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74 साल से पट्टे का इंतजार, हक के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे औबेदुल्लागंज के गौतमपुर कॉलोनी के ग्रामीण 74 साल से पट्टे का इंतजार, हक के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे औबेदुल्लागंज के गौतमपुर कॉलोनी के ग्रामीण
ABBTAK NEWS Dewangnj
74 साल से पट्टे का इंतजार, हक के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे औबेदुल्लागंज के गौतमपुर कॉलोनी के ग्रामीण 74 साल से पट्टे का इंतजार, हक के लिए कलेक्ट्रेट पहुंचे औबेदुल्लागंज के गौतमपुर कॉलोनी के ग्रामीण
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- मेरठ में पुलिस चौकी के अंदर दरोगा का जन्मदिन मनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो जाकिर कॉलोनी चौकी का बताया जा रहा है, जिसमें दरोगा अंकित कुछ युवकों के साथ केक काटते नजर आ रहे हैं। इनमें अब्दुल रहमान भी दिखाई दे रहा है, जिसके खिलाफ दो मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है। मेरठ में पुलिस चौकी के अंदर दरोगा का जन्मदिन मनाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो जाकिर कॉलोनी चौकी का बताया जा रहा है, जिसमें दरोगा अंकित कुछ युवकों के साथ केक काटते नजर आ रहे हैं। इनमें अब्दुल रहमान भी दिखाई दे रहा है, जिसके खिलाफ दो मुकदमे दर्ज बताए जा रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।1
- ग्वालियर ब्रेकिंग, ग्वालियर में किसिंग कार पर धमाल, अब आया कार पर किस करते हुए गर्लफ्रेंड का वीडियो सामने, 11 सैकेंड के वीडियो में कार को किस करते हुए एक लड़की आ रही है नजर, वीडियो में दिखाई गई है लिप मार्क कार, बता दें बीते रोज ट्रैफिक पुलिस ने पकड़ी थी अजब- गजब किसिंग कार’, कार चालक से वसूला था पांच हजार पांच सौ रुपए का चालान, ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने पर की गई थी कार्रवाई, कार बताई गई थी आदित्य सिकरवार निवासी थाटीपुर की, आदित्य ने किया था दावा, बिना जानकारी के गर्लफ्रेंड ने बना दिए थे कार पर 3400 किस के निशान, आठ सौ से नौ सौ रुपए का आया था खर्च, रील के विदेशी ट्रेंड से प्रभावित होकर गर्लफ्रेंड ने बनाया था कार पर अनोखा डिजाइन,1
- आगामी त्योहारों के दृष्टिगत थाना निशातपुरा में,अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 4 श्री संजीव पाठक एवं सहायक पुलिस आयुक्त निशातपुरा श्री शशांक जैन के निर्देशन एवं अधिकारी द्वय की उपस्थिति में, क्षेत्र के गुंडा, निगरानी, चाकूबाज बदमाशों की परेड कराई गई जिसमें थाना एवं मंडी चौकी क्षेत्र के 60 बदमाश थाने पर उपस्थित हुए। सभी के डोजियर चेक करके अद्यतन किए गए। प्रतिबंधात्मक कार्यवाही और बाउंड ओवर की स्थिति चेक की गई। सभी की परेड करवा कर वरिष्ठ अधिकारियों एवं थाना प्रभारी द्वारा सख्त हिदायत दी गई कि, किसी भी प्रकार के अपराध से दूरी बना कर रखें एवं अपने चाल चलन में सुधार लाएं। आगामी त्योहारों के दृष्टिगत थाना निशातपुरा में,अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 4 श्री संजीव पाठक एवं सहायक पुलिस आयुक्त निशातपुरा श्री शशांक जैन के निर्देशन एवं अधिकारी द्वय की उपस्थिति में, क्षेत्र के गुंडा, निगरानी, चाकूबाज बदमाशों की परेड कराई गई जिसमें थाना एवं मंडी चौकी क्षेत्र के 60 बदमाश थाने पर उपस्थित हुए। सभी के डोजियर चेक करके अद्यतन किए गए। प्रतिबंधात्मक कार्यवाही और बाउंड ओवर की स्थिति चेक की गई। सभी की परेड करवा कर वरिष्ठ अधिकारियों एवं थाना प्रभारी द्वारा सख्त हिदायत दी गई कि, किसी भी प्रकार के अपराध से दूरी बना कर रखें एवं अपने चाल चलन में सुधार लाएं।4
- मोहन राज में शिक्षा के मंदिर में मासूम बच्चों का अपमान क्यों? जिस जगह बच्चों को किताबों के साथ सपने दिए जाने चाहिए, जिस विद्यालय में उन्हें अपने भविष्य की नई इबारत लिखना सीखना चाहिए, अगर उसी जगह उन्हें “कीड़ा”, “गंवार”, “गरीब” और अनपढ़ कहकर अपमानित किया जाए तो सवाल केवल शिक्षकों की भाषा का नहीं रह जाता, सवाल पूरी शिक्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता पर खड़ा हो जाता है। बड़वानी के एकलव्य आवासीय विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। बच्चों का आरोप है कि उन्हें अपमानजनक शब्द कहे गए और यहां तक कहा गया कि पढ़-लिखकर भी उन्हें आखिर शादी करके बच्चे ही पैदा करने हैं। यदि बच्चों द्वारा लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह केवल अनुशासनहीनता या गलत शब्दों का मामला नहीं होगा, बल्कि यह उस मानसिकता का प्रमाण होगा जो शिक्षा के मूल उद्देश्य को ही समझने में असफल है। एक आदिवासी बच्चा जब अपने गांव, परिवार और सामाजिक परिस्थितियों से निकलकर आवासीय विद्यालय में पहुंचता है तो उसके साथ किताबें ही नहीं आतीं, उसके साथ उम्मीदें भी आती हैं। उसके माता-पिता अपने सीमित साधनों के बावजूद यह सपना देखते हैं कि उनका बच्चा पढ़ेगा, आगे बढ़ेगा, अधिकारी बनेगा, डॉक्टर बनेगा, इंजीनियर बनेगा, शिक्षक बनेगा या अपनी पसंद का कोई भी सम्मानजनक जीवन चुनेगा। ऐसे में यदि विद्यालय में ही उसके सपनों का मजाक बनाया जाए तो उससे बड़ा अन्याय क्या हो सकता है? शिक्षक केवल पाठ पढ़ाने वाला व्यक्ति नहीं होता। शिक्षक बच्चे के व्यक्तित्व का निर्माण करता है। उसके एक वाक्य से बच्चा जीवन भर के लिए आत्मविश्वासी भी बन सकता है और उसी एक वाक्य से उसके भीतर हीनभावना भी पैदा हो सकती है। इसलिए शिक्षक के शब्दों की जिम्मेदारी सामान्य व्यक्ति से कहीं अधिक होती है। आदिवासी बच्चों को “गरीब” कहकर उनकी आर्थिक स्थिति का मजाक उड़ाना, “गंवार” कहकर उनकी सामाजिक पृष्ठभूमि को नीचा दिखाना और उनके भविष्य को केवल शादी तथा बच्चे पैदा करने तक सीमित कर देना उस सोच को दर्शाता है जिसमें शिक्षा का अर्थ ही शायद केवल किताबें पढ़ाना रह गया है। शिक्षा तो वह है जो बच्चे को यह विश्वास दे कि उसकी वर्तमान परिस्थितियां उसके भविष्य की सीमा नहीं हैं। सवाल यह भी है कि अगर आदिवासी बच्चे ही अपने विद्यालय में सम्मान और सुरक्षा के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं तो आखिर हमारी आवासीय विद्यालय व्यवस्था किसके लिए है? एकलव्य विद्यालयों की स्थापना का उद्देश्य ही वंचित और आदिवासी समाज के बच्चों को बेहतर शिक्षा और अवसर उपलब्ध कराना है। इन विद्यालयों में पढ़ने वाला प्रत्येक बच्चा देश की संपत्ति है। उसके साथ किसी भी प्रकार का जातीय, सामाजिक, आर्थिक या सांस्कृतिक भेदभाव केवल उस बच्चे का अपमान नहीं, बल्कि संविधान की उस भावना का भी अपमान है जो हर नागरिक को समानता और सम्मान का अधिकार देती है। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बच्चों के आरोपों को न तो बिना जांच के अंतिम सत्य मान लेना चाहिए और न ही उन्हें महज बच्चों की शिकायत कहकर दबा देना चाहिए। निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। बच्चों के बयान स्वतंत्र वातावरण में लिए जाने चाहिए। विद्यालय प्रशासन की भूमिका की जांच होनी चाहिए और यदि किसी शिक्षक या अधिकारी की गलती सामने आती है तो कार्रवाई भी ऐसी होनी चाहिए जिससे भविष्य में किसी बच्चे को अपनी पहचान, गरीबी या आदिवासी पृष्ठभूमि के कारण अपमानित न होना पड़े। मुख्यमंत्री से सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सरकार केवल भवन, छात्रावास, भोजन और किताबें उपलब्ध कराने से अपनी जिम्मेदारी पूरी नहीं कर सकती। सरकार की जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना भी है कि इन संस्थानों में पढ़ने वाले बच्चों को सम्मानजनक वातावरण मिले। किसी बच्चे को यह बताने का अधिकार किसी शिक्षक को नहीं है कि उसकी जिंदगी की सीमा क्या होगी। बच्चा चाहे आदिवासी परिवार से आता हो, दलित परिवार से, किसान परिवार से, मजदूर परिवार से या किसी गरीब परिवार से उसके सपनों की कोई जाति नहीं होती और उसके भविष्य की कोई सामाजिक सीमा नहीं होनी चाहिए। आज आवश्यकता केवल दोषी की तलाश करने की नहीं, बल्कि उस मानसिकता की पहचान करने की है जो बच्चों को उनकी सामाजिक पहचान से आंकती है। यदि शिक्षा के मंदिर में ही बच्चे अपनी पहचान को लेकर शर्म महसूस करने लगें तो फिर हम उनसे आत्मविश्वास, नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण की उम्मीद कैसे कर सकते हैं? आदिवासी बच्चे किसी पर एहसान नहीं मांग रहे। वे अपने अधिकार की शिक्षा मांग रहे हैं। वे सम्मान चाहते हैं। वे सुरक्षित वातावरण चाहते हैं। वे अपने सपनों को उड़ान देना चाहते हैं। उनके सपनों पर किसी शिक्षक की व्यक्तिगत मानसिकता का पहरा नहीं लगाया जा सकता। सरकार जांच करे, दोषी मिले तो कार्रवाई करे और सबसे बढ़कर यह सुनिश्चित करे कि प्रदेश के किसी भी विद्यालय में किसी बच्चे को उसकी जाति, गरीबी, भाषा, संस्कृति या पारिवारिक पृष्ठभूमि के कारण अपमानित न होना पड़े। क्योंकि शिक्षा का मंदिर वह जगह है जहां बच्चों को झुकना नहीं, उठना सिखाया जाना चाहिए। और आदिवासी बच्चों का भविष्य किसी की मानसिकता का शिकार नहीं हो सकता।1
- सा रे गा मा म्यूजिकल ग्रुप द्वारा संगीत संध्या का भव्य आयोजन किया गया सा रे गा मा म्यूजिकल ग्रुप द्वारा संगीत संध्या का आयोजन हथ करघा एवं हस्त शिल्प विकास निगम द्वारा आयोजित सावन मेले में किया गया। सावन मेले का आयोजन गौहर महल भोपाल में किया जा रहा है। सा रे गा मा म्यूजिकल ग्रुप के आर्गेनाइजर दिनेश कुमार गौर, सलाहकार वरिष्ठ सिंगर सुनीता जी, एंकर एवं सिंगर आनद शर्मा, कविता सक्सेना तनु स्वामी रितेश पाठक कमोद सक्सेना, प्रदीप सक्सेना, आशा अजय,स्तुति भार्गव, द्वारा संगीत संध्या में एक से बढ़कर एक सुमधुर सदावहर गीतों की प्रस्तुति दी गई4
- आगामी त्योहारों के दृष्टिगत थाना निशातपुरा में,अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 4 श्री संजीव पाठक एवं सहायक पुलिस आयुक्त निशातपुरा श्री शशांक जैन के निर्देशन एवं अधिकारी द्वय की उपस्थिति में, क्षेत्र के गुंडा, निगरानी, चाकूबाज बदमाशों की परेड कराई गई जिसमें थाना एवं मंडी चौकी क्षेत्र के 60 बदमाश थाने पर उपस्थित हुए। सभी के डोजियर चेक करके अद्यतन किए गए। प्रतिबंधात्मक कार्यवाही और बाउंड ओवर की स्थिति चेक की गई। सभी की परेड करवा कर वरिष्ठ अधिकारियों एवं थाना प्रभारी द्वारा सख्त हिदायत दी गई कि, किसी भी प्रकार के अपराध से दूरी बना कर रखें एवं अपने चाल चलन में सुधार लाएं। आगामी त्योहारों के दृष्टिगत थाना निशातपुरा में,अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त जोन 4 श्री संजीव पाठक एवं सहायक पुलिस आयुक्त निशातपुरा श्री शशांक जैन के निर्देशन एवं अधिकारी द्वय की उपस्थिति में, क्षेत्र के गुंडा, निगरानी, चाकूबाज बदमाशों की परेड कराई गई जिसमें थाना एवं मंडी चौकी क्षेत्र के 60 बदमाश थाने पर उपस्थित हुए। सभी के डोजियर चेक करके अद्यतन किए गए। प्रतिबंधात्मक कार्यवाही और बाउंड ओवर की स्थिति चेक की गई। सभी की परेड करवा कर वरिष्ठ अधिकारियों एवं थाना प्रभारी द्वारा सख्त हिदायत दी गई कि, किसी भी प्रकार के अपराध से दूरी बना कर रखें एवं अपने चाल चलन में सुधार लाएं।1
- विदिशा के रीठा फाटक इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। 30 वर्षीय महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ कथित तौर पर अज्ञात कारणों के चलते जहरीला पदार्थ खा लिया। घटना में महिला और उसकी दोनों बेटियों की मौत हो गई। वीओ: जानकारी के मुताबिक, रीठा फाटक निवासी महिला ने अपनी दोनों बेटियों के साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर तीनों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। फिलहाल महिला और उसकी दोनों बेटियों द्वारा यह कदम क्यों उठाया गया, इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों से पूछताछ की जा रही है।1
- 30 वर्षीय महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ कथित तौर पर अज्ञात कारणों के चलते मौत विदिशा के रीठा फाटक इलाके से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां 30 वर्षीय महिला ने अपनी दो बेटियों के साथ कथित तौर पर अज्ञात कारणों के चलते जहरीला पदार्थ खा लिया। घटना में महिला और उसकी दोनों बेटियों की मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक, रीठा फाटक निवासी महिला ने अपनी दोनों बेटियों के साथ जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर तीनों को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। फिलहाल महिला और उसकी दोनों बेटियों द्वारा यह कदम क्यों उठाया गया, इसका कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और घटना के पीछे की वजह जानने के लिए परिजनों से पूछताछ की जा रही है।3
- एम्स हॉस्पिटल भोपाल एम्स के तीन नंबर गेट पर दो अज्ञात व्यक्तियों ने क्या हमला मामूली विवाद धक्का मुक्की होने पर क्या जानलेवा हमला इमाम खान नाम व्यक्ति गंभीर रूप से घायल मारपीट करने वालों का अभी तक नहीं लगा पता प्रशासन से उम्मीद है की एम्स के गेट पर लगे कैमरो से पुष्टि की जाए1