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कोटा के लाडपुरा में एक स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रनीत मोरे के शो के दौरान पुरुषों के निजी अंगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली एक युवती ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। इस घटना से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें युवती अपनी टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त करती दिख रही है। यह पूरा मामला तब गरमाया था जब शो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद नेटिजंस और स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Voice of लाडपुरा' (जितेंद्र कुमार) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ता देख युवती ने अब अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है, जिससे इस चर्चित मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
Jitendra Kumar
कोटा के लाडपुरा में एक स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रनीत मोरे के शो के दौरान पुरुषों के निजी अंगों पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाली एक युवती ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है। इस घटना से जुड़ा एक नया वीडियो सामने आया है, जिसमें युवती अपनी टिप्पणी के लिए खेद व्यक्त करती दिख रही है। यह पूरा मामला तब गरमाया था जब शो की एक क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद नेटिजंस और स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'Voice of लाडपुरा' (जितेंद्र कुमार) द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, विवाद बढ़ता देख युवती ने अब अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगी है, जिससे इस चर्चित मामले में एक नया मोड़ आ गया है।
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- पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कोटा के न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे हैं। उनका यह दौरा प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने और उनकी मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन से विस्तृत जानकारी लेने के लिए है। यह मामला हाल ही में पूरे प्रदेश में राजनीतिक गरमाहट का कारण बना हुआ है, और इसकी जांच भी जारी है। अपनी इस यात्रा के दौरान, गहलोत अस्पताल में भर्ती प्रभावित महिलाओं के परिजनों से भी मुलाकात कर सकते हैं। इस संवेदनशील मामले को लेकर कांग्रेस लगातार राज्य सरकार और प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठा रही है।3
- राजस्थान का कोटा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का देश का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है, एक बार फिर चर्चा में है। छात्रों की आत्महत्याओं के बढ़ते मामलों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोटा को उसकी वास्तविक पहचान से कहीं अधिक नकारात्मक रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। आत्महत्या के आंकड़ों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है कि आखिर परिणाम देने वाला कोटा ही बार-बार निशाने पर क्यों आता है। आलोचकों का तर्क है कि देश के कई अन्य बड़े शहरों में छात्र आत्महत्या के मामले कोटा की तुलना में कहीं अधिक दर्ज होते हैं। इसके बावजूद, जब भी कोई ऐसी घटना सामने आती है, राष्ट्रीय स्तर पर बहस का केंद्र सबसे पहले कोटा बन जाता है। यह उचित नहीं है कि कोटा को केवल एक नकारात्मक पहचान के साथ ही प्रस्तुत किया जाए, जबकि इसकी व्यापक भूमिका है। समर्थकों का कहना है कि कोटा हर साल लाखों छात्रों को मेडिकल और इंजीनियरिंग जैसी प्रतिष्ठित परीक्षाओं की तैयारी का अवसर देता है, जहाँ से बड़ी संख्या में छात्र सफल होकर देश के शीर्ष शिक्षण संस्थानों तक पहुँचते हैं। उनका दृढ़ता से मानना है कि कोटा की पहचान केवल चुनौतियों या नकारात्मक घटनाओं से नहीं, बल्कि उसके महत्वपूर्ण शैक्षणिक योगदान और शानदार परिणामों से भी होनी चाहिए।1
- भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री सुनील बंसल ने कोटा में एक प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि केंद्र सरकार ने अपने 12 वर्ष के शासन काल में जन विश्वास और जन कल्याणकारी नीतियों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने इस अवसर पर सरकार की विभिन्न उपलब्धियों का विस्तार से उल्लेख किया।1
- राजस्थान के धौलपुर में पुलिस ने एक फरार अपराधी को सफलतापूर्वक गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के दौरान, पुलिस ने अपराधी के पास से एक कट्टा भी बरामद किया है।1
- कोटा में चंद्रसेल मठ की संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक सनसनीखेज हत्याकांड का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि एक वकील ने कथित तौर पर ₹1 लाख की सुपारी देकर एक महंत की हत्या करवा दी थी। इस मामले के खुलासे के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। पुलिस के अनुसार, संपत्ति विवाद को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ था, और इसी विवाद के चलते आरोपी वकील ने महंत को रास्ते से हटाने की पूरी साजिश रची, जिसके बाद सुपारी देकर हत्या को अंजाम दिया गया। घटना को अंजाम देने के बाद खुद पर किसी तरह का शक न हो, इसके लिए आरोपी वकील ने कथित तौर पर एक अस्पताल में भर्ती होने का नाटक भी किया। पुलिस ने इस पहलू की भी गहराई से जांच की और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ते हुए इस गंभीर मामले का सफलतापूर्वक खुलासा किया। पुलिस ने इस हत्याकांड में शामिल आरोपियों को हिरासत में ले लिया है और उनसे पूछताछ जारी है। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच की जा रही है, और जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस खुलासे के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल गर्म है और लोग इस घटना पर अपनी हैरानी व्यक्त कर रहे हैं। पुलिस ने यह भी दावा किया है कि इस मामले में जल्द ही और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं।2
- कोटा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के 17 जून के दौरे को लेकर उनके स्वागत में लगाए गए होर्डिंग्स हटा दिए गए हैं। इस घटना पर शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राखी गौतम ने तीव्र नाराजगी और गुस्सा व्यक्त किया है।1
- कोटा में कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का 'छात्र संवाद सम्मेलन' आयोजित होने जा रहा है, जिसे कांग्रेस नेताओं ने 'ऐतिहासिक' बताया है। यह सम्मेलन नीट पेपर लीक, सीबीएसई के डिजिटल इवैल्यूएशन सिस्टम में धांधली और परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं जैसे अहम मुद्दों पर युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद स्थापित करेगा। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर नयापुरा कार्यालय में आयोजित कार्यकर्ता बैठक में कांग्रेस के कोटा बूंदी लोकसभा प्रत्याशी रहे प्रहलाद गुंजल ने छात्रों से संपर्क कर उन्हें कार्यक्रम में लाने के निर्देश दिए। बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पिछले बारह सालों से बच्चों के भविष्य को लूटा जा रहा है, उनके सपनों को कुचला जा रहा है और उनकी मेहनत की हत्या की जा रही है। डोटासरा ने प्रधानमंत्री पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि प्रधानमंत्री राजस्थान के सट्टा को यह कहकर लूट ले जाएं कि 'राजस्थान में पेपर लीक हो गए, हम पेपर लीक नहीं होने देंगे, आप हमारी सरकार बनाओ' और जनता झांसे में आकर उनकी सरकार बना भी दे, उसके बावजूद यदि धर्मेंद्र प्रधान के नाक के नीचे पैसे लेकर पेपर बेचे जा रहे हों और छात्रों के सपनों को तार-तार किया जा रहा हो, तो ऐसी सरकार को शर्म आनी चाहिए। एआईसीसी इंचार्ज बैजू एम जॉर्ज ने राहुल गांधी के इस कार्यक्रम को राजनीतिक न बताते हुए, इसे देश के युवाओं और छात्रों से सीधा संवाद करने का कार्यक्रम बताया। उन्होंने जानकारी दी कि राहुल गांधी ने स्वयं कोटा को इस आयोजन के लिए चुना है, और इसे सफल बनाने की जिम्मेदारी कोटा के प्रत्येक कांग्रेसी नेता व कार्यकर्ता की है, जिसके लिए अधिक से अधिक छात्रों से संपर्क करना आवश्यक है। प्रहलाद गुंजल ने कार्यकर्ताओं से बातचीत में कहा कि लगातार तीन सालों से नीट पेपर लीक को लेकर छात्र उद्वेलित हैं, और सीबीएसई परीक्षाओं में भी घोर अनियमितताएँ सामने आ रही हैं। उन्होंने बताया कि देश का करोड़ों बच्चा इससे हैरान-परेशान है, और कई बच्चों ने तो अवसाद में आकर आत्महत्या जैसे कदम उठा लिए हैं, जो सरकार और पूरे सिस्टम के लिए शर्म की बात है। गुंजल ने राहुल गांधी की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने देश के युवाओं, छात्रों और बेरोजगारों का दर्द समझा है और इसके खिलाफ पूरे देश में एक लड़ाई छेड़ दी है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि यह कोटा के लिए सौभाग्य की बात है कि राहुल गांधी कांग्रेस के राष्ट्रव्यापी छात्र संवाद कार्यक्रम की शुरुआत यहीं से करेंगे। गुंजल ने सभी कार्यकर्ताओं से अपने रिश्तेदारों और मिलने वालों के ऐसे बच्चों को, जो नीट सहित विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, कार्यक्रम में लाना सुनिश्चित करने का आग्रह किया। कांग्रेस नेताओं ने साझा तौर पर यह दावा किया कि राहुल गांधी के युवाओं से संवाद करने और उनकी लड़ाई में शामिल होने से 'डबल इंजन सरकार' में बेचैनी बढ़ गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कोटा दौरे से पूरी प्रदेश भाजपा बौखला गई है और शासन-प्रशासन का दुरुपयोग कर छात्रों को कार्यक्रम में आने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेताओं ने यह भी कहा कि कोटा सहित पूरे प्रदेश में अनर्गल प्रचार भी किया जा रहा है, लेकिन देश का युवा भाजपा की युवा और छात्र विरोधी नीतियों को समझ चुका है। उन्होंने विश्वास जताया कि इन सारे षडयंत्रों के बाद भी राहुल गांधी का कोटा दौरा ऐतिहासिक रहेगा। अशोक चांदना ने स्पष्ट किया कि राहुल गांधी ने कोटा को इसलिए चुना है क्योंकि उन्हें हाड़ौती के नेताओं पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि नीट पेपर लीक होने से देश के युवाओं की आँखों के आगे अंधकार छा गया है और इन परिस्थितियों में यदि कोई इस सरकार को नींद से जगा सकता है, तथा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा करा सकता है, तो इस देश में कांग्रेस पार्टी का राहुल गांधी जैसा 'बब्बर शेर' ही है। बैठक में धन्यवाद कोटा बूंदी प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज ने दिया। इस कार्यकर्ता बैठक में कोटा बूंदी प्रभारी पुष्पेंद्र भारद्वाज, युवा कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष यशवीर सूरा, शहर अध्यक्ष राखी गौतम, देहात अध्यक्ष भानु प्रताप सिंह, पूर्व शहर अध्यक्ष रविंद्र त्यागी, खेल प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष अमीन पठान, पूर्व विधायक पूनम गोयल, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष दिलदार अली, मंजू चौधरी, ओबीसी संभागीय अध्यक्ष अशोक नागर, शहर अध्यक्ष दीपक नामदेव, देहात अध्यक्ष टीकम सुमन, मंजूर तंवर सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कांग्रेस नेताओं ने यह भी विश्वास व्यक्त किया कि राहुल गांधी के इस संवाद कार्यक्रम में हजारों की संख्या में छात्र शामिल होंगे।4
- बिहार पुलिस भर्ती परीक्षा में शामिल होने जा रहे परीक्षार्थियों की भारी भीड़ और रेलवे स्टेशनों पर मची अफरा-तफरी के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेज़ी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक युवा ट्रेन की खचाखच भरी बोगी के अंदर अचेत और तड़पता हुआ दिखाई दे रहा है। इसे साझा करते हुए विपक्ष के नेताओं सहित कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने दावा किया कि भीषण गर्मी, घुटन और अत्यधिक भीड़ के कारण एक छात्र ने ट्रेन के भीतर ही दम तोड़ दिया। इस घटना ने देश भर के युवाओं और आम नागरिकों में भारी आक्रोश और लाचारी की भावना पैदा कर दी है। इस वीडियो को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साझा करते हुए सरकार की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि ये उस भारत के लाचार युवा हैं, जिसकी सरकार अपने अरबपति दोस्तों पर लाखों करोड़ लुटा देती है, पर अपने ही छात्रों को एक सुरक्षित सफ़र तक नहीं दे सकती। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव के वक़्त सरकार पूरी-पूरी ट्रेनों का इंतज़ाम कर लेती है, तो परीक्षा देने जा रहे छात्रों के लिए भीड़, घुटन और बेबसी क्यों? अन्य नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी लाखों छात्रों के लिए विशेष ट्रेनों या अतिरिक्त बोगियों का इंतजाम न होने पर सवाल उठाए। मामले के तूल पकड़ने के बाद, पूर्व मध्य रेलवे (ECR) ने इस वायरल वीडियो पर आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है, जिसमें छात्र की मौत के दावों को एक “अफवाह” बताया गया है। रेलवे प्रशासन ने सोशल मीडिया मंच 'X' पर बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह घटना पाटलिपुत्र रेलवे स्टेशन की नहीं है, जैसा कि सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा था। रेलवे ने यह भी कहा कि उन्हें किसी भी प्रामाणिक स्रोत या ऑन-ड्यूटी स्टाफ से ट्रेन के भीतर किसी यात्री या छात्र की मृत्यु होने की सूचना प्राप्त नहीं हुई है। रेलवे का प्रथम दृष्टया अनुमान है कि वीडियो में दिख रहा युवक अत्यधिक थकान, बीमारी या मिर्गी जैसी किसी अन्य मेडिकल समस्या से पीड़ित था, जिसके कारण वह अचेत हो गया था। भले ही रेलवे ने मौत के दावों का खंडन किया हो, लेकिन इस घटना ने भारतीय रेलवे के जनरल कोचों में सफ़र करने वाले आम यात्रियों और देश के बेरोजगार युवाओं की असल लाचारी को एक बार फिर उजागर कर दिया है। बिहार के पटना जंक्शन और पाटलिपुत्र जैसे प्रमुख स्टेशनों पर परीक्षा के दौरान हज़ारों छात्र जान जोखिम में डालकर ट्रेनों की छतों, शौचालयों के पास और पायदानों पर लटककर सफ़र करने को मजबूर दिखे। कई जगहों पर ट्रेनों के देरी से चलने के कारण छात्रों का गुस्सा भी फूट पड़ा और सुरक्षा बलों को स्थिति पर काबू पाने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। देश का युवा सिर्फ एक अदद नौकरी की उम्मीद में सैकड़ों किलोमीटर दूर परीक्षा देने निकलता है, लेकिन सफ़र की ये भयावह तस्वीरें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि क्या आम नागरिक के जीवन और सुरक्षा की वाकई कोई कीमत है?1