीवन संघ के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं के उल्लेखनीय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस माता पार्वती की तपस्या एवं भगवान शिव-विवाह का दिव्य प्रसंग सुनाया गया गुरुग्राम। जैकबपुरा स्थित दिव्य जीवन संघ श्री कृष्ण मंदिर में आयोजित सात दिवसीय श्री शिव महापुराण कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज (चित्रकूट वाले) ने माता पार्वती की कठोर तपस्या, भगवान शिव की महिमा तथा शिव-पार्वती के दिव्य एवं अलौकिक विवाह का अत्यंत भावपूर्ण एवं प्रेरणादायी वर्णन किया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे तथा संपूर्ण परिसर श्रद्धा, भक्ति और शिवमय वातावरण से गुंजायमान रहा। कथा के प्रारंभ में महाराज श्री ने बताया कि पूर्व जन्म में माता सती द्वारा योगाग्नि में देह त्यागने के पश्चात उन्होंने पर्वतराज हिमालय के घर माता पार्वती के रूप में जन्म लिया। बाल्यकाल से ही उनका मन भगवान शिव की आराधना में लगा रहा। देवर्षि नारद के मार्गदर्शन में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त करने के लिए वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी अटूट श्रद्धा, धैर्य, संयम और अखंड भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। महाराज श्री ने कहा कि माता पार्वती की तपस्या हमें यह शिक्षा देती है कि सच्ची श्रद्धा, दृढ़ संकल्प, धैर्य और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण से जीवन के कठिन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं। भगवान शिव अपने भक्तों की निष्काम भक्ति से शीघ्र प्रसन्न
होकर उन्हें सुख, शांति, समृद्धि एवं मोक्ष का मार्ग प्रदान करते हैं। कथा के दौरान भगवान शिव की अद्भुत एवं अलौकिक बारात का सजीव वर्णन सुनकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। महाराज श्री ने बताया कि शिवजी की बारात में देवता, ऋषि-मुनि, यक्ष, गंधर्व, भूत-प्रेत, शिवगण तथा समस्त दिव्य शक्तियाँ सम्मिलित थीं। भगवान शिव के वैरागी स्वरूप को देखकर माता मैना क्षणभर के लिए चिंतित हुईं, किन्तु भगवान विष्णु एवं देवताओं ने शिव के दिव्य स्वरूप का परिचय कराया। तत्पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भगवान शिव एवं माता पार्वती का दिव्य विवाह सम्पन्न हुआ, जिस पर समस्त देवताओं ने पुष्पवर्षा कर इस दिव्य मिलन का अभिनंदन किया। महाराज श्री ने कहा कि शिव और शक्ति का यह पावन मिलन केवल एक विवाह नहीं, बल्कि चेतना और ऊर्जा, पुरुष और प्रकृति तथा आत्मा और परमात्मा के दिव्य समन्वय का प्रतीक है। शिव-पार्वती का आदर्श दाम्पत्य जीवन प्रेम, विश्वास, त्याग, मर्यादा और पारिवारिक मूल्यों का सर्वोच्च उदाहरण प्रस्तुत करता है। कथा के उपरांत भगवान शिव एवं माता पार्वती के दिव्य विवाहोत्सव का उल्लासपूर्ण आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने भक्ति-भाव से भगवान का पूजन-अर्चन किया तथा "हर-हर महादेव" एवं "बम-बम भोले" के जयघोषों से संपूर्ण वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस अवसर पर दिव्य जीवन संघ श्री कृष्ण मंदिर के प्रधान श्री नरेश गुप्ता द्वारा भगवान शिव के भव्य दरबार की आकर्षक एवं मनमोहक सजावट श्रद्धालुओं के आकर्षण का विशेष केंद्र रही। रंग-बिरंगे पुष्पों, मनोहारी विद्युत सज्जा
एवं आध्यात्मिक अलंकरण से सुसज्जित शिव दरबार ने ऐसा दिव्य वातावरण निर्मित किया कि श्रद्धालु स्वयं को कैलाश धाम की अलौकिक अनुभूति से अभिभूत अनुभव कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने भगवान शिव के दिव्य दरबार के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा भव्य सजावट की मुक्त कंठ से सराहना की। इस पावन अवसर पर प्रयागराज स्थित श्री सच्चा बाबा आश्रम से पधारे परम पूज्य श्री ब्रह्मचारी जी महाराज, जो कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज (चित्रकूट वाले) के पूज्य गुरुदेव भी हैं, की विशेष एवं गरिमामयी उपस्थिति ने आयोजन की आध्यात्मिक गरिमा को और अधिक बढ़ा दिया। कथा व्यास पूज्य पंडित प्रमोद महाराज ने अपने पूज्य गुरुदेव का श्रद्धापूर्वक स्वागत एवं अभिनंदन किया। पूज्य गुरुदेव ने अपने दिव्य आशीर्वचनों, ओजस्वी संदेश एवं मधुर संकीर्तन के माध्यम से श्रद्धालुओं को भक्ति-रस में सराबोर कर दिया। उनके मंगलमय आशीर्वाद से संपूर्ण वातावरण शिवमय एवं भक्तिमय हो उठा। उपस्थित श्रद्धालुओं ने उनके पावन सान्निध्य एवं आशीर्वाद को अपने जीवन का सौभाग्य बताते हुए आत्मिक शांति, दिव्य आनंद एवं आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव किया। अंत में मंदिर के प्रधान श्री नरेश गुप्ता ने सभी श्रद्धालुओं से कथा के शेष तीन दिनों में अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर भगवान शिव की कृपा एवं आशीर्वाद प्राप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने आयोजन को सफल बनाने में दिव्य जीवन संघ के सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं के उल्लेखनीय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
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