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🔱🏵🙏 जगत पिता जय श्री महाकाल ज़ी जगत माता हरसिद्धि देवी जी 🙏🏵🔱 संध्या आरती शृंगार दर्शन उज्जैन धाम से 🌖 चैत्र मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी रविवार , 22 मार्च 2026🌼 विक्रम संवत 2083 🔱🌿श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🌿🔱
Shivinder singh Bhadwal
🔱🏵🙏 जगत पिता जय श्री महाकाल ज़ी जगत माता हरसिद्धि देवी जी 🙏🏵🔱 संध्या आरती शृंगार दर्शन उज्जैन धाम से 🌖 चैत्र मास शुक्ल पक्ष चतुर्थी रविवार , 22 मार्च 2026🌼 विक्रम संवत 2083 🔱🌿श्री शिवाय नमस्तुभ्यं 🌿🔱
More news from Jammu and Kashmir and nearby areas
- Post by Varun Slathia1
- Net practice of cap ludhiana. Atleast six months in ludhiana pathan academy of cricket.Skills and knowledge of cricket. My name is Naresh singh. I am from jammu and kashmir in Kathua district.Ramkot Tehsil and village is Rajwalta. I started play cricket at the age is 20. I can play more private leagues good performance better then study.2
- हिमाचल प्रदेश के जनजातीय क्षेत्र अपनी अद्भुत प्राकृतिक संपदा और समृद्ध जैव विविधता के लिए पूरे देश में विशेष पहचान रखते हैं। इन्हीं क्षेत्रों में जिला चंबा का पांगी विकास खंड एक ऐसा इलाका है, जिसे वन्य प्राणियों का सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता है। ऊंचे-ऊंचे पहाड़, घने जंगल, बर्फ से ढकी चोटियां और दूर-दराज़ की शांत घाटियां यहां के वन्य जीवन को संरक्षण प्रदान करती हैं। पांगी क्षेत्र में विभिन्न प्रकार के दुर्लभ और संरक्षित वन्य जीव पाए जाते हैं। इनमें हिमालयन आइबेक्स, हिमालयन थार, कस्तूरी मृग, बर्फीला तेंदुआ (स्नो लेपर्ड), काला भालू, भूरा भालू, लाल भालू और जंगली बकरी, पक्षीयो में नील नीलो, चकोर, गोरेया, गलोन, गिद प्रमुख हैं। इन जीवों की मौजूदगी इस क्षेत्र की पारिस्थितिकी संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खास बात यह है कि ये वन्य जीव पांगी की ऊंची धारों (गहारों) में प्राकृतिक रूप से विचरण करते हैं, जिससे यह क्षेत्र जैव विविधता का अनमोल केंद्र बन गया है। प्रदेश सरकार द्वारा पांगी के टावन सैचू क्षेत्र को वन्य जीवों के लिए आरक्षित अभयारण्य घोषित किया गया है, जिससे यहां के वन्य जीवों को अतिरिक्त सुरक्षा मिल रही है। पांगी वन मंडल के अंतर्गत गहार परमार, दुसगहार, हरुई, चस्क भटोरी, हिलूटवान, सुराल हुडान, प्रेग्राम और विन्द्रावानी जैसी अनेक सुंदर धारें स्थित हैं। ये सभी गहार अपनी प्राकृतिक सुंदरता, हरियाली और सांस्कृतिक महत्व के लिए प्रसिद्ध हैं। यहां के बर्फ से ढके पहाड़, हरे-भरे चरागाह और स्वच्छ वातावरण पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। वन्य जीवों की गतिविधियों के बारे में जानकारी देते हुए पर्यावरण प्रेमी डॉ. नरेश ठाकुर, जो वर्तमान में पशुपालन विभाग पांगी में कार्यरत हैं, बताते हैं कि गर्मियों के मौसम में ये वन्य जीव 9,000 से 12,000 फीट की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चले जाते हैं। इस दौरान उन्हें पर्याप्त भोजन और अनुकूल वातावरण मिलता है। वहीं सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण ये जीव निचले क्षेत्रों की ओर आ जाते हैं, जहां उन्हें जीवन यापन के लिए बेहतर परिस्थितियां मिलती हैं। पांगी की ये गहारें न केवल वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आवास हैं, बल्कि वन्यजीव पर्यटन के लिए भी अपार संभावनाएं रखती हैं। यदि इन क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से पर्यटन को बढ़ावा दिया जाए, तो यह स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है। साथ ही, इससे लोगों में वन्य जीवों के प्रति जागरूकता और संरक्षण की भावना भी विकसित होगी। अतः यह आवश्यक है कि हम सभी मिलकर पांगी की इस अनमोल प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित करने का संकल्प लें। वन्य जीवों की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और संतुलित पर्यटन विकास के माध्यम से ही इस क्षेत्र की सुंदरता और जैव विविधता को आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा सकता है।1
- स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग पूरी होने से ग्रामीणों में खुशी, विधायक विवेक शर्मा का जिताया आभार, किसानों व श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत, बंगाणा, कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत लमलेहड़ी गांव में मुख्य सड़क से बाबा बालक रूपी मंदिर और श्मशान घाट तक बन रही लिंक सड़क का विधायक विवेक शर्मा ने निरीक्षण किया। लगभग अढ़ाई किलोमीटर लंबाई वाली इस लिंक सड़क का निर्माण कार्य इन दिनों युद्ध स्तर पर जारी है। इस सड़क के निर्माण को लेकर क्षेत्र की जनता लंबे समय से मांग कर रही थी, जो अब पूरी होती नजर आ रही है। निरीक्षण के दौरान विधायक विवेक शर्मा ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों व ठेकेदार को स्पष्ट निर्देश दिए कि कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए तथा निर्माण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि यह सड़क क्षेत्र की जनता की वर्षों पुरानी मांग थी, जिसे अब साकार किया जा रहा है। विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि इस लिंक सड़क के बनने से जहां श्रद्धालुओं को बाबा बालक रूपी मंदिर तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी, वहीं श्मशान घाट तक पहुंचने का रास्ता भी सुगम हो जाएगा। पहले लोगों को अंतिम संस्कार जैसे संवेदनशील कार्यों के लिए कठिन परिस्थितियों से गुजरना पड़ता था, विशेषकर बरसात के दिनों में यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती थी। अब इस सड़क के बनने से लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इस सड़क का लाभ केवल मंदिर और श्मशान घाट तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास की दर्जनों मलकीयत भूमि वाले किसानों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। किसानों को अपनी कृषि उपज को खेतों से मुख्य सड़क तक पहुंचाने में आसानी होगी, जिससे उनके समय और श्रम दोनों की बचत होगी। साथ ही ग्रामीणों के आवागमन की सुविधा भी पहले से कहीं अधिक बेहतर हो जाएगी। निरीक्षण के दौरान विधायक विवेक शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जाए और निर्धारित मानकों के अनुसार ही कार्य किया जाए। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि टिकाऊ और मजबूत सड़कें बनाना है, जो लंबे समय तक जनता की सेवा कर सकें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है और समय-समय पर इसकी निगरानी की जा रही है, ताकि किसी प्रकार की कमी न रह जाए। उन्होंने आश्वस्त किया कि यह सड़क निर्धारित समय के भीतर पूर्ण कर जनता को समर्पित की जाएगी। हर गांव और धार्मिक स्थल को कुटलैहड़ में हर घर हर गांव को सड़क से जोड़ना हमारा संकल्प, विधायक विवेक शर्मा ने कहा कि उनका संकल्प है कि कुटलैहड़ विधानसभा क्षेत्र के हर गांव, हर घर और हर धार्मिक स्थल को सड़क और पक्के रास्ते से जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि सड़क विकास किसी भी क्षेत्र की प्रगति की रीढ़ होती है और बेहतर सड़कें बनने से क्षेत्र के सामाजिक व आर्थिक विकास को गति मिलती है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की जनता ने जो विश्वास उन पर जताया है, उसे वे पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में कई अन्य लिंक सड़कों और विकास कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा सके। इस अवसर पर स्थानीय ग्रामीणों ने विधायक विवेक शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सड़क उनकी लंबे समय से चली आ रही मांग थी। उन्होंने कहा कि इस सड़क के बनने से उनके जीवन में काफी सहूलियत आएगी और क्षेत्र का समग्र विकास भी सुनिश्चित होगा। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि इसी प्रकार अन्य विकास कार्य भी क्षेत्र में निरंतर जारी रहेंगे।1
- पुलिस थाना बंगाणा के तहत बीहडू कलां स्थित गोबिंद सागर झील में डूबे 24 वर्षीय श्रद्धालु का शव 18 घंटे बाद मिला। मृतक युवक की पहचान आकाशदीप पुत्र कश्मीरी लाल निवासी अमृतसर, पंजाब के रूप में हुई है। गोताखोर की मदद से निकाले गए शव को बंगाणा पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। साथ ही आगामी शुरू कर दी है। बता दें कि पंजाब के कुछ श्रद्धालु युवक शुक्रवार दोपहर को पीरनिगाह मंदिर में माथा टेकने के बाद बाबा बालक नाथ मंदिर जा रहे थे। इसके लिए बीहडू कलां स्थित गोबिंद सागर झील किनारे बोट का इंतजार करने लगे। इसी दौरान अमृतसर निवासी आकाशदीप सिंह का पैर फिसल गया और गोबिंद सागर झील में समा गया। हालांकि साथी युवकों बचाने का प्रयास किया, लेकिन असफल रहे। सूचना मिलने के बाद ग्रामीण सहित पुलिस टीम मौके पर पहुंची और आकाशदीप को ढूंढने का प्रयास किया, लेकिन अंधेरा होने के चलते कोई पता नहीं चल पाया। शनिवार सुबह एक बार फिर से आकाशदीप सिंह तलाश शुरू की और गोताखोरों को बुलाया। जिसके बाद शव को बाहर निकाला गया। एएसपी ऊना संजीव भाटिया ने बताया कि पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।1
- सुजानपुर सुजानपुर के विश्व प्रसिद्ध काली माता मंदिर प्रांगण में शनिवार को विशेष पूजा अर्चना हवन इत्यादि करने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया गया मंदिर परिसर के बाहर सैकड़ो लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया बताते चले की मंदिर कमेटी द्वारा प्रतिवर्ष नवरात्र संपन्न होने के बाद वार्षिक भंडारा आयोजित किया जाता है जिसके चलते यह कार्यक्रम आयोजित हुआ भंडारा शुरू होने से पहले मंदिर परिसर में विशेष पूजा पाठ हवन इत्यादि करवाया गया यहां पंडित आचार्य संजय शर्मा द्वारा तमाम वैदिक रस्मों को निभाते हुए सर्वजन मंगल कल्याण की कामना की गई3
- हिमालय की दुर्गम और प्राकृतिक रूप से समृद्ध घाटियों में वन्यजीवों की मौजूदगी एक सुखद संकेत मानी जाती है। इसी कड़ी में 3 अप्रैल 2026 को पांगी घाटी के चस्क क्षेत्र में एक स्थानीय व्यक्ति द्वारा हिमालयन आइबेक्स (Himalayan Ibex) का कैमरे में कैद होना न केवल रोमांचक क्षण है, बल्कि यह क्षेत्र में जैव विविधता की समृद्धि और संरक्षण प्रयासों की सफलता को भी दर्शाता है। बताया जा रहा है कि यह दुर्लभ दृश्य चस्क की ऊंची पहाड़ियों में देखा गया, जहां आइबेक्स अपने प्राकृतिक आवास में स्वतंत्र रूप से विचरण करता नजर आया। हिमालयन आइबेक्स एक जंगली बकरी प्रजाति है, जो ऊबड़-खाबड़ चट्टानी इलाकों में रहने के लिए जानी जाती है और इसे देख पाना बेहद कठिन होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की वन्यजीव उपस्थिति यह संकेत देती है कि क्षेत्र का पर्यावरण अभी भी संतुलित है और मानव हस्तक्षेप सीमित है। स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने इस दुर्लभ क्षण को साझा करते हुए वन्यजीव पर्यटन (Wildlife Tourism) को बढ़ावा देने की अपील की है, ताकि लोग प्रकृति के करीब आ सकें और इसके संरक्षण के प्रति जागरूक बनें। पांगी घाटी, जो अपनी अनछुई सुंदरता और जैव विविधता के लिए जानी जाती है, अब धीरे-धीरे एडवेंचर और इको-टूरिज्म का केंद्र बनती जा रही है। ऐसे में हिमालयन आइबेक्स जैसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी पर्यटकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभा सकती है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग से भी यह अपेक्षा की जा रही है कि वे इस दिशा में ठोस कदम उठाएं, ताकि वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित हो सके और क्षेत्र में जिम्मेदार पर्यटन को बढ़ावा मिल सके। 👉 यह दृश्य न केवल एक फोटोग्राफर की उपलब्धि है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है, जो हमें प्रकृति के प्रति हमारी जिम्मेदारी का एहसास कराता है।1
- नंगल से आए गोताखोरों ने निकाला गोविंद सागर झील के मंदली में डूबे पंजाब के युवक का शव1