पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत एक स्वदेशी कैथेटर तैयार कर चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह कैथेटर एक डिजिटल मीटर की मदद से सटीक रूप से बता सकेगा कि मरीज की आंतें कितनी गंभीर रूप से बीमार या क्षतिग्रस्त हैं। इस नई तकनीक के आने से पेट और आंत की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहतर इलाज की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक आंतों की गतिशीलता, सूजन या बीमारी की गंभीरता जांचने के लिए महंगी विदेशी मशीनों और जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस वजह से रिपोर्ट आने में देरी होती थी और कई बार गंभीर मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता था। अब नए कैथेटर में लगे सेंसर सीधे आंतों की दीवारों के संपर्क में आकर डिजिटल मीटर पर रीडिंग दिखाएंगे, जिससे डॉक्टर तुरंत जान सकेंगे कि आंत का कौन-सा हिस्सा प्रभावित है और बीमारी किस स्टेज पर पहुंच चुकी है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बने इस डिवाइस का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिलेगा, क्योंकि यह विदेशी उपकरणों की तुलना में करीब एक-चौथाई लागत में उपलब्ध होगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, इस डिवाइस के क्लीनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और जल्द ही इसे व्यापक स्तर पर मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस तकनीक से जांच का खर्च काफी कम हो जाएगा और आंतों के अल्सर, कोलाइटिस तथा शुरुआती कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को समय रहते पहचानने में डॉक्टरों को बड़ी मदद मिलेगी।
पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई) चंडीगढ़ के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग ने 'मेक इन इंडिया' अभियान के तहत एक स्वदेशी कैथेटर तैयार कर चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। यह कैथेटर एक डिजिटल मीटर की मदद से सटीक रूप से बता सकेगा कि मरीज की आंतें कितनी गंभीर रूप से बीमार या क्षतिग्रस्त हैं। इस नई तकनीक के आने से पेट और आंत की गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए बेहतर इलाज की उम्मीदें बढ़ गई हैं। पीजीआई के विशेषज्ञों के मुताबिक, अब तक आंतों की गतिशीलता, सूजन या बीमारी की गंभीरता जांचने के लिए महंगी विदेशी मशीनों और जटिल प्रक्रियाओं पर निर्भर रहना पड़ता था। इस वजह से रिपोर्ट आने में देरी होती थी और कई बार गंभीर मरीजों का इलाज समय पर शुरू नहीं हो पाता था। अब नए कैथेटर में लगे सेंसर सीधे आंतों की दीवारों के संपर्क में आकर डिजिटल मीटर पर रीडिंग दिखाएंगे, जिससे डॉक्टर तुरंत जान सकेंगे कि आंत का कौन-सा हिस्सा प्रभावित है और बीमारी किस स्टेज पर पहुंच चुकी है। पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बने इस डिवाइस का सबसे बड़ा लाभ आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मिलेगा, क्योंकि यह विदेशी उपकरणों की तुलना में करीब एक-चौथाई लागत में उपलब्ध होगा। पीजीआई प्रशासन के अनुसार, इस डिवाइस के क्लीनिकल ट्रायल सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं और जल्द ही इसे व्यापक स्तर पर मरीजों की जांच के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस तकनीक से जांच का खर्च काफी कम हो जाएगा और आंतों के अल्सर, कोलाइटिस तथा शुरुआती कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को समय रहते पहचानने में डॉक्टरों को बड़ी मदद मिलेगी।
- रेवाड़ी की ऐतिहासिक ब्रास मार्केट में व्यापारी पूरी तरह से टैक्स भरने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। यहां की जर्जर सड़कें, सीवर व्यवस्था की बदहाली और जलभराव की गंभीर समस्या व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। पूरा टैक्स चुकाने के बाद भी सुविधाएं अधूरी रहने से परेशान व्यापारियों ने अब इस ऐतिहासिक बाजार में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जोरदार मांग उठाई है।1
- रेवाड़ी के सर्कुलर रोड स्थित ऐतिहासिक ब्रास मार्केट में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग काफी तेज हो गई है। राष्ट्रीय सामाजिक संगठन लोक सेवा मंच के मेगा मिशन जनसंपर्क अभियान के तहत आयोजित एक बैठक में व्यापारियों, दुकानदारों और ग्राहकों ने सरकार व प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह बैठक ब्रास मार्केट एसोसिएशन के प्रधान नीरज गुप्ता की अध्यक्षता में बैंक ऑफ बड़ौदा के पास आयोजित की गई, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता अशोक प्रधान मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। बैठक के दौरान बाजार की कई गंभीर समस्याओं को प्रमुखता से उठाया गया, जिसमें जर्जर और नाकारा सीवर सिस्टम, बारिश के पानी की निकासी की उचित व्यवस्था न होना, टूटी व गड्ढों से भरी सड़कें, सार्वजनिक शौचालय और पेशाबघर का अभाव, पार्कों और खाली स्थानों पर गंदा पानी व कूड़े के ढेर जमा होना और बाजार के चार में से तीन प्रवेश मार्गों पर जलभराव की समस्या शामिल है। व्यापारियों का कहना है कि ब्रास मार्केट में बैंक, एलआईसी कार्यालय, ब्रांडेड शोरूम, ज्वेलरी शॉप, अस्पताल और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठान होने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाओं की हालत बेहद खराब है। मुख्य वक्ता अशोक प्रधान ने कहा कि व्यापारी सरकार को टैक्स देते हैं और लोगों को सेवाएं उपलब्ध कराते हैं, ऐसे में उन्हें बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक नागरिक सुविधाएं देना सरकार का मौलिक कर्तव्य है। उन्होंने घोषणा की कि इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर ब्रास मार्केट को जल्द से जल्द 'मॉडर्न मार्केट' के रूप में विकसित करने की मांग की जाएगी।1
- हरियाणा में प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा प्रहार किया गया है। HPSC चेयरमैन आलोक वर्मा पूरी तरह से खट्टर के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं और नायब सैनी केवल नाम के मुख्यमंत्री हैं। रेवाड़ी की दीपिका यादव ने इस पूरी स्थिति को लेकर यह बात कही है।1
- स्वास्थ्य मंत्री आरती राव भिवानी पहुंची हैं।1
- हरियाणा के पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने अपना एक बयान दिया है।1
- चरखी दादरी में नई अनाज मंडी के सामने गहरे गड्ढे बनने से आढ़तियों में भारी नाराजगी है। इसके विरोध में आढ़तियों ने दादरी कनीना रोड पर उतरकर जोरदार रोष प्रदर्शन किया।1
- हरियाणा की तमाम 50 बड़ी खबरों को अब सिर्फ 10 मिनट के एक ही वीडियो में देखा जा सकता है।1
- हरियाणा के भिवानी में स्वास्थ्य मंत्री आरती राव के सिविल अस्पताल के दौरे के दौरान अस्पताल की खामियां एक बड़ा मुद्दा बन गईं। इस दौरे के दौरान सीएमओ स्वास्थ्य मंत्री के सामने सिविल अस्पताल की कमियां छुपाते नजर आए, लेकिन पत्रकारों ने वहां की जमीनी हकीकत खोलकर रख दी। अस्पताल में कमियों के इस बड़े मुद्दे को देखते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने सीएमओ को तत्काल सुधार करने के निर्देश दिए हैं।1